एज्रा 10
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
एज्रा परमेश्वर के भवन के सामने ज़मीन पर पड़ा है। वह रो रहा है, प्रार्थना कर रहा है, और लोगों के पाप को खुलकर मान रहा है। और तब कुछ होता है: लोग आने लगते हैं। पुरुष, स्त्रियाँ, बच्चे, एक बहुत बड़ी भीड़। और वे भी बिलख-बिलख कर रोते हैं। कभी-कभी एक व्यक्ति का सच्चा दुःख पूरी भीड़ को छू जाता है।
शकन्याह नाम का एक आदमी बोलता है। वह बात को छिपाता नहीं: "हम लोगों ने… अपने परमेश्वर का विश्वासघात तो किया है।" विश्वासघात का मतलब है भरोसा तोड़ना। लोगों ने आसपास की जातियों की स्त्रियों से विवाह किया था, ऐसी स्त्रियों से जो दूसरे देवताओं को पूजती थीं। यह सिर्फ़ एक नियम तोड़ना नहीं था। यही वह रास्ता था जिस पर चलकर इस्राएल पहले परमेश्वर को भूल बैठा था और बँधुआई में चला गया था। अब, मुश्किल से लौटने के बाद, वही रास्ता दोबारा शुरू हो रहा था।
पर शकन्याह एक और बात कहता है, और यह सबसे सुंदर वाक्य है: "इस दशा में भी इस्राएल के लिये आशा है।"
फिर एक कठोर फ़ैसला होता है। लोग परमेश्वर से वाचा बाँधते हैं, यानी एक पक्का वादा, कि वे उन स्त्रियों को और उनके बच्चों को दूर करेंगे। एज्रा अगुवों को शपथ खिलाता है। वह खुद न रोटी खाता है, न पानी पीता है, इतना दुःख उसे है।
सब लोगों को यरूशलेम बुलाया जाता है, तीन दिन के भीतर। जो न आए, उसकी सम्पत्ति जब्त होगी और वह मण्डली से अलग कर दिया जाएगा। नौवें महीने के बीसवें दिन सब लोग भवन के चौक में बैठे हैं और काँप रहे हैं, दो कारणों से: उस भारी बात के कारण, और भारी वर्षा के कारण। भीगते हुए, ठिठुरते हुए, वे सुनते हैं।
लोग मान जाते हैं, पर वे व्यावहारिक भी हैं: "यह दो एक दिन का काम नहीं है।" इसलिए अगुवे नियुक्त किए जाते हैं। केवल चार आदमी इसके विरुद्ध खड़े होते हैं। जाँच तीन महीने चलती है। और फिर आती है एक लम्बी सूची, नाम पर नाम, याजक, लेवीय, गवैये, द्वारपाल, आम लोग। अध्याय खत्म होता है एक भारी वाक्य से: उनमें से बहुतों के बच्चे भी थे।
What Does This Mean?
यह अध्याय आसान नहीं है, और मैं इसे आसान बनाकर तुम्हें नहीं दूँगा।
पहली बात जो साफ़ है: पाप का असर सिर्फ़ मेरे ऊपर नहीं पड़ता। यहाँ पूरी मण्डली रो रही है, क्योंकि जो कुछ हुआ उसने सबको छुआ।
दूसरी बात: सच्चा पछतावा सिर्फ़ आँसू नहीं होता। लोग रोते भी हैं और कुछ करते भी हैं। यह उन्हें महँगा पड़ता है।
और अब वह बात जो सचमुच कठिन है। इन स्त्रियों और बच्चों का आगे क्या हुआ, बाइबल हमें नहीं बताती। अध्याय के आख़िरी शब्द बच्चों के बारे में हैं, और फिर किताब खत्म हो जाती है। कोई तालियाँ नहीं, कोई सुखद अंत नहीं। मुझे यह पढ़कर दर्द होता है, और शायद तुम्हें भी। मेरे पास इसका कोई साफ़-सुथरा जवाब नहीं है। मुझे यह अच्छा लगता है कि बाइबल इसे छिपाती नहीं। वह ईमानदार है, तब भी जब कहानी टेढ़ी और दुखदायी हो। परमेश्वर हमें ऐसी किताब देते हैं जिसमें सवाल पूछने की जगह है।
The Common Thread
ध्यान दो कि वे याजक क्या करते हैं जिन्होंने गलती की थी: वे अपने दोष के कारण एक-एक मेढ़ा बलि करते हैं। एक जानवर मरता है, ताकि दोषी आदमी जी सके। पूरा पुराना नियम ऐसी बलियों से भरा है, और हर बलि एक इशारा है, आगे की ओर।
यीशु मसीह वह अंतिम बलि हैं। वे खुद दूर किए गए, शहर के बाहर, ताकि हमें दूर न किया जाए। और यहीं इस अध्याय की सबसे बड़ी पलटी आती है: एज्रा के दिनों में लोगों को शुद्ध रहने के लिए बाहरवालों को दूर करना पड़ा। यीशु दूसरी दिशा में काम करते हैं। वे बाहरवालों को अंदर बुलाते हैं और उन्हें भीतर से शुद्ध करते हैं। शकन्याह का वाक्य, "इस दशा में भी आशा है", यीशु में पूरा होता है।
For You
तुम्हारे साथ शायद ऐसा हुआ हो कि तुमने कुछ गलत किया और उसे ठीक करना सिर्फ़ "सॉरी" कहने से ज़्यादा लगा। एज्रा 10 यही दिखाता है: कभी-कभी मरम्मत लम्बी चलती है, तीन महीने की सूची जितनी लम्बी।
और यह भी सोचो: इस्राएल की गलती एक दिन में नहीं हुई थी। वह धीरे-धीरे हुई, छोटे-छोटे कदमों से। जिनके साथ तुम सबसे ज़्यादा समय बिताते हो, जो चीज़ें तुम रोज़ देखते और सुनते हो, वे चुपचाप तुम्हारा दिल बनाती हैं। यह डरने की बात नहीं, ध्यान देने की बात है।
आख़िर में, वह लम्बी नामों की सूची। परमेश्वर उन लोगों का नाम भी दर्ज करते हैं जिन्होंने गड़बड़ की। तुम भी उनके लिए एक नाम हो, कोई भीड़ नहीं।
Talk About It
इस अध्याय में तुम्हें सबसे कठिन क्या लगा, और अगर तुम एज्रा से एक सवाल पूछ सकते, तो क्या पूछते?
शकन्याह कहता है कि "इस दशा में भी आशा है।" तुम्हें कब लगा कि अब कोई उम्मीद नहीं बची, और तब क्या हुआ?
Praying Together
प्रभु परमेश्वर, यह कहानी हमें भारी लगती है, और कुछ सवाल हमारे पास रह जाते हैं। हम उन्हें आपके सामने रखते हैं। हमें ईमानदार बनाइए, जैसे एज्रा ईमानदार था। और धन्यवाद कि यीशु मसीह में हमारे लिए आशा है, आमीन।
एज्रा 10 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
एज्रा 10 किस विषय में है?
एज्रा 10 क्या कहता है?
एज्रा 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे एज्रा 10 से क्या सीख सकते हैं?
एज्रा 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
शकन्याह ने पाप को हल्का नहीं किया। उसने कहा, "हम लोगों ने अपने परमेश्वर का विश्वासघात करके इस देश की अन्यजाति स्त्रियों से विवाह कर लिया है।" हम, न कि वे। और उसी साँस में उसने जोड़ा, "तो भी इस्राएल के लिये अब भी आशा है।" सच्चा पश्चाताप पाप को छोटा नहीं करता, वह परमेश्वर को बड़ा करता है। तू अपनी गलती कब तक छिपाकर रखेगा?
एज्रा ने वह पाप नहीं किया था, फिर भी उसी का शोक उसे खा रहा था। "उसने न तो रोटी खाई, न पानी पिया, क्योंकि वह बन्धुआई से आए हुओं के विश्वासघात के कारण शोक करता रहा।" और यह शोक उसने भीड़ के सामने नहीं, एक बन्द कोठरी में किया। दूसरों के पाप पर हमारी पहली प्रतिक्रिया क्या होती है, उँगली उठाना या घुटने टेकना?
नामों की एक सूखी सूची, और बस। पर हर नाम के पीछे एक टूटा हुआ आदमी खड़ा है, जिसने अपनी गलती मानी: "हारीम की सन्तान में से मासेयाह, एलिय्याह, शमायाह, यहीएल और उज्जियाह।" ये याजक थे, जिन्हें दूसरों को राह दिखानी थी। फिर भी उनके नाम छिपाए नहीं गए। सच्चा पश्चाताप गुमनाम नहीं रहता। तू अपनी भूल किसके सामने नाम लेकर मानने को तैयार है?
पहले महीने के पहले दिन तक उन्होंने उन सब पुरुषों की जाँच पूरी कर ली।" पूरे तीन महीने लगे। भीड़ का फैसला एक साथ नहीं हुआ, हर आदमी का नाम अलग से देखा गया। पाप से निपटना जल्दबाज़ी का काम नहीं। परमेश्वर तुझे भी झुंड में नहीं, नाम लेकर बुलाता है। और जो टेढ़ा है, उसे सुलझाने में समय लगता है। क्या तू उतना समय देने को तैयार है?
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