3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 थिस्सलुनीकियों 4

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

पहला थिस्सलुनीकियों 4

व्याख्या

एक बार पौलुस ने अपने दोस्तों को एक चिट्ठी लिखी। उसके दोस्त यीशु से बहुत प्यार करते थे। पौलुस ने लिखा, "तुम परमेश्वर को खुश करना जानते हो। अच्छा! अब और भी ऐसा करो।"

पौलुस चाहता था कि वे प्यार से रहें। एक दूसरे से सच बोलें। एक दूसरे को ठगें नहीं। परमेश्वर उन्हें देख रहे हैं, पास से, प्यार से।

पौलुस ने यह भी लिखा, "अपने हाथों से काम करो। चुपचाप रहो। और सबके साथ भले बनो।" जैसे कोई बच्चा अपने खिलौने चुपचाप उठाता है, वैसे ही।

इससे क्या समझ मिलता है?

फिर पौलुस ने एक बड़ी बात बताई। कुछ दोस्त मर गए थे। बाकी दोस्त बहुत दुखी थे। वे रोते थे।

पौलुस ने कहा, "रो मत, ऐसे मत रो जैसे जिनके पास कोई आशा नहीं।" क्यों? क्योंकि यीशु मरे थे, पर फिर जी उठे। सच में जी उठे!

और जो यीशु पर विश्वास करके मर गए, परमेश्वर उन्हें भी वापस लाएँगे। जैसे पापा रात में सोए हुए बच्चे को गोद में उठा लेते हैं, वैसे ही।

एक ही कहानी की धारा

एक दिन, प्रभु यीशु खुद आकाश से उतरेंगे। बहुत बड़ी तुरही बजेगी। सुनो, कैसी जोर से आवाज़! और जो मसीह में मरे थे, वे पहले जी उठेंगे।

फिर जो जीवित हैं, वे भी बादलों पर उठा लिए जाएँगे। सब मिलकर प्रभु से मिलेंगे, हवा में, ऊँचे ऊँचे आसमान में।

और उसके बाद? सब हमेशा प्रभु के साथ रहेंगे। हमेशा। कभी अलग नहीं होंगे।

तुम्हारे लिए

क्या तुमने कभी किसी को खो दिया है? कोई दादी, कोई दोस्त? तब दिल में दर्द होता है। रोना भी ठीक है।

पर याद रखो, यीशु मरे और फिर जी उठे। इसलिए जो उनसे प्यार करते हैं, वे फिर मिलेंगे। एक दिन, तुरही बजेगी। और सब साथ होंगे।

पौलुस ने लिखा, "एक दूसरे को शान्ति दो।" तो जब कोई दुखी हो, उसे गले लगाओ। कहो, "यीशु फिर आएँगे।" यह सबसे अच्छी बात है जो तुम कह सकते हो।

बात करें

तुम्हें किसकी याद आती है, जो अभी साथ नहीं है?

जब तुरही बजेगी, तब क्या होगा, यह सोचकर कैसा लगता है?

एक साथ प्रार्थना

प्रिय यीशु, आप मरे, और फिर जी उठे। यह कितनी अच्छी बात है। जब कोई मुझे याद आए, मुझे दिलासा दें। और एक दिन, जब तुरही बजे, मुझे भी अपने पास बुला लें। आमीन।

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1 थिस्सलुनीकियों 4 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 थिस्सलुनीकियों 4 किस विषय में है?
एक बार पौलुस ने अपने दोस्तों को एक चिट्ठी लिखी। उसके दोस्त यीशु से बहुत प्यार करते थे। पौलुस ने लिखा, "तुम परमेश्वर को खुश करना जानते हो। अच्छा! अब और भी ऐसा करो।"
1 थिस्सलुनीकियों 4 क्या कहता है?
फिर पौलुस ने एक बड़ी बात बताई। कुछ दोस्त मर गए थे। बाकी दोस्त बहुत दुखी थे। वे रोते थे।
1 थिस्सलुनीकियों 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
एक दिन, प्रभु यीशु खुद आकाश से उतरेंगे। बहुत बड़ी तुरही बजेगी। सुनो, कैसी जोर से आवाज़! और जो मसीह में मरे थे, वे पहले जी उठेंगे।
नन्हे बच्चे 1 थिस्सलुनीकियों 4 से क्या सीख सकते हैं?
क्या तुमने कभी किसी को खो दिया है? कोई दादी, कोई दोस्त? तब दिल में दर्द होता है। रोना भी ठीक है।
1 थिस्सलुनीकियों 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय यीशु, आप मरे, और फिर जी उठे। यह कितनी अच्छी बात है। जब कोई मुझे याद आए, मुझे दिलासा दें। और एक दिन, जब तुरही बजे, मुझे भी अपने पास बुला लें। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

पौलुस थिस्सलुनीकियों को डाँटता नहीं। वह कहता है, "जैसा तुम चलते भी हो, वैसे ही और भी बढ़ते जाओ।" यानी तू पहले से सही रास्ते पर है, बस रुक मत जा। परमेश्वर को प्रसन्न करना कोई रेखा नहीं जिसे पार करके काम खत्म हो जाए। यह प्रेम है, और प्रेम हमेशा और गहरा होना चाहता है। आज तू कहाँ ठहर गया है, यह सोचकर कि इतना काफ़ी है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

पौलुस यह नहीं कहता कि मत रोओ। वह कहता है, "ऐसा न हो कि तुम औरों के समान शोक करो जिन्हें आशा नहीं।" शोक मना नहीं है, निराशा मना है। और देखो, वह मरे हुओं को "जो सो गए हैं" कहता है। नींद का अंत जागना होता है। जिस कब्र पर तू आँसू बहाता है, मसीह उसे बिस्तर कहता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

पौलुस कोई बड़ा मिशन नहीं सौंप रहा, वह कहता है: "चुपचाप रहने और अपना-अपना काम-काज करने, और अपने-अपने हाथों से कमाने का प्रयत्न करो।" थिस्सलुनीके के कुछ लोग प्रभु के आने की बाट जोहते-जोहते काम छोड़ बैठे थे। मसीह की प्रतीक्षा आपके हाथों को खाली नहीं करती, उन्हें ईमानदार बनाती है। आज आपका चुपचाप किया गया काम भी परमेश्वर की नज़र में गवाही है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

क्योंकि परमेश्वर ने हमें अशुद्धता के लिये नहीं, परन्तु पवित्रता के लिये बुलाया है।" ध्यान दे, पौलुस पवित्रता को नियम नहीं, बुलाहट कहता है। जिस दिन परमेश्वर ने तुझे अपना कहा, उसी दिन उसने तेरे शरीर, तेरी आँखों और तेरे एकांत के पलों को भी अपने लिये माँग लिया। तू किसी सूची का पालन नहीं कर रहा, तू एक बुलाने वाले को उत्तर दे रहा है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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