7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

एज्रा 5

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एज्रा की किताब में हम यहूदियों के एक बड़े समूह को देखते हैं जो बाबेल की कैद से लौटकर यरूशलेम में परमेश्वर का भवन, यानी मन्दिर, फिर से बनाना चाहते हैं। लेकिन काम रुक गया था। अब, अध्याय पाँच में, कुछ नया होता है। हाग्गै और जकर्याह नाम के दो भविष्यद्वक्ता खड़े होते हैं। भविष्यद्वक्ता वह व्यक्ति है जिसे परमेश्वर कुछ कहने के लिए चुनता है, ताकि लोग फिर से हिम्मत पाएँ। उनकी बातों से जरुब्बाबेल और येशुअ नाम के दो अगुवे कमर बाँधकर काम में जुट जाते हैं। "कमर बाँधना" का मतलब है, पूरी ताकत और ध्यान से कुछ शुरू करना, जैसे कोई दौड़ने से पहले अपने कपड़े कसकर बाँध लेता है।

पर जैसे ही काम शुरू होता है, अधिकारी आ जाते हैं। तत्तनै नाम का एक बड़ा अधिकारी पूछता है, "किसने तुम्हें यह बनाने की आज्ञा दी?" यह सवाल डराने के लिए नहीं बल्कि जांचने के लिए पूछा गया लगता है। यहूदी जवाब देते हैं कि वे आकाश और पृथ्वी के परमेश्वर के सेवक हैं, और यह वही भवन है जो पहले एक इस्राएली राजा ने बनाया था। वे पूरी कहानी बताते हैं, कि कैसे उनके पुरखाओं ने परमेश्वर को रिस दिलाई, कैसे नबूकदनेस्सर ने मन्दिर गिराया, लेकिन फिर राजा कुस्रू ने खुद आज्ञा दी कि मन्दिर फिर से बने।

सबसे सुंदर बात यह है कि अधिकारी तुरंत काम नहीं रोकते। पद पाँच कहता है कि "यहूदियों के पुरनियों के परमेश्वर की दृष्टि उन पर रही।" इसलिए काम चलता रहा जब तक राजा दारा से उत्तर नहीं आया।

इसका अर्थ क्या है?

यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर का काम कभी इंसानों की ताकत से शुरू नहीं होता, बल्कि उनके बोलने से शुरू होता है। हाग्गै और जकर्याह ने कुछ नहीं बनाया, उन्होंने सिर्फ बात की, परमेश्वर के नाम से बोले, और इससे लोगों में फिर से उमंग जागी। कभी-कभी सबसे बड़ा बदलाव किसी के साहसी शब्दों से शुरू होता है।

दूसरी बात, जरुब्बाबेल और येशुअ को काम शुरू करने के लिए पहले से सब कुछ पक्का नहीं पता था। उन्हें नहीं मालूम था कि अधिकारी क्या कहेंगे, राजा क्या फैसला करेगा। फिर भी उन्होंने कदम उठाया। यह विश्वास जैसा लगता है, यह मानना कि परमेश्वर रास्ता खोलेंगे, भले ही अभी सब साफ न हो।

और वह पंक्ति, "परमेश्वर की दृष्टि उन पर रही", बहुत गहरी है। इसका मतलब यह नहीं कि कोई मुश्किल नहीं आई, तत्तनै फिर भी आया और सवाल पूछे। पर परमेश्वर ने उन्हें पूरी तरह रुकने नहीं दिया।

कड़ी की बात

बहुत पहले परमेश्वर ने अपने लोगों से एक वाचा बाँधी थी, यानी एक पक्का वादा, कि वे उनके लोग रहेंगे और वे उनके परमेश्वर रहेंगे। मन्दिर इसी वाचा का निशान था, वह जगह जहाँ परमेश्वर अपने लोगों के बीच रहते थे। जब मन्दिर गिरा था, तो लगा जैसे वह वादा टूट गया। पर अब मन्दिर फिर से बन रहा है, यह दिखाता है कि परमेश्वर का वादा खत्म नहीं हुआ था। बहुत बाद में, यीशु मसीह आए और कहा कि उनका शरीर ही असली मन्दिर है, जहाँ परमेश्वर और इंसान मिलते हैं। एज्रा की कहानी उस बड़ी कहानी का एक हिस्सा है, जहाँ परमेश्वर बार-बार अपने लोगों के पास लौटने का रास्ता बनाते हैं।

तुम्हारे लिए

शायद तुम्हें भी कभी लगता हो कि कुछ शुरू करना मुश्किल है क्योंकि तुम्हें नहीं पता आगे क्या होगा, जैसे कोई नया काम, कोई मुश्किल बातचीत, कोई सही फैसला। जरुब्बाबेल को भी पूरा रास्ता साफ नहीं दिखा था, फिर भी उसने कमर बाँधी। तुम भी आज किसी छोटे काम में, जो सही है, पहला कदम उठा सकते हो, भले ही सब सवालों का जवाब अभी न हो। और शायद तुम किसी दोस्त के लिए हाग्गै जैसे बन सको, कोई जो हिम्मत के शब्द कहता है जब दूसरा हार मानने लगे।

बातचीत के लिए

तुम्हें क्या लगता है, जरुब्बाबेल को डर नहीं लगा होगा जब तत्तनै ने सवाल पूछे? वह फिर भी काम में क्यों लगा रहा?

परमेश्वर की "दृष्टि" किसी पर रहना, इसका क्या मतलब हो सकता है तुम्हारी अपनी जिंदगी में?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, आप आकाश और पृथ्वी के मालिक हैं, फिर भी आप अपने लोगों की तरफ देखते हैं। जब हमें डर लगे कि कोई हमसे कठिन सवाल पूछेगा, तब हमें वैसा ही साहस दीजिए जैसा उन यहूदियों में था। हमें सिखाइए कि आप पर भरोसा करते हुए पहला कदम उठाना कैसा लगता है। आपका नाम महान है। आमीन।

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एज्रा 5 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

एज्रा 5 किस विषय में है?
एज्रा की किताब में हम यहूदियों के एक बड़े समूह को देखते हैं जो बाबेल की कैद से लौटकर यरूशलेम में परमेश्वर का भवन, यानी मन्दिर, फिर से बनाना चाहते हैं। लेकिन काम रुक गया था। अब, अध्याय पाँच में, कुछ नया होता है। हाग्गै और जकर्याह नाम के दो भविष्यद्वक्ता खड़े होते हैं। भविष्यद्वक्ता वह व्यक्ति है जिसे परमेश्वर कुछ कहने के लिए चुनता है, ताकि लोग फिर से हिम्मत पाएँ। उनकी बातों से जरुब्बाबेल और येशुअ नाम के दो अगुवे कमर बाँधकर काम में जुट जाते हैं। "कमर बाँधना" का मतलब है, पूरी ताकत और ध्यान से कुछ शुरू करना, जैसे कोई दौड़ने से पहले अपने कपड़े कसकर बाँध लेता है।
एज्रा 5 क्या कहता है?
सबसे सुंदर बात यह है कि अधिकारी तुरंत काम नहीं रोकते। पद पाँच कहता है कि "यहूदियों के पुरनियों के परमेश्वर की दृष्टि उन पर रही।" इसलिए काम चलता रहा जब तक राजा दारा से उत्तर नहीं आया।
एज्रा 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
दूसरी बात, जरुब्बाबेल और येशुअ को काम शुरू करने के लिए पहले से सब कुछ पक्का नहीं पता था। उन्हें नहीं मालूम था कि अधिकारी क्या कहेंगे, राजा क्या फैसला करेगा। फिर भी उन्होंने कदम उठाया। यह विश्वास जैसा लगता है, यह मानना कि परमेश्वर रास्ता खोलेंगे, भले ही अभी सब साफ न हो।
बच्चे एज्रा 5 से क्या सीख सकते हैं?
बहुत पहले परमेश्वर ने अपने लोगों से एक वाचा बाँधी थी, यानी एक पक्का वादा, कि वे उनके लोग रहेंगे और वे उनके परमेश्वर रहेंगे। मन्दिर इसी वाचा का निशान था, वह जगह जहाँ परमेश्वर अपने लोगों के बीच रहते थे। जब मन्दिर गिरा था, तो लगा जैसे वह वादा टूट गया। पर अब मन्दिर फिर से बन रहा है, यह दिखाता है कि परमेश्वर का वादा खत्म नहीं हुआ था। बहुत बाद में, यीशु मसीह आए और कहा कि उनका शरीर ही असली मन्दिर है, जहाँ परमेश्वर और इंसान मिलते हैं। एज्रा की कहानी उस बड़ी कहानी का एक हिस्सा है, जहाँ परमेश्वर बार-बार अपने लोगों के पास लौटने का रास्ता बनाते हैं।
एज्रा 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम्हें क्या लगता है, जरुब्बाबेल को डर नहीं लगा होगा जब तत्तनै ने सवाल पूछे? वह फिर भी काम में क्यों लगा रहा?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

सोलह साल से मंदिर का काम बंद पड़ा था। पत्थर वहीं पड़े थे, नींव खुली थी, और लोग अपने-अपने घरों में लगे थे। फिर परमेश्वर ने क्या भेजा? सेना नहीं, पैसा नहीं, बस दो नबी: "तब हाग्गै नबी और इद्दो के पोते जकर्याह नबी ने भविष्यद्वाणी की।" कभी-कभी तेरे रुके हुए काम को शुरू करने के लिए एक ही चीज़ चाहिए, परमेश्वर का वचन। तेरी कौन सी अधूरी नींव आज तुझे बुला रही है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

तुम्हारे बारे में भी कभी कोई चिट्ठी लिखी जा सकती है, तुम्हारी नीयत पर सवाल उठाया जा सकता है। यहाँ पूरी शिकायत लिखी जा रही थी, और मन्दिर का काम रुका नहीं। परमेश्वर की दृष्टि उन बुज़ुर्गों पर बनी रही। जो पत्र उन्हें रोकने के लिए लिखा गया, उसी से राजा की मंज़ूरी निकल आई। तू भी काम करता रह।

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हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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