मत्ती 24:13
पाठ
चारों ओर धोखेबाज मसीह, झूठे भविष्यद्वक्ता, विश्वासघात करते भाई, और ठंडा पड़ता प्रेम; इसी अंधकार के बीच यीशु एक ही वाक्य रख देते हैं: "परन्तु जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा।" वह "परन्तु" पूरे परिच्छेद का मोड़ है। पिछली आयत कहती है कि अधर्म इतना बढ़ जाएगा कि बहुतों का प्रेम बुझ जाएगा, और तुरंत बाद यह वचन उन थोड़े लोगों की ओर इशारा करता है जो बुझते नहीं। यीशु कोई नई शर्त नहीं जोड़ रहे, न ही कोई तारीख बता रहे हैं; वे अपने चेलों को बता रहे हैं कि जो समय आ रहा है उसमें विश्वास की परख टिके रहने से होगी, चमत्कारों या सफलता से नहीं। अंत तक बने रहना ही वह चिन्ह है जिसे वे खोजने को कहते हैं।
केंद्रीय बात
यहाँ सबसे बड़ा खतरा गलतफहमी का है: मानो उद्धार हमारी सहनशक्ति का इनाम हो, मानो परमेश्वर कहते हों कि जो पर्याप्त मजबूत निकलेगा उसे बचा लिया जाएगा। पर ध्यान दीजिए, यीशु यह नहीं कहते कि "जो अन्त तक जीतेगा" या "जो कभी न गिरेगा"। जिस यूनानी शब्द का अनुवाद धीरज है, वह है हुपोमेनो, जिसका शाब्दिक अर्थ है "नीचे बने रहना", बोझ के नीचे से भाग न जाना। यह वीरता नहीं, स्थिरता है। और यह स्थिरता उसी की देन है जिसने पहले हमारे लिए सारा बोझ उठाया। धीरज उद्धार की कीमत नहीं, उसका फल है; वह जड़ नहीं, बल्कि पत्ता है जो दिखाता है कि जड़ जीवित है। जहाँ प्रेम ठंडा पड़ रहा है, वहाँ बने रहना अपने आप में अनुग्रह का प्रमाण है।
बड़ी कहानी का सूत्र
जो मसीह यह वचन बोल रहे हैं, वे स्वयं कुछ ही दिनों में इसे जीकर दिखाने वाले हैं। जैतून पहाड़ पर बैठकर वे अपने चेलों से विश्वासघात, घृणा और मृत्यु की बात करते हैं, और उसी जैतून पहाड़ की ढलान पर, गतसमनी में, वे स्वयं पकड़वाए जाएँगे, अपनों से त्यागे जाएँगे, और अन्त तक टिके रहेंगे। "धीरज धरे रहेगा" कोई सैद्धांतिक आदर्श नहीं; यह यीशु की अपनी जीवनी है। क्रूस पर वे बोझ के नीचे से भागे नहीं। इसलिए जब वे कहते हैं कि टिके रहनेवाले का उद्धार होगा, तो वे हमें अपने पदचिह्नों पर बुला रहे हैं, पर खाली हाथ नहीं भेज रहे। पहले वे अन्त तक गए, ताकि हमारे पास एक ऐसा उद्धार हो जो हमारी सहनशक्ति पर नहीं, उनकी सहनशक्ति पर टिका है। हमारा धीरज उनके धीरज की प्रतिध्वनि है।
दर्पण
यह आयत उस थकान को छूती है जिसे हम स्वीकार करने से डरते हैं। वह विवाह जिसमें आप बीस साल से डटे हैं और अब कुछ महसूस नहीं होता। वह बेटा जो चर्च छोड़ चुका है और जिसके लिए प्रार्थना करते-करते शब्द सूख गए हैं। वह नौकरी जहाँ ईमानदारी की कीमत हर महीने चुकानी पड़ती है और कोई देखता तक नहीं। यीशु यह नहीं कहते कि आपका प्रेम कभी ठंडा नहीं पड़ेगा; वे कहते हैं कि चारों ओर यही होगा। खतरा नाटकीय पतन का नहीं, धीमे जम जाने का है। हम सोचते हैं हम मजबूत हैं, जबकि असल में हम केवल अभी तक थके नहीं हैं। आज एक काम कीजिए: उस एक व्यक्ति का नाम कागज पर लिखिए जिसके लिए प्रार्थना करना आपने थककर छोड़ दिया था, और वह नाम ऊँची आवाज़ में परमेश्वर के सामने बोलिए।
कठिन प्रश्न
"अन्त तक" का अर्थ क्या है, और अगर कोई अन्त से पहले टूट जाए तो? यह प्रश्न टालने लायक नहीं। कोई विश्वासी कैंसर की आखिरी महीनों में कड़वा हो जाता है; कोई सताव में इनकार कर देता है, जैसे पतरस ने किया। क्या उनका उद्धार गया? पाठ हमें आसान उत्तर नहीं देता, और मैं भी नहीं दूँगा। पर एक बात स्पष्ट है: यीशु यह चेतावनी उन्हीं चेलों को देते हैं जिनमें से एक कुछ ही दिनों बाद तीन बार इनकार करेगा, और जिसे वे फिर बहाल करेंगे। गिरना और छोड़ देना एक बात नहीं है। "अन्त तक" किसी अचूक प्रदर्शन की माँग नहीं, बल्कि दिशा की बात है: बार-बार लौटते रहना भी टिके रहना है। रहस्य बचा रहता है, पर वह अनुग्रह से घिरा हुआ रहस्य है।
एक बारीकी
"उसी का" शब्द पर रुकिए। हिंदी अनुवाद में यह छोटा-सा जोर बहुत कुछ खोलता है। पूरे परिच्छेद में "बहुत से" और "बहुतों" बार-बार आता है: बहुत से झूठे मसीह, बहुतों का बहकना, बहुतों का प्रेम ठंडा पड़ना। भीड़ की भाषा। और फिर अचानक एकवचन: "उसी का उद्धार होगा।" परमेश्वर की गिनती भीड़ से नहीं होती। जब आँकड़े निराश करते हैं, जब आपकी मंडली सिकुड़ रही है और आपके साथी एक-एक कर पीछे हट रहे हैं, तब यह एकवचन आपके लिए है। यीशु ऐसे किसी को नहीं भूलते जो केवल टिका रहा, बिना नाम के, बिना सफलता के, बिना किसी के देखे।
शास्त्र की गूँज
मत्ती 10 में यीशु यही वाक्य लगभग शब्दशः अपने बारह चेलों को भेजते समय कहते हैं। वहाँ संदर्भ मिशन का है, यहाँ अन्त के दिनों का; पर वचन एक ही रहता है, मानो यीशु कह रहे हों कि हर युग में शिष्यता का आकार एक ही है, केवल तीव्रता बदलती है। दूसरी ओर, इब्रानियों का लेखक हमें यीशु की ओर ताकते रहने को कहता है, जिन्होंने आनंद के लिए क्रूस सहा; वहाँ धीरज का स्रोत नाम लेकर बताया गया है। दोनों मिलकर वही कहते हैं जो आयत 14 संकेत करती है: टिके रहनेवालों के जीवन से ही राज्य का सुसमाचार सब जातियों तक पहुँचता है। हमारा ठहरना गवाही बन जाता है।
चिंतन के प्रश्न
आपके जीवन में वह कौन-सी जगह है जहाँ प्रेम ठंडा नहीं हुआ, पर धीरे-धीरे ठंडा पड़ रहा है, और आप इसे किसके सामने स्वीकार कर सकते हैं?
अगर आपका धीरज मसीह के धीरज का फल है, न कि उद्धार की कीमत, तो यह आपके थके हुए दिनों को कैसे बदलता है?
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Matthew 24:13 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
मत्ती 24:13 का क्या अर्थ है?
मत्ती 24:13 किस विषय में है?
मत्ती 24:13 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
मत्ती 24:13 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
मत्ती 24:13 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Matthew 24 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, कितनी आवाज़ें कहती हैं कि तू यहाँ है, वहाँ है। मेरा मन भटक जाता है और हर नई बात के पीछे दौड़ने लगता है। मुझे ठहरना सिखा, तेरे वचन में जड़ पकड़ना सिखा। जब तू आएगा, किसी को बताना नहीं पड़ेगा। तब तक मुझे शांत और जागता हुआ रख।
पिता, कभी कभी लगता है कि तेरा आना बहुत दूर है, और मन ढीला पड़ने लगता है। मुझे उस सोच से बचा जो कहती है, अभी तो समय है। मेरे दिल को जगाए रख, ताकि जिस दिन तू आए, मैं वही करता मिलूँ जो तूने मुझे सौंपा है।
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