नहेम्याह 6
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
यरूशलेम की शहरपनाह यानी शहर की सुरक्षा-दीवार बनकर लगभग तैयार हो चुकी थी। फाटकों में पल्ले अभी लगाए जाने थे, पर दीवार में कोई दरार नहीं बची थी। जब सम्बल्लत, तोबियाह और अरबी गेशेम को यह पता चला, तो उन्होंने नहेमायाह को एक चाल से रोकने की कोशिश की। उन्होंने कहा, "आओ, हम ओनो के मैदान में मिलें।" पर उनकी मनसा भेंट करने की नहीं, हानि पहुँचाने की थी। नहेमायाह ने साफ इनकार किया, "मैं भारी काम में लगा हूँ, मैं नहीं आ सकता।" चार बार यही खेल दोहराया गया, और नहेमायाह ने हर बार वही उत्तर दिया।
जब यह चाल काम न आई, तो सम्बल्लत ने एक खुली चिट्ठी भेजी, जिसे रास्ते में सब पढ़ सकते थे। उसमें झूठा आरोप था कि नहेमायाह विद्रोह की योजना बना रहा है और राजा बनना चाहता है। यह एक धमकी थी, जिससे नहेमायाह डर जाए और काम रोक दे। पर नहेमायाह ने बेझिझक कहा, "जैसा तू कहता है, वैसा तो कुछ भी नहीं हुआ, तू ये बातें अपने मन से गढ़ता है।"
फिर एक भविष्यवक्ता शमायाह ने नहेमायाह से मन्दिर में छिप जाने को कहा, यह कहकर कि लोग उसे रात में मार डालने आएँगे। पर नहेमायाह ने पहचान लिया कि यह परमेश्वर का संदेश नहीं, बल्कि तोबियाह और सम्बल्लत के पैसों से खरीदा गया झूठा डर था। उसने साफ कहा, "क्या मुझ जैसा मनुष्य भागे?" और नहीं गया।
अंत में, बावन दिनों के भीतर दीवार पूरी बन गई। जब शत्रुओं ने यह सुना, वे लज्जित हुए, क्योंकि उन्होंने समझ लिया कि यह काम परमेश्वर की ओर से हुआ है। पर अध्याय यह भी नहीं छिपाता कि कुछ यहूदी रईस तोबियाह के साथ पत्र-व्यवहार करते रहे, और वह नहेमायाह को डराने की चिट्ठियाँ भेजता रहा।
इसका अर्थ क्या है?
यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर का काम करते समय डर और झूठ अक्सर साथ-साथ आते हैं। कभी दुश्मन बाहर से धमकाते हैं, कभी झूठे दोस्त भीतर से बहकाते हैं। नहेमायाह डर के आगे नहीं झुका, पर वह अपने बल पर भी नहीं टिका रहा। उसने प्रार्थना की, "हे परमेश्वर तू मुझे हियाव दे", यानी हिम्मत दे। सच्चा साहस वही है जो प्रार्थना से निकलता है, न कि जो सिर्फ जिद से आता है।
यह भी दिलचस्प है कि नहेमायाह हर धमकी को परखता है। वह हर आवाज़ को परमेश्वर का वचन नहीं मान लेता, भले ही कोई उसे भविष्यवक्ता कहकर बात करे। पहचानना कि कौन सच बोल रहा है और कौन डरा रहा है, यह भी बुद्धि की बात है।
एक बड़ी कड़ी
यह घटना हमें याद दिलाती है कि परमेश्वर अपने लोगों को बनाने का, संवारने का काम कभी नहीं छोड़ते, चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ। यह वही परमेश्वर हैं जिनने बाद में अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजा, जिन्हें भी झूठे आरोपों से डराया गया, धमकाया गया, पर जो डरकर पीछे नहीं हटे। जैसे दीवार बावन दिनों में पूरी हुई, वैसे ही परमेश्वर की योजनाएँ, चाहे कितनी देर लगे, पूरी होती हैं। यह विश्वास दिलाता है कि परमेश्वर का काम रुकता नहीं, चाहे कितने भी लोग उसे रोकने की कोशिश करें।
तुम्हारे लिए
कभी तुम्हें भी ऐसा लगेगा कि कोई तुम्हें डरा रहा है ताकि तुम सही काम छोड़ दो, चाहे वह स्कूल में हो, दोस्तों के बीच हो या घर में। शायद कोई अफवाह फैलाए, या कोई झूठी बात कहकर तुम्हें डरा दे। नहेमायाह की तरह रुककर सोचो, क्या यह सच है, या कोई मुझे रोकना चाहता है? और परमेश्वर से हिम्मत माँगो, जैसे नहेमायाह ने माँगी। तुम्हें हर बात का जवाब देने की ज़रूरत नहीं, बस अपने काम में लगे रहने की।
चर्चा के लिए
नहेमायाह ने कैसे पहचाना कि शमायाह की बात परमेश्वर की ओर से नहीं थी? तुम कैसे जान सकते हो कि कोई तुम्हें सच बता रहा है या डरा रहा है?
क्या तुम्हारे जीवन में कभी ऐसा समय आया जब तुमने सही काम करना जारी रखा, भले ही किसी ने तुम्हें रोकने की कोशिश की?
संगति में प्रार्थना
हे परमेश्वर, जब कोई हमें डराए या भ्रमित करे, तब हमें हियाव दें। हमें सच और झूठ में फर्क करने की बुद्धि दें, और हमें उस काम में लगे रहने की शक्ति दें जो आपने हमें सौंपा है। हम जानते हैं कि आप हमारे साथ हैं, जैसे आप नहेमायाह के साथ थे। आमीन।
नहेम्याह 6 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
नहेम्याह 6 किस विषय में है?
नहेम्याह 6 क्या कहता है?
नहेम्याह 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे नहेम्याह 6 से क्या सीख सकते हैं?
नहेम्याह 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
बावन दिन। इतनी सी बात, और शहरपनाह खड़ी हो गई। नहेम्याह को अपने बचाव में कोई भाषण नहीं देना पड़ा। लिखा है, "क्योंकि उन्होंने जान लिया कि यह काम हमारे परमेश्वर की ओर से हुआ है।" जिन लोगों ने ताने मारे थे, उन्हीं को मानना पड़ा। तू भी शायद सफाई देते देते थक गया है। चुपचाप काम पूरा कर। परमेश्वर खुद तेरा जवाब बन जाएगा।
सनबल्लत का बुलावा सुनने में तो मित्रता जैसा लगता था, पर वह ओनो के मैदान तक नीचे उतारने की चाल थी। नहेमायाह का उत्तर सीधा था, "मैं तो एक भारी काम कर रहा हूँ, इस कारण नीचे नहीं आ सकता।" हर बुलावे का जवाब देना ज़रूरी नहीं। सोचो, आज कौन सी बातचीत तुम्हें दीवार से नीचे खींच रही है?
नहेमायाह जब शहरपनाह बना रहा था, तब सम्बल्लत ने झूठी अफवाह फैलाई कि वह राजा के विरुद्ध विद्रोह करने वाला है। नहेमायाह का उत्तर सीधा था, "जो बातें तू कहता है, उनमें से कोई भी नहीं हुई, वरन् तू अपने मन से गढ़ लेता है।"
कभी कभी हमारे विरुद्ध भी झूठी बातें कही जाती हैं। सफाई देने में उलझने के बजाय नहेमायाह की तरह शांत होकर सच बोलिए, और काम पर लगे रहिए। परमेश्वर आपकी प्रतिष्ठा की रक्षा करेगा।
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