6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

प्रेरितों के काम 2

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

समझाव

यरूशलेम शहर में एक बड़ा दिन आया, जिसका नाम पिन्तेकुस्त था। यीशु के चेले एक घर में इकट्ठे बैठे थे। अचानक आकाश से एक आवाज़ आई, जैसे तेज़ आँधी चल रही हो। पूरा घर उस आवाज़ से गूँज उठा। फिर कुछ अजीब हुआ, आग जैसी जीभें दिखाई दीं, और वे हर चेले के सिर पर आ ठहरीं। क्या तुम सोच सकते हो, कैसा लगा होगा जब आग तुम्हारे सिर के पास उतरती दिखे? डरावना भी, और अचम्भित करने वाला भी।

फिर पवित्र आत्मा उन सबमें भर गए, और वे अलग अलग भाषाओं में बोलने लगे, भाषाएँ जो उन्होंने कभी सीखी ही नहीं थीं। बाहर गली में बहुत से लोग थे, दूर दूर देशों से आए हुए यहूदी। जब उन्होंने यह सुना, तो भीड़ लग गई। हर कोई चकित था, क्योंकि हर एक अपनी ही भाषा में परमेश्वर के बड़े कामों की बात सुन रहा था। कुछ लोगों ने हँसी उड़ाई और कहा, "ये तो नई मदिरा पीकर मस्त हैं।"

तब पतरस खड़ा हुआ। वही पतरस, जो कुछ दिन पहले डर के मारे यीशु को जानने से इनकार कर चुका था। अब वह ऊँची आवाज़ में बोला, "ये नशे में नहीं हैं, अभी तो दिन का तीसरा पहर ही है।" उसने समझाया कि यह तो वही बात है जो भविष्यद्वक्ता योएल ने पहले ही कही थी, कि परमेश्वर अपना आत्मा सब लोगों पर उण्डेल देंगे।

फिर पतरस ने सीधी बात कही, यीशु के बारे में। उसने कहा, उसी यीशु को तुमने क्रूस पर चढ़वा दिया, पर परमेश्वर ने उसे मृत्यु से जिलाया, क्योंकि मृत्यु उसे पकड़ नहीं सकती थी। पतरस ने यह भी कहा कि परमेश्वर ने उसी यीशु को प्रभु भी ठहराया और मसीह भी।

यह सुनकर लोगों के हृदय छिद गए, मानो किसी ने तीर मार दिया हो। उन्होंने पूछा, "हम क्या करें?" पतरस ने कहा, मन फिराओ, और यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लो, तब तुम्हें पापों की क्षमा और पवित्र आत्मा मिलेगा।

इसका क्या अर्थ है

उस दिन तीन हज़ार लोगों ने पतरस की बात मानी और बपतिस्मा लिया। एक डरपोक मछुआरा बोला, और इतने लोगों का दिल बदल गया। यह पतरस की ताक़त नहीं थी, यह पवित्र आत्मा का काम था। परमेश्वर ने दिखाया कि वे दूर दूर के लोगों तक अपनी बात पहुँचा सकते हैं, चाहे वे कोई भी भाषा बोलते हों।

एक ही कहानी की कड़ी

यह सब यीशु के बारे में है। दाऊद ने पहले ही लिखा था कि मसीह की देह सड़ने नहीं पाएगी, और वह जी उठेगा। यही यीशु के साथ हुआ। परमेश्वर ने अपनी पुरानी प्रतिज्ञा निभाई, पहले भविष्यद्वक्ताओं से, फिर दाऊद से, और अब यीशु में पूरी हुई। पवित्र आत्मा का आना भी वही प्रतिज्ञा थी, जो अब सारे विश्वासियों को दी गई।

तुम्हारे लिए

बपतिस्मा लेनेवाले लोग मिलकर रहने लगे, साथ खाना खाते, प्रार्थना करते और एक दूसरे की मदद करते थे। तुम भी यह कर सकते हो। जब किसी दोस्त के पास कम हो, तो अपना कुछ बाँट दो। जब तुम्हारा मन उदास हो, तो परमेश्वर से बात करो, जैसे वे चेले करते थे। और यीशु के बारे में जो सुना है, वह दूसरों को भी बताओ, जैसे पतरस ने बताया।

बात करें

अगर तुम वहाँ खड़े होते और आग जैसी जीभें देखते, तो तुम्हें कैसा लगता?

पतरस ने डर छोड़कर सच बात कही। किसी से यीशु के बारे में बताना तुम्हें कब मुश्किल लगता है?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, आपने चेलों को पवित्र आत्मा दिया, और वे साहसी बन गए। हमें भी साहस दीजिए कि हम यीशु के बारे में बताएँ। हमारी मदद कीजिए कि हम एक दूसरे के साथ बाँटकर रहें, जैसे पहले विश्वासी रहते थे। आमीन।

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प्रेरितों के काम 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

प्रेरितों के काम 2 किस विषय में है?
यरूशलेम शहर में एक बड़ा दिन आया, जिसका नाम पिन्तेकुस्त था। यीशु के चेले एक घर में इकट्ठे बैठे थे। अचानक आकाश से एक आवाज़ आई, जैसे तेज़ आँधी चल रही हो। पूरा घर उस आवाज़ से गूँज उठा। फिर कुछ अजीब हुआ, आग जैसी जीभें दिखाई दीं, और वे हर चेले के सिर पर आ ठहरीं। क्या तुम सोच सकते हो, कैसा लगा होगा जब आग तुम्हारे सिर के पास उतरती दिखे?
प्रेरितों के काम 2 क्या कहता है?
तब पतरस खड़ा हुआ। वही पतरस, जो कुछ दिन पहले डर के मारे यीशु को जानने से इनकार कर चुका था। अब वह ऊँची आवाज़ में बोला, "ये नशे में नहीं हैं, अभी तो दिन का तीसरा पहर ही है।" उसने समझाया कि यह तो वही बात है जो भविष्यद्वक्ता योएल ने पहले ही कही थी, कि परमेश्वर अपना आत्मा सब लोगों पर उण्डेल देंगे।
प्रेरितों के काम 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह सुनकर लोगों के हृदय छिद गए, मानो किसी ने तीर मार दिया हो। उन्होंने पूछा, "हम क्या करें?" पतरस ने कहा, मन फिराओ, और यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा लो, तब तुम्हें पापों की क्षमा और पवित्र आत्मा मिलेगा।
बच्चे प्रेरितों के काम 2 से क्या सीख सकते हैं?
यह सब यीशु के बारे में है। दाऊद ने पहले ही लिखा था कि मसीह की देह सड़ने नहीं पाएगी, और वह जी उठेगा। यही यीशु के साथ हुआ। परमेश्वर ने अपनी पुरानी प्रतिज्ञा निभाई, पहले भविष्यद्वक्ताओं से, फिर दाऊद से, और अब यीशु में पूरी हुई। पवित्र आत्मा का आना भी वही प्रतिज्ञा थी, जो अब सारे विश्वासियों को दी गई।
प्रेरितों के काम 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर तुम वहाँ खड़े होते और आग जैसी जीभें देखते, तो तुम्हें कैसा लगता?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

पिन्तेकुस्त के दिन भीड़ के पास कोई तैयार जवाब नहीं था। वे बस चकित और घबराए हुए खड़े थे और पूछ रहे थे, "इसका क्या अर्थ है?" और यही सवाल पतरस के उपदेश का दरवाज़ा बना। परमेश्वर तुम्हारे उलझे हुए सवालों से नहीं डरता। जो मज़ाक उड़ाकर चले गए, वे चूक गए। जो ठहरकर पूछते रहे, उन्होंने उसी दिन मसीह को पाया। तुम्हारा सवाल कहाँ ले जा रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

जब वह शब्द हुआ तो भीड़ लग गई और लोग घबरा गए, क्योंकि हर एक को यही सुनाई देता था कि ये मेरी ही भाषा में बोल रहे हैं।"

ध्यान दो, परमेश्वर ने यह नहीं कहा कि पहले कोई पवित्र भाषा सीखो, फिर मेरी बात समझोगे। वह खुद हर एक की मातृभाषा तक उतर आया। जिस भाषा में तुम रोते हो, जिसमें माँ ने तुम्हें पुकारा था, उसी में वह तुमसे बात करना चाहता है। क्या तुम उसे अपनी असली भाषा में जवाब दोगे?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 32

इसी यीशु को परमेश्वर ने जिलाया, जिसके हम सब गवाह हैं।" पतरस ने कोई तर्क नहीं दिया, बस अपनी आँखों देखी बात कही। जिस आदमी ने डर के मारे यीशु को नकारा था, वही अब भीड़ के सामने खड़ा है। गवाह होने के लिए तुम्हें विद्वान नहीं होना है, सिर्फ यह जानना है कि जी उठे यीशु ने तुम्हारे जीवन में क्या किया। वह कहानी तुम किसे सुनाओगे?

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