गलातियों 2
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
पौलुस बरनबास के साथ यरूशलेम शहर गया। तीतुस भी उनके साथ था। तीतुस यूनानी था, यहूदी नहीं। कुछ लोग चोरी-छिपे कलीसिया में घुस आए थे, जैसे जासूस चुपचाप घुस आते हैं। वे चाहते थे कि तीतुस का खतना हो, यानी वह भी यहूदियों के पुराने नियम को माने। पौलुस डरा नहीं। उसने साफ मना कर दिया। उसने तीतुस को मजबूर नहीं होने दिया। क्यों? क्योंकि यीशु मसीह में मिली आज़ादी कोई छीन नहीं सकता।
यरूशलेम में याकूब, पतरस, जिसे कैफा भी कहा जाता था, और यूहन्ना ने पौलुस और बरनबास से हाथ मिलाया। उन्होंने कहा, तुम अन्यजातियों के पास जाओ, हम यहूदियों के पास जाएँगे। सुसमाचार की खुशखबरी एक ही रहेगी, सबके लिए एक जैसी।
पर फिर एक दिन कुछ अजीब हुआ। पतरस अन्ताकिया शहर में आया। वहाँ वह अन्यजातियों के साथ खुशी से एक ही मेज पर खाना खाता था। फिर याकूब की तरफ से कुछ लोग आए। पतरस डर गया। वह चुपचाप मेज से उठकर दूर हो गया। उसने अन्यजातियों के साथ खाना बंद कर दिया। बरनबास भी, पौलुस का पुराना साथी, इसी डर में फँस गया।
पौलुस ने यह देखा। उसका मन दुखी हुआ, क्योंकि यह सच्चाई नहीं थी, यह सिर्फ डर था। इसलिए पौलुस सबके सामने खड़ा हुआ। उसने पतरस से पूछा, जब तू यहूदी होकर अन्यजातियों जैसा जीता है, तो अन्यजातियों को यहूदियों जैसा जीने को क्यों कहता है? यह सवाल तेज तलवार जैसा था। सब चुप हो गए।
इसका क्या अर्थ है?
पौलुस ने समझाया, कोई भी व्यक्ति नियम मानकर परमेश्वर के सामने धर्मी नहीं ठहरता। धर्मी ठहरने का मतलब है, परमेश्वर की नज़र में सही होना। न पतरस, न पौलुस, न कोई और, अपने कामों से यह पा सकता था। सिर्फ यीशु मसीह पर विश्वास करने से यह मिलता है। पतरस यह जानता था, फिर भी डर के मारे गलत काम कर बैठा। क्या आप कभी सही जानते हुए भी डर से गलत कर बैठे हैं? पौलुस ने हिम्मत दिखाई और सच बोला, भले सबके सामने पतरस को टोकना कठिन था।
मुख्य धागा
पौलुस ने एक सुंदर बात कही, मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ, अब मैं नहीं, पर मसीह मुझमें जीवित है। यह वह प्रेम है, जिसने मुझसे प्रेम किया और मेरे लिये अपने आपको दे दिया। यही असली सुसमाचार है। यीशु मसीह ने खुद अपना जीवन दिया, ताकि हम बिना नियम गिने भी परमेश्वर के प्रिय बच्चे बन सकें। यह कोई इनाम नहीं है जो हम कमाते हैं, यह मुफ्त उपहार है, जो प्रेम से दिया गया है।
आपके लिए
कभी-कभी आप भी डर जाते हैं, जैसे पतरस डर गया था। शायद दोस्तों के सामने कुछ अलग करते हैं, और घर पर कुछ और। परमेश्वर चाहते हैं कि आप हर जगह एक जैसे रहें, चाहे कोई देख रहा हो या नहीं। आज जब कोई आपको डराए कि सही काम मत करो, याद रखिए, यीशु मसीह ने आपसे प्रेम किया, आपको बदलने की, या नियम गिनने की ज़रूरत नहीं। बस उन पर भरोसा कीजिए, और सच बोलने की हिम्मत माँगिए।
बातचीत करें
क्या आपने कभी सही जानते हुए भी डर से गलत काम किया? फिर क्या हुआ?
पौलुस ने हिम्मत से सच बोला। आप किसे सच बात कहने की हिम्मत माँगना चाहेंगे?
साथ में प्रार्थना करें
प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आपने हमसे प्रेम किया और अपने आपको हमारे लिए दे दिया। जब हम डर जाएँ, हमें हिम्मत दीजिए कि हम सच बोलें और सच पर टिके रहें। हमें याद दिलाइए कि हम आपके प्रेम से ही आपके प्रिय बच्चे हैं। आमीन।
गलातियों 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
गलातियों 2 किस विषय में है?
गलातियों 2 क्या कहता है?
गलातियों 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे गलातियों 2 से क्या सीख सकते हैं?
गलातियों 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
मसीह के पास आकर जब आपको अपने भीतर पहले से ज़्यादा गंदगी दिखने लगे, तो घबराइए मत। पौलुस कहता है, "क्या मसीह पाप का सेवक है? कदापि नहीं!" उजाला गंदगी पैदा नहीं करता, वह उसे दिखाता है। जो सच आज आपको शर्मिंदा कर रहा है, वही आपको चंगा करने आया है। क्या आप उस उजाले से मुँह मोड़ेंगे, या उसमें खड़े रहेंगे?
पौलुस यहाँ खुद को पतरस से बड़ा साबित नहीं कर रहा। वह बस एक बात दिखा रहा है: "जिसने पतरस से खतना किए हुए लोगों में प्रेरिताई का कार्य बड़े प्रभाव से कराया, उसी ने मुझसे भी अन्यजातियों में प्रभावशाली रीति से कार्य कराया।" वही परमेश्वर, अलग-अलग खेत। तेरा बुलावा किसी और जैसा नहीं दिखेगा, पर काम करनेवाला हाथ वही है। फिर तुलना क्यों?
यरूशलेम के खम्भे माने जाने वाले प्रेरितों ने पौलुस के सुसमाचार में कुछ जोड़ा नहीं, बस एक बात कही, "केवल यह कि हम कंगालों की सुधि लें।" सोचिए, इतनी बड़ी धर्मशास्त्रीय बहस के अंत में जो एक बात बची, वह गरीबों को याद रखना थी। जिस विश्वास में भूखे पड़ोसी के लिए जगह नहीं, वह कहीं अधूरा तो नहीं?
पौलुस को सुसमाचार सीधे प्रभु से मिला था, फिर भी उसने कहा, "कहीं ऐसा न हो कि मेरी दौड़-धूप व्यर्थ ठहरे।" जिसे परमेश्वर ने खुद बुलाया, वह भी अकेले नहीं दौड़ा। उसने अपनी सेवा दूसरों के सामने खोलकर रखी। तुम्हारी सेवा, तुम्हारे फैसले, क्या कोई ऐसा है जिसके सामने तुम उन्हें रख सको? अकेले दौड़ना बहादुरी नहीं, जोखिम है।
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