यशायाह 52:7
पाठ
क्षितिज पर एक आकृति उभरती है। पहाड़ियों की उस लकीर पर, जहाँ से बेबीलोन की सड़क यरूशलेम की ओर मुड़ती है, कोई दौड़ता हुआ आ रहा है। अभी उसका चेहरा नहीं दिखता, केवल पाँव दिखते हैं, ऊपर-नीचे, धूल उड़ाते हुए। और भविष्यद्वक्ता, जो खण्डहरों के बीच खड़ा है, चिल्ला उठता है: "पहाड़ों पर उसके पाँव क्या ही सुहावने हैं जो शुभ समाचार लाता है।" वह दूत हाँफते हुए चार बातें कहता है, एक के बाद एक, जैसे साँस लेने का समय न हो: शान्ति, कल्याण, उद्धार, और फिर वह वाक्य जो सब कुछ पलट देता है, सिय्योन की ओर मुँह करके, "तेरा परमेश्वर राज्य करता है।"
मर्म
ध्यान दीजिए कि दूत यह नहीं कहता, "अब तुम्हारे दिन बदलने वाले हैं" या "हिम्मत रखो।" वह एक तथ्य की घोषणा करता है जो पहले ही सच हो चुका है। युद्ध कहीं और लड़ा गया, जीत कहीं और मिली, और अब केवल खबर पहुँच रही है। यही सुसमाचार का ढाँचा है: उद्धार पहले होता है, विश्वास बाद में आता है। बन्दी बेटी को अपनी जंजीर खुद नहीं तोड़नी थी, यहोवा ने उसे "बिना रुपया दिए" छुड़ाया। और परमेश्वर के राज्य करने की घोषणा उन कानों तक पहुँचती है जिन्होंने सत्तर साल तक केवल बेबीलोन के राजाओं के आदेश सुने थे। राज्य करना कोई अमूर्त धार्मिक विचार नहीं था; इसका अर्थ था कि जिस सम्राट ने उन्हें बेचा था, वह अन्तिम शब्द नहीं बोलता।
बड़ी कहानी का सूत्र
इस घोषणा के तुरंत बाद, कुछ ही पंक्तियों की दूरी पर, यशायाह लिखता है: "देखो, मेरा दास बुद्धि से काम करेगा।" और फिर वह चौंकाने वाली बात कि उसका रूप "यहाँ तक बिगड़ा हुआ था कि मनुष्य का सा न जान पड़ता था।" यह संयोग नहीं है। जो दूत पहाड़ों पर दौड़ता है, वह जिस जीत की खबर लाता है, उसकी कीमत अगले अध्याय में चुकाई जाती है। पौलुस इसी आयत को रोमियों 10:15 में उठाकर मसीह के प्रचारकों पर लगा देता है, और उसका तर्क सीधा है: सुसमाचार की सुन्दरता उस दूत की योग्यता में नहीं, उस राजा में है जिसने कुरुप होकर जीत हासिल की। "तेरा परमेश्वर राज्य करता है" का पूरा अर्थ क्रूस और खाली कब्र के बाद ही खुलता है।
दर्पण
आप जानते हैं कि खबर के इन्तज़ार में जीना कैसा होता है। जाँच की रिपोर्ट आने में तीन दिन बाकी हैं। बेटा फोन नहीं उठा रहा। दफ्तर में छँटनी की सूची बन रही है और आपका नाम उसमें है या नहीं, कोई नहीं बताता। ऐसे दिनों में हमारा मन किसी और की प्रभुता के नीचे चला जाता है: बैंक की, बीमारी की, उस व्यक्ति की जिसके मूड पर घर का मौसम टिका है। सिय्योन की बन्दी बेटी को भी यही लगता था कि बेबीलोन ही अन्तिम सत्ता है। दूत उसकी परिस्थिति नहीं बदलता, उसका राजा बदल देता है। आज एक काम कीजिए: कागज़ पर उस एक नाम या चीज़ को लिखिए जो इस समय आपके जीवन पर राज करती हुई महसूस होती है, और उस पर उँगली रखकर ज़ोर से कहिए, "तेरा परमेश्वर राज्य करता है।"
पृष्ठभूमि
छठी शताब्दी ईसा पूर्व। यरूशलेम खण्डहर है, मन्दिर जला हुआ, दीवारें टूटी हुईं, और लोगों की एक पूरी पीढ़ी बेबीलोन में जन्मी है जिसने सिय्योन कभी देखा ही नहीं। प्राचीन दुनिया में युद्ध का परिणाम शहर तक इसी तरह पहुँचता था: कोई दौड़ता हुआ धावक, कई दिनों की भूखी-प्यासी दौड़ के बाद, पहाड़ी की चोटी पर प्रकट होता। दीवार पर खड़े पहरुए सबसे पहले उसे देखते थे, और उसकी चाल से ही अंदाज़ा लगाते थे कि खबर अच्छी है या बुरी। हारने की खबर लानेवाले दूत को कभी-कभी मार डाला जाता था। इसलिए वह दौड़ता चेहरा शहर के लिए जीवन-मरण का प्रश्न होता था। यहाँ पहरुए "एक साथ जयजयकार कर रहे हैं," क्योंकि उन्होंने चाल पहचान ली है।
एक बारीकी
आयत सुन्दर आवाज़ की नहीं, सुन्दर पाँवों की बात करती है। और सोचिए, दौड़ते दूत के पाँव शरीर का सबसे बदसूरत हिस्सा होते हैं: फटी एड़ियाँ, धूल की परत, पत्थरों से छिले हुए, शायद खून से सने। यशायाह उन्हीं को "सुहावने" कहता है। सुन्दरता पाँवों में नहीं, उस सन्देश में है जो उन्हें यहाँ तक खींच लाया। इब्रानी शब्द है मबस्सेर, "शुभ समाचार लानेवाला," वही जड़ जिससे नए नियम का यूअंगेलियोन यानी सुसमाचार बनता है। यह हमें एक असुविधाजनक सच्चाई देता है: खबर को किसी के शरीर से होकर आना पड़ता है। परमेश्वर आकाश में अक्षर नहीं लिखते; वे किसी थके, धूल भरे, साधारण इंसान को दौड़ाते हैं।
मुख्य पात्र
इस दृश्य का असली नायक दौड़नेवाला नहीं, वह है जिसके बारे में खबर है। और उनका चरित्र आयत 5 में खुलता है: "मेरे नाम कि निन्दा लगातार दिन भर होती रहती है।" परमेश्वर यह सहन नहीं कर पाते कि उनकी प्रजा की दुर्दशा से जातियों के बीच उनका नाम मिट्टी में घसीटा जाए। वे केवल दयालु नहीं हैं, वे आहत हैं। और उनकी प्रतिक्रिया गुस्से का विस्फोट नहीं, बल्कि एक छुड़ौती है जिसमें वे स्वयं कीमत उठाते हैं: "बिना रुपया दिए छुड़ाए भी जाओगे।" जो परमेश्वर आगे-आगे चलते हैं और पीछे भी रक्षा करते चलते हैं, वे राज्य ऐसे नहीं करते जैसे बेबीलोन का सम्राट करता था। उनका सिंहासन अपने लोगों की ओर झुका हुआ है।
मनन के प्रश्न
आपके जीवन में इस समय कौन सी आवाज़ सबसे ज़्यादा "राजा" की तरह बोलती है, और आप उसकी बात को अन्तिम क्यों मान लेते हैं?
यदि सुसमाचार को किसी के पाँवों से होकर आना ही है, तो इस सप्ताह किसके लिए वे पाँव आपके हो सकते हैं, और आपको क्या कीमत चुकानी पड़ेगी?
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देखो, मेरा दास बुद्धिमानी से काम करेगा, वह ऊँचा और महान और अति महान हो जाएगा।"
ध्यान दो, परमेश्वर जीत की घोषणा पहले करता है, और घाव का वर्णन उसके बाद आता है। अध्याय 53 की पीड़ा से पहले ही वह कह देता है कि उसका दास ऊँचा उठाया जाएगा।
तेरी कहानी भी अभी बीच में है। जो दुख तुझे आज निगल रहा है, उसका अंत परमेश्वर पहले से जानता है।
दूर हो, दूर, वहाँ से निकल जाओ, कोई अशुद्ध वस्तु मत छूओ।" यह भागते हुए लोगों की भगदड़ नहीं थी। ये वे लोग थे जो बाबेल से मंदिर के पात्र उठाकर लौट रहे थे, और जो हाथ परमेश्वर की पवित्र वस्तुएँ थामते हैं, उनका शुद्ध होना ज़रूरी था। तू भी कुछ पवित्र उठाए चल रहा है, उसका नाम, उसका वचन। पर वही हाथ और किस चीज़ को अब तक पकड़े हुए हैं?
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