बाइबल व्याख्या

सभोपदेशक 11

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

किसान खेत पर खड़ा है

एक किसान अपने खेत की मेंड़ पर खड़ा है। हाथ में बीज की टोकरी है, पर वह बोता नहीं। वह आकाश की ओर देखता है। बादल कहाँ हैं? हवा किस दिशा से बह रही है? कहीं ऐसा न हो कि बीज बोऊँ और पाला पड़ जाए। कहीं ऐसा न हो कि मेहनत बेकार जाए। वह ताकता रहता है, ताकता रहता है, और मौसम बीत जाता है। भाई कोहेलेत, उपदेशक, उसके कंधे पर हाथ रखकर कहते हैं: "जो वायु को ताकता रहेगा वह बीज बोने न पाएगा।" यह अध्याय उसी किसान के लिए है, और हम सबके भीतर वह किसान बैठा है जो निश्चितता के बिना एक कदम भी उठाना नहीं चाहता।

पाठ

उपदेशक ग्यारहवें अध्याय में जीवन की अनिश्चितता के बीच साहसपूर्वक जीने का न्योता देते हैं। रोटी जल पर डाल, कई लोगों में बाँट, बीज बो, दोनों हाथों से काम कर, क्योंकि तू परमेश्वर के काम को नहीं समझता। और जवानी में आनन्द मना, पर यह जानकर कि परमेश्वर एक दिन न्याय करेंगे।

मर्म

यह अध्याय एक विरोधाभास पर टिका है जो हमें असहज करता है। एक ओर उपदेशक कहते हैं कि तुम कुछ नहीं जानते, न हवा का मार्ग, न गर्भ में हड्डियों का बनना, न परमेश्वर का काम। दूसरी ओर वे कहते हैं: फिर भी बो, फिर भी बाँट, फिर भी आनन्द मना। यह मूर्खों का आशावाद नहीं है। यह विश्वास का यथार्थवाद है। परमेश्वर सब कुछ करते हैं, पर हमें उनकी योजना का नक्शा नहीं मिला। इस अज्ञानता में जीने के दो तरीके हैं: लकवाग्रस्त होकर बादलों को ताकते रहना, या साहस से बीज बोना। उपदेशक दूसरा रास्ता चुनते हैं, और परमेश्वर की सर्वसत्ता को डर का नहीं, स्वतंत्रता का आधार बनाते हैं।

समग्र सूत्र

बाइबल की बड़ी कहानी में यह अध्याय एक अनोखी जगह रखता है। यहाँ परमेश्वर का काम "जो सब कुछ करते हैं" रहस्य में लिपटा है, पर मनुष्य को निष्क्रिय नहीं छोड़ा जाता। यह वही तनाव है जो प्रभु यीशु के दृष्टान्तों में जीवित होता है, जहाँ बीज बोने वाला जमीन नहीं देखता, बस बोता है, और वृद्धि परमेश्वर के हाथ में है। पुराने नियम में यहाँ बीज है; नए नियम में वह बीज मसीह के वचन में फल देता है। उपदेशक का "बहुत दिन के बाद तू उसे फिर पाएगा" उस कटनी की ओर इशारा करता है जो हमारी आँखों के पार है। जो अनिश्चितता में देते हैं, बोते हैं, बाँटते हैं, वे परमेश्वर के राज्य के तर्क में जीते हैं।

दर्पण

रुककर अपने आप से पूछिए: मैं किन बादलों को ताकता रहता हूँ? शायद वह नौकरी है जो बदलनी चाहिए, पर बाज़ार अनिश्चित है। शायद वह रिश्ता है जिसमें माफी माँगनी है, पर पता नहीं दूसरा क्या कहेगा। शायद वह दान है जो देना है, पर आगे खर्च कौन जानता है। शायद वह बातचीत है अपने बच्चे के साथ जो टलती जा रही है। उपदेशक की बात कठोर है: पूरी निश्चितता कभी नहीं आएगी। जो पूरी जानकारी का इंतज़ार करता है, वह कभी नहीं बोता, कभी नहीं काटता। और जवानी वाले लोगों के लिए एक और चोट: आनन्द मनाओ, पर यह भूलकर नहीं कि न्याय होगा। स्वतंत्रता और उत्तरदायित्व यहाँ अलग नहीं किए जाते।

अंतर्पाठ

पद पाँच में गर्भ में हड्डियों के बनने का चित्र भजन 139 की याद दिलाता है, जहाँ दाऊद कहते हैं कि परमेश्वर ने उन्हें माँ के गर्भ में बुना। वहाँ रहस्य आराधना बन जाता है; यहाँ रहस्य विनम्रता और साहस बन जाता है। एक ही सत्य के दो चेहरे। और पद एक की "जल के ऊपर रोटी" प्रभु यीशु के उस वचन से गूँजती है जहाँ वे कहते हैं कि जो अपना जीवन खोता है वही उसे पाता है। जो देता है बिना हिसाब लगाए, उसे परमेश्वर की अर्थव्यवस्था में लौटता है, पर उस समय पर जो हमारा नहीं, उनका है।

प्रोफ़ाइल

मूल पाठकों के लिए यह शब्द राहत भी थे और चुनौती भी। इस्राएल एक कृषि समाज था जहाँ फसल का असफल होना मौत का प्रश्न था। "सात वरन् आठ जनों को भाग दे" व्यापारी की भाषा है, वह जो अपने माल को कई जहाजों में बाँटता है ताकि एक डूबे तो दूसरा बचे। यह ज्ञान की परंपरा में जीने वाले लोगों के लिए था, जो मानते थे कि बुद्धि से जीवन को नियंत्रित किया जा सकता है। उपदेशक उन्हें बताते हैं: बुद्धिमान बनो, पर यह मत सोचो कि तुम जीवन को समझ गए हो। पूजा-अर्चना करने वाले, कानून पालन करने वाले इस्राएली को यह सुनना कठिन था कि परमेश्वर का काम "तू नहीं जानता।"

विवरण

पद तीन का एक वाक्य ठहरने योग्य है: "वृक्ष चाहे दक्षिण की ओर गिरे या उत्तर की ओर, तो भी जिस स्थान पर वृक्ष गिरेगा, वहीं पड़ा रहेगा।" यह वाक्य ठंडा लगता है, लगभग निर्मम। पर इसमें एक गहरी शांति है। कुछ चीज़ें तय हैं। पेड़ जहाँ गिरा वहाँ पड़ा है, और तुम उसे बदल नहीं सकते। जीवन में कुछ फैसले, कुछ घटनाएँ, कुछ मौतें ऐसी हैं जिन्हें उलटा नहीं जा सकता। उपदेशक इसे स्वीकार करते हैं। और यही स्वीकृति उन्हें अगले पद में स्वतंत्र करती है बोने के

Ecclesiastes में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

Living Life Backward

David Gibson

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The Message of Ecclesiastes

Derek Kidner

A short, sane guide through the Preacher's search for meaning.

Ecclesiastes: An Introduction and Commentary

Michael Eaton

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Ecclesiastes, Song of Songs

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Ecclesiastes 11 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

सभोपदेशक 11 का क्या अर्थ है?
एक किसान अपने खेत की मेंड़ पर खड़ा है। हाथ में बीज की टोकरी है, पर वह बोता नहीं। वह आकाश की ओर देखता है। बादल कहाँ हैं? हवा किस दिशा से बह रही है? कहीं ऐसा न हो कि बीज बोऊँ और पाला पड़ जाए। कहीं ऐसा न हो कि मेहनत बेकार जाए। वह ताकता रहता है, ताकता रहता है, और मौसम बीत जाता है। भाई कोहेलेत, उपदेशक, उसके कंधे पर हाथ रखकर कहते हैं: "जो वायु को ताकता रहेगा वह बीज बोने न पाएगा।" यह अध्याय उसी किसान के लिए है, और हम सबके भीतर वह किसान बैठा है जो निश्चितता के बिना एक कदम भी उठाना नहीं चाहता।
सभोपदेशक 11 किस विषय में है?
उपदेशक ग्यारहवें अध्याय में जीवन की अनिश्चितता के बीच साहसपूर्वक जीने का न्योता देते हैं। रोटी जल पर डाल, कई लोगों में बाँट, बीज बो, दोनों हाथों से काम कर, क्योंकि तू परमेश्वर के काम को नहीं समझता। और जवानी में आनन्द मना, पर यह जानकर कि परमेश्वर एक दिन न्याय करेंगे।
सभोपदेशक 11 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यह अध्याय एक विरोधाभास पर टिका है जो हमें असहज करता है। एक ओर उपदेशक कहते हैं कि तुम कुछ नहीं जानते, न हवा का मार्ग, न गर्भ में हड्डियों का बनना, न परमेश्वर का काम। दूसरी ओर वे कहते हैं: फिर भी बो, फिर भी बाँट, फिर भी आनन्द मना। यह मूर्खों का आशावाद नहीं है। यह विश्वास का यथार्थवाद है। परमेश्वर सब कुछ करते हैं, पर हमें उनकी योजना का नक्शा नहीं मिला। इस अज्ञानता में जीने के दो तरीके हैं: लकवाग्रस्त होकर बादलों को ताकते रहना, या साहस से बीज बोना। उपदेशक दूसरा रास्ता चुनते हैं, और परमेश्वर की सर्वसत्ता को डर का नहीं, स्वतंत्रता का आधार बनाते हैं।
सभोपदेशक 11 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
बाइबल की बड़ी कहानी में यह अध्याय एक अनोखी जगह रखता है। यहाँ परमेश्वर का काम "जो सब कुछ करते हैं" रहस्य में लिपटा है, पर मनुष्य को निष्क्रिय नहीं छोड़ा जाता। यह वही तनाव है जो प्रभु यीशु के दृष्टान्तों में जीवित होता है, जहाँ बीज बोने वाला जमीन नहीं देखता, बस बोता है, और वृद्धि परमेश्वर के हाथ में है। पुराने नियम में यहाँ बीज है; नए नियम में वह बीज मसीह के वचन में फल देता है। उपदेशक का "बहुत दिन के बाद तू उसे फिर पाएगा" उस कटनी की ओर इशारा करता है जो हमारी आँखों के पार है। जो अनिश्चितता में देते हैं, बोते हैं, बाँटते हैं, वे परमेश्वर के राज्य के तर्क में जीते हैं।
सभोपदेशक 11 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
रुककर अपने आप से पूछिए: मैं किन बादलों को ताकता रहता हूँ? शायद वह नौकरी है जो बदलनी चाहिए, पर बाज़ार अनिश्चित है। शायद वह रिश्ता है जिसमें माफी माँगनी है, पर पता नहीं दूसरा क्या कहेगा। शायद वह दान है जो देना है, पर आगे खर्च कौन जानता है। शायद वह बातचीत है अपने बच्चे के साथ जो टलती जा रही है। उपदेशक की बात कठोर है: पूरी निश्चितता कभी नहीं आएगी। जो पूरी जानकारी का इंतज़ार करता है, वह कभी नहीं बोता, कभी नहीं काटता। और जवानी वाले लोगों के लिए एक और चोट: आनन्द मनाओ, पर यह भूलकर नहीं कि न्याय होगा। स्वतंत्रता और उत्तरदायित्व यहाँ अलग नहीं किए जाते।
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Ecclesiastes 11 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

अपनी रोटी जल के ऊपर डाल दे, क्योंकि बहुत दिनों के बाद तू उसे फिर पाएगा।" पानी पर रोटी डालना बेवकूफी जैसा लगता है, कुछ लौटता दिखता ही नहीं। पर सुलैमान कहता है, दे दे, भले ही फल तुरन्त न दिखे। तूने जो भलाई चुपचाप की, जो माफ किया, जो सहारा दिया, वह बहता हुआ लगता है, पर परमेश्वर उसे गिनता है। क्या तू बिना रसीद के देना सीखेगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

यदि बादल जल से भरे हों, तो वे पृथ्वी पर उसे बरसा देते हैं; और यदि वृक्ष दक्षिण या उत्तर की ओर गिरे, तो जिस स्थान पर वह गिरता है, वहीं पड़ा रहता है।"

बादल कब बरसेंगे, पेड़ किस ओर गिरेगा, यह तेरे हाथ में नहीं। पर बीज बोना तेरे हाथ में है। जो तू बदल नहीं सकता, उसकी चिंता में बैठा रहेगा, तो जो कर सकता था वह भी छूट जाएगा। आज उठ, बो दे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

जवानी एक तोहफ़ा है, और सभोपदेशक इससे इनकार नहीं करता। वह कहता है, "हे जवान, अपनी जवानी में आनन्द कर, और अपनी जवानी के दिनों में तेरा मन तुझे आनन्दित करे।" पर उसी साँस में वह जोड़ता है कि परमेश्वर तुझे इन सब बातों का न्याय में ले आएगा।

यह डराने के लिए नहीं, जगाने के लिए है। जी भरकर जी, पर याद रख कि हर हँसी, हर चुनाव किसी की आँखों के सामने हो रहा है जो तुझसे प्रेम करता है।

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