इब्रानियों 11:1
पाठ
लेखक विश्वास की कोई भावुक परिभाषा नहीं देता, बल्कि लगभग अदालती भाषा चुनता है: विश्वास वह ठोस आधार है जिस पर आशा की हुई वस्तुएँ टिकी हैं, और वह प्रमाण है उन चीज़ों का जो आँख से दिखाई नहीं देतीं। "अब विश्वास आशा की हुई वस्तुओं का निश्चय, और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है।" ध्यान दीजिए, यहाँ विश्वास को "महसूस करना" या "मान लेना" नहीं कहा गया; उसे निश्चय और प्रमाण कहा गया है, यानी ऐसी दो चीज़ें जो अदालत में गवाही के रूप में टिकती हैं। और अगली ही साँस में लेखक जोड़ता है कि "इसी के विषय में पूर्वजों की अच्छी गवाही दी गई", मानो कह रहा हो: यह परिभाषा हवा में नहीं लटकी, इसके पीछे नामों की एक लंबी कतार खड़ी है।
मूल बात
यह वचन असल में परमेश्वर के बारे में एक दावा है, हमारे बारे में नहीं। विश्वास इसलिए "प्रमाण" बन पाता है क्योंकि जो बोलता है वह भरोसेमंद है; सारा के बारे में लेखक ठीक यही कहता है, "क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करनेवाले को सच्चा जाना था।" वचन की विश्वसनीयता ही विश्वास की रीढ़ है। इसीलिए तीसरे पद में सृष्टि का उदाहरण आता है: जो दिखाई देता है, वह दिखी हुई वस्तुओं से नहीं बना। परमेश्वर की दुनिया में अनदेखा हमेशा देखे हुए से पहले आता है और उससे अधिक ठोस होता है। यह हमारी सामान्य समझ को उलट देता है, जहाँ हम केवल उसी को असली मानते हैं जिसे छू सकें। पौलुस इसी को दूसरे शब्दों में कहता है, कि हम देखने से नहीं, विश्वास से चलते हैं; इब्रानियों का लेखक उसमें यह जोड़ता है कि यह चलना अंधेरे में टटोलना नहीं, बल्कि एक दिए हुए वादे पर पूरा भार डाल देना है।
जोड़ने वाला सूत्र
इस एक वाक्य के पीछे पूरे पुराने नियम की गूँज है। ठीक पहले लेखक हबक्कूक भविष्यद्वक्ता का वह वाक्य उद्धृत कर चुका है कि धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा, वही वाक्य जिस पर पौलुस ने रोमियों और गलातियों में अपना पूरा सुसमाचार टिकाया। हबक्कूक ने यह तब लिखा था जब बाबेल की सेना क्षितिज पर थी और परमेश्वर चुप लग रहे थे; यानी यह परिभाषा किसी शांत अध्ययन कक्ष में नहीं, बल्कि आक्रमण के साये में जन्मी। और फिर सबसे चौंकाने वाली कड़ी: मूसा के बारे में लेखक कहता है कि उसने "मसीह के कारण निन्दित होने को मिस्र के भण्डार से बड़ा धन समझा।" मूसा मसीह का नाम नहीं जानता था, फिर भी लेखक कहता है कि उसकी आँखें उसी अनदेखे पर टिकी थीं। जिसे इब्राहीम ने दूर से देखा, हमने क्रूस पर पास से देखा।
दर्पण
यह वचन उस जगह चुभता है जहाँ हमारा जीवन प्रमाण माँगता है। बैंक का खाता प्रमाण देता है, मेडिकल रिपोर्ट प्रमाण देती है, बच्चे का रिज़ल्ट प्रमाण देता है। और हम चुपचाप उसी के अनुसार जीने लगते हैं: जो दिखता है, वही असली है। फिर एक दिन नौकरी जाती है, या रिपोर्ट में वह शब्द निकलता है जिससे डर लगता था, या बेटा कहता है कि उसे परमेश्वर में कोई रुचि नहीं रही, और हमारे पास दिखाई देने वाला कोई सहारा नहीं बचता। इब्राहीम भी तंबुओं में रहा, उसी देश में परदेशी की तरह जो उसे दिया गया था। विश्वास पक्की छत नहीं देता, वह पक्की नींव देता है, और वह नींव एक व्यक्ति का वचन है। आज एक कागज़ पर वह एक बात लिखिए जिसकी आप आशा कर रहे हैं पर जो अभी दिखाई नहीं देती, और उसके नीचे लिखकर ऊँची आवाज़ में पढ़िए: प्रतिज्ञा करनेवाला सच्चा है।
संदर्भ
यह पत्री उन मसीहियों के लिए लिखी गई जो थक चुके थे। पहले वे बंधुओं के साथ खड़े हुए थे, उनकी संपत्ति लूटी गई थी, और अब जोश ठंडा पड़ रहा था। बाहर से देखने पर उनका विश्वास उन्हें कुछ भी ठोस नहीं दे रहा था: न मंदिर, न सुरक्षा, न समाज में इज़्ज़त। लौट जाने का रास्ता खुला था, ठीक वैसे ही जैसे लेखक कहता है कि पूर्वजों के पास भी "लौट जाने का अवसर था।" ऐसे लोगों को वह उपदेश नहीं देता, वह उन्हें उनका वंश-वृक्ष दिखाता है। ग्यारहवाँ अध्याय एक तर्क नहीं, एक जुलूस है: हाबिल से लेकर उन गुमनाम शहीदों तक जो खालें ओढ़े गुफाओं में भटके। संदेश साफ़ है, तुम अकेले नहीं हो, और तुम्हारा रास्ता नया नहीं है।
कठिन प्रश्न
अगर विश्वास "प्रमाण" है, तो पद उन्तालीस क्यों कहता है कि इन सब को "प्रतिज्ञा की हुई वस्तु न मिली"? यह अध्याय खुद अपने भीतर टूटता हुआ लगता है। पहले हम पढ़ते हैं कि विश्वास से राज्य जीते गए, सिंहों के मुँह बंद हुए, आग ठंडी हुई। और फिर उसी साँस में, उसी विश्वास से, लोग आरे से चीरे गए और पथराव किए गए। एक ही विश्वास, दो बिल्कुल उलटे नतीजे। लेखक इस अंतर को समझाने की कोशिश तक नहीं करता। वह बस यह कहता है कि परमेश्वर ने "हमारे लिये पहले से एक उत्तम बात ठहराई।" यानी हिसाब इस जीवन में पूरा नहीं होता, और जो इसे इस जीवन में पूरा करवाना चाहता है, वह विश्वास नहीं, सौदा कर रहा है।
पहले पाठक
जिन कानों ने यह पहली बार सुना, उनके लिए ये नाम पारिवारिक नाम थे। इब्राहीम उनका पिता था, मूसा उनका मुक्तिदाता, राहाब उनकी शर्मनाक पर स्वीकृत पूर्वज। एक ऐसे समाज में जहाँ इज़्ज़त सब कुछ थी और बहिष्कार मौत के बराबर था, उन्होंने पद अड़तीस के वे शब्द सुने जो हमारे कानों से अक्सर फिसल जाते हैं: "संसार उनके योग्य न था।" यह उनके अपमान का पूरा उलटाव था। जिन्हें शहर ने बाहर निकाला, उनके बारे में परमेश्वर कहते हैं कि शहर ही उनके लायक नहीं था। और वे यह भी सुनते हैं कि परमेश्वर "उनका परमेश्वर कहलाने में नहीं लजाता", जबकि उनके अपने पड़ोसी उन्हें पहचानने में लजाते थे।
मनन के प्रश्न
आपके जीवन में इस समय कौन सी एक चीज़ है जिसे आप "देखने" पर टिका रहे हैं, और उसे "प्रतिज्ञा करनेवाले" पर टिकाने का व्यावहारिक अर्थ क्या होगा?
पद तैंतीस से अड़तीस तक एक ही विश्वास के दो अलग नतीजे दिखते हैं। आप किस नतीजे के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, और क्या आप दूसरे को भी विश्वास मानने के लिए तैयार हैं?
Hebrews में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Jesus, better than everything: the whole argument made plain.
Wright walks through the Bible's richest sermon step by step.
Hebrews: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Hebrews 11:1 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
इब्रानियों 11:1 का क्या अर्थ है?
इब्रानियों 11:1 किस विषय में है?
इब्रानियों 11:1 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इब्रानियों 11:1 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इब्रानियों 11:1 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Hebrews 11 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, यूसुफ ने अपनी आखिरी सांस तक उस वादे पर भरोसा रखा जिसे उसने खुद पूरा होते नहीं देखा। मुझे भी ऐसा विश्वास दे कि जो मेरे जीते जी पूरा न हो, उसकी आशा मेरे दिल में बनी रहे। मेरी नजर अपने दिनों से आगे, आपकी वफादारी पर टिकी रहे।
पिता, धन्यवाद कि गिदोन, बाराक, शिमशोन, यिप्तह, दाऊद और शमूएल जैसे कमजोर और डरे हुए लोगों को भी आपने विश्वास की सूची में जगह दी। धन्यवाद कि आप मेरी कमियों के बावजूद मुझे भी काम में लाते हैं, और मेरा नाम भी आपके सामने याद रखा जाता है।
पिता, धन्यवाद कि अब्राहम "मरा हुआ सा था", फिर भी आपने उससे आकाश के तारों और समुद्र तट की बालू के समान अनगिनत वंश उठाया। धन्यवाद कि मेरी थकी, सूखी सी परिस्थिति भी आपके हाथ में बाँझ नहीं रहती, और आपकी प्रतिज्ञा मेरी कमज़ोरी से बड़ी है।
पिता, धन्यवाद कि मूसा के माता-पिता ने विश्वास से उसे तीन महीने छिपाए रखा और राजा की आज्ञा से न डरे। धन्यवाद कि आज भी आप माता-पिता को ऐसा साहस देते हैं कि वे डर के बीच अपने बच्चों को आपके हाथों में सौंप दें, और आप उनकी रक्षा करते हैं।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें