यहोशू 24
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
यहोशू अब बहुत बूढ़ा हो चुका है। उसकी उम्र एक सौ दस वर्ष है, और वह जानता है कि उसके दिन गिनती के हैं। वह इस्राएल के सारे गोत्रों को शेकेम में बुलाता है। यह जगह यूँ ही नहीं चुनी गई, यहीं कभी अब्राहम ने परमेश्वर के लिए वेदी बनाई थी। यहाँ इतिहास की मिट्टी है।
यहोशू खुद बोलना शुरू नहीं करता। वह कहता है, "यहोवा यह कहता है।" फिर वह इस्राएल का पूरा इतिहास दोहराता है, पर एक अजीब तरीके से। हर वाक्य में "मैंने" है। मैंने अब्राहम को बुलाया। मैंने इसहाक दिया। मैंने तुम्हें मिस्र से निकाला। मैंने समुद्र को उन पर बहा दिया। मैंने तुम्हें ऐसा देश दिया जिसमें तुमने परिश्रम नहीं किया, ऐसे नगर जिन्हें तुमने नहीं बसाया, ऐसे दाख के बगीचे जिन्हें तुमने नहीं लगाया।
यह इतिहास का पाठ नहीं है, यह याद दिलाना है। सब कुछ परमेश्वर ने किया।
फिर यहोशू बात को मोड़ता है। "अब चुन लो।" वह दो विकल्प रखता है, वे देवता जिन्हें उनके पुरखे फरात के उस पार पूजते थे, या एमोरियों के देवता। और फिर वह वाक्य आता है जो हज़ारों सालों से गूँज रहा है, "परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा ही की सेवा नित करूँगा।"
लोग जोश से जवाब देते हैं, "हम भी यहोवा की सेवा करेंगे।" पर यहोशू उन्हें सस्ते में नहीं छोड़ता। वह कहता है, "तुमसे यह हो नहीं सकेगा। वह पवित्र परमेश्वर है, जलन रखनेवाला परमेश्वर है।" यह अजीब लगता है, जैसे वह उन्हें रोक रहा हो। पर वह उन्हें झकझोर रहा है। "क्या तुम समझते हो कि तुम क्या कह रहे हो?"
लोग फिर भी हाँ कहते हैं। यहोशू एक बड़ा पत्थर उठाकर वहाँ खड़ा करता है, गवाही के रूप में। "यह पत्थर सुन चुका है। यह याद रखेगा।" फिर वह अध्याय यहोशू, यूसुफ की हड्डियों, और एलीआज़ार की मृत्यु के साथ बंद होता है। एक पूरा युग समाप्त हो जाता है।
What Does This Mean?
यहोशू 24 एक निर्णय की जगह है। यहोशू लोगों को यह बताने में समय नहीं गँवाता कि यहोवा क्यों सबसे अच्छा है। वह इतिहास दिखाता है और फिर कहता है, चुनो।
गौर करने वाली बात यह है, वह विकल्प देता है। "यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो।" परमेश्वर किसी को मजबूर नहीं करता। यह ईमानदार धर्म है। ईमानदार आस्था।
पर उतनी ही ईमानदार वह चेतावनी है जो यहोशू देता है। "यह हल्की बात नहीं है।" परमेश्वर की सेवा करना कोई अनुष्ठान नहीं है जो तुम रविवार को निपटा दो। यह एक वाचा है, एक बंधन। और परमेश्वर ऐसा नहीं है जो आधे मन को स्वीकार करे। वह "जलन रखनेवाला" है, यानी वह चाहता है कि तुम पूरे हो, बँटे हुए नहीं।
तीन बार लोग हाँ कहते हैं। यहोशू तीन बार पूछता है। क्योंकि वह जानता है, कल जब मुश्किल आएगी, यह क्षण मायने रखेगा।
The Common Thread
यहोशू 24 पूरी बाइबल की एक छोटी तस्वीर है। परमेश्वर पहले कुछ करता है, फिर वह हमसे जवाब माँगता है। "मैंने तुम्हें बुलाया, मैंने तुम्हें छुड़ाया, मैंने तुम्हें दिया।" इसके बाद, "अब तुम चुनो।"
यही वह पैटर्न है जो यीशु में अपनी पूर्णता पाता है। क्रूस पर यीशु ने वह किया जो हम नहीं कर सकते थे। "मैंने तुम्हें छुड़ाया।" और फिर वह हर एक से पूछता है, "तुम मुझे क्या कहते हो?" कोई ज़बरदस्ती नहीं। बस एक बुलाहट।
यहोशू ने कहा था, "तुमसे यहोवा की सेवा नहीं हो सकती।" वह सही था। हमसे नहीं होता, अपने बल पर। इसीलिए यीशु आया। वह पवित्र आत्मा देता है, ताकि जो हम अपने आप नहीं कर सकते, वह हममें हो सके।
और वह पत्थर जो शेकेम में गड़ा था? आज हमारे लिए वह पत्थर बपतिस्मा है, प्रभु भोज है, वह क्षण जब हमने कहा, "हाँ, मैं भी।"
For You
तुम्हारी उम्र में ज़्यादातर फैसले अभी सामने आ रहे हैं। कौन-सा दोस्त सर्कल? कौन-सी पहचान? क्या सच है, क्या झूठ? इंस्टाग्राम पर कौन-सी छवि? रविवार को चर्च या नींद?
यहोशू का सवाल तुम्हारे सामने भी है, बस कपड़े बदले हुए। "आज चुन लो।" तुम्हारे "एमोरियों के देवता" शायद पैसा हैं, शायद लोगों की स्वीकृति, शायद रिश्ते, शायद अपनी परफेक्ट इमेज। ये देवता चिल्लाते नहीं, वे फुसफुसाते हैं। और वे तुम्हारा समय, तुम्हारा ध्यान, तुम्हारा दिल थोड़ा-थोड़ा करके ले लेते हैं।
एक बात नोट करो। यहोशू ने नहीं कहा, "एक बार चुन लो।" यह एक रोज़ का चुनाव है। हर सुबह। क्योंकि दिल भटकता है।
और अगर तुम आज ईमानदार हो और कहते हो, "मुझे नहीं पता, मैं सच में यकीन करता हूँ या नहीं?" तो यह भी ठीक है। यहोशू ने आधे-अधूरे जवाब स्वीकार नहीं किए। परमेश्वर तुम्हारी ईमानदारी को तुम्हारे दिखावे से ज़्यादा पसंद करता है। संदेह के साथ आना, नकली विश्वास से बेहतर है।
Talk About It
तुम्हारी ज़िंदगी में वे "छोटे देवता" कौन-से हैं जिन्हें छोड़ना सबसे मुश्किल है, वे जो चुपचाप तुम्हारे दिल का बड़ा हिस्सा माँगते हैं?
यहोशू ने कहा, "तुमसे यह हो नहीं सकेगा।" इसका क्या मतलब है कि विश्वास हमारी ताकत पर टिका नहीं है? क्या यह डराने वाला है, या राहत देने वाला?
Praying Together
परमेश्वर, आपने पहले मुझे चुना, इससे पहले कि मैं आपको जानता। आपकी कहानी में हर पन्ने पर आपका "मैंने" लिखा है। आज मैं भी कहना चाहता हूँ, हाँ। मेरा दिल बँटा हुआ है,
यहोशू 24 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
यहोशू 24 किस विषय में है?
यहोशू 24 क्या कहता है?
यहोशू 24 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर यहोशू 24 से क्या सीख सकते हैं?
यहोशू 24 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
शेकेम में यहोशू ने लोगों की भावना पर भरोसा नहीं किया, उसने वाचा बाँधी: "उसी दिन यहोशू ने लोगों के साथ वाचा बाँधी, और शेकेम में उनके लिये विधि और नियम ठहराए।" भीड़ ने कहा था, हम यहोवा की सेवा करेंगे। पर कहना आसान है, बँधना कठिन। तेरे मन का वादा कहीं लिखा गया है, या बस उस दिन की भावना में बह गया?
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