लूका 1:72
पाठ
ज़कर्याह नौ महीने चुप रहा, और जब उसकी जीभ खुलती है तो वह अपने बेटे के बारे में नहीं, परमेश्वर के बारे में गाता है। उस गीत के बीचोंबीच यह पंक्ति आती है: "कि हमारे पूर्वजों पर दया करके अपनी पवित्र वाचा का स्मरण करे।" इससे पहले वह छुटकारे और शत्रुओं से बचाव की बात कर चुका है; अब वह कारण बताता है। परमेश्वर ने यह सब इसलिए किया क्योंकि उन्होंने एक पुरानी वाचा को याद किया, और उस याद के भीतर वे लोग भी शामिल हैं जो कब्रों में सो चुके हैं।
मर्म
यह वाक्य परमेश्वर के बारे में कुछ ऐसा कहता है जिसे हम आसानी से पार कर जाते हैं: वे किसी नई योजना से नहीं, बल्कि अपने ही पुराने वचन से बंधे होकर काम करते हैं। उद्धार यहाँ परमेश्वर के मूड का परिणाम नहीं है, न ही इस्राएल की योग्यता का इनाम। यह वाचा की वफ़ादारी है। हमारे लिए इसका अर्थ यह है कि अनुग्रह मनमाना नहीं है। परमेश्वर ने खुद को एक वचन से बाँध लिया, और उस बंधन को वे तोड़ते नहीं। यही वह ज़मीन है जिस पर विश्वास खड़ा हो सकता है जब भावनाएँ खिसक जाती हैं। परमेश्वर याद करते हैं, इसलिए हम भूलने के बावजूद बचे रहते हैं।
सूत्र
अब्राहम से खाई गई शपथ, दाऊद के घराने का सिंहासन, भविष्यद्वक्ताओं की आवाज़ें, ये सब सदियों तक अधूरे धागों की तरह लटके रहे। ज़कर्याह कह रहा है कि ये धागे अब एक ही जगह बँध रहे हैं, और वह जगह एक गर्भ है। दिलचस्प यह है कि वह अपने ही बेटे को केंद्र नहीं बनाता; यूहन्ना केवल "प्रभु के मार्ग तैयार करने" वाला है। वाचा का स्मरण एक व्यक्ति में देह धारण करता है। मसीह कोई नया विचार नहीं, बल्कि एक बहुत पुराने वचन का चुकाया जाना है। इसलिए पुराना नियम पढ़ते समय हम पिछड़ी हुई किताब नहीं, वादे की लंबी प्रतीक्षा पढ़ते हैं।
दर्पण
आप शायद ऐसी प्रार्थनाओं के साथ जी रहे हैं जिनका उत्तर वर्षों से नहीं आया। एक बच्चा जो लौटा नहीं, एक शरीर जो ठीक नहीं हुआ, एक रिश्ता जो जुड़ा नहीं। और भीतर एक चुपचाप संदेह पलता है: शायद परमेश्वर भूल गए। ज़कर्याह भी यही सोचता था; इसीलिए उसने स्वर्गदूत से पूछा, "यह मैं कैसे जानूँ?" उसकी प्रार्थना दशकों पहले सुनी जा चुकी थी, पर उत्तर उसकी उम्र के आखिरी हिस्से में आया। यह पद हमें आसान दिलासा नहीं देता। यह कहता है कि परमेश्वर की स्मृति हमारी समय-सारणी से नहीं चलती। सवाल यह नहीं कि क्या वे याद करते हैं, बल्कि यह कि जब तक वे न बोलें, क्या हम चुपचाप ठहर सकते हैं।
एक बारीकी
"स्मरण करे।" बाइबल में याद करना दिमाग़ी क्रिया नहीं, हाथ की क्रिया है। जब निर्गमन में कहा जाता है कि परमेश्वर ने अब्राहम के साथ बाँधी वाचा को याद किया, तो अगली बात यह नहीं होती कि उन्हें कुछ ध्यान आया, बल्कि यह कि मिस्र की ग़ुलामी टूटने लगी। स्मरण का मतलब है हस्तक्षेप। और फिर वह अजीब वाक्यांश: "हमारे पूर्वजों पर दया करके।" वे तो मर चुके हैं। उन पर दया कैसे? शायद इसलिए कि परमेश्वर की वफ़ादारी पीढ़ियों के आर-पार बहती है; जो वादा दादा से किया गया, वह पोते में पूरा होकर दादा का भी सम्मान करता है। मृतक भी इस दया से बाहर नहीं। यहाँ पाठ चुप हो जाता है, और वह चुप्पी हमें सोचने देती है।
संदर्भ
यह गीत हेरोदेस के यहूदिया में गाया जाता है, एक ऐसे देश में जहाँ रोमी सैनिक सड़कों पर हैं और मंदिर की व्यवस्था सत्ता के साथ समझौते कर चुकी है। ज़कर्याह एक साधारण गाँव-याजक है, चौबीस दलों में से एक का सदस्य, जिसके जीवन में शायद एक ही बार धूप जलाने की चिट्ठी निकली। वह और एलीशिबा "परमेश्वर के सामने धर्मी" थे, फिर भी निःसंतान, जो उस समाज में सार्वजनिक अपमान था। मौका है आठवें दिन का खतना, पड़ोसी और रिश्तेदार जमा हैं, और नाम को लेकर विवाद हुआ है। इसी घरेलू, छोटे, हाशिए के दृश्य में एक आदमी राष्ट्रों के इतिहास की भाषा बोलने लगता है। साम्राज्य को इसकी ख़बर तक नहीं।
अंतर्पाठ
कुछ ही महीने पहले मरियम ने उसी घर में गाया था कि परमेश्वर ने "अपने सेवक इस्राएल को सम्भाल लिया कि अपनी उस दया को स्मरण करे।" दो अलग-अलग लोग, एक बूढ़ा याजक और एक जवान लड़की, एक ही शब्द तक पहुँचते हैं: स्मरण। यह संयोग नहीं; पवित्र आत्मा दोनों को उसी पुरानी स्मृति में डुबो देते हैं। और पीछे निर्गमन की कहानी खड़ी है, जहाँ इस्राएल की कराह ऊपर पहुँची और परमेश्वर ने वाचा याद की। लूका सुझा रहा है कि यह दूसरा निर्गमन है, पर इस बार शत्रु फ़िरौन नहीं; अगले ही पदों में उद्धार को "पापों की क्षमा" कहा गया है। असली ग़ुलामी भीतर थी।
मनन के प्रश्न
जिस प्रार्थना का उत्तर आपको आज तक नहीं मिला, क्या आप उसे परमेश्वर की भूल मानते हैं या उनकी स्मृति के भीतर रखी हुई चीज़?
ज़कर्याह की नौ महीने की चुप्पी ने उसके भीतर एक गीत पकाया। आपके जीवन में वह चुप्पी कहाँ है, और क्या आप उससे भाग रहे हैं?
Luke में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Warm, readable commentary on the Gospel for outsiders and doubters.
Follows Luke's careful account of the Savior for all nations.
Luke: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Luke 1:72 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
लूका 1:72 का क्या अर्थ है?
लूका 1:72 किस विषय में है?
लूका 1:72 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
लूका 1:72 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
लूका 1:72 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Luke 1 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
जकरयाह और इलीशिबा के बारे में लिखा है, "वे दोनों परमेश्वर के सामने धर्मी थे, और प्रभु की सारी आज्ञाओं और विधियों पर निर्दोष चलनेवाले थे।" और फिर अगली ही आयत कहती है कि उनके कोई सन्तान न थी। धर्मी होना हर दरवाज़ा नहीं खोलता। तुम्हारी वफ़ादारी के बदले भी शायद सन्नाटा ही मिला हो। पर परमेश्वर गिन रहा था, वर्षों तक, चुपचाप।
फिर जब उसकी सेवा के दिन पूरे हुए, तो वह अपने घर चला गया।" जकर्याह मंदिर में स्वर्गदूत से मिला, पर इसके बाद भी उसने अपनी बाकी सेवा के दिन पूरे किए, और फिर चुपचाप घर लौट गया। कोई भीड़ नहीं, कोई गवाही नहीं, बस एक गूँगा मुँह और भीतर छिपा हुआ वादा। क्या तुम भी परमेश्वर के किसी वादे को चुपचाप घर तक ले जा रहे हो? वह वहाँ भी काम करता है, जहाँ कोई देख नहीं रहा।
मरियम कहती है, "उसने अपना भुजबल दिखाया, और जो अपने मन में घमण्ड करते थे, उन्हें तितर-बितर किया।" ध्यान दे, घमंड कहाँ पकड़ा गया? मन में। बाहर से कोई कुछ नहीं देख पाता, पर परमेश्वर वहीं हाथ डालता है। शायद तेरे भीतर भी कोई चुपचाप बना हुआ सिंहासन है, जिसे तूने किसी को नहीं दिखाया। वह उसे जानता है, और उसे गिराना उसकी दया है, दंड नहीं।
पिता, इलीशिबा की तरह मुझे भी हिम्मत दे कि जब सब लोग कुछ और कहें, तब भी मैं तेरी बात पर टिकी रहूँ। मेरे डर को दूर कर, और मुझे भरोसा दे कि तेरा चुना हुआ रास्ता ही सबसे भला है। तू जो नाम मुझे देता है, वही मेरी पहचान हो।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें