6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

प्रकाशितवाक्य 1

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यूहन्ना नाम का एक बूढ़ा आदमी पतमुस नामक एक छोटे से टापू पर अकेला बैठा है। वह वहाँ कैद में है, क्योंकि उसने यीशु मसीह के बारे में गवाही दी थी। लेकिन अचानक एक रविवार को, जिसे वह "प्रभु का दिन" कहता है, कुछ असाधारण होता है। उसके पीछे से तुरही जैसी तेज आवाज़ आती है। जब वह पलटकर देखता है, तो उसे सोने की सात दीवटें दिखाई देती हैं, और उनके बीच में एक पुरुष खड़ा है जो इतना चमकीला और शक्तिशाली है कि उसका वर्णन करना मुश्किल है। उसके बाल बर्फ जैसे सफेद हैं, उसकी आँखें आग की लौ जैसी जलती हैं, उसका चेहरा सूरज की तरह चमकता है, और उसके मुँह से एक तेज तलवार निकलती है। यह दृश्य इतना भारी है कि यूहन्ना डर के मारे उसके पैरों पर गिर पड़ता है, मानो वह मर गया हो।

पर यह पुरुष कोई डरावना भूत नहीं है। वह यूहन्ना पर अपना हाथ रखता है और कहता है: "मत डर; मैं प्रथम और अन्तिम हूँ, और जीवित भी मैं हूँ। मैं मर गया था, और अब देख मैं युगानुयुग जीविता हूँ।" यह यीशु मसीह ही है, वही जो क्रूस पर मरा था और फिर जी उठा। अब वह यूहन्ना को एक काम सौंपता है: जो कुछ उसने देखा है, जो अभी हो रहा है, और जो आगे होगा, वह सब लिखकर सात कलीसियाओं के पास भेज दे।

What Does This Mean?

यह अध्याय हमें बताता है कि यीशु मसीह अब वह कमज़ोर आदमी नहीं है जिसे सैनिकों ने पकड़ा और सताया था। वह अब जीवित, महिमावान और शक्तिशाली राजा है। उसके हाथ में सात तारे हैं, और उसकी उपस्थिति में सात सोने की दीवटें हैं। ये तारे और दीवटें दरअसल सात कलीसियाओं और उनके स्वर्गदूतों को दर्शाते हैं, जैसा वचन 20 में साफ बताया गया है। इसका मतलब है कि यीशु अपनी कलीसिया के बीच में खड़ा है, वह उन्हें देख रहा है, जान रहा है, और उनकी रखवाली कर रहा है।

यह भी ध्यान देने लायक है कि यूहन्ना डर गया था। कभी-कभी हम सोचते हैं कि परमेश्वर के करीब होना हमेशा आरामदायक अनुभव होता है, पर यहाँ साफ दिखता है कि परमेश्वर की पवित्रता और महिमा इतनी बड़ी है कि उसके सामने आना डरावना भी हो सकता है। यही कारण है कि यीशु तुरंत कहता है, "मत डर।" यह डर और दिलासा दोनों एक साथ इस अध्याय में हैं, और यह कुछ ऐसा है जिसे समझना आसान नहीं, पर ईमानदार रहना ज़रूरी है।

The Common Thread

यीशु खुद को यहाँ "अल्फा और ओमेगा" कहता है, यानी यूनानी वर्णमाला का पहला और आखिरी अक्षर। इसका मतलब है कि वह शुरुआत भी है और अंत भी, वह सब कुछ जानता और नियंत्रित करता है। यह परमेश्वर की उस पुरानी प्रतिज्ञा से जुड़ा है जो पूरी बाइबल में चलती है: परमेश्वर अपने लोगों को कभी नहीं छोड़ते, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों। यूहन्ना कैद में था, अकेला और शायद डरा हुआ भी, फिर भी वहीं यीशु उसे मिलता है। यह दिखाता है कि यीशु सबसे अंधेरी जगहों में भी आ सकता है और अपनी उपस्थिति से रोशनी ला सकता है। मृत्यु और अधोलोक की कुँजियाँ भी उसी के पास हैं, यानी वह मृत्यु से भी बड़ा है, जिसने खुद मृत्यु को हरा दिया है।

For You

शायद तुम कभी किसी मुश्किल हालात में हो, जैसे यूहन्ना था, अकेला या डरा हुआ, और तुम्हें लगता हो कि परमेश्वर दूर है। यह अध्याय कहता है कि ऐसा नहीं है। यीशु मसीह आज भी अपनी कलीसिया के बीच में चलता है, वह देख रहा है, वह जानता है। जब तुम किसी चीज़ से डरते हो, चाहे वह अंधेरा हो, कोई परीक्षा हो या कोई नया बदलाव, तो याद रखना कि वही यीशु कहता है "मत डर"। यह कोई खोखला वादा नहीं है, क्योंकि यह वही है जो मर गया और फिर जी उठा।

Talk About It

यूहन्ना यीशु को देखकर डर गया, मानो मर गया हो। तुम्हें क्या लगता है, क्यों परमेश्वर की महिमा इतनी भारी हो सकती है कि वह डरावनी भी लगे?

यीशु कहता है कि उसके पास मृत्यु और अधोलोक की कुँजियाँ हैं। इसका तुम्हारे लिए क्या मतलब हो सकता है, जब तुम मृत्यु के बारे में सोचते हो?

Praying Together

प्रभु यीशु, आप शुरुआत भी हैं और अंत भी, और आप आज भी हमारे बीच में हैं। जब हम डरते हैं, हमें याद दिलाइए कि आपने कहा है "मत डर"। धन्यवाद कि आप मर गए और फिर जी उठे, और अब सदा जीवित हैं। हमें अपनी उपस्थिति का एहसास कराइए। आमीन।

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प्रकाशितवाक्य 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

प्रकाशितवाक्य 1 किस विषय में है?
यूहन्ना नाम का एक बूढ़ा आदमी पतमुस नामक एक छोटे से टापू पर अकेला बैठा है। वह वहाँ कैद में है, क्योंकि उसने यीशु मसीह के बारे में गवाही दी थी। लेकिन अचानक एक रविवार को, जिसे वह "प्रभु का दिन" कहता है, कुछ असाधारण होता है। उसके पीछे से तुरही जैसी तेज आवाज़ आती है। जब वह पलटकर देखता है, तो उसे सोने की सात दीवटें दिखाई देती हैं, और उनके बीच में एक पुरुष खड़ा है जो इतना चमकीला और शक्तिशाली है कि उसका वर्णन करना मुश्किल है। उसके बाल बर्फ जैसे सफेद हैं, उसकी आँखें आग की लौ जैसी जलती हैं, उसका चेहरा सूरज की तरह चमकता है, और उसके मुँह से एक तेज तलवार निकलती है। यह दृश्य इतना भारी है कि यूहन्ना डर के मारे उसके पैरों पर गिर पड़ता है, मानो वह मर गया हो।
प्रकाशितवाक्य 1 क्या कहता है?
यह अध्याय हमें बताता है कि यीशु मसीह अब वह कमज़ोर आदमी नहीं है जिसे सैनिकों ने पकड़ा और सताया था। वह अब जीवित, महिमावान और शक्तिशाली राजा है। उसके हाथ में सात तारे हैं, और उसकी उपस्थिति में सात सोने की दीवटें हैं। ये तारे और दीवटें दरअसल सात कलीसियाओं और उनके स्वर्गदूतों को दर्शाते हैं, जैसा वचन 20 में साफ बताया गया है। इसका मतलब है कि यीशु अपनी कलीसिया के बीच में खड़ा है, वह उन्हें देख रहा है, जान रहा है, और उनकी रखवाली कर रहा है।
प्रकाशितवाक्य 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यीशु खुद को यहाँ "अल्फा और ओमेगा" कहता है, यानी यूनानी वर्णमाला का पहला और आखिरी अक्षर। इसका मतलब है कि वह शुरुआत भी है और अंत भी, वह सब कुछ जानता और नियंत्रित करता है। यह परमेश्वर की उस पुरानी प्रतिज्ञा से जुड़ा है जो पूरी बाइबल में चलती है: परमेश्वर अपने लोगों को कभी नहीं छोड़ते, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों। यूहन्ना कैद में था, अकेला और शायद डरा हुआ भी, फिर भी वहीं यीशु उसे मिलता है। यह दिखाता है कि यीशु सबसे अंधेरी जगहों में भी आ सकता है और अपनी उपस्थिति से रोशनी ला सकता है। मृत्यु और अधोलोक की कुँजियाँ भी उसी के पास हैं, यानी वह मृत्यु से भी बड़ा है, जिसने खुद मृत्यु को हरा दिया है।
बच्चे प्रकाशितवाक्य 1 से क्या सीख सकते हैं?
यूहन्ना यीशु को देखकर डर गया, मानो मर गया हो। तुम्हें क्या लगता है, क्यों परमेश्वर की महिमा इतनी भारी हो सकती है कि वह डरावनी भी लगे?
प्रकाशितवाक्य 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रभु यीशु, आप शुरुआत भी हैं और अंत भी, और आप आज भी हमारे बीच में हैं। जब हम डरते हैं, हमें याद दिलाइए कि आपने कहा है "मत डर"। धन्यवाद कि आप मर गए और फिर जी उठे, और अब सदा जीवित हैं। हमें अपनी उपस्थिति का एहसास कराइए। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

यूहन्ना अपने आप को "प्रेरित" नहीं, पहले "तुम्हारा भाई" कहता है, और फिर "क्लेश और राज्य और धीरज में तुम्हारा सहभागी।" ध्यान दो, क्लेश और राज्य एक ही साँस में हैं। वह निर्वासित था, पतमुस के उस सूने टापू पर, फिर भी राज्य की बात करता है। तेरा अकेलापन भी शायद वही जगह हो जहाँ स्वर्ग खुलता है।

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