निर्गमन 2:24
पाठ
वर्षों की चुप्पी के बाद एक आवाज़ उठती है, और वह आवाज़ शब्द नहीं, कराह है। मिस्र का राजा मर जाता है, पर इस्राएलियों की हालत नहीं बदलती; वे "कठिन सेवा के कारण लम्बी-लम्बी साँस लेकर आहें भरने लगे, और पुकार उठे।" इसी बिंदु पर पद 24 कहानी का रुख मोड़ देता है: "और परमेश्वर ने उनका कराहना सुनकर अपनी वाचा को, जो उसने अब्राहम, और इसहाक, और याकूब के साथ बाँधी थी, स्मरण किया।" यह वाक्य बहुत छोटा है, पर इसमें चार क्रियाएँ छिपी हैं जो पूरी निर्गमन की पुस्तक को चलाती हैं: परमेश्वर ने सुना, उन्हें याद आया, उन्होंने दृष्टि की, और उन्होंने अपना चित्त लगाया। मूसा मिद्यान में भेड़ें चरा रहा है, फ़िरौन के महल में कुछ नहीं बदला, पर स्वर्ग में निर्णय हो चुका है।
मूल बात
"स्मरण किया" पढ़कर यह मत सोचिए कि परमेश्वर भूल गए थे और अचानक उन्हें याद आ गया। इब्रानी शब्द ज़ाकार का अर्थ केवल मन में कोई बात लौट आना नहीं, बल्कि उस बात पर कार्रवाई करना है। जब परमेश्वर स्मरण करते हैं, तो कुछ होता है। यहाँ उद्धार की जड़ इस्राएल की धार्मिकता में नहीं है; पाठ यह नहीं कहता कि उन्होंने पश्चाताप किया, प्रार्थना की, या विश्वास दिखाया। वे बस कराहे, जैसे घायल पशु कराहता है, और परमेश्वर ने उस कराह को अब्राहम से बाँधी हुई अपनी वाचा के साथ जोड़ लिया। यही अनुग्रह की संरचना है: परमेश्वर अपने वचन के प्रति वफ़ादार हैं, इसलिए वे छुड़ाते हैं। उद्धार परमेश्वर के चरित्र से निकलता है, हमारी योग्यता से नहीं, और इसीलिए वह टिकाऊ है।
सूत्र
निर्गमन की पूरी कहानी इस एक पद से बहती है, और उसी धारा में यीशु मसीह खड़े हैं। ध्यान दीजिए कि परमेश्वर कराह को वाचा से जोड़ते हैं, अर्थात वर्तमान पीड़ा को एक पुराने वादे से। ठीक यही ढाँचा सुसमाचार में लौटता है: जब मरियम और ज़करयाह गाते हैं, तो वे अब्राहम से की गई वाचा का स्मरण करते हैं, क्योंकि मसीह का आना किसी नई योजना की शुरुआत नहीं, बल्कि एक पुराने वचन का निभाया जाना है। और जैसे यहाँ परमेश्वर नीचे उतरकर एक छुड़ाने वाला भेजते हैं, वैसे ही वे देह धारण करके स्वयं उतरे। मूसा छुड़ाता है फ़िरौन से; मसीह छुड़ाते हैं पाप और मृत्यु से। मूसा लहू लगाकर इस्राएल को बचाता है; मसीह अपना लहू देकर। यह रूपक नहीं, यह एक ही परमेश्वर की एक ही कार्यशैली है, जो क्रूस पर अपनी चरम सीमा तक पहुँचती है।
दर्पण
हम सब कहीं न कहीं कराह रहे हैं, पर प्रार्थना के शब्द नहीं मिलते। वह नौकरी जो हर सुबह आपको थोड़ा और खोखला कर देती है; वह रिश्ता जिसमें आप वर्षों से ठीक होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं; वह शरीर जो अब पहले जैसा नहीं रहा; वह बच्चा जिसके लिए आप रात को जागते हैं। और भीतर एक डर बैठा रहता है कि शायद परमेश्वर ने ध्यान देना बंद कर दिया। यह पद उस डर को तोड़ता है, पर सस्ते ढंग से नहीं: इस्राएल अस्सी साल कराहता रहा, फिर भी परमेश्वर सुन रहे थे। आपकी बिना शब्दों वाली आह भी स्वर्ग तक पहुँचती है, क्योंकि आपका भरोसा आपकी प्रार्थना की गुणवत्ता पर नहीं, उनकी वाचा पर टिका है। आज एक काम कीजिए: एक कागज़ पर वह एक बात लिखिए जिसके लिए आप शब्द नहीं जुटा पाते, और उसके नीचे लिख दीजिए, "परमेश्वर ने सुना।" फिर वह कागज़ अपनी बाइबल में रख दीजिए।
प्रश्न
अगर परमेश्वर सुन रहे थे, तो इतनी देर क्यों? चार सौ तीस साल, और उनमें दशकों की क्रूर दासता, नील नदी में डूबते शिशु, टूटी हुई माएँ। पाठ इसका उत्तर नहीं देता, और हमें भी उसे जल्दबाज़ी में भरना नहीं चाहिए। बाइबल कहीं यह नहीं सिखाती कि दुख की लंबाई का कोई सुंदर कारण होता है जिसे जानकर हम संतुष्ट हो जाएँगे। जो वह कहती है, वह यह है कि परमेश्वर की देर उनकी अनुपस्थिति नहीं है। जिन दिनों कुछ नहीं हो रहा था, उन्हीं दिनों एक बालक टोकरी में बचाया जा रहा था और मिद्यान में तैयार किया जा रहा था। हमें प्रायः यह पीछे मुड़कर ही दिखता है, कभी-कभी बिल्कुल नहीं। यह रहस्य है, बहाना नहीं।
अन्य वचनों की गूँज
स्तिफनुस अपने अंतिम भाषण में ठीक इसी क्षण को उद्धृत करता है (प्रेरितों 7:34), और वह ऐसा करके यह दिखाता है कि इस्राएल का इतिहास बार-बार एक ही पैटर्न दोहराता है: परमेश्वर एक छुड़ाने वाला भेजते हैं, और लोग उसे ठुकराते हैं, जैसे उन्होंने मूसा से कहा, "किसने तुझे हम लोगों पर हाकिम और न्यायी ठहराया?" स्तिफनुस का निष्कर्ष कड़वा है: जो मूसा के साथ हुआ, वही मसीह के साथ हुआ। दूसरी गूँज उत्पत्ति में है, जहाँ परमेश्वर अब्राहम से कहते हैं कि उसके वंशज परदेश में दास होंगे और परमेश्वर उन्हें निकाल लाएँगे। निर्गमन 2:24 उस भविष्यवाणी की रसीद है, काला अक्षरों में लिखा हुआ प्रमाण कि परमेश्वर अपने वचन से मुकरते नहीं।
पृष्ठभूमि
यह लगभग ईसा पूर्व दूसरी सहस्राब्दी का मिस्र है, उस समय की सबसे बड़ी शक्ति। फ़िरौन केवल राजा नहीं, देवता माना जाता था; उसके विरुद्ध कोई अदालत नहीं थी। इस्राएली एक प्रवासी समुदाय थे जो अकाल के समय आए और फिर राज्य की निर्माण-परियोजनाओं के लिए बंधुआ मज़दूर बना दिए गए। उनके पास न ज़मीन थी, न हथियार, न कोई राजनीतिक आवाज़। जब पाठ कहता है कि मिस्र का राजा मर गया, तो सुननेवाला आशा करता है कि अब कुछ बदलेगा; राजा बदलते हैं, नीतियाँ बदलती हैं। पर कुछ नहीं बदला। ठीक उसी निराशा के क्षण में कथा का कैमरा मिस्र के सिंहासन से हटकर स्वर्ग की ओर मुड़ता है, और हमें पता चलता है कि असली सत्ता कहाँ बैठी है।
चिंतन
आपके जीवन की कौन-सी कराह अभी शब्दों में नहीं आ पा रही, और क्या आप मान सकते हैं कि वह बिना शब्दों के भी सुनी जा चुकी है?
जब परमेश्वर "स्मरण" करते हैं तो वे कार्य करते हैं; आप अपने इतिहास में किन जगहों पर अब पीछे मुड़कर उनके कार्य को पहचान सकते हैं, जो उस समय दिखाई नहीं दिया था?
Exodus में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Traces how God rescues a people for himself, from slavery to Sinai.
An accessible chapter by chapter guide that keeps pointing to Jesus.
Exodus: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Rich, sermon shaped exposition of the whole exodus story.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Exodus 2:24 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
निर्गमन 2:24 का क्या अर्थ है?
निर्गमन 2:24 किस विषय में है?
निर्गमन 2:24 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
निर्गमन 2:24 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
निर्गमन 2:24 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Exodus 2 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
किसने तुझे हम पर हाकिम और न्यायी ठहराया?" यह सवाल मूसा को चुभ गया, क्योंकि सच यही था। अभी परमेश्वर ने उसे भेजा नहीं था। उसने इधर उधर देखकर, छिपकर, अपने हाथ से छुड़ाना चाहा। चालीस साल बाद वही मूसा जलती झाड़ी के सामने बुलाया गया। तेरे भीतर का जोश गलत नहीं है। पर पूछ ले, यह काम तू कर रहा है या परमेश्वर तुझसे करवा रहा है?
पिता, जब मुझे किनारे धकेला जाता है और कोई पक्ष नहीं लेता, तब भी तू देखता है। तू ऐसे लोग भेजता है जो उठकर मेरी मदद करते हैं। मुझे भी वैसा ही साहस दे कि जहाँ किसी के साथ अन्याय हो, मैं चुप न रहूँ, बल्कि आगे बढ़कर हाथ बढ़ाऊँ।
पिता, धन्यवाद कि आपने फ़िरौन की बेटी के मन में तरस डाल दिया, जब उसने रोते हुए बच्चे को देखा। धन्यवाद कि मूसा का वह छोटा सा रोना भी अनसुना न रहा, और आपने शत्रु के घर में ही उसके लिए सुरक्षा तैयार कर रखी थी। हमारे आँसुओं पर भी आपकी वही दयादृष्टि है।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें