7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

2 पतरस 1

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

पतरस यह चिट्ठी लिख रहा है। वह यीशु का शिष्य था, वही मछुआरा जो कभी डर के मारे यीशु को नहीं जानने का दावा कर बैठा था। अब वह बूढ़ा हो चुका है और जानता है कि उसकी मौत जल्दी आने वाली है। इसलिए वह जल्दी में है। वह चाहता है कि विश्वासी लोग कुछ ज़रूरी बातें कभी न भूलें।

पहले वह कहता है कि परमेश्वर ने हमें एक "बहुमूल्य विश्वास" दिया है। यानी विश्वास कोई ऐसी चीज़ नहीं जो हम खुद बनाते हैं। यह एक तोहफ़ा है, जैसे किसी बहुत महँगे पत्थर की तरह। और यह तोहफ़ा सबके लिए एक जैसा है, चाहे तुम बड़े हो या छोटे, अमीर हो या गरीब।

फिर पतरस एक सीढ़ी जैसी चीज़ बनाता है। विश्वास पर सद्गुण रखो, सद्गुण पर समझ, समझ पर संयम (यानी खुद पर काबू रखना), संयम पर धीरज, धीरज पर भक्ति, भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और उस पर प्रेम। एक के ऊपर एक, धीरे-धीरे बढ़ते जाओ। पतरस कहता है कि जिसमें ये चीज़ें नहीं, वह "अंधा" है, वह भूल गया है कि यीशु ने उसके पापों को धोया है।

फिर पतरस एक खास याद बताता है। एक बार वह, याकूब और यूहन्ना यीशु के साथ एक ऊँचे पहाड़ पर थे। वहाँ अचानक यीशु का चेहरा और कपड़े चमकने लगे, और स्वर्ग से एक आवाज़ आई, "यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं प्रसन्न हूँ।" पतरस कहता है, "हमने खुद अपनी आँखों से यह देखा। यह कोई गढ़ी हुई कहानी नहीं है।"

अंत में वह बाइबल के बारे में एक सुंदर बात कहता है। परमेश्वर के वचन एक दीये की तरह हैं जो अँधेरी जगह में जलता है, जब तक सुबह न हो जाए। और बाइबल की बातें किसी इंसान ने अपने मन से नहीं बनाईं, बल्कि पवित्र आत्मा ने भक्तों को उभारा और उन्होंने परमेश्वर की ओर से बोला।

What Does This Mean?

पतरस चाहता है कि हम समझें कि विश्वास कोई एक जगह रुकी हुई चीज़ नहीं है। यह बढ़ता है। जैसे तुम हर साल थोड़े लंबे होते हो, वैसे ही विश्वास भी बड़ा होता जाता है। और यह बढ़ने के लिए मेहनत भी लगती है। पतरस बार-बार कहता है, "यत्न करो।" यानी कोशिश करते रहो।

पर ध्यान दो: पहले परमेश्वर देते हैं, फिर हम बढ़ते हैं। परमेश्वर ने पहले ही "सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बंध रखता है" हमें दे दिया है। हम खाली हाथ से शुरू नहीं करते।

The Common Thread

पूरी बाइबल में परमेश्वर वादे करते हैं और उन्हें पूरे करते हैं। पतरस इन वादों को "बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएँ" कहता है। सबसे बड़ा वादा यीशु मसीह खुद हैं।

पहाड़ पर पतरस ने जो देखा, वह इसका सबूत है। यीशु सचमुच परमेश्वर के पुत्र हैं। और सब भविष्यद्वक्ता, जिन्होंने पुराने नियम में लिखा, वे सब उसी की ओर इशारा कर रहे थे। पतरस कहता है कि यीशु "भोर का तारा" हैं, वह तारा जो सुबह होने से पहले चमकता है। एक दिन वे फिर आएँगे, और तब पूरी सुबह हो जाएगी।

For You

तुम शायद सोचते हो, "मैं तो अभी बच्चा हूँ, मेरा विश्वास इतना बड़ा नहीं है।" पर पतरस कहेगा, "कोई बात नहीं। सीढ़ी पर पहला कदम रखो।"

आज तुम एक चीज़ चुन सकते हो। शायद संयम, यानी खुद पर काबू। जब गुस्सा आए, गिनती करो। जब झूठ बोलने का मन हो, रुक जाओ। या शायद धीरज, जब चीज़ें तुम्हारी मर्ज़ी से नहीं होतीं। या भाईचारे की प्रीति, अपने भाई-बहन या स्कूल के दोस्त के साथ।

और जब बाइबल पढ़ना बोरिंग लगे, तो याद रखो: यह एक दीया है। अभी अँधेरा है, पर यह दीया तुम्हें रास्ता दिखा रहा है जब तक कि यीशु खुद न आ जाएँ।

Talk About It

पतरस ने विश्वास की एक सीढ़ी बनाई। तुम्हें लगता है तुम अभी किस पायदान पर हो, और अगला कदम क्या हो सकता है?

पतरस कहता है कि उसने यीशु की महिमा अपनी आँखों से देखी। अगर तुम्हें कोई कहे "यीशु की कहानियाँ बस कहानियाँ हैं," तो तुम क्या जवाब दोगे?

Praying Together

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आपने हमें बहुमूल्य विश्वास दिया है, बिना हमारे कमाए। हमें बढ़ने में मदद कीजिए, एक कदम, फिर एक और कदम। हमारे दिलों में यीशु को भोर के तारे की तरह चमकने दीजिए। आमीन।

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2 पतरस 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 पतरस 1 किस विषय में है?
पतरस यह चिट्ठी लिख रहा है। वह यीशु का शिष्य था, वही मछुआरा जो कभी डर के मारे यीशु को नहीं जानने का दावा कर बैठा था। अब वह बूढ़ा हो चुका है और जानता है कि उसकी मौत जल्दी आने वाली है। इसलिए वह जल्दी में है। वह चाहता है कि विश्वासी लोग कुछ ज़रूरी बातें कभी न भूलें।
2 पतरस 1 क्या कहता है?
फिर पतरस एक खास याद बताता है। एक बार वह, याकूब और यूहन्ना यीशु के साथ एक ऊँचे पहाड़ पर थे। वहाँ अचानक यीशु का चेहरा और कपड़े चमकने लगे, और स्वर्ग से एक आवाज़ आई, "यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं प्रसन्न हूँ।" पतरस कहता है, "हमने खुद अपनी आँखों से यह देखा। यह कोई गढ़ी हुई कहानी नहीं है।"
2 पतरस 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पर ध्यान दो: पहले परमेश्वर देते हैं, फिर हम बढ़ते हैं। परमेश्वर ने पहले ही "सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बंध रखता है" हमें दे दिया है। हम खाली हाथ से शुरू नहीं करते।
बच्चे 2 पतरस 1 से क्या सीख सकते हैं?
तुम शायद सोचते हो, "मैं तो अभी बच्चा हूँ, मेरा विश्वास इतना बड़ा नहीं है।" पर पतरस कहेगा, "कोई बात नहीं। सीढ़ी पर पहला कदम रखो।"
2 पतरस 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
पतरस ने विश्वास की एक सीढ़ी बनाई। तुम्हें लगता है तुम अभी किस पायदान पर हो, और अगला कदम क्या हो सकता है?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

पतरस यीशु के साथ चला, पानी पर कदम रखा, तीन बार इनकार करके भी बहाल हुआ। फिर भी वह लिखता है कि तुम्हें "हमारे विश्वास के समान बहुमूल्य विश्वास प्राप्त" हुआ है। समान। तुम्हारा विश्वास किसी प्रेरित से छोटा नहीं। और ध्यान दो, वह प्राप्त हुआ, कमाया नहीं गया। जो पीछे की पंक्ति में चुपचाप बैठकर प्रार्थना करता है, उसके हाथ में भी वही खजाना है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

पतरस जानता था कि उसके पाठक सच्चाई जानते हैं, फिर भी लिखता है, "इसलिए मैं तुम्हें ये बातें सदा स्मरण दिलाने को तैयार रहूँगा, यद्यपि तुम उन्हें जानते हो।" प्रेम इसी तरह बोलता है, बार बार, वही बात। हम अक्सर सोचते हैं कि हमें कुछ नया चाहिए। पर शायद तुम्हें आज नई बात नहीं, वही पुरानी सच्चाई फिर से सुननी है, जब तक वह दिल में बैठ न जाए।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति।" ध्यान दो, समझ अपने आप में रुक नहीं सकती। जो तुम जानते हो, अगर वह तुम्हारी जीभ और गुस्से पर लगाम न लगाए, तो वह सिर्फ जानकारी है। और संयम अकेला थका देता है, इसलिए उस पर धीरज चढ़ता है, और धीरज अंत में परमेश्वर की ओर मोड़ देता है। आज तुम्हारी कौन सी कड़ी कमजोर पड़ी है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

पतरस जानता था कि उसका समय थोड़ा है। फिर भी लिखता है, "और मैं यह उचित समझता हूँ कि जब तक मैं इस डेरे में हूँ, तब तक तुम्हें सुधि दिलाकर उत्तेजित करता रहूँ।" डेरा, यानी तम्बू। कभी न कभी उखड़ जाने वाला। अपने अंतिम दिनों में उसने अपने बारे में नहीं, तुम्हारे बारे में सोचा। जो बातें तुम पहले से जानते हो, वही याद दिलाईं। सच को दोहराना बेकार नहीं होता। भूलना हमारी सबसे बड़ी कमज़ोरी है।

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हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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