मीका 3
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
बहुत समय पहले एक शहर था। उसका नाम यरूशलेम था। वहाँ बड़े-बड़े लोग रहते थे। वे प्रधान थे। वे न्यायी थे। लोग उन पर भरोसा करते थे।
पर ये प्रधान अच्छे नहीं थे। वे भलाई से बैर रखते थे। वे बुराई से प्यार करते थे। वे लोगों की मदद नहीं करते थे। वे लोगों को दुःख देते थे। बहुत, बहुत दुःख।
मीका एक नबी था। मीका ने यह सब देखा। मीका उदास हो गया। मीका ने कहा, "सुनो! क्या तुम्हें नहीं मालूम, क्या सही है?"
कुछ आदमी भविष्यद्वक्ता कहलाते थे। वे परमेश्वर की बात बताते थे। पर वे झूठ बोलते थे। जब उन्हें रोटी मिलती, तब कहते, "सब ठीक है।" जब कोई रोटी नहीं देता, तब वे नाराज़ हो जाते। यह बहुत बुरा था।
इसका क्या अर्थ है?
पर मीका दूसरों जैसा नहीं था। मीका के अंदर परमेश्वर की आत्मा थी। परमेश्वर ने मीका को शक्ति दी। हिम्मत दी। सच बोलने की हिम्मत।
मीका डरा नहीं। मीका ने ऊँची आवाज़ में कहा, "यह गलत है। परमेश्वर सब देख रहे हैं।"
प्रधान रिश्वत लेते थे। याजक पैसे के लिए सिखाते थे। भविष्यद्वक्ता पैसे के लिए बातें बनाते थे। फिर भी वे कहते थे, "परमेश्वर हमारे साथ हैं। हमें कुछ नहीं होगा।"
पर यह सच नहीं था। परमेश्वर ने कहा, "इस वजह से यह शहर खाली हो जाएगा। खेत जैसा। ढेर जैसा।" यह सुनकर मन भारी हो जाता है। पर परमेश्वर झूठ को झूठ ही कहते हैं।
समान सूत्र
परमेश्वर को अपने लोग बहुत प्रिय थे। वे नहीं चाहते थे कि कोई उन्हें दुःख दे। इसलिए एक दिन परमेश्वर ने एक और चरवाहा भेजा। उसका नाम यीशु था।
यीशु उन प्रधानों जैसे नहीं हैं। यीशु भेड़ों को दुःख नहीं देते। यीशु भेड़ों से प्यार करते हैं। यीशु उनके लिए अपनी जान भी देते हैं।
यीशु हमेशा सच बोलते हैं। यीशु कभी धोखा नहीं देते।
तुम्हारे लिए
तुम भी सच बोल सकते हो। जब कोई किसी को दुःख दे, तुम कह सकते हो, "यह ठीक नहीं है।" परमेश्वर तुम्हें भी हिम्मत दे सकते हैं। मीका जैसी हिम्मत।
परमेश्वर हर बच्चे को देखते हैं। जो दुःखी है, परमेश्वर उसे भी देखते हैं। परमेश्वर कभी आँख नहीं मूँदते।
बात करें
क्या तुम्हें पता है, किसी के साथ नाइंसाफी होना कैसा लगता है?
यीशु एक अच्छे चरवाहे हैं। एक अच्छा चरवाहा क्या करता है?
साथ में प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप सब देखते हैं। हमें सच बोलने की हिम्मत दीजिए। हमें दयालु बनाइए। धन्यवाद कि यीशु हमारे अच्छे चरवाहा हैं। आमीन।
मीका 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
मीका 3 किस विषय में है?
मीका 3 क्या कहता है?
मीका 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे मीका 3 से क्या सीख सकते हैं?
मीका 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
तुम जो न्याय से घृणा करते और सब सिधाई को टेढ़ी करते हो।" ये लोग मंदिर जाते थे, बलिदान चढ़ाते थे, पर अंदर से न्याय से नफरत करते थे। सीधी बात को घुमा देना उनकी आदत बन चुकी थी। कहीं तुम भी तो अपनी गलती को समझाने के लिए शब्दों को मोड़ते नहीं? परमेश्वर सुनता है, और वह सीधी बात का परमेश्वर है।
आसपास के भविष्यद्वक्ता रोटी के एक टुकड़े के बदले "शान्ति" की घोषणा कर देते थे। उसी भीड़ में मीका खड़ा होकर कहता है, "परन्तु मैं तो यहोवा की आत्मा से शक्ति, न्याय और पराक्रम पाकर परिपूर्ण हूँ।" यह भरपूरी तालियों के लिए नहीं, बल्कि लोगों को उनका पाप जताने के लिए थी। परमेश्वर ने तुझे जो साहस दिया है, तू उसे किसे खुश करने में खर्च कर रहा है?
मीका उन भविष्यद्वक्ताओं से बात कर रहा है जो पैसे के लिए शांति का संदेश बेचते थे। उनका दंड यह था: "भविष्यद्वक्ताओं पर सूर्य अस्त होगा, और उनके लिये दिन अंधेरा हो जाएगा।" सबसे डरावनी सज़ा परमेश्वर की मार नहीं, उसकी चुप्पी है। सोचो, क्या तुमने कभी उसकी आवाज़ को अपनी सुविधा के मुताबिक मोड़ने की कोशिश की है?
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