निर्गमन 1:6
पाठ
एक ही वाक्य में पूरी पीढ़ी कब्र में उतर जाती है: "यूसुफ, और उसके सब भाई, और उस पीढ़ी के सब लोग मर मिटे।" जो यूसुफ मिस्र का दूसरा शासक था, जिसके हाथ में अकाल के वर्षों में रोटी थी, जिसके नाम से फ़िरौन के दरबार में दरवाज़े खुलते थे, वह भी मर जाता है। उसके ग्यारह भाई, जिनके नाम अभी-अभी गिने गए हैं, वे भी। और उनके साथ वह सारी पीढ़ी जो कनान से मिस्र आई थी, जिसने याकूब का चेहरा देखा था और जो जानती थी कि परमेश्वर ने अब्राहम से क्या कहा था। नामों की सूची के तुरंत बाद मृत्यु की सूची। सत्तर प्राणी आए थे; अब उनमें से कोई जीवित नहीं बचा।
मर्म
यह पद केवल समय बीतने की सूचना नहीं है, यह एक धर्मवैज्ञानिक संकट है। इस्राएल के पास मिस्र में जो कुछ सुरक्षा थी, वह एक आदमी के व्यक्तित्व पर टिकी थी। यूसुफ के जीते जी वाचा का वंश किसी शक्तिशाली संरक्षक की छाया में जी रहा था। अब वह छाया हट गई। जो बचा है वह केवल एक वचन है, और वचन देनेवाले परमेश्वर हैं, जो स्वयं नहीं मरते। यही इस छोटे से वाक्य का भार है: वाचा मनुष्य के जीवनकाल से नहीं बंधी। परमेश्वर ने अब्राहम से कहा था कि उसका वंश बहुत होगा और एक पराए देश में दास होगा, और यूसुफ की मृत्यु उस वचन को रद्द नहीं करती, वह उसे आगे बढ़ाती है। ध्यान दीजिए कि अगला पद "परन्तु" से शुरू होता है: मृत्यु के ठीक बाद फूलना-फलना। यहाँ अनुग्रह अपना असली रंग दिखाता है, क्योंकि वह किसी मानवीय मध्यस्थ की उपलब्धि पर नहीं, बल्कि परमेश्वर की अपनी निष्ठा पर खड़ा है।
समग्र कथा का सूत्र
बाइबल बार-बार इसी मोड़ पर आती है: वह आदमी मर जाता है जिस पर सब कुछ टिका लगता था, और परमेश्वर की कहानी रुकती नहीं। यूसुफ मरता है, मूसा मरता है, दाऊद मरता है, हर याजक मरता है और अगले को जगह देता है। पुराने नियम का यह दोहराव एक कमी की ओर इशारा करता है जिसे वह स्वयं पूरा नहीं कर सकता: उद्धार के लिए ऐसा मध्यस्थ चाहिए जिसे मृत्यु हटा न सके। यूसुफ ने अपने भाइयों को अकाल से बचाया, अनाज दिया, क्षमा दी, और फिर कब्र में उतर गया। मसीह ने अपने भाइयों को बचाया, अपने आप को दिया, कब्र में उतरा, और लौट आया। इसलिए निर्गमन 1:6 केवल एक शोक-सूचना नहीं, वह एक खालीपन है जो सुसमाचार की दिशा में खुलता है।
दर्पण
हम सब किसी न किसी यूसुफ की छाया में जीते हैं। वह स्थिर नौकरी हो सकती है, वह पिता जिसने हमेशा संभाला, वह पादरी जिसके उपदेश से आपका विश्वास खड़ा हुआ, वह डॉक्टर जिसकी रिपोर्ट पर आपकी नींद टिकी है, या वह बचत खाता जो आपको लगता है काफ़ी है। ये सब भले हैं, परमेश्वर की ही देन हैं, पर इनमें से हर एक मर मिटता है। यह पद उस डर को नंगा करता है जिसे हम स्वीकार नहीं करते: कि अगर वह व्यक्ति या वह व्यवस्था चली गई, तो परमेश्वर का वचन भी मेरे लिए खाली हो जाएगा। नहीं होगा। आज एक कागज़ पर उस एक व्यक्ति का नाम लिखिए जो अब जीवित नहीं है और जिसके कारण आप आज विश्वास करते हैं, और उस नाम को हाथ में लेकर ऊँची आवाज़ में परमेश्वर को धन्यवाद दीजिए कि उनका मरना आपके विश्वास का अंत नहीं बना।
पहले श्रोता
जिन लोगों ने यह पहली बार सुना, वे वे थे जो मिस्र से निकल चुके थे, या उनके बच्चे जो जंगल में बड़े हुए। उनके लिए यह पद एक परिचित कड़वाहट था। वे जानते थे कि गुलामी की शुरुआत कैसे हुई: पहले एक भरोसेमंद नाम, फिर उस नाम की मृत्यु, फिर वह फ़िरौन जो यूसुफ को नहीं जानता था। उन्होंने अपनी आँखों से देखा था कि एक पीढ़ी के गुज़रते ही सुरक्षा कितनी जल्दी ढह जाती है। पर वे यह भी जानते थे कि वे जीवित हैं, कि गिनती में बढ़ गए, कि परमेश्वर ने उन्हें निकाल लाया। इसलिए यह वाक्य उनके लिए निराशा नहीं, बल्कि प्रमाण था: जो हमें बचाता है वह कोई मिस्री दरबारी नहीं, वह हमारे पुरखाओं का परमेश्वर है।
शास्त्र की गूँज
उत्पत्ति का अंत यूसुफ के एक अनोखे आदेश पर होता है: मरते समय वह कहता है कि परमेश्वर उन्हें इस देश से निकालेंगे, और तब वे उसकी हड्डियाँ साथ ले जाएँ। यानी यूसुफ की मृत्यु स्वयं एक विश्वास का कार्य थी, एक ताबूत जो कनान की ओर इशारा करता रहा। दूसरी गूँज नए नियम से आती है, और हिंदी बाइबल इसे यहीं हाशिये पर रख देती है: प्रेरितों के काम 7 में स्तिफनुस, पत्थरों से मरने से ठीक पहले, इसी इतिहास को दोहराता है, कि याकूब और पुरखे मरे और गाड़े गए। वह अपनी ही मृत्यु को उसी धारा में रखता है, यह जानते हुए कि जो परमेश्वर एक मरी हुई पीढ़ी के बाद भी वादा निभाते हैं, वे उसे भी न छोड़ेंगे।
पृष्ठभूमि
यूसुफ की मृत्यु और मूसा के जन्म के बीच लगभग तीन सौ वर्ष खड़े हैं, और बाइबल उन्हें एक पद में समेट देती है। मिस्र उस समय संसार की सबसे स्थिर सभ्यता थी, अपनी अन्न-भंडारों, अपने राजवंशों और अपने देवताओं पर गर्वित। इस्राएली वहाँ गोशेन में पशुपालक के रूप में बसे थे, विदेशी मेहमान, न नागरिक न गुलाम, जिनकी हैसियत पूरी तरह दरबार की कृपा पर निर्भर थी। जब तक यूसुफ की स्मृति ताज़ा थी, यह कृपा बनी रही। पीढ़ी बदलते ही राजनीति बदली, कृतज्ञता मिट गई और मेहमान खतरा बन गए। पद 6 वह चुप दहलीज़ है जिसके एक ओर आदर है और दूसरी ओर ईंट, गारा और नील नदी।
चिंतन
आपके जीवन में कौन सा "यूसुफ" है, कोई व्यक्ति या व्यवस्था, जिसके बिना आपको लगता है कि परमेश्वर का वचन आपके लिए काम नहीं करेगा?
अगर आपके मरने के बाद आपकी पीढ़ी के सब लोग मर मिटेंगे, तो आप आज किस चीज़ में निवेश कर रहे हैं जो उस मृत्यु के पार भी टिकेगी?
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