3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

होशे 5

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यह बहुत पुराने समय की बात है। सुनो, यह एक कहानी है। परमेश्वर की, और उनके लोगों की। उनके लोगों का नाम था इस्राएल। याजक थे। राजा थे। पर सबका दिल परमेश्वर से दूर चला गया था। बहुत दूर।

एक समय था। इस्राएल के लोग परमेश्वर की बात नहीं मानते थे। वे झूठ बोलते थे। वे एक दूसरे को दुख देते थे। परमेश्वर यह सब देख रहे थे। कुछ भी उनसे छिपा नहीं था। एक भी बात नहीं। परमेश्वर ने कहा, "मैं एप्रैम का भेद जानता हूँ। इस्राएल की दशा मुझसे छिपी नहीं है।"

एक दिन इस्राएल के लोगों ने अपनी भेड़-बकरियाँ लीं। अपने गाय-बैल भी लिए। वे परमेश्वर को ढूँढ़ने निकले। वे चले, और चले, और चले। धूप गरम थी। पैरों में धूल थी। रास्ता लंबा था। भेड़ें मी-मी करती थीं। बैल हांफते थे। सब थक गए थे। पर परमेश्वर उन्हें न मिले। एक भी नहीं। इसका कारण क्या था? परमेश्वर उनसे दूर हो गए थे। नहीं, परमेश्वर ने उन्हें नहीं छोड़ा। पर उनका मन बहुत दूर भटक गया था। बहुत दूर।

What Does This Mean?

यह उदास बात है, बहुत उदास। परमेश्वर का दिल भी दुखता था। जब हम परमेश्वर की बात नहीं सुनते। हम उनसे दूर चले जाते हैं। जैसे कोई अपने घर से बहुत दूर भाग जाए। और फिर रास्ता भूल जाए। परमेश्वर दूर जाना नहीं चाहते थे। परमेश्वर चाहते थे, वे उनके पास वापस आएँ। पर लोग गलत रास्ते पर भागते रहे। इसलिए परमेश्वर ने कहा, वे अपने घर लौट जाएँगे। वे तब तक रुकेंगे। जब तक लोग सच में उन्हें ढूँढ़ें।

The Common Thread

पर सुनो, एक बात बहुत खास है। परमेश्वर ने कहा, "जब वे संकट में पड़ेंगे, तब जी लगाकर मुझे ढूँढ़ने लगेंगे।" परमेश्वर इंतज़ार कर रहे थे। जैसे एक पापा इंतज़ार करता है। दरवाज़े पर खड़ा, अपने बच्चे के लौटने का। परमेश्वर चाहते थे, लोग सच में उन्हें ढूँढ़ें। पूरे मन से। बाद में परमेश्वर ने यीशु मसीह को भेजा। यीशु ने घर वापस जाने का रास्ता दिखाया। यीशु हमेशा हमारे पास रहते हैं। वे कभी दूर नहीं जाते। अब हम परमेश्वर को पा सकते हैं। सच में, हमेशा के लिए।

For You

तुम भी परमेश्वर को ढूँढ़ सकते हो। तुम्हें भेड़-बकरी नहीं चाहिए। तुम्हें गाय-बैल भी नहीं चाहिए। तुम्हें बस अपना छोटा सा दिल चाहिए। तुम कह सकते हो, "परमेश्वर, मैं आपको ढूँढ़ रहा हूँ।" और परमेश्वर सुनते हैं। वे तुमसे दूर नहीं भागते। वे तुम्हारा इंतज़ार करते हैं। तुम आज रात भी उनसे बात कर सकते हो। सोने से पहले।

Talk About It

क्या तुमने कभी किसी को ढूँढ़ा है, जो दिखाई नहीं दे रहा था?

तुम परमेश्वर से आज क्या कहना चाहते हो?

Praying Together

प्रभु, हम आपको ढूँढ़ना चाहते हैं। हमें अपने पास आने दीजिए। आमीन।

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होशे 5 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

होशे 5 किस विषय में है?
यह बहुत पुराने समय की बात है। सुनो, यह एक कहानी है। परमेश्वर की, और उनके लोगों की। उनके लोगों का नाम था इस्राएल। याजक थे। राजा थे। पर सबका दिल परमेश्वर से दूर चला गया था। बहुत दूर।
होशे 5 क्या कहता है?
एक समय था। इस्राएल के लोग परमेश्वर की बात नहीं मानते थे। वे झूठ बोलते थे। वे एक दूसरे को दुख देते थे। परमेश्वर यह सब देख रहे थे। कुछ भी उनसे छिपा नहीं था। एक भी बात नहीं। परमेश्वर ने कहा, "मैं एप्रैम का भेद जानता हूँ। इस्राएल की दशा मुझसे छिपी नहीं है।"
होशे 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
एक दिन इस्राएल के लोगों ने अपनी भेड़-बकरियाँ लीं। अपने गाय-बैल भी लिए। वे परमेश्वर को ढूँढ़ने निकले। वे चले, और चले, और चले। धूप गरम थी। पैरों में धूल थी। रास्ता लंबा था। भेड़ें मी-मी करती थीं। बैल हांफते थे। सब थक गए थे। पर परमेश्वर उन्हें न मिले। एक भी नहीं। इसका कारण क्या था? परमेश्वर उनसे दूर हो गए थे। नहीं, परमेश्वर ने उन्हें नहीं छोड़ा। पर उनका मन बहुत दूर भटक गया था। बहुत दूर।
नन्हे बच्चे होशे 5 से क्या सीख सकते हैं?
यह उदास बात है, बहुत उदास। परमेश्वर का दिल भी दुखता था। जब हम परमेश्वर की बात नहीं सुनते। हम उनसे दूर चले जाते हैं। जैसे कोई अपने घर से बहुत दूर भाग जाए। और फिर रास्ता भूल जाए। परमेश्वर दूर जाना नहीं चाहते थे। परमेश्वर चाहते थे, वे उनके पास वापस आएँ। पर लोग गलत रास्ते पर भागते रहे। इसलिए परमेश्वर ने कहा, वे अपने घर लौट जाएँगे। वे तब तक रुकेंगे। जब तक लोग सच में उन्हें ढूँढ़ें।
होशे 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
पर सुनो, एक बात बहुत खास है। परमेश्वर ने कहा, "जब वे संकट में पड़ेंगे, तब जी लगाकर मुझे ढूँढ़ने लगेंगे।" परमेश्वर इंतज़ार कर रहे थे। जैसे एक पापा इंतज़ार करता है। दरवाज़े पर खड़ा, अपने बच्चे के लौटने का। परमेश्वर चाहते थे, लोग सच में उन्हें ढूँढ़ें। पूरे मन से। बाद में परमेश्वर ने यीशु मसीह को भेजा। यीशु ने घर वापस जाने का रास्ता दिखाया। यीशु हमेशा हमारे पास रहते हैं। वे कभी दूर नहीं जाते। अब हम परमेश्वर को पा सकते हैं। सच में, हमेशा के लिए।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

गिबा में नरसिंगा और रामाह में तुरही फूँको; बेतावेन में ललकारो!" ध्यान दो, जिस जगह का नाम कभी बेतेल यानी परमेश्वर का घर था, वही अब बेतावेन, यानी अनर्थ का घर कहलाती है। नाम वही जगह, पर भीतर से खोखली। तेरे जीवन में भी कोई ऐसा कोना है जो कभी प्रार्थना से भरा था और अब सिर्फ़ आदत रह गया? परमेश्वर वहाँ तुरही फूँक रहा है, नाश करने नहीं, तुझे जगाने के लिए।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

इस्राएल का अहंकार उसी के विरुद्ध साक्षी देता है।" परमेश्वर को गवाह ढूँढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ी। जिस घमंड को हम ताकत समझते हैं, वही अदालत में खड़ा होकर हमारे विरुद्ध बोलता है। और ध्यान दे, यहूदा भी उनके संग ठोकर खाता है। तेरा अकड़ा हुआ मन सिर्फ़ तुझे नहीं गिराता, तेरे साथ चलने वालों को भी लड़खड़ाता है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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