सभोपदेशक 6
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक बार एक आदमी था। उसके पास बहुत सारा खाना था। बहुत सारे रुपये थे। बहुत सारी अच्छी चीज़ें थीं।
पर वह उन्हें खा नहीं पाया। कोई और आकर खा गया।
कैसा दुख! कितना बड़ा दुख!
सोचो, तुम्हारे पास केक हो। बड़ा, मीठा केक। पर तुम उसे खा ही न पाओ। कोई और आकर सारा केक खा जाए। तुम बस देखते रह जाओ।
ऐसा दुखी लगता है, ना?
इसका मतलब क्या है?
सुनो, एक और बात है। एक आदमी के सौ बेटे थे। सौ! बहुत बड़ी उमर तक जीता रहा। बहुत साल, बहुत साल।
पर उसका दिल खुश नहीं था। कभी नहीं।
एक छोटा बच्चा है, जो जन्म से पहले ही चला गया। उसने सूरज को भी नहीं देखा। उसका नाम भी किसी को याद नहीं।
फिर भी उस छोटे बच्चे को ज़्यादा चैन मिला। ज़्यादा शांति।
क्या अजीब बात है ना? बहुत साल जीना, बहुत बेटे होना, बहुत खाना होना, इससे दिल खुश नहीं होता। दिल की खुशी कहीं और से आती है।
आदमी काम करता है, काम करता है, काम करता है। खाने के लिये। पर उसका पेट फिर भी नहीं भरता। कभी नहीं भरता।
समान सूत्र
परमेश्वर सब जानते हैं। वे ही जानते हैं कि आदमी के लिये अच्छा क्या है। यह लिखा है, "मनुष्य को कौन बता सकता है कि उसके बाद सूर्य के नीचे क्या होगा?"
कोई नहीं जानता। सिर्फ परमेश्वर जानते हैं।
बहुत बाद में, यीशु आये। उन्होंने कहा, मत डरो। मैं जानता हूँ आगे क्या होगा। मेरे पास आओ, मैं तुम्हारा दिल भरूँगा।
रुपये दिल नहीं भरते। खाना दिल नहीं भरता। बेटे-बेटियाँ भी दिल नहीं भरते। पर यीशु दिल भर सकते हैं। सचमुच भर सकते हैं।
तुम्हारे लिए
तुम्हारे पास कोई खिलौना है, जिसे तुम बहुत प्यार करते हो? अच्छा है खिलौना।
पर अकेला खिलौना दिल को खुश नहीं रख सकता। सुबह उठकर फिर मन उदास हो सकता है।
परमेश्वर तुम्हें प्यार करते हैं। यीशु तुम्हें जानते हैं। उनके पास जाओ, दिल की सच्ची खुशी वहीं मिलेगी।
बातचीत के लिए:
क्या तुम्हें याद है, तुमने कब कोई अच्छी चीज़ पाई, फिर भी दिल खुश नहीं हुआ था?
तुम्हें लगता है, यीशु के पास जाने से दिल क्यों खुश होता है?
साथ में प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर,
रुपये और खिलौने दिल नहीं भरते।
सिर्फ आप भर सकते हैं।
आइए मेरे दिल में, यीशु के नाम से।
आमीन।
सभोपदेशक 6 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
सभोपदेशक 6 किस विषय में है?
सभोपदेशक 6 क्या कहता है?
सभोपदेशक 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे सभोपदेशक 6 से क्या सीख सकते हैं?
सभोपदेशक 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
चाहे वह दो हजार वर्ष जीवित रहे, परन्तु कुछ सुख न भोगे, तो क्या?" सुलैमान लम्बी उम्र को नहीं, बल्कि बिना स्वाद के जीने को खाली कहता है। तू भी शायद सब कुछ "बाद के लिए" बचा रहा है, रोटी, हँसी, अपनों के साथ बैठना। पर जो आज परमेश्वर के हाथ से मिला है, उसे आज ही ग्रहण कर। कल की गिनती तेरे हाथ में नहीं।
छाया के समान" जीवन बिताने वाले से सभोपदेशक पूछता है कि उसके लिए भला क्या है, और उत्तर नहीं देता। यह चुप्पी क्रूर नहीं, दयालु है। तू अपनी योजनाओं की लंबी सूची पकड़े बैठा है, पर कल का एक दिन भी तेरे हाथ में नहीं। तो आज जो सामने है, वही रोटी, वही चेहरा, वही काम, उसे परमेश्वर के हाथ से लेकर जी। छाया छोटी है, पर वह प्रकाश के कारण ही बनती है।
आँखों से देख लेना मन की चंचलता से उत्तम है: यह भी व्यर्थ और मानो वायु को पकड़ना है।"
जो तेरे हाथ में है, उसे देख। जो नहीं है, उसके पीछे मन दौड़ता रहता है, और थकता ही जाता है। सुलैमान कहता है, यह हवा पकड़ने जैसा है।
आज रुककर सोच: परमेश्वर ने जो दिया है, क्या तूने उसे सच में देखा भी है? या मन कहीं और भटक रहा है, किसी और जीवन के पीछे जो कभी तेरा था ही नहीं?
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