यहोशू 9
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
कहानी क्या कहती है
बहुत समय पहले की बात है। यहोशू और परमेश्वर के लोग एक बड़े देश में आए थे। परमेश्वर उनके साथ थे। परमेश्वर ने उनकी मदद की थी।
पास ही एक शहर था। उसका नाम था गिबोन। गिबोन के लोग डर गए। बहुत डर गए। उन्होंने सोचा, "अब क्या करें? यहोशू के लोग तो बहुत बलवान हैं।"
तब उन्होंने एक चाल सोची। एक छोटी सी चालाकी।
वे बाहर गए। उन्होंने पुराने, फटे कपड़े पहने। उनकी जूतियाँ भी पुरानी थीं। बहुत पुरानी। उन्होंने अपने गधों पर पुराने बोरे रखे। और सूखी, कड़ी रोटी ले ली। ऐसी रोटी जिस पर फफूंदी लगी थी।
फिर वे यहोशू के पास चले।
यहोशू ने उन्हें देखा। उसने पूछा, "तुम कौन हो? कहाँ से आए हो?"
गिबोन के लोगों ने झूठ बोला। उन्होंने कहा, "हम बहुत दूर से आए हैं। देखो, हमारी रोटी सूख गई है। देखो, हमारे कपड़े फट गए हैं।"
पर यह सच नहीं था। वे पास में ही रहते थे!
यहोशू ने परमेश्वर से नहीं पूछा। उसने खुद ही सोचा। और उसने उन लोगों से वादा किया, "हम तुम्हें कुछ नहीं करेंगे।"
तीन दिन बाद यहोशू को पता चला। "अरे! ये तो पास ही रहते हैं! इन्होंने तो झूठ बोला था!"
यहोशू ने उन्हें बुलाया। "तुमने झूठ क्यों बोला?"
गिबोन के लोगों ने कहा, "हम डर गए थे।"
यहोशू ने वादा तोड़ा नहीं। परमेश्वर के नाम पर वादा किया था। इसलिए वादा वादा है। पर अब गिबोन के लोगों को काम करना पड़ा। वे लकड़ी लाते थे। वे पानी भरते थे।
इसका क्या मतलब है
यहोशू भूल गया। वह परमेश्वर से पूछना भूल गया। और गिबोन के लोगों ने झूठ बोला क्योंकि वे बहुत डरे हुए थे।
पर देखो एक अच्छी बात। परमेश्वर बड़े हैं। वे गिबोन के लोगों को भी बचा लेते हैं। वे उन्हें अपने घर के लिए काम देते हैं।
बड़ी कहानी
परमेश्वर हर बात जानते हैं। हम नहीं जानते। इसलिए हमें हमेशा परमेश्वर से पूछना है। "परमेश्वर, मुझे बताइए।"
और देखो, यीशु भी डरे हुए लोगों को अपने पास बुलाते हैं। जैसे परमेश्वर ने गिबोन के लोगों को बुलाया।
तुम्हारे लिए
क्या तुम कभी डरते हो? तब झूठ मत बोलो। परमेश्वर से बात करो। वे सुनते हैं। वे बहुत अच्छे हैं।
और जब कुछ करना हो, तो परमेश्वर से पूछो। छोटी सी प्रार्थना काफी है।
बात करो
क्या तुमने कभी डर के कारण झूठ बोला है? क्या हुआ था?
क्या तुम परमेश्वर से पूछ सकते हो जब कुछ मुश्किल हो?
साथ मिलकर प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, आप सब जानते हैं। मैं सब नहीं जानता। जब मैं डरूँ, तो मुझे याद दिलाइए कि आप पास हैं। मुझे सच बोलना सिखाइए। यीशु के नाम में, आमीन।
यहोशू 9 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
यहोशू 9 किस विषय में है?
यहोशू 9 क्या कहता है?
यहोशू 9 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे यहोशू 9 से क्या सीख सकते हैं?
यहोशू 9 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
गिबोनियों की फटी जूतियाँ और सूखी रोटी देखकर इस्राएलियों को लगा, सबूत तो सामने है। पर लिखा है, "तब उन पुरुषों ने उनके भोजन में से कुछ ले लिया, परन्तु यहोवा से सलाह न ली।" उन्होंने जाँच की, बस पूछा नहीं। आज भी सबसे बड़ा धोखा वहीं होता है जहाँ बात इतनी साफ़ लगती है कि प्रार्थना करना ज़रूरी ही नहीं लगता। तेरा कौन सा फ़ैसला अभी परमेश्वर से बिना पूछे तैयार खड़ा है?
थोड़े बड़े बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?
हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।
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