7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यशायाह 9

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यशायाह अध्याय 9 एक अजीब किताब जैसा है, जिसमें एक पन्ने पर अंधकार है और अगले पन्ने पर रोशनी। शुरुआत में कहा गया है कि जो लोग अंधियारे में चल रहे थे, उन्होंने बड़ा उजियाला देखा, और जो मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी। यह इस्राएल के लोगों के बारे में है, जो युद्ध, डर और शर्म से थके हुए थे। परमेश्वर कहते हैं कि यह अंधकार हमेशा नहीं रहेगा।

फिर आती हैं वे पंक्तियाँ जो शायद आपने क्रिसमस पर सुनी हों: "हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है।" इस बालक के पास बड़ी-बड़ी उपाधियाँ हैं, अद्भुत युक्ति करनेवाला पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार। उसका राज्य दाऊद के सिंहासन पर सदा के लिए टिका रहेगा, न्याय और धर्म के साथ।

पर उसके बाद यशायाह अचानक दूसरी तरफ मुड़ जाते हैं। वे इस्राएल के उत्तरी हिस्से, एप्रैम और सामरिया की बात करते हैं, जो घमंड से भरे हुए थे। उन्होंने कहा, "हमारी ईंटें टूट गईं तो क्या, हम और मजबूत पत्थरों से बनाएँगे।" वे अपने दम पर सब ठीक कर लेना चाहते थे, परमेश्वर की ओर फिरे बिना। इसलिए परमेश्वर ने उन्हें उनके दुश्मनों के हाथों में छोड़ दिया। अध्याय के अंत में एक डरावना चित्र है, लोग आपस में ही लड़ते हैं, भूखे रहते हैं, एक दूसरे पर दया नहीं करते। और चार बार एक ही पंक्ति दोहराई जाती है: "इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ, और उसका हाथ अब तक बढ़ा हुआ है।"

What Does This Mean?

यह अध्याय हमें ईमानदार होना सिखाता है। एक तरफ परमेश्वर की बड़ी प्रतिज्ञा है, एक राजा जो शांति लाएगा। दूसरी तरफ लोगों का घमंड और उसके भयानक नतीजे हैं। यशायाह दोनों को एक साथ रखता है, बिना यह दिखावा किए कि सब कुछ तुरंत ठीक हो गया।

क्यों परमेश्वर का क्रोध इतनी बार दोहराया गया है? शायद इसलिए कि यशायाह चाहते थे कि लोग समझें, परमेश्वर चुप नहीं बैठते जब उनके लोग घमंड में अपना रास्ता खुद बनाने की कोशिश करते हैं। एप्रैम के लोगों ने कहा "हम खुद बना लेंगे", मानो उन्हें परमेश्वर की जरूरत ही नहीं थी। यह एक चेतावनी है जो आज भी सच लगती है।

The Common Thread

वह बालक जिसकी बात आयत 6 में है, वही है जिसे हम यीशु मसीह के नाम से जानते हैं। लूका के सुसमाचार में एक स्वर्गदूत मरियम से कहता है कि उसका पुत्र दाऊद के सिंहासन पर सदा राज्य करेगा, ठीक वैसे ही जैसे यशायाह ने सदियों पहले लिखा था। यह एक प्रतिज्ञा थी जो इंतज़ार में रही, पीढ़ी दर पीढ़ी, तब तक जब तक बेतलेहेम में सच में एक बालक पैदा नहीं हुआ।

पर ध्यान दीजिए, यशायाह यह नहीं कहते कि राजा आते ही सब दुख गायब हो जाएगा। असल में इसी अध्याय में आगे दुख और युद्ध की बातें हैं। शायद इसका मतलब यह है कि परमेश्वर का राज्य धीरे-धीरे आता है, जैसे अंधकार में एक दीया जलता है, तुरंत पूरा सूरज नहीं निकलता। यीशु मसीह आए, पर दुनिया का सारा दुख अभी भी खत्म नहीं हुआ है। हम अब भी उस दिन का इंतज़ार कर रहे हैं जब उनकी शांति का राज्य पूरी तरह से आएगा।

For You

शायद आपने कभी सोचा हो कि अपनी समस्याएँ खुद सुलझा लेना बेहतर है, बिना किसी की मदद माँगे, यहाँ तक कि परमेश्वर की भी नहीं। एप्रैम के लोगों ने यही किया। उन्होंने कहा, "हमें किसी की जरूरत नहीं, हम खुद नया घर बना लेंगे।" पर असली ताकत घमंड में नहीं, परमेश्वर की ओर फिरने में है।

अगली बार जब आपसे कोई गलती हो जाए, स्कूल में, घर में, दोस्तों के साथ, एक पल रुकिए और सोचिए, क्या मैं यह खुद अपने दम पर ठीक करना चाहता हूँ, या मैं परमेश्वर से मदद माँगूँगा? वही बालक जिसका नाम शांति का राजकुमार है, आज भी आपकी बात सुनने को तैयार हैं।

Talk About It

क्या तुम्हें लगता है परमेश्वर का क्रोध और परमेश्वर का प्यार एक साथ रह सकते हैं? इस अध्याय में इसका क्या उदाहरण है?

अगर यीशु मसीह शांति के राजकुमार हैं, तो दुनिया में अब भी इतनी जंग और दुख क्यों है? इसका कोई आसान जवाब नहीं है, तुम क्या सोचते हो?

Praying Together

हे प्रभु, आप हमें अंधकार में भी उजियाला दिखाते हैं। धन्यवाद कि आपने हमें एक बालक दिया, शांति का राजकुमार, यीशु मसीह। हमें माफ़ कीजिए जब हम घमंड में अपने दम पर सब कुछ ठीक करने की कोशिश करते हैं। हमें सिखाइए कि हम आपकी ओर फिरें, और आपके राज्य का इंतज़ार धीरज से करें। आमीन।

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यशायाह 9 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यशायाह 9 किस विषय में है?
यशायाह अध्याय 9 एक अजीब किताब जैसा है, जिसमें एक पन्ने पर अंधकार है और अगले पन्ने पर रोशनी। शुरुआत में कहा गया है कि जो लोग अंधियारे में चल रहे थे, उन्होंने बड़ा उजियाला देखा, और जो मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी। यह इस्राएल के लोगों के बारे में है, जो युद्ध, डर और शर्म से थके हुए थे। परमेश्वर कहते हैं कि यह अंधकार हमेशा नहीं रहेगा।
यशायाह 9 क्या कहता है?
पर उसके बाद यशायाह अचानक दूसरी तरफ मुड़ जाते हैं। वे इस्राएल के उत्तरी हिस्से, एप्रैम और सामरिया की बात करते हैं, जो घमंड से भरे हुए थे। उन्होंने कहा, "हमारी ईंटें टूट गईं तो क्या, हम और मजबूत पत्थरों से बनाएँगे।" वे अपने दम पर सब ठीक कर लेना चाहते थे, परमेश्वर की ओर फिरे बिना। इसलिए परमेश्वर ने उन्हें उनके दुश्मनों के हाथों में छोड़ दिया। अध्याय के अंत में एक डरावना चित्र है, लोग आपस में ही लड़ते हैं, भूखे रहते हैं, एक दूसरे पर दया नहीं करते। और चार बार एक ही पंक्ति दोहराई जाती है: "इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ, और उसका हाथ अब तक बढ़ा हुआ है।"
यशायाह 9 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
क्यों परमेश्वर का क्रोध इतनी बार दोहराया गया है? शायद इसलिए कि यशायाह चाहते थे कि लोग समझें, परमेश्वर चुप नहीं बैठते जब उनके लोग घमंड में अपना रास्ता खुद बनाने की कोशिश करते हैं। एप्रैम के लोगों ने कहा "हम खुद बना लेंगे", मानो उन्हें परमेश्वर की जरूरत ही नहीं थी। यह एक चेतावनी है जो आज भी सच लगती है।
बच्चे यशायाह 9 से क्या सीख सकते हैं?
पर ध्यान दीजिए, यशायाह यह नहीं कहते कि राजा आते ही सब दुख गायब हो जाएगा। असल में इसी अध्याय में आगे दुख और युद्ध की बातें हैं। शायद इसका मतलब यह है कि परमेश्वर का राज्य धीरे-धीरे आता है, जैसे अंधकार में एक दीया जलता है, तुरंत पूरा सूरज नहीं निकलता। यीशु मसीह आए, पर दुनिया का सारा दुख अभी भी खत्म नहीं हुआ है। हम अब भी उस दिन का इंतज़ार कर रहे हैं जब उनकी शांति का राज्य पूरी तरह से आएगा।
यशायाह 9 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगली बार जब आपसे कोई गलती हो जाए, स्कूल में, घर में, दोस्तों के साथ, एक पल रुकिए और सोचिए, क्या मैं यह खुद अपने दम पर ठीक करना चाहता हूँ, या मैं परमेश्वर से मदद माँगूँगा? वही बालक जिसका नाम शांति का राजकुमार है, आज भी आपकी बात सुनने को तैयार हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

जबूलून और नप्ताली, यही वे इलाके थे जिन पर सबसे पहले अश्शूर की मार पड़ी। सबसे पहले उजड़े, सबसे पहले भुला दिए गए। और परमेश्वर कहता है, "अन्त में वह समुद्र के मार्ग को, यरदन के पार, अन्यजातियों के गलील को महिमा देगा।" वहीं से यीशु ने अपनी सेवा शुरू की।

तेरे जीवन का जो हिस्सा सबसे ज़्यादा टूटा है, हो सकता है वहीं से उसकी ज्योति उगे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

यशायाह अध्याय 9 में एक अंधकार भरी घड़ी है। इस्राएल शत्रुओं के भय में जी रहा है, युद्ध की गूँज हर घर तक पहुँच रही है। तभी परमेश्वर एक अजीब सी बात कहते हैं, "सिपाही के जूते जो लड़ाई में पहने जाते हैं, और लहू में लथपथ किए हुए कपड़े, आग की ईंधन होकर भस्म हो जाएंगे।"

सोचिए, सैनिकों के जूते अब जलाने की लकड़ी बनेंगे। जिन चीज़ों ने आपको इतने दिनों तक डराया, परमेश्वर उन्हें राख कर सकते हैं। आपके जीवन का कौन सा "युद्ध का जूता" आज उनके हाथ में सौंपने की ज़रूरत है?

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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