यशायाह 60
प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
कल्पना करो, एक शहर है जो बहुत अंधेरे में बैठा है। चारों ओर काली रात है, कोई रोशनी नहीं। लोग उदास हैं, डरे हुए हैं। यशायाह भविष्यवक्ता उस शहर से कहता है, "उठ, प्रकाशमान हो!" क्योंकि अचानक कुछ होता है, एक रोशनी आती है। यहोवा का तेज, यानी परमेश्वर की चमकीली महिमा, उस शहर पर उदय हो जाती है, जैसे सूरज पहाड़ी के पीछे से निकलता है।
बाकी दुनिया अब भी अंधेरे में है, पर इस शहर पर रोशनी चमक रही है। और फिर अजीब बात होती है। दूर-दूर के राजा और देशों के लोग इस रोशनी को देखकर चले आते हैं। ऊँटों के झुंड आते हैं, सोना और खुशबूदार लोबान लेकर। भेड़-बकरियों के झुंड आते हैं। जहाज चांदी-सोना लेकर आते हैं। यह देखकर शहर का दिल खुशी से उछल पड़ता है, उसका चेहरा चमक उठता है।
शहर के फाटक, यानी बड़े दरवाजे, अब कभी बंद नहीं होंगे। दिन-रात खुले रहेंगे, क्योंकि अब डर की कोई बात नहीं। जो लोग पहले इस शहर से नफरत करते थे, वे अब सिर झुकाकर आएँगे। और जो शहर कभी त्यागा हुआ, घृणित समझा जाता था, अब वह हमेशा के लिए गर्व और खुशी का कारण बनेगा।
इसका क्या मतलब है?
यह कहानी सिर्फ ऊँट और सोने की नहीं है। यह बताती है कि अंधेरा हमेशा नहीं रहता। परमेश्वर खुद रोशनी बनकर आते हैं। जो शहर अकेला और भुला हुआ महसूस करता था, उसे परमेश्वर कहते हैं, "अब तू अकेला नहीं रहेगा, सारी दुनिया तेरे पास आएगी।" यह एक वादा है कि दुख हमेशा के लिए नहीं टिकता। परमेश्वर अपने लोगों को भूलते नहीं, वे उन्हें ढूंढ निकालते हैं और उन पर अपनी रोशनी डालते हैं।
सिलसिला
यह रोशनी की कहानी यीशु मसीह तक जाती है। यूहन्ना अपनी किताब में लिखता है कि परमेश्वर का तेज हमारे बीच प्रगट हुआ, यीशु में। वे ही वह रोशनी हैं जो अंधेरे में चमकी। और यशायाह यहाँ कहते हैं कि एक दिन सूरज और चाँद की भी जरूरत नहीं रहेगी, क्योंकि यहोवा खुद हमेशा की रोशनी होंगे। प्रकाशितवाक्य की किताब में भी यही लिखा है, कि नए शहर में परमेश्वर खुद रोशनी होंगे, और उसके फाटक कभी बंद नहीं होंगे। यह शहर जिसकी बात यशायाह करता है, वह आखिरकार उस नए शहर की तस्वीर है, जहाँ यीशु मसीह राजा होंगे।
तुम्हारे लिए
कभी-कभी तुम्हारा दिल भी अंधेरे जैसा महसूस करता होगा। शायद डर लगता हो, या अकेलापन लगता हो। याद रखना, परमेश्वर कहते हैं, "उठ, प्रकाशमान हो!" वे तुम्हें अंधेरे में अकेला नहीं छोड़ते। जब तुम सुबह उठो और सूरज की रोशनी देखो, तो याद करो कि परमेश्वर की रोशनी उससे भी बड़ी है। तुम किसी दोस्त को बता सकते हो जो उदास है, "परमेश्वर तुम्हें भूले नहीं हैं।" यह छोटा सा काम, पर यह रोशनी फैलाने जैसा है।
आपस में बात करो
क्या तुमने कभी ऐसा महसूस किया जैसे तुम अंधेरे में अकेले हो? तब क्या हुआ?
यशायाह कहते हैं परमेश्वर की रोशनी कभी बुझती नहीं। इसका तुम्हारे लिए क्या मतलब है?
साथ में प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमारे अंधेरे में रोशनी लाते हैं। जब हम डरते हैं या अकेला महसूस करते हैं, हमें याद दिलाइए कि आप हमें भूले नहीं हैं। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
यशायाह 60 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
यशायाह 60 किस विषय में है?
यशायाह 60 क्या कहता है?
यशायाह 60 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे यशायाह 60 से क्या सीख सकते हैं?
यशायाह 60 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?
हमारे पास नन्हे बच्चों (3-5 वर्ष) और किशोरों (13 वर्ष और उससे ऊपर) के लिए अलग संस्करण भी हैं।
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