एज्रा 10
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
यह क्या कहता है
यरूशलेम में परमेश्वर का घर था। उसके सामने एक बड़ा आँगन था।
उस आँगन में ज़मीन पर एक आदमी पड़ा था। उसका नाम एज्रा था। एज्रा रो रहा था। बड़े-बड़े आँसू। वह परमेश्वर से बात कर रहा था।
क्यों रो रहा था एज्रा? क्योंकि लोग परमेश्वर को भूल गए थे। वे वैसा नहीं कर रहे थे, जैसा परमेश्वर ने कहा था।
फिर लोग आने लगे। पहले थोड़े। फिर बहुत। आदमी आए। औरतें आईं। बच्चे भी आए। बहुत बड़ी भीड़। और सब रो रहे थे।
तब एक आदमी खड़ा हुआ। उसका नाम शकन्याह था। उसने कहा, "हमने बुरा किया है। पर सुनो! अब भी आशा है।"
एज्रा उठा। उसने रोटी नहीं खाई। उसने पानी नहीं पिया। वह बहुत दुखी था।
फिर सब जगह ख़बर गई। "सब लोग यरूशलेम में आओ!"
और लोग आए। बहुत, बहुत लोग।
उस दिन बारिश हुई। बहुत तेज़ बारिश। और बारिश होती रही। और होती रही।
सब लोग आँगन में बैठे थे। भीगे हुए। ठंडे। काँपते हुए।
तब एज्रा खड़ा हुआ। उसने ज़ोर से कहा, "परमेश्वर से कहो कि तुमने बुरा किया। और अब वैसा करो जैसा परमेश्वर कहते हैं।"
फिर सब लोगों ने मिलकर ज़ोर से कहा, "हाँ! हम वैसा ही करेंगे!"
इसका क्या मतलब है?
यह आसान नहीं था। बिलकुल आसान नहीं।
लोगों को बहुत कुछ बदलना पड़ा। उन्हें बहुत दुख हुआ। वे रोए भी।
पर वे परमेश्वर के पास लौट आए। वे फिर परमेश्वर के लोग बनना चाहते थे।
और परमेश्वर? परमेश्वर ने उनका रोना सुना। परमेश्वर हमेशा सुनते हैं। जब कोई कहता है, "मुझसे गलती हुई", तब परमेश्वर सुनते हैं।
जोड़ने वाला धागा
परमेश्वर ने इन लोगों को नहीं छोड़ा। कभी नहीं।
वे उनके पास आते रहे। बार-बार।
और बहुत साल बाद परमेश्वर ने कुछ और किया। वे स्वयं आए। एक छोटे बच्चे के रूप में। उसका नाम यीशु था।
यीशु हमारा सब बुरा अपने ऊपर ले लेते हैं। सब कुछ।
इसलिए हमें ठंडी बारिश में बैठकर काँपना नहीं पड़ता। हम सीधे यीशु के पास जा सकते हैं।
तुम्हारे लिए
कभी तुमने कुछ बुरा किया? किसी को मारा? कुछ छिपाया?
तब तुम्हारे पेट में एक भारी गाँठ बन जाती है। भारी और बुरी।
तुम परमेश्वर से कह सकते हो, "मुझसे गलती हुई।"
तुम्हें यरूशलेम जाने की ज़रूरत नहीं। तुम अपने बिस्तर में कह सकते हो। परमेश्वर सुनते हैं।
और फिर वह भारी गाँठ चली जाती है।
इस पर बात करें
तेज़ बारिश में भीगकर बैठना कैसा लगता है? ठंडा या गरम?
तुम परमेश्वर से क्या कहना चाहोगे?
मिलकर प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर,
कभी-कभी मैं बुरा करता हूँ। आप उसे जानते हैं।
मुझे माफ़ कर दीजिए।
धन्यवाद कि आप हमेशा सुनते हैं।
आमीन।
एज्रा 10 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
एज्रा 10 किस विषय में है?
एज्रा 10 क्या कहता है?
एज्रा 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे एज्रा 10 से क्या सीख सकते हैं?
एज्रा 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
शकन्याह ने पाप को हल्का नहीं किया। उसने कहा, "हम लोगों ने अपने परमेश्वर का विश्वासघात करके इस देश की अन्यजाति स्त्रियों से विवाह कर लिया है।" हम, न कि वे। और उसी साँस में उसने जोड़ा, "तो भी इस्राएल के लिये अब भी आशा है।" सच्चा पश्चाताप पाप को छोटा नहीं करता, वह परमेश्वर को बड़ा करता है। तू अपनी गलती कब तक छिपाकर रखेगा?
एज्रा ने वह पाप नहीं किया था, फिर भी उसी का शोक उसे खा रहा था। "उसने न तो रोटी खाई, न पानी पिया, क्योंकि वह बन्धुआई से आए हुओं के विश्वासघात के कारण शोक करता रहा।" और यह शोक उसने भीड़ के सामने नहीं, एक बन्द कोठरी में किया। दूसरों के पाप पर हमारी पहली प्रतिक्रिया क्या होती है, उँगली उठाना या घुटने टेकना?
नामों की एक सूखी सूची, और बस। पर हर नाम के पीछे एक टूटा हुआ आदमी खड़ा है, जिसने अपनी गलती मानी: "हारीम की सन्तान में से मासेयाह, एलिय्याह, शमायाह, यहीएल और उज्जियाह।" ये याजक थे, जिन्हें दूसरों को राह दिखानी थी। फिर भी उनके नाम छिपाए नहीं गए। सच्चा पश्चाताप गुमनाम नहीं रहता। तू अपनी भूल किसके सामने नाम लेकर मानने को तैयार है?
पहले महीने के पहले दिन तक उन्होंने उन सब पुरुषों की जाँच पूरी कर ली।" पूरे तीन महीने लगे। भीड़ का फैसला एक साथ नहीं हुआ, हर आदमी का नाम अलग से देखा गया। पाप से निपटना जल्दबाज़ी का काम नहीं। परमेश्वर तुझे भी झुंड में नहीं, नाम लेकर बुलाता है। और जो टेढ़ा है, उसे सुलझाने में समय लगता है। क्या तू उतना समय देने को तैयार है?
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