3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

यहोशू 24

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यह एक धूप वाला दिन था। शेकेम नाम की जगह पर बहुत लोग इकट्ठे हुए। माताएँ, पिता, दादा और दादी। और बहुत से बच्चे भी। सब चुप हो गए। क्योंकि अब यहोशू बोलने वाला था।

यहोशू बहुत बूढ़ा था। उसके बाल सफ़ेद थे। उसके कदम धीमे थे। पर उसकी आवाज़ अभी भी ज़ोर की थी।

"सुनो," यहोशू ने कहा। "याद करो परमेश्वर ने क्या किया।"

और फिर वह बताने लगा।

परमेश्वर अब्राहम को एक दूर देश से यहाँ लाए। परमेश्वर लोगों को मिस्र से बाहर लाए। वहाँ वे गुलाम थे। वहाँ उन्हें रोना पड़ता था।

फिर वे बड़े समुद्र के किनारे पहुँचे। पीछे घोड़े और रथ आ रहे थे। धूल उड़ रही थी। लोग बहुत डर गए। बहुत, बहुत डर गए। उन्होंने परमेश्वर को पुकारा। और परमेश्वर ने पानी से उन्हें बचा लिया।

फिर बहुत दिन तक वे जंगल में रहे। रेत गरम थी। रातें ठंडी थीं। पर परमेश्वर साथ रहे। हर दिन साथ रहे।

और अब? अब उनके पास घर थे। ऐसे घर जो उन्होंने बनाए भी नहीं थे। और बगीचे थे। अंगूर के मीठे बगीचे। ये पेड़ उन्होंने लगाए भी नहीं थे। परमेश्वर ने उन्हें सब दिया था।

इसका क्या अर्थ है?

यहोशू ने चारों तरफ़ देखा। सब लोग सुन रहे थे।

तब यहोशू ने कहा: "आज चुन लो। तुम किसकी सेवा करोगे?"

क्योंकि उस देश में लोग पत्थर की मूर्तियों को पूजते थे। वे मूर्तियाँ कुछ नहीं कर सकती थीं। वे सुन नहीं सकती थीं। वे बचा नहीं सकती थीं।

फिर यहोशू खड़ा हुआ, बिल्कुल सीधा। उसने कहा: "मैं तो अपने घराने समेत यहोवा ही की सेवा नित करूँगा।"

तब सब लोग एक साथ बोले। जोर से बोले: "हम भी! हम परमेश्वर की ही सेवा करेंगे। वही हमारा परमेश्वर है!"

जोड़नेवाला सूत्र

तब यहोशू ने कुछ किया। उसने एक बड़ा पत्थर उठवाया। एक भारी, बड़ा पत्थर। वह उसे एक बड़े पेड़ के नीचे खड़ा किया।

"देखो," यहोशू ने कहा। "यह पत्थर सब सुन चुका है। यह याद रखेगा जो तुमने आज कहा।"

और वहाँ वह पत्थर खड़ा रहा। धूप में। बारिश में। हर दिन।

परमेश्वर भी याद रखते हैं। परमेश्वर कभी नहीं भूलते। वे हमेशा अपना वादा निभाते हैं। इतना, कि बाद में वे प्रभु यीशु को भेजा। यीशु हमें कभी नहीं छोड़ते।

तुम्हारे लिए

तुम अभी छोटे हो। पर तुम भी वही कह सकते हो जो वे लोग बोले।

कल सुबह, जब तुम उठो, तुम कह सकते हो: "परमेश्वर, मैं आपका हूँ।"

और अगर तुम कभी बाहर एक पत्थर देखो, तो उसे हाथ में लो। ठंडा और भारी। और सोचो: परमेश्वर याद रखते हैं। परमेश्वर मुझसे प्यार करते हैं।

इसके बारे में बात करो

परमेश्वर ने उन लोगों के लिए क्या-क्या अच्छा किया? क्या तुम एक बात बता सकते हो?

परमेश्वर ने तुम्हें क्या अच्छी चीज़ें दी हैं?

मिलकर प्रार्थना

परमेश्वर, आप बहुत अच्छे हैं। आपने उन लोगों को बचाया। आप मुझे भी नहीं भूलते। मैं भी आपका होना चाहता हूँ। आमीन।

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यहोशू 24 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहोशू 24 किस विषय में है?
यह एक धूप वाला दिन था। शेकेम नाम की जगह पर बहुत लोग इकट्ठे हुए। माताएँ, पिता, दादा और दादी। और बहुत से बच्चे भी। सब चुप हो गए। क्योंकि अब यहोशू बोलने वाला था।
यहोशू 24 क्या कहता है?
फिर वे बड़े समुद्र के किनारे पहुँचे। पीछे घोड़े और रथ आ रहे थे। धूल उड़ रही थी। लोग बहुत डर गए। बहुत, बहुत डर गए। उन्होंने परमेश्वर को पुकारा। और परमेश्वर ने पानी से उन्हें बचा लिया।
यहोशू 24 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर यहोशू खड़ा हुआ, बिल्कुल सीधा। उसने कहा: "मैं तो अपने घराने समेत यहोवा ही की सेवा नित करूँगा।"
नन्हे बच्चे यहोशू 24 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर भी याद रखते हैं। परमेश्वर कभी नहीं भूलते। वे हमेशा अपना वादा निभाते हैं। इतना, कि बाद में वे प्रभु यीशु को भेजा। यीशु हमें कभी नहीं छोड़ते।
यहोशू 24 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
परमेश्वर ने उन लोगों के लिए क्या-क्या अच्छा किया? क्या तुम एक बात बता सकते हो?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 25

शेकेम में यहोशू ने लोगों की भावना पर भरोसा नहीं किया, उसने वाचा बाँधी: "उसी दिन यहोशू ने लोगों के साथ वाचा बाँधी, और शेकेम में उनके लिये विधि और नियम ठहराए।" भीड़ ने कहा था, हम यहोवा की सेवा करेंगे। पर कहना आसान है, बँधना कठिन। तेरे मन का वादा कहीं लिखा गया है, या बस उस दिन की भावना में बह गया?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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