न्यायियों 10
प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
स्पष्टीकरण
न्यायियों की यह पुस्तक एक चक्र जैसी कहानी बताती है। इस्राएल परमेश्वर को छोड़ता है, मुसीबत आती है, वे पुकारते हैं, और परमेश्वर किसी को भेजकर छुड़ाते हैं। इस अध्याय में पहले दो न्यायी बहुत कम शब्दों में बताए गए हैं, तोला और याईर। तोला तेईस वर्ष तक इस्राएल का न्याय करता रहा, और याईर बाईस वर्ष तक। याईर के तीस बेटे थे जो गधों पर सवार हुआ करते थे, और उनके तीस नगर थे। यह उस समय संपन्नता और प्रभाव का चिन्ह था।
लेकिन फिर कहानी फिर से अंधेरी हो जाती है। इस्राएलियों ने फिर से यहोवा की दृष्टि में बुरा किया। उन्होंने बाल और अश्तोरेत नाम की मूर्तियों की उपासना शुरू कर दी, और साथ ही आसपास के सात अलग-अलग राष्ट्रों के देवताओं की भी। यहोवा का क्रोध भड़का और उन्हें पलिश्तियों और अम्मोनियों के हाथ में सौंप दिया गया। अठारह साल तक गिलाद में रहने वाले इस्राएली सताए जाते रहे।
जब दुख असहनीय हो गया, तो इस्राएलियों ने यहोवा की दुहाई दी। उन्होंने अपना पाप मान लिया। परन्तु यहोवा का जवाब चौंकाने वाला है। वे याद दिलाते हैं कि कितनी बार पहले भी उन्होंने छुड़ाया था, और फिर कहते हैं, "मैं फिर तुम को न छुड़ाऊँगा। जाओ, अपने माने हुए देवताओं की दुहाई दो।" यह सुनकर इस्राएली फिर गिड़गिड़ाते हैं, अपने पराए देवताओं को दूर कर देते हैं, और यहोवा की उपासना करने लगते हैं। तब लिखा है कि यहोवा इस्राएलियों के कष्ट के कारण खेदित हुआ, यानी उनका दुख देखकर उनका हृदय पिघल गया। अध्याय के अंत में गिलाद के अगुवे एक-दूसरे से पूछते हैं कि कौन अम्मोनियों के विरुद्ध लड़ाई शुरू करेगा।
इसका क्या अर्थ है?
यह कहानी एक आसान सबक नहीं देती। यहोवा साफ कहते हैं, "मैं फिर तुम को न छुड़ाऊँगा।" क्या वे अपनी बात से मुकर गए? यह सवाल इस अध्याय में खुला ही छूट जाता है, और हमें भी इसे खुला छोड़ना ईमानदार होगा। लेकिन एक बात साफ है, परमेश्वर का क्रोध उनकी उदासीनता नहीं है। वे गुस्सा इसलिए करते हैं क्योंकि उनका रिश्ता इस्राएल के साथ सच्चा है, और सच्चे रिश्तों में दर्द और नाराज़गी दोनों होती हैं। फिर भी जब इस्राएली अपने देवताओं को सच में त्याग देते हैं, न कि केवल शब्दों से बल्कि कार्य से, तो यहोवा का मन उनके कष्ट के कारण पिघल जाता है। यह दिखाता है कि परमेश्वर की नाराज़गी उनके प्रेम से बड़ी नहीं है।
समानांतर सूत्र
यह चक्र, पाप, दुख, पुकार, छुटकारा, पूरी बाइबल में बार-बार दिखता है। इस्राएल बार-बार वही गलती दोहराता है, और फिर भी परमेश्वर बार-बार सुनते हैं। यह हमें याद दिलाता है कि मनुष्य का बचाया जाना किसी इंसानी वफादारी पर नहीं, बल्कि परमेश्वर की धीरज और दया पर टिका है। आगे चलकर यीशु मसीह इस पूरे चक्र को एक बार और सदा के लिए तोड़ देंगे। वे न्यायी नहीं थे जो कुछ साल राज करके मर जाते, बल्कि वे सदा के उद्धारकर्ता हैं जो अपने लोगों को भीतर से बदलते हैं ताकि वे बार-बार पुराने देवताओं की ओर न लौटें।
तुम्हारे लिए
तुम्हारे जीवन में भी ऐसी चीज़ें हो सकती हैं जो परमेश्वर की जगह ले लेती हैं, जैसे कोई खेल, कोई दोस्ती, कोई आदत, जिसे तुम परमेश्वर से ज़्यादा महत्व देने लगो। यह कहानी तुमसे झूठी माफी नहीं माँगती। यह पूछती है, क्या तुम सच में उन चीज़ों को दूर करने को तैयार हो, जैसे इस्राएलियों ने अपने पराए देवताओं को दूर किया? परमेश्वर तुम्हारे आधे-अधूरे "सॉरी" से संतुष्ट नहीं होते, पर जब तुम सच में लौटते हो, तो उनका हृदय तुम्हारे लिए पिघलता है।
चर्चा के लिए
क्या तुम्हें लगता है परमेश्वर का कहना "मैं फिर न छुड़ाऊँगा" और फिर भी छुड़ा देना, एक विरोधाभास है, या इसमें कोई गहरी बात छिपी है?
तुम्हारे जीवन में वह कौन सी चीज़ हो सकती है जिसे परमेश्वर से ज़्यादा जगह मिल गई हो?
साथ में प्रार्थना
हे परमेश्वर, हम भी कभी-कभी आपको भूल जाते हैं और अपने मन की चीज़ों के पीछे भाग जाते हैं। धन्यवाद कि आप हमारी पुकार सुनते हैं, भले हम बार-बार भटक जाएँ। हमें सच्चे मन से आपकी ओर लौटने में मदद दीजिए। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
न्यायियों 10 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
न्यायियों 10 किस विषय में है?
न्यायियों 10 क्या कहता है?
न्यायियों 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे न्यायियों 10 से क्या सीख सकते हैं?
न्यायियों 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
जाकर उन देवताओं की दुहाई दो जिन्हें तुम ने चुन लिया है; तुम्हारे संकट के समय वे ही तुम्हें छुड़ाएँ।" ये शब्द कठोर लगते हैं, पर ये ठुकराना नहीं, आईना दिखाना है। जिन चीज़ों को तुमने सुख के दिनों में अपना सहारा बनाया, क्या वे आज रो पड़ने पर जवाब देती हैं? और ध्यान दो, छः पद आगे इस्राएल ने मूरतें फेंक दीं, और परमेश्वर से उनका दुख देखा न गया।
सात जातियों के देवता गिनाए गए हैं, पर एक भी इस्राएल का अपना नहीं था। जब यहोवा छूटा तो दिल खाली नहीं रहा, वह भर गया, दूसरों के देवताओं से। यही आज भी होता है। परमेश्वर से दूरी बनाते ही हम किसी और चीज़ के सामने झुकने लगते हैं, लोगों की राय, पैसा, डर। आखिरी पंक्ति चुभती है, "यहोवा को त्याग दिया और उसकी उपासना न की।" तेरी सूची में आज क्या-क्या जुड़ गया है?
वह तेईस वर्ष तक इस्राएल का न्याय करता रहा। फिर वह मर गया और शामीर में उसे मिट्टी दी गई।" तोला के बारे में बाइबल में बस इतना ही लिखा है। कोई युद्ध नहीं, कोई गीत नहीं। पर अबीमेलेक के खून बहाने के बाद वे तेईस साल की शांति किसी की चुपचाप की गई वफादारी से आई थी। तेरे रोज़ के छोटे, अनदेखे कामों की गिनती परमेश्वर रखता है, चाहे कोई और न रखे।
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