भजन संहिता 107
पाठ
चार तस्वीरें, एक ही ढाँचा: रेगिस्तान में भटकते लोग, अंधेरे में बेड़ियों से जकड़े कैदी, अपनी मूर्खता से बीमार पड़े लोग, और तूफ़ान में डूबते जहाज़ी। हर बार वही वाक्य लौटता है, "तब उन्होंने संकट में यहोवा की दुहाई दी," और हर बार वही उत्तर, "और उसने सकेती से उनका उद्धार किया," जिसके बाद धन्यवाद का बुलावा दोहराया जाता है। अंत में भजन नदियों को जंगल और जंगल को ताल बनाने वाले परमेश्वर की ओर मुड़ता है, जो हाकिमों को नीचा और दरिद्रों को ऊँचा करता है, और बुद्धिमान को न्योता देता है कि वह इन बातों पर ध्यान करे।
मूल बात
यह भजन परमेश्वर के चरित्र को कहानी के रूप में बताता है। पहली पंक्ति की "करुणा" इब्रानी में हेसेद है, वह वाचा-निष्ठा जो भावना नहीं बल्कि प्रतिज्ञा है: परमेश्वर अपने लोगों से बँधे हुए हैं और बँधे रहते हैं। और ध्यान दें कि चारों समूहों में एक भी निर्दोष नहीं है। कैदी अंधेरे में हैं "इसलिए कि वे परमेश्वर के वचनों के विरुद्ध चले," बीमार अपनी "कुचाल, और अधर्म के कामों के कारण" कराह रहे हैं। यानी उद्धार यहाँ योग्यता का इनाम नहीं, दुहाई का उत्तर है। भजन का परमेश्वर उन्हें बचाते हैं जिन्होंने अपनी मुसीबत खुद बनाई। यही अनुग्रह की परिभाषा है, इससे कम कुछ नहीं।
जोड़ने वाला धागा
अब चारों तस्वीरों को सुसमाचारों के सामने रखिए। जो "अभिलाषी जीव को सन्तुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है" — मरियम ने अपने गीत में ठीक यही शब्द अपने गर्भ के बच्चे के बारे में गाए (लूका 1:53)। जो "पीतल के फाटकों को तोड़ा, और लोहे के बेंड़ों को टुकड़े-टुकड़े किया" — वही मसीह हैं जिन्होंने कैदियों की छुड़ौती की घोषणा की। जो "अपने वचन के द्वारा उनको चंगा करता" — वही जिनके एक शब्द से सूबेदार का दास ठीक हुआ। और जो "आँधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं" — गलील की झील पर नाव में शिष्य यही देखकर डर गए थे कि यह कौन है (मरकुस 4:39)। भजन 107 उस व्यक्ति का चित्र पहले से खींच रहा है जिसे शिष्यों ने पहचानने में देर की।
दर्पण
आप उन चारों में कहीं तो हैं। कोई नौकरी में इतने साल से भटक रहा है कि "बसा हुआ नगर" शब्द ही कड़वा लगता है। किसी की बेड़ियाँ खुद उसके चुनावों से बनी हैं, वह क़र्ज़ हो, वह लत हो, वह रिश्ता हो जिसे उसने अपने हाथों तोड़ा। किसी का शरीर उसे धोखा दे रहा है और "उनका जी सब भाँति के भोजन से मिचलाता है" वाली पंक्ति बिस्तर के पास की मेज़ जैसी सच्ची लगती है। भजन आपकी ज़िम्मेदारी को छिपाता नहीं, पर वह आपको वहीं नहीं छोड़ता। और यह मानता है कि छुटकारे के बाद हम चुप हो जाते हैं, इसलिए पद 2 आज्ञा देता है कि छुड़ाए हुए लोग बोलें।
तो आज: किसी एक व्यक्ति को फ़ोन या संदेश करके एक ठोस बात नाम लेकर बताइए जिससे परमेश्वर ने आपको निकाला, और अंत में यही वाक्य लिखिए या कहिए, "उसकी करुणा सदा की है।"
एक बारीकी
पद 2 का छोटा वाक्यांश आसानी से फिसल जाता है: "जिन्हें उसने शत्रु के हाथ से दाम देकर छुड़ा लिया है।" इब्रानी में यहाँ गाअल की जड़ है, वही शब्द जो गोएल से जुड़ा है, निकटतम रिश्तेदार जो कीमत चुकाकर अपने परिवार के डूबे हुए सदस्य को गुलामी या क़र्ज़ से खरीद लेता। यानी छुटकारा मुफ़्त नहीं था; वह मुफ़्त पाया गया, क्योंकि कीमत किसी और ने चुकाई। पुराने नियम में यह कीमत अक्सर अस्पष्ट रहती है। नए नियम में वह चेहरा पा लेती है: छुड़ानेवाला रिश्तेदार बना, और दाम अपने लहू से चुकाया। इसीलिए यह भजन कलीसिया के मुँह में इतना सहज बैठता है।
पृष्ठभूमि
यह भजन पाँचवीं पुस्तक खोलता है, और उससे पहले भजन 106 की अंतिम प्रार्थना खड़ी है: हमें जाति-जाति में से इकट्ठा कीजिए। पद 3 उसका उत्तर है, "पूरब-पश्चिम, उत्तर और दक्षिण से इकट्ठा किया है।" यह निर्वासन से लौटे लोगों की भाषा है, बाबेल से वापसी की धूल जिनके कपड़ों पर अभी थी। वे ऐसे समुदाय थे जिनके पास खंडहर मंदिर, ढहा शहर और भरा-पूरा घाव था। पद 22 का "धन्यवाद-बलि" मंदिर की असली रस्म थी: बलि चढ़ाकर, परिवार और पड़ोसियों के साथ खाकर, सार्वजनिक रूप से बताना कि परमेश्वर ने क्या किया। धन्यवाद निजी भावना नहीं, सामुदायिक गवाही थी।
पहले सुननेवाले
लौटे हुए बंधुओं के कानों में ये चारों तस्वीरें रूपक नहीं थीं। रेगिस्तान का भटकना उनका सफ़र था। बेड़ियाँ और "अंधियारे और मृत्यु की छाया" उनके पिताओं की क़ैद थी। और पद 34, "वह फलवन्त भूमि को बंजर बनाता है, यह वहाँ के रहनेवालों की दुष्टता के कारण होता है," वह उनके देश का इतिहास था, कोई सिद्धांत नहीं। इसलिए पद 40 का उलटाव, जिसमें हाकिम अपमान से लदते और दरिद्र ऊँचे किए जाते हैं, उनके लिए राजनीतिक उम्मीद था, न कि आत्मिक कविता। वे जानते थे कि साम्राज्य आते-जाते हैं, पर हेसेद सदा की है। बुद्धिमान वही है जो इस पर "ध्यान करेगा।"
मनन के प्रश्न
चारों तस्वीरों में से आप आज किसमें बैठे हैं, और आपकी "दुहाई" वास्तव में किन शब्दों में निकलेगी?
यदि छुड़ाए हुए लोगों को बोलना है (पद 2), तो आपकी चुप्पी किसे उस परमेश्वर से अपरिचित रख रही है जिसने दाम चुकाया?
Psalms में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
A year of daily devotions through every psalm, ideal alongside your reading.
The second half of the psalter with the same loved precision.
Lewis thinking out loud about praise, cursing psalms and joy.
Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Psalms 107 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 107 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 107 किस विषय में है?
भजन संहिता 107 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 107 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 107 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 107 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
वह नदियों को जंगल बना देता है, और जल के सोतों को सूखी भूमि कर देता है।" जो कभी बहता था, वह सूख भी सकता है। पर अगली ही आयतों में परमेश्वर मरुभूमि को जल का ताल बना देता है। तेरी सूखी जगह उसके हाथ से बाहर नहीं है। पूछ खुद से: क्या मैंने धारा पर भरोसा किया, या धारा देनेवाले पर?
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें
