7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

होशे 5

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

होशे नबी के माध्यम से परमेश्वर तीन समूहों को बुलाते हैं: याजकों को, जो मंदिर में परमेश्वर की सेवा करते थे, इस्राएल के सारे घराने को, और राजा के घराने को। परमेश्वर कहते हैं कि उनका न्याय होने वाला है, क्योंकि वे मिस्पा और ताबोर जैसी जगहों पर, जहाँ लोग परमेश्वर की खोज में आते थे, फंदे और जाल बन गए हैं। सोचिए, जहाँ लोगों को परमेश्वर के पास आना चाहिए था, वहीं उन्हें फँसाया जा रहा था।

परमेश्वर कहते हैं कि वे एप्रैम और इस्राएल का भेद जानते हैं, कुछ भी छिपा नहीं है। यहाँ "छिनाला" शब्द का मतलब सिर्फ शारीरिक बेवफाई नहीं, बल्कि यह भी है कि इस्राएल ने परमेश्वर को छोड़कर मूर्तियों की पूजा शुरू कर दी थी, जैसे कोई अपने साथी को छोड़कर दूसरे के पास चला जाए। उनका गर्व उनके खिलाफ गवाही देता है, वे यहोवा को नहीं जानते।

फिर एक चौंकाने वाली बात आती है: लोग अपने पशु लेकर यहोवा को ढूँढ़ने निकलेंगे, पर वे उन्हें नहीं मिलेंगे, क्योंकि परमेश्वर उनसे दूर हो गए हैं। युद्ध की तुरही फूँकने की बात होती है, बिन्यामीन को चेतावनी दी जाती है। एप्रैम अश्शूर देश के राजा के पास मदद माँगने जाता है, पर परमेश्वर कहते हैं कि वह राजा उन्हें ठीक नहीं कर सकता। और अंत में परमेश्वर कहते हैं कि वे सिंह के समान बनेंगे, जो उन्हें पकड़ ले जाएगा, जब तक वे अपना अपराध मानकर परमेश्वर को खोजने न लगें।

What Does This Mean?

यह अध्याय पढ़ना आसान नहीं है। परमेश्वर यहाँ गुस्से में नहीं दिखते जैसे कोई बच्चा गुस्सा करता है, बल्कि एक ऐसे पिता की तरह जिसका दिल टूट गया है, क्योंकि उसके बच्चों ने उसे छोड़ दिया है। सबसे कठिन बात यह है: "वे यहोवा को ढूँढ़ेंगे, परन्तु वह उनको न मिलेगा।" यह डरावना लगता है। क्या परमेश्वर सच में छिप जाते हैं?

यहाँ ध्यान देने की बात है, इस्राएल के लोग परमेश्वर को नहीं ढूँढ़ रहे थे क्योंकि वे सच में उनसे मिलना चाहते थे। वे सिर्फ मुसीबत से बचना चाहते थे, इसलिए भेड़-बकरियाँ लेकर आए, जैसे कोई भेंट देकर परमेश्वर से कोई फायदा माँग रहा हो। असली दिल परमेश्वर की ओर नहीं फिरा था। और जब कोई अपना दिल न देकर सिर्फ मदद माँगे, तो वह खोज खोज नहीं होती।

The Common Thread

पूरी बाइबल में परमेश्वर हमें बताते हैं कि वे एक वाचा के परमेश्वर हैं, यानी उन्होंने अपने लोगों से एक पक्का वादा किया है कि वे उनके परमेश्वर रहेंगे। पर वाचा का मतलब यह भी है कि लोगों को अपनी तरफ से वफादार रहना है। होशे 5 में हम देखते हैं कि इस्राएल ने अपनी तरफ से वाचा तोड़ दी।

पर याद रखिए, यह पूरी कहानी का अंत नहीं है। परमेश्वर कहते हैं, "मैं अपने स्थान को न लौटूँगा, जब तक वे मुझे न ढूँढ़ें।" इसका मतलब है कि परमेश्वर इंतज़ार कर रहे हैं। वे हमेशा के लिए दूर नहीं रहना चाहते। यही परमेश्वर बाद में यीशु मसीह के द्वारा खुद ढूँढ़ने वालों के पास आते हैं। यीशु ने कहा कि वे खोई हुई भेड़ों को ढूँढ़ने आए हैं। जो सिंह होशे में डरावना है, वही परमेश्वर बाद में अपने बेटे को हमारे लिए घायल होने देते हैं, ताकि हमारा घाव भरे।

For You

कभी-कभी हम भी परमेश्वर के पास सिर्फ इसलिए जाते हैं क्योंकि कोई मुसीबत आई है, स्कूल में परीक्षा है या घर में झगड़ा हुआ है। यह गलत नहीं है, परमेश्वर मुसीबत में भी हमारी सुनते हैं। पर सवाल यह है कि क्या हम सिर्फ मुसीबत के समय याद करते हैं या रोज़ उनसे बात करना चाहते हैं, जैसे किसी सच्चे दोस्त से बात करते हैं। आज सोचिए, क्या मेरा परमेश्वर के साथ रिश्ता असली है, या मैं सिर्फ भेंट लेकर आता हूँ जब कुछ चाहिए?

Talk About It

अगर परमेश्वर सब कुछ जानते हैं, तो वे इस्राएल से इतने दुखी क्यों हुए? क्या तुम्हें लगता है परमेश्वर हमारी बेवफाई से भी दुखी होते हैं?

होशे में परमेश्वर सिंह की तरह डरावने और फिर भी इंतज़ार करने वाले पिता की तरह दिखते हैं, यह दोनों बातें एक साथ कैसे सच हो सकती हैं?

Praying Together

प्रभु, कभी-कभी हम आपको सिर्फ तब याद करते हैं जब कुछ मुश्किल होता है। हमें माफ़ कीजिए। हमें ऐसा दिल दीजिए जो सच में आपको खोजे, न सिर्फ आपकी मदद को। धन्यवाद कि आप इंतज़ार करते हैं, और यीशु में हमें फिर से अपने पास बुलाते हैं। आमेन।

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होशे 5 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

होशे 5 किस विषय में है?
होशे नबी के माध्यम से परमेश्वर तीन समूहों को बुलाते हैं: याजकों को, जो मंदिर में परमेश्वर की सेवा करते थे, इस्राएल के सारे घराने को, और राजा के घराने को। परमेश्वर कहते हैं कि उनका न्याय होने वाला है, क्योंकि वे मिस्पा और ताबोर जैसी जगहों पर, जहाँ लोग परमेश्वर की खोज में आते थे, फंदे और जाल बन गए हैं। सोचिए, जहाँ लोगों को परमेश्वर के पास आना चाहिए था, वहीं उन्हें फँसाया जा रहा था।
होशे 5 क्या कहता है?
फिर एक चौंकाने वाली बात आती है: लोग अपने पशु लेकर यहोवा को ढूँढ़ने निकलेंगे, पर वे उन्हें नहीं मिलेंगे, क्योंकि परमेश्वर उनसे दूर हो गए हैं। युद्ध की तुरही फूँकने की बात होती है, बिन्यामीन को चेतावनी दी जाती है। एप्रैम अश्शूर देश के राजा के पास मदद माँगने जाता है, पर परमेश्वर कहते हैं कि वह राजा उन्हें ठीक नहीं कर सकता। और अंत में परमेश्वर कहते हैं कि वे सिंह के समान बनेंगे, जो उन्हें पकड़ ले जाएगा, जब तक वे अपना अपराध मानकर परमेश्वर को खोजने न लगें।
होशे 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यहाँ ध्यान देने की बात है, इस्राएल के लोग परमेश्वर को नहीं ढूँढ़ रहे थे क्योंकि वे सच में उनसे मिलना चाहते थे। वे सिर्फ मुसीबत से बचना चाहते थे, इसलिए भेड़-बकरियाँ लेकर आए, जैसे कोई भेंट देकर परमेश्वर से कोई फायदा माँग रहा हो। असली दिल परमेश्वर की ओर नहीं फिरा था। और जब कोई अपना दिल न देकर सिर्फ मदद माँगे, तो वह खोज खोज नहीं होती।
बच्चे होशे 5 से क्या सीख सकते हैं?
पर याद रखिए, यह पूरी कहानी का अंत नहीं है। परमेश्वर कहते हैं, "मैं अपने स्थान को न लौटूँगा, जब तक वे मुझे न ढूँढ़ें।" इसका मतलब है कि परमेश्वर इंतज़ार कर रहे हैं। वे हमेशा के लिए दूर नहीं रहना चाहते। यही परमेश्वर बाद में यीशु मसीह के द्वारा खुद ढूँढ़ने वालों के पास आते हैं। यीशु ने कहा कि वे खोई हुई भेड़ों को ढूँढ़ने आए हैं। जो सिंह होशे में डरावना है, वही परमेश्वर बाद में अपने बेटे को हमारे लिए घायल होने देते हैं, ताकि हमारा घाव भरे।
होशे 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर परमेश्वर सब कुछ जानते हैं, तो वे इस्राएल से इतने दुखी क्यों हुए? क्या तुम्हें लगता है परमेश्वर हमारी बेवफाई से भी दुखी होते हैं?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

वे अपनी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों के साथ यहोवा को ढूँढ़ने जाएँगे, परन्तु उसे न पाएँगे; वह उनसे अलग हो गया है।" वे खाली हाथ नहीं आए थे। भेंट थी, भीड़ थी, बस मन नहीं था। सोच यह थी कि कुछ देकर परमेश्वर को मना लेंगे। पर वह सौदा नहीं चाहता, तुझे चाहता है। आज तेरी भेंट में क्या है, तेरा कुछ या तू?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

परमेश्वर कहते हैं, "मैं एप्रैम के लिये कीड़े के समान, और यहूदा के घराने के लिये सड़ाहट के समान ठहरूँगा।" कीड़ा शोर नहीं मचाता। वह चुपचाप कपड़े को खाता रहता है, और एक दिन तू उसे पहनता है और वह फट जाता है। कई बार परमेश्वर की ताड़ना धमाके से नहीं, धीरे-धीरे आती है। ठहरकर सोच, तेरे भीतर कौन सी चीज़ चुपके से कमज़ोर पड़ रही है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

उन्होंने यहोवा से विश्वासघात किया है" और उसका फल केवल उन तक नहीं रुका, उनके बच्चों तक पहुँचा। यही बात सबसे अधिक चुभती है। हम सोचते हैं कि हमारा समझौता बस हमारा निजी मामला है, पर घर के छोटे वही सीखते हैं जो हम जीते हैं। आज अपने दिल से पूछो, मेरे पीछे आने वाले मुझसे क्या विरासत में पा रहे हैं?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

गिबा में नरसिंगा और रामाह में तुरही फूँको; बेतावेन में ललकारो!" ध्यान दो, जिस जगह का नाम कभी बेतेल यानी परमेश्वर का घर था, वही अब बेतावेन, यानी अनर्थ का घर कहलाती है। नाम वही जगह, पर भीतर से खोखली। तेरे जीवन में भी कोई ऐसा कोना है जो कभी प्रार्थना से भरा था और अब सिर्फ़ आदत रह गया? परमेश्वर वहाँ तुरही फूँक रहा है, नाश करने नहीं, तुझे जगाने के लिए।

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

बच्चों की बाइबल टूल में खोलें

For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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