बाइबल व्याख्या

कुलुस्सियों 4

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

पौलुस अपनी चिट्ठी के अंत में स्वामियों को न्याय की चेतावनी देता है, फिर प्रार्थना, बुद्धिमानी और अनुग्रह-भरी बातचीत की बात करता है। इसके बाद वह एक-एक करके अपने साथियों के नाम गिनाता है, तुखिकुस, उनेसिमुस, अरिस्तर्खुस, मरकुस, इपफ्रास, लूका, देमास, और अंत में अपने हाथ से लिखता है, "मेरी जंजीरों को स्मरण रखना।" यह अध्याय जितना उपदेशात्मक है, उतना ही व्यक्तिगत।

मर्म

यहाँ धर्म-सिद्धांत की बड़ी घोषणाएँ नहीं हैं, फिर भी परमेश्वर के राज्य का पूरा ढाँचा दिखाई देता है। स्वामी को याद दिलाया जाता है कि उसका भी एक स्वामी है, यानी सत्ता कभी अंतिम नहीं होती। प्रार्थना केवल कर्तव्य नहीं, "जागृत रहना" है, यानी एक सचेत ठहराव। बाहरवालों के साथ बर्ताव में "अवसर को बहुमूल्य" समझना है, वक्त को बचाना है। और वचन "अनुग्रह सहित और सुहावना" हो। यानी मसीही जीवन कोई अलग आत्मिक कोना नहीं, बल्कि हर बातचीत, हर सौदा, हर उत्तर, हर कैदी-मित्र में परमेश्वर की उपस्थिति का प्रश्न है।

समग्र सूत्र

पौलुस जंजीरों में है, फिर भी "वचन सुनाने का द्वार" खुलने की प्रार्थना माँगता है। यहाँ मसीह के उस पैटर्न की गूँज है जो पूरे बाइबल में चलती है: बंधन के भीतर से आज़ादी का सुसमाचार निकलता है। यूसुफ जेल में, दानिय्येल गड्ढे में, यीशु क्रूस पर। पौलुस उसी परंपरा में खड़ा है। और अंत में उनेसिमुस का नाम, वह भागा हुआ दास जो अब "विश्वासयोग्य और प्रिय भाई" है, दिखाता है कि सुसमाचार सामाजिक ढाँचे को भीतर से पिघला देता है। स्वामी और दास एक ही पत्र में, एक ही कलीसिया में, एक ही मेज़ पर।

दर्पण

रुकिए इस वाक्य पर: "तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सुहावना हो।" सदा। यानी उस मीटिंग में भी जहाँ आपको काटा गया, उस रिश्तेदार से भी जो हर बार वही ताना मारता है, उस मैसेज में भी जो आप गुस्से में टाइप कर रहे थे। क्या आपकी जीभ इस कसौटी पर खरी उतरती है? और वह अगला वाक्य, "अवसर को बहुमूल्य समझकर", यह उन दिनों में चुभता है जब हम स्क्रॉल करते-करते शाम गुज़ार देते हैं और फिर शिकायत करते हैं कि प्रार्थना के लिए वक्त नहीं मिला। पौलुस जंजीरों में बंधा है, फिर भी उसकी चिंता यह है कि द्वार खुले। हमारे पास द्वार खुले हैं, पर हम अंदर बैठे रहते हैं।

और स्वामियों वाली आयत को आधुनिक कान से न छोड़िए। आप किसी के "बॉस" हैं, चाहे घर में, दफ्तर में, कलीसिया में। क्या आपके अधीन काम करने वाले लोग यह कह सकते हैं कि आप "न्याय और ठीक-ठीक व्यवहार" करते हैं? या आप यह भूल जाते हैं कि स्वर्ग में आपका भी एक स्वामी है?

अंतर्पाठ

"प्रार्थना में लगे रहो" वाली आयत 1 थिस्सलुनीकियों 5:17 की "निरंतर प्रार्थना करो" के साथ गूँजती है। पौलुस के लिए प्रार्थना कोई अनुष्ठान नहीं, जीवन की साँस है। और "वचन सदा अनुग्रह सहित" वाली बात नीतिवचन 15:1 की याद दिलाती है, "कोमल उत्तर सुनकर जलजलाहट ठंडी हो जाती है।" पौलुस पुराने ज्ञान-साहित्य की उस धारा में खड़ा है जो जानती है कि जीभ जीवन और मृत्यु दोनों की शक्ति रखती है, पर वह उसमें "अनुग्रह" जोड़ता है, यानी मसीह में मिली कृपा को अब हमारी बातचीत का स्वाद बनना है।

विवरण

"मेरी जंजीरों को स्मरण रखना।" पौलुस ने पूरी चिट्ठी में मसीह की महिमा, विश्व की उत्पत्ति में उसकी भूमिका, कलीसिया के सिर के रूप में उसकी प्रतिष्ठा, यह सब लिखा। और अंत में, अपने हाथ से, यह छोटी सी पंक्ति। कोई शिकायत नहीं, कोई नाटक नहीं। बस, "याद रखना।" यह पंक्ति चुभती है क्योंकि यह हमें बताती है कि सबसे बड़े प्रेरित को भी याद किए जाने की भूख थी। वह लोहे में बंधा हुआ, दूर कहीं, अकेला। और कलीसिया से माँगता है, भूल मत जाना। जो लोग सेवा में हैं, चाहे मिशनरी हों, पास्टर हों, या वे भाई-बहन जो बीमार बिस्तर से प्रार्थना करते हैं, उनकी भी यही चुपचाप पुकार है।

प्रोफ़ाइल

कुलुस्से की छोटी सी कलीसिया ने जब यह पत्र पढ़ा होगा, तो नामों की सूची ने उन्हें झकझोरा होगा। तुखिकुस को वे जानते थे, इपफ्रास तो उन्हीं में से था, उनेसिमुस, जो शायद वहीं का भागा हुआ दास था, अब "प्रिय भाई" कहलाकर लौट रहा है। यह कोई अमूर्त ईश्वर-विज्ञान नहीं था, यह उनके पड़ोसियों, उनके घर की कलीसिया की सच्चाई थी। और जब उन्होंने सुना कि यह पत्र लौदीकिया में भी पढ़ा जाएगा, तो उन्हें एहसास हुआ कि वे एक बड़े परिवार का हिस्सा हैं, एक ऐसी कलीसिया जो सामाजिक सीमाओं के आर-पार फैली है। खतना किए हुए और अन्यजातियाँ, स्वामी और दास, यूनानी वैद्य और यहूदी प्रेरित, एक ही पत्र में, एक ही राज्य में।

चिंतन

*आपकी पिछली दस बातचीतें, चाहे बोली हुई हों या टाइप की हुई,

Colossians में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Colossians and Philemon

Dick Lucas

Christ above everything: fullness in him against every substitute.

Paul For Everyone: The Prison Letters

N.T. Wright

Ephesians, Philippians, Colossians and Philemon in short daily readings.

Colossians and Philemon: An Introduction and Commentary

N.T. Wright

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Colossians and Philemon

David Garland

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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Colossians 4 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

कुलुस्सियों 4 का क्या अर्थ है?
पौलुस अपनी चिट्ठी के अंत में स्वामियों को न्याय की चेतावनी देता है, फिर प्रार्थना, बुद्धिमानी और अनुग्रह-भरी बातचीत की बात करता है। इसके बाद वह एक-एक करके अपने साथियों के नाम गिनाता है, तुखिकुस, उनेसिमुस, अरिस्तर्खुस, मरकुस, इपफ्रास, लूका, देमास, और अंत में अपने हाथ से लिखता है, "मेरी जंजीरों को स्मरण रखना।" यह अध्याय जितना उपदेशात्मक है, उतना ही व्यक्तिगत।
कुलुस्सियों 4 किस विषय में है?
पौलुस जंजीरों में है, फिर भी "वचन सुनाने का द्वार" खुलने की प्रार्थना माँगता है। यहाँ मसीह के उस पैटर्न की गूँज है जो पूरे बाइबल में चलती है: बंधन के भीतर से आज़ादी का सुसमाचार निकलता है। यूसुफ जेल में, दानिय्येल गड्ढे में, यीशु क्रूस पर। पौलुस उसी परंपरा में खड़ा है। और अंत में उनेसिमुस का नाम, वह भागा हुआ दास जो अब "विश्वासयोग्य और प्रिय भाई" है, दिखाता है कि सुसमाचार सामाजिक ढाँचे को भीतर से पिघला देता है। स्वामी और दास एक ही पत्र में, एक ही कलीसिया में, एक ही मेज़ पर।
कुलुस्सियों 4 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
और स्वामियों वाली आयत को आधुनिक कान से न छोड़िए। आप किसी के "बॉस" हैं, चाहे घर में, दफ्तर में, कलीसिया में। क्या आपके अधीन काम करने वाले लोग यह कह सकते हैं कि आप "न्याय और ठीक-ठीक व्यवहार" करते हैं? या आप यह भूल जाते हैं कि स्वर्ग में आपका भी एक स्वामी है?
कुलुस्सियों 4 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"मेरी जंजीरों को स्मरण रखना।" पौलुस ने पूरी चिट्ठी में मसीह की महिमा, विश्व की उत्पत्ति में उसकी भूमिका, कलीसिया के सिर के रूप में उसकी प्रतिष्ठा, यह सब लिखा। और अंत में, अपने हाथ से, यह छोटी सी पंक्ति। कोई शिकायत नहीं, कोई नाटक नहीं। बस, "याद रखना।" यह पंक्ति चुभती है क्योंकि यह हमें बताती है कि सबसे बड़े प्रेरित को भी याद किए जाने की भूख थी। वह लोहे में बंधा हुआ, दूर कहीं, अकेला। और कलीसिया से माँगता है, भूल मत जाना। जो लोग सेवा में हैं, चाहे मिशनरी हों, पास्टर हों, या वे भाई-बहन जो बीमार बिस्तर से प्रार्थना करते हैं, उनकी भी यही चुपचाप पुकार है।
कुलुस्सियों 4 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
*आपकी पिछली दस बातचीतें, चाहे बोली हुई हों या टाइप की हुई,
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Colossians 4 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 16

पिता, धन्यवाद कि तेरा वचन एक ही कलीसिया तक बंद नहीं रहा। जो पत्री कुलुस्से में पढ़ी गई, वही लौदीकिया तक पहुँची, और आज वही हम तक आई है। धन्यवाद उन हाथों के लिए जिन्होंने इसे सहेजा, पढ़ा और आगे बढ़ाया, ताकि हम भी सुन सकें।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

बाहरवालों के साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करो, और समय को बहुमूल्य समझो।" पौलुस यह बात जेल से लिख रहा है, जहाँ उसका अपना समय छिन चुका था। फिर भी वह कहता है, हर मुलाकात कीमती है। जो पड़ोसी अभी मसीह को नहीं जानता, वह तुम्हारे लहजे से, तुम्हारे धीरज से मसीह को पढ़ता है। आज किसके सामने तुम खुली किताब हो?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 12

पिता, मुझे भी ऐसा दिल दे जो दूसरों के लिए सच्चाई से प्रार्थना में लगा रहे। मेरे अपनों को थामे रख, ताकि वे डगमगाएँ नहीं, बल्कि तेरी इच्छा में पूरे विश्वास के साथ स्थिर खड़े रहें। और मुझे भी उसी भरोसे में बढ़ने दे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

मरकुस जो बरनबास का चचेरा भाई है... यदि वह तुम्हारे पास आए, तो उसका स्वागत करना।" यही वह मरकुस है जिसे कभी पौलुस साथ ले जाने को तैयार न था। सालों बाद वही नाम, अब सिफ़ारिश के साथ। एक असफलता ने उसकी कहानी का अंत तय नहीं किया। तुम्हारे मन में जिसका नाम अब भी पुरानी चोट के साथ जुड़ा है, क्या मसीह उसे नया लिख रहा है?

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