अय्यूब 36
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
एलीहू अभी भी बोल रहा है। वह अय्यूब का मित्र नहीं है, पर वह सोचता है कि वह परमेश्वर की तरफ़ से बोल रहा है। वह कहता है, “कुछ ठहरा रह, और मैं तुझको समझाऊँगा… मैं अपने सृजनहार को धर्मी ठहराऊँगा।” एलीहू परमेश्वर के बारे में कुछ सुंदर बातें कहता है। वह कहता है कि परमेश्वर किसी को तुच्छ नहीं जानता, दीनों को उनका हक़ देता है, और धर्मियों से अपनी आँखें नहीं फेरता।
फिर वह एक विचार रखता है: अगर कोई दुःख में बंधा हुआ है, तो शायद परमेश्वर उसे उसका पाप और गर्व दिखा रहे हैं। वह कहता है कि परमेश्वर लोगों के कान खोलता है ताकि वे सुनें और बुराई से दूर रहें। अगर वे सुनें, तो उनके दिन अच्छे बीतेंगे; अगर न सुनें, तो वे नाश हो जाएँगे। एलीहू यहाँ सीधे अय्यूब से कहता है, “तूने दुष्टों का सा निर्णय किया है… चौकस रह, अनर्थ काम की ओर मत फिर।”
पर यहाँ कुछ ध्यान देने लायक है। हम पाठक जानते हैं, जो एलीहू नहीं जानता, कि अय्यूब की तकलीफ़ उसके पाप की वजह से नहीं आई थी। परमेश्वर ने खुद शुरुआत में अय्यूब को “खरा और सीधा” कहा था। तो एलीहू की यह बात, कि दुःख हमेशा छिपे हुए पाप का सबूत है, पूरी तरह सच नहीं है। यह किताब खुद यह सवाल खुला छोड़ देती है।
आखिर में एलीहू परमेश्वर की महानता का गीत गाना शुरू करता है, जैसे किसी तूफ़ान से पहले की चुप्पी हो। वह पूछता है, “उसके समान शिक्षक कौन है?” फिर वह बारिश, बादल, बिजली और गरज का वर्णन करता है, कि कैसे परमेश्वर पानी की बूँदें ऊपर खींचते हैं, बादलों से बरसाते हैं, बिजली को आज्ञा देते हैं कि निशाने पर गिरे।
What Does This Mean?
एलीहू की बातों में कुछ सच है और कुछ अधूरा सच है। यह सच है कि परमेश्वर महान, न्यायी और शक्तिशाली हैं, और यह भी सच है कि वे हमें अपने कानों से सिखाने की कोशिश करते हैं। पर यह मानना कि हर दुःख का मतलब है कि किसी ने पाप किया है, गलत है। कभी-कभी अच्छे लोग भी भारी दुःख से गुज़रते हैं, बिना किसी साफ़ कारण के। अय्यूब की पूरी किताब हमें यही सिखाती है: हम हमेशा नहीं जान सकते “क्यों”, और फिर भी परमेश्वर पर भरोसा रखा जा सकता है।
The Common Thread
यह अध्याय हमें एक गहरे सवाल तक ले जाता है, जो पूरी बाइबल में गूँजता है: क्या एक सच्चा निर्दोष व्यक्ति दुःख उठा सकता है? अय्यूब की कहानी में इसका पूरा जवाब नहीं मिलता, पर बाद में बाइबल में एक और निर्दोष व्यक्ति आता है, यीशु मसीह। उन्होंने कभी कोई पाप नहीं किया, फिर भी उन्होंने सबसे भारी दुःख उठाया, सूली पर मरकर। उनका दुःख उनके पाप की वजह से नहीं था, बल्कि हमारे लिए था। एलीहू सोचता है कि दुःख हमेशा सज़ा है, पर यीशु हमें दिखाते हैं कि कभी-कभी दुःख प्रेम से भी उठाया जाता है।
For You
जब तुम किसी को मुश्किल में देखो, तो तुरंत यह मत सोचो कि “ज़रूर इसने कुछ गलत किया होगा”। एलीहू की गलती यही थी, वह बहुत जल्दी न्याय करने लगा। इसके बजाय, सुनना सीखो, जैसे एलीहू खुद कहता है कि परमेश्वर हमारे कान खोलते हैं। जब कोई तुम्हें सिखाने या सुधारने की कोशिश करे, चाहे माता-पिता हों या शिक्षक, उसे ध्यान से सुनने की कोशिश करो, भले ही वह अभी अच्छा न लगे। और जब आसमान में बादल गरजें या बिजली चमके, याद रखना कि यह सब परमेश्वर के हाथ में है, जो तुमसे कहीं बड़े और समझदार हैं।
Talk About It
क्या तुमने कभी किसी को दुःख में देखा और सोचा कि “इसने ज़रूर कुछ गलत किया होगा”? उस सोच के बारे में अब तुम क्या सोचते हो?
एलीहू कहता है कि परमेश्वर जैसा शिक्षक कोई नहीं। तुम्हें क्या लगता है, परमेश्वर आज तुम्हें कैसे सिखाते हैं?
Praying Together
हे परमेश्वर, आप महान हैं और आपके काम हमारी समझ से भी बड़े हैं। हमें जल्दी न्याय करने से बचाइए, और हमें सुनने वाला दिल दीजिए। जब हम दुःख में हों, तब भी हमें याद दिलाइए कि आप हमसे प्रेम करते हैं। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
अय्यूब 36 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
अय्यूब 36 किस विषय में है?
अय्यूब 36 क्या कहता है?
अय्यूब 36 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे अय्यूब 36 से क्या सीख सकते हैं?
अय्यूब 36 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
एलीहू तूफ़ान की ओर इशारा करके कहता है, "वह बिजली को अपनी मुट्ठी में भर लेता है, और उसे आज्ञा देता है कि वह निशाने पर गिरे।" बिजली हमें बेतरतीब लगती है, पर उसका भी एक निशाना है। तेरे जीवन में जो गिरा, वह परमेश्वर के हाथ से छूटा नहीं था। क्या तू उस हाथ पर भरोसा कर सकता है जो निशाना चूकता नहीं?
एलीहू ने इससे पहले कहा था कि भक्तिहीन लोग बँधे होने पर भी दोहाई नहीं देते। और फिर यह: "वे जवानी में ही मर जाते हैं।" असली त्रासदी जंजीर नहीं, वह चुप्पी है जो जंजीर में भी पुकारना नहीं चाहती। आज तेरे जीवन में कौन सा दर्द है जिसे तू परमेश्वर से छिपाकर अकेले सह रहा है? पुकार ले। चुप रहना ही सबसे बड़ा खतरा है।
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