योएल 3
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
कहानी क्या कहती है
बहुत पहले की बात है। परमेश्वर के लोग बहुत दूर चले गए थे। वे अपने घर में नहीं थे।
बुरे लोग आए थे। उन्होंने उनकी चाँदी ले ली। उन्होंने उनका सोना ले लिया। उन्होंने बच्चों को पकड़कर दूर भेज दिया।
सोचो, एक छोटा लड़का। उसका घर पीछे छूट गया। उसकी माँ पीछे छूट गई। वह रोया। बहुत रोया।
क्या किसी ने देखा? हाँ। परमेश्वर ने देखा।
परमेश्वर सब कुछ देखते हैं। वे उस छोटे लड़के को देख रहे थे। और उनका मन दुखी हुआ।
तब परमेश्वर बोले। और उनकी आवाज़ बहुत बड़ी थी।
इसका क्या मतलब है
परमेश्वर की आवाज़ गरजी। जैसे बादल गरजते हैं। ग-ड़-ग-ड़! आसमान हिल गया। ज़मीन हिल गई।
परमेश्वर ने कहा, "मैंने सब देखा। तुमने मेरे बच्चों को दुख दिया।"
बुरे लोग डर गए। बहुत डर गए।
पर सुनो, परमेश्वर के अपने लोग डरे नहीं। जानते हो क्यों?
क्योंकि परमेश्वर उनके लिए एक घर थे। एक मज़बूत, सुरक्षित घर।
जब बाहर तूफ़ान आता है, तो तुम कहाँ जाते हो? अंदर। घर के अंदर। पापा की गोद में।
ऐसे ही परमेश्वर के लोग उनके पास छिप गए। और वहाँ वे सुरक्षित थे। बिलकुल सुरक्षित।
एक ही धागा
और फिर परमेश्वर ने कुछ सुंदर कहा।
उन्होंने कहा, "मैं तुम्हें वापस लाऊँगा। घर वापस।"
और वह घर कैसा होगा? सुनो।
पहाड़ों से मीठा रस टपकेगा। टप। टप। टप।
छोटी पहाड़ियों से दूध बहेगा। सफ़ेद, ठंडा दूध।
और सारी नदियाँ पानी से भर जाएँगी। छल-छल, छल-छल।
और परमेश्वर के घर में से एक झरना निकलेगा। साफ़ पानी। ठंडा पानी। कभी न खत्म होने वाला पानी।
वहाँ कोई नहीं रोएगा। कोई किसी को नहीं ले जाएगा। परमेश्वर वहीं रहेंगे, अपने लोगों के बीच में।
परमेश्वर ने यह कहा था। और परमेश्वर जो कहते हैं, वह करते हैं।
तुम्हारे लिए
क्या तुम्हें कभी डर लगता है?
शायद रात को, जब अँधेरा होता है। शायद जब कोई तुम पर चिल्लाता है। शायद जब तुम अकेले हो।
सुनो, प्यारे बच्चे।
परमेश्वर देखते हैं। वे तुम्हें देखते हैं। ठीक अभी।
और वे तुम्हारे लिए एक घर हैं। एक छिपने की जगह।
तुम उनके पास जा सकते हो। तुम कह सकते हो, "परमेश्वर, मुझे डर लग रहा है।"
और वे सुनेंगे। वे हमेशा सुनते हैं।
बात करें
अगर तुम्हें डर लगे, तो तुम कहाँ छिपना चाहोगे?
परमेश्वर के घर में मीठा रस और दूध बहेगा। तुम वहाँ क्या देखना चाहोगे?
मिलकर प्रार्थना करें
प्यारे परमेश्वर,
आप सब कुछ देखते हैं। आप मुझे भी देखते हैं।
जब मुझे डर लगे, मैं आपके पास आऊँगा।
आप मेरा सुरक्षित घर हैं।
धन्यवाद।
आमीन।
योएल 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
योएल 3 किस विषय में है?
योएल 3 क्या कहता है?
योएल 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे योएल 3 से क्या सीख सकते हैं?
योएल 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
क्योंकि देखो, उन दिनों में और उस समय, जब मैं यहूदा और यरूशलेम को बँधुआई से लौटा लाऊँगा," परमेश्वर कहता है। ध्यान दे, लौटाने वाला वही है। जो तुझसे छीन लिया गया, वह उसे भूला नहीं है। तेरी घड़ी तेरे हाथ में नहीं, उसके हाथ में है, और वह देर से आने वाला नहीं, ठीक समय पर आने वाला है।
जिस आवाज़ से आकाश और पृथ्वी थरथराते हैं, वही आवाज़ तेरे लिए शरण बन जाती है। "परन्तु यहोवा अपनी प्रजा के लिये शरणस्थान, और इस्राएलियों के लिये गढ़ ठहरेगा।" सोच, जो गरजना जातियों को डराता है, वही तुझे ढाँप लेता है। तेरा डर इसलिए नहीं जाता कि तूफ़ान छोटा है, बल्कि इसलिए कि जो गरजता है, वह तेरी ओर है।
अपने हलों को पीटकर तलवारें, और अपनी हँसियों को पीटकर बर्छियाँ बनाओ" यह आवाहन नहीं, ताना है। परमेश्वर जातियों को उनके अपने घमंड के साथ न्याय की घाटी में बुला रहा है। और सबसे दुखद पंक्ति यह है, "जो बलहीन हो वह भी कहे, 'मैं वीर हूँ।'" कमज़ोर आदमी का खुद को योद्धा कहना। कहीं तुम भी तो अपनी उगाने वाली चीज़ों को काटने वाले हथियारों में नहीं ढाल रहे?
और मेरी प्रजा पर चिट्ठी डाली, और एक लड़के को वेश्या के बदले में दे दिया, और एक लड़की को दाखमधु के बदले में बेचकर पी गए।" एक बच्चा, एक रात के नशे के बराबर। परमेश्वर यह भूला नहीं। जिन्हें दुनिया ने सस्ता आँका, उनका मोल वह खुद चुकाता है। सोच, तूने किसे इतना कम मूल्य का समझ रखा है?
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