6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यिर्मयाह 31

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

यिर्मयाह 31: परमेश्वर अपने बच्चों को घर वापस लाते हैं

The Explanation

कल्पना करो कि तुम बहुत दूर, किसी अनजान देश में फँसे हो। तुम्हारा घर दूर है, रास्ता मुश्किल है। इस्राएल के लोगों के साथ ठीक यही हुआ था। वे अपने देश से दूर, दुश्मन के देश में बन्दी बनकर रह रहे थे।

पर परमेश्वर ने यिर्मयाह नबी के द्वारा एक अद्भुत वचन भेजा। परमेश्वर ने कहा, "मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ।" यह कोई छोटी बात नहीं थी। परमेश्वर ने वादा किया कि वे अपने लोगों को वापस लाएँगे। अंधे, लँगड़े, छोटे बच्चे, बूढ़े, सब लोग साथ चलेंगे। कोई पीछे नहीं छूटेगा।

परमेश्वर ने कहा कि वे उन्हें नदियों के किनारे, सीधे और सुरक्षित रास्ते से ले आएँगे, जहाँ वे ठोकर न खाएँ। जैसे एक चरवाहा अपनी भेड़ों की रखवाली करता है, वैसे ही परमेश्वर अपने लोगों की रखवाली करेंगे।

इस कहानी में एक माँ का नाम भी आता है, राहेल। वह रो रही थी क्योंकि उसके बच्चे खो गए थे। कितना दुख भरा दृश्य है! पर परमेश्वर कहते हैं, "रोने-पीटने से रुक जा, तेरे परिश्रम का फल मिलनेवाला है।" आँसुओं के बाद आनन्द आएगा।

फिर परमेश्वर एक और बड़ा वादा करते हैं। वे कहते हैं कि वे एक नई वाचा बनाएँगे, यानी एक नया वादा, एक नया रिश्ता। पुराने समय में परमेश्वर ने अपनी व्यवस्था पत्थर की पट्टियों पर लिखी थी। पर अब परमेश्वर कहते हैं, "मैं अपनी व्यवस्था उनके मन में समवाऊँगा, और उसे उनके हृदय पर लिखूँगा।" यानी परमेश्वर को जानना अब बाहर से सीखने की बात नहीं रहेगी, बल्कि भीतर से, दिल से होगा।

What Does This Mean?

क्या तुमने कभी कुछ तोड़ा है और सोचा कि अब सब खत्म हो गया? इस्राएल के लोगों ने भी परमेश्वर की बात नहीं मानी थी, और उन्हें लगा कि अब परमेश्वर उनसे नाराज़ होंगे हमेशा के लिए।

पर परमेश्वर एक पिता की तरह बोलते हैं। वे कहते हैं, "क्या एप्रैम मेरा प्रिय पुत्र नहीं है? मेरा मन उसके कारण भर आता है।" यह एक पिता का दिल है जो अपने बच्चे को दूर जाते देखकर दुखी होता है, पर फिर भी उसे गले लगाने का इंतज़ार करता है। परमेश्वर क्रोधित नहीं रहते, वे क्षमा करना चाहते हैं। वे कहते हैं, "मैं उनका अधर्म क्षमा करूँगा, और उनका पाप फिर स्मरण न करूँगा।"

The Common Thread

यह नई वाचा, जिसकी बात परमेश्वर ने की, वह यीशु मसीह में पूरी हुई। जब यीशु ने अपने चेलों के साथ आखिरी भोजन किया, तब उन्होंने प्याला उठाकर कहा कि यह नई वाचा उनके खून से बनती है। जो वादा यिर्मयाह में था, वह यीशु में सच हुआ। अब परमेश्वर को जानना किसी किताब से रटने की बात नहीं, बल्कि यीशु के द्वारा दिल में परमेश्वर के प्रेम को अनुभव करने की बात है। जैसे परमेश्वर ने बिखरी हुई भेड़ों को इकट्ठा करने का वादा किया, वैसे ही यीशु अच्छे चरवाहे बनकर हमें ढूँढते और घर ले आते हैं।

For You

जब तुमसे कोई गलती हो जाए, तो याद रखना कि परमेश्वर तुमसे नाराज़ होकर दूर नहीं भागते। वे तुम्हें वापस बुलाते हैं, ठीक जैसे उन्होंने इस्राएल को बुलाया। आज रात सोने से पहले परमेश्वर से कह सकते हो, "आप मुझे वापस बुलाइए, जैसे आपने वादा किया है।" और जब तुम किसी दोस्त से माफी माँगते हो, तो यह भी उसी प्रेम की एक छोटी तस्वीर है जो परमेश्वर हमें दिखाते हैं।

Talk About It

राहेल बच्चों के लिए रो रही थी। क्या तुम्हें याद है कि तुम कब बहुत उदास हुए थे, और किसने तुम्हें दिलासा दिया?

परमेश्वर कहते हैं कि वे अपनी बात हमारे दिल में लिखेंगे। इसका क्या मतलब हो सकता है, कि परमेश्वर को जानना दिल से होता है?

Praying Together

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें छोड़ते नहीं, चाहे हम कितनी भी दूर भटक जाएँ। जैसे आपने इस्राएल को घर वापस बुलाया, वैसे ही हमें भी हमेशा अपने पास बुलाइए। हमारे दिलों में अपना प्रेम लिख दीजिए। यीशु के नाम में, आमीन।

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यिर्मयाह 31 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यिर्मयाह 31 किस विषय में है?
कल्पना करो कि तुम बहुत दूर, किसी अनजान देश में फँसे हो। तुम्हारा घर दूर है, रास्ता मुश्किल है। इस्राएल के लोगों के साथ ठीक यही हुआ था। वे अपने देश से दूर, दुश्मन के देश में बन्दी बनकर रह रहे थे।
यिर्मयाह 31 क्या कहता है?
परमेश्वर ने कहा कि वे उन्हें नदियों के किनारे, सीधे और सुरक्षित रास्ते से ले आएँगे, जहाँ वे ठोकर न खाएँ। जैसे एक चरवाहा अपनी भेड़ों की रखवाली करता है, वैसे ही परमेश्वर अपने लोगों की रखवाली करेंगे।
यिर्मयाह 31 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर परमेश्वर एक और बड़ा वादा करते हैं। वे कहते हैं कि वे एक नई वाचा बनाएँगे, यानी एक नया वादा, एक नया रिश्ता। पुराने समय में परमेश्वर ने अपनी व्यवस्था पत्थर की पट्टियों पर लिखी थी। पर अब परमेश्वर कहते हैं, "मैं अपनी व्यवस्था उनके मन में समवाऊँगा, और उसे उनके हृदय पर लिखूँगा।" यानी परमेश्वर को जानना अब बाहर से सीखने की बात नहीं रहेगी, बल्कि भीतर से, दिल से होगा।
बच्चे यिर्मयाह 31 से क्या सीख सकते हैं?
पर परमेश्वर एक पिता की तरह बोलते हैं। वे कहते हैं, "क्या एप्रैम मेरा प्रिय पुत्र नहीं है? मेरा मन उसके कारण भर आता है।" यह एक पिता का दिल है जो अपने बच्चे को दूर जाते देखकर दुखी होता है, पर फिर भी उसे गले लगाने का इंतज़ार करता है। परमेश्वर क्रोधित नहीं रहते, वे क्षमा करना चाहते हैं। वे कहते हैं, "मैं उनका अधर्म क्षमा करूँगा, और उनका पाप फिर स्मरण न करूँगा।"
यिर्मयाह 31 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जब तुमसे कोई गलती हो जाए, तो याद रखना कि परमेश्वर तुमसे नाराज़ होकर दूर नहीं भागते। वे तुम्हें वापस बुलाते हैं, ठीक जैसे उन्होंने इस्राएल को बुलाया। आज रात सोने से पहले परमेश्वर से कह सकते हो, "आप मुझे वापस बुलाइए, जैसे आपने वादा किया है।" और जब तुम किसी दोस्त से माफी माँगते हो, तो यह भी उसी प्रेम की एक छोटी तस्वीर है जो परमेश्वर हमें दिखाते हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 26

इतने में मैं जाग उठा और देखा, और मेरी नींद मुझे मीठी लगी।" यही यिर्मयाह है जिसने रो रोकर रातें काटी थीं, जिसने अपने शहर को गिरते देखा। पर जब परमेश्वर ने उसे नई वाचा दिखाई, उसकी नींद मीठी हो गई। हालात अब भी वही थे, बस वादा सुनाई दे गया था। आज रात तू किसके भरोसे तकिये पर सिर रखेगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 25

परमेश्वर कहता है, "क्योंकि मैंने थके हुए प्राणी को तृप्त किया, और सब उदास प्राणियों को सन्तुष्ट किया है।" ध्यान दे, यह वादा बंधुआई में पड़े लोगों से किया गया, और फिर भी भूतकाल में कहा गया, मानो काम पूरा हो चुका हो। तेरी थकान परमेश्वर की नज़र में अनदेखी नहीं है। वह तुझसे नहीं कहता कि और ज़ोर लगा, वह कहता है कि आ, मैं तुझे तृप्त करूँगा।

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