7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

1 राजाओं 14

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

राजा यारोबाम का बेटा अबिय्याह बहुत बीमार पड़ गया। यारोबाम डर गया। उसने अपनी पत्नी से कहा, "भेष बदल लो, ताकि कोई तुम्हें पहचान न सके। शीलो जाओ, वहाँ अहिय्याह नबी रहते हैं। वे बता देंगे कि लड़के का क्या होगा।" रानी ने दस रोटी, कुछ टिकियाँ और शहद की कुप्पी ली, और चल पड़ी।

अहिय्याह बूढ़े हो चुके थे, उनकी आँखें धुँधली हो गई थीं, वे देख नहीं पाते थे। पर परमेश्वर ने पहले ही उन्हें बता दिया था, "यारोबाम की स्त्री आ रही है, वह अपने आपको कोई और बताएगी।" जैसे ही रानी के पाँवों की आहट दरवाजे पर सुनाई दी, अहिय्याह बोल उठे, "यारोबाम की स्त्री, अंदर आओ, तुम अपने आपको क्यों छिपा रही हो?" रानी कितनी चौंक गई होगी! भेष बदलने से भी परमेश्वर की नजरों से कुछ छिपा नहीं रहता।

फिर अहिय्याह ने कठोर बात कही। परमेश्वर ने कहा था, "मैंने यारोबाम को राजा बनाया, पर उसने मेरी बात नहीं मानी। उसने मूरतें बनाईं और मुझे क्रोधित किया।" इसलिए परमेश्वर ने कहा कि यारोबाम के घराने पर विपत्ति आएगी। और यह भी कहा गया, "जैसे ही तुम्हारे पाँव नगर में पड़ेंगे, बालक मर जाएगा।"

रानी उदास मन से घर लौटी। जैसे ही उसने अपने घर की डेवढ़ी पर पाँव रखा, बालक मर गया, ठीक वैसे ही जैसे परमेश्वर ने कहा था। सारे इस्राएल ने उस बालक के लिए शोक मनाया।

इसका क्या अर्थ है?

यह कहानी सुनने में कठोर लगती है। पर यह हमें एक बड़ी सच्चाई दिखाती है। परमेश्वर जो कहते हैं, वह होकर रहता है। यारोबाम ने सोचा कि वह छिपकर, भेष बदलकर परमेश्वर से बच सकता है। पर परमेश्वर सब कुछ जानते हैं, यहाँ तक कि किसी के पाँवों की आहट भी। अहिय्याह की आँखें अंधी थीं, पर परमेश्वर की आँखें कभी अंधी नहीं होतीं।

आगे की कहानी में हम रहबाम के बारे में पढ़ते हैं, जो यहूदा का राजा बना। उसके राज्य में भी लोगों ने मूरतें बनाईं और बुरे काम किए। इसलिए मिस्र का राजा आकर मंदिर की अनमोल चीजें ले गया। रहबाम ने सोने की ढालों की जगह पीतल की ढालें बनवाईं, पर वह सोने जैसी चमकदार नहीं थीं। जब हम परमेश्वर से दूर हटते हैं, तो जो कुछ बचता है वह असली चीज की नकल मात्र रह जाता है।

समान सूत्र

इस अध्याय में एक बात चमकती है। अहिय्याह ने कहा कि यारोबाम के परिवार में एक ही व्यक्ति को ठीक से दफनाया जाएगा, वह बीमार बालक, क्योंकि उसमें कुछ भलाई पाई गई। परमेश्वर हर हाल में भलाई खोजते हैं, चाहे परिस्थिति कितनी भी अंधेरी क्यों न हो।

परमेश्वर ने पहले दाऊद से वादा किया था कि उसका घराना बना रहेगा। यही वादा आगे चलकर यीशु मसीह तक पहुँचता है। जहाँ राजा असफल होते हैं, वहाँ परमेश्वर अपना वादा नहीं तोड़ते। वे अंततः एक ऐसे राजा को भेजते हैं जो पूरी तरह भरोसेमंद है।

तुम्हारे लिए

क्या तुम कभी सोचते हो कि परमेश्वर से कुछ छिपाया जा सकता है? यारोबाम की पत्नी ने भेष बदला, पर परमेश्वर ने उसे तुरंत पहचान लिया। परमेश्वर तुम्हारे बारे में भी सब जानते हैं, तुम्हारी खुशी, तुम्हारा डर, तुम्हारी गलतियाँ। यह डरने की बात नहीं, बल्कि यह जानने की बात है कि परमेश्वर तुमसे सच्चाई चाहते हैं। जब तुमसे कुछ गलत हो जाए, तो छिपने की जगह परमेश्वर के सामने सच बोलो।

बात करें

क्या तुम्हें लगता है कि अहिय्याह ने रानी को पहचान कैसे लिया, जबकि वे देख नहीं सकते थे?

यारोबाम ने मूरतें बनाईं क्योंकि वह परमेश्वर के बजाय कुछ और भरोसा करना चाहता था। क्या तुम्हारे जीवन में कोई ऐसी चीज है जिस पर तुम परमेश्वर से ज्यादा भरोसा करते हो?

साथ में प्रार्थना

हे प्रभु परमेश्वर, आप सब कुछ जानते हैं, हमारा डर, हमारी खुशी, हमारी गलतियाँ भी। हमें सिखाइए कि हम आपसे कभी न छिपें, बल्कि सच्चाई से आपके सामने आएं। हमें अपने पूरे मन से आपके पीछे चलने की शक्ति दीजिए। आमीन।

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1 राजाओं 14 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 राजाओं 14 किस विषय में है?
राजा यारोबाम का बेटा अबिय्याह बहुत बीमार पड़ गया। यारोबाम डर गया। उसने अपनी पत्नी से कहा, "भेष बदल लो, ताकि कोई तुम्हें पहचान न सके। शीलो जाओ, वहाँ अहिय्याह नबी रहते हैं। वे बता देंगे कि लड़के का क्या होगा।" रानी ने दस रोटी, कुछ टिकियाँ और शहद की कुप्पी ली, और चल पड़ी।
1 राजाओं 14 क्या कहता है?
फिर अहिय्याह ने कठोर बात कही। परमेश्वर ने कहा था, "मैंने यारोबाम को राजा बनाया, पर उसने मेरी बात नहीं मानी। उसने मूरतें बनाईं और मुझे क्रोधित किया।" इसलिए परमेश्वर ने कहा कि यारोबाम के घराने पर विपत्ति आएगी। और यह भी कहा गया, "जैसे ही तुम्हारे पाँव नगर में पड़ेंगे, बालक मर जाएगा।"
1 राजाओं 14 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह कहानी सुनने में कठोर लगती है। पर यह हमें एक बड़ी सच्चाई दिखाती है। परमेश्वर जो कहते हैं, वह होकर रहता है। यारोबाम ने सोचा कि वह छिपकर, भेष बदलकर परमेश्वर से बच सकता है। पर परमेश्वर सब कुछ जानते हैं, यहाँ तक कि किसी के पाँवों की आहट भी। अहिय्याह की आँखें अंधी थीं, पर परमेश्वर की आँखें कभी अंधी नहीं होतीं।
बच्चे 1 राजाओं 14 से क्या सीख सकते हैं?
इस अध्याय में एक बात चमकती है। अहिय्याह ने कहा कि यारोबाम के परिवार में एक ही व्यक्ति को ठीक से दफनाया जाएगा, वह बीमार बालक, क्योंकि उसमें कुछ भलाई पाई गई। परमेश्वर हर हाल में भलाई खोजते हैं, चाहे परिस्थिति कितनी भी अंधेरी क्यों न हो।
1 राजाओं 14 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम कभी सोचते हो कि परमेश्वर से कुछ छिपाया जा सकता है? यारोबाम की पत्नी ने भेष बदला, पर परमेश्वर ने उसे तुरंत पहचान लिया। परमेश्वर तुम्हारे बारे में भी सब जानते हैं, तुम्हारी खुशी, तुम्हारा डर, तुम्हारी गलतियाँ। यह डरने की बात नहीं, बल्कि यह जानने की बात है कि परमेश्वर तुमसे सच्चाई चाहते हैं। जब तुमसे कुछ गलत हो जाए, तो छिपने की जगह परमेश्वर के सामने सच बोलो।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

यारोबाम ने अपनी गद्दी बचाने के लिए सब कुछ किया, मूर्तियाँ गढ़ीं, वेदियाँ बनाईं। पर जो उसने अपने घर के लिए छोड़ा, वह यह था: "यारोबाम के घर में से जो कोई नगर में मरे, उसको कुत्ते खाएँगे।" उसने राज्य बनाया और परिवार खो दिया। सोच, तेरी आज की जिद तेरे बच्चों को क्या विरासत में दे रही है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

और यारोबाम के उन पापों के कारण जो उसने किए और इस्राएल से भी कराए, यहोवा इस्राएल को त्याग देगा।" यारोबाम का नाम इतिहास में इसी वाक्य से चिपका रह गया, "जिसने इस्राएल से पाप कराया।" उसका पाप अकेले उसका नहीं रहा, वह पूरी पीढ़ी की आदत बन गया। सोचो, तुम्हारे घर में कौन तुम्हारे कदमों पर चल रहा है? जो समझौता तुम छोटा समझकर कर रहे हो, वह किसी और के लिए रास्ता बन सकता है।

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

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