नहूम 1
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
नहूम की पुस्तक एक भारी वचन से शुरू होती है, और यह "भारी" शब्द अपने आप में बताता है कि यह कोई हल्की-फुल्की बात नहीं है। नहूम को एक दर्शन मिला है, नीनवे के बारे में। नीनवे उस समय की महाशक्ति अश्शूर की राजधानी थी, एक ऐसा शहर जिसने इस्राएल के उत्तरी राज्य को उजाड़ दिया था और जो अपनी क्रूरता के लिए बदनाम था। लगभग सौ साल पहले योना इसी शहर में गया था और तब वहाँ के लोग पश्चाताप में झुक गए थे। पर अब वह पश्चाताप बहुत पीछे छूट गया है। नीनवे फिर से अहंकारी और हिंसक हो चुका है।
नहूम परमेश्वर का चित्र बहुत तीव्र शब्दों में खींचता है। परमेश्वर जलन रखनेवाला है, बदला लेनेवाला है, परन्तु साथ ही "विलम्ब से क्रोध करनेवाला" भी है। यानी वे जल्दी क्रोधित नहीं होते, पर अन्यायी को अन्ततः जवाब देना ही होता है। फिर आती हैं ऐसी छवियाँ जो पढ़ते समय काँप देती हैं: बवंडर और आँधी में परमेश्वर चलते हैं, बादल उनके पैरों की धूल हैं, उनके एक घुड़कने से समुद्र और नदियाँ सूख जाती हैं, पहाड़ काँप उठते हैं, चट्टानें फट जाती हैं।
पर इसी अध्याय के बीच में, पद 7 में, एक अचानक ठहराव आता है। "यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधि रखता है।" वही परमेश्वर जो नीनवे के लिए तूफ़ान हैं, वे यहूदा के लिए आश्रय हैं। पद 12 और 13 में परमेश्वर अपने लोगों से सीधे बात करते हैं: "मैंने तुझे दुःख दिया है, परन्तु फिर न दूँगा।" वे उस भारी जूए को तोड़ने का वादा करते हैं जो अश्शूर ने यहूदा की गर्दन पर रखा था। और अध्याय समाप्त होता है एक सुंदर चित्र से: पहाड़ों पर एक दूत आ रहा है, अच्छी खबर लेकर, शान्ति का प्रचार करते हुए।
What Does This Mean?
नहूम 1 हमें एक ऐसे परमेश्वर से मिलाता है जिसे आज की दुनिया अक्सर सुनना नहीं चाहती। एक परमेश्वर जो केवल "प्रेम है, बस प्रेम है" वाला मीठा विचार नहीं है। वे प्रेम हैं, हाँ, पर उनका प्रेम इतना गहरा है कि वे अन्याय को अनदेखा नहीं कर सकते। जो परमेश्वर बुराई पर आँख मूँद ले, वह भला परमेश्वर नहीं होगा।
सोचो: अगर तुम्हारे साथ कोई गहरा अन्याय हुआ हो, और कोई कहे "छोड़ो, भूल जाओ, कुछ नहीं होगा" – क्या यह न्याय है? नहूम कहता है कि नहीं। परमेश्वर याद रखते हैं। पीड़ितों को नहीं भूलते। अत्याचारी को अन्ततः जवाब देना होगा।
पर यह क्रोध अंधा नहीं है। पद 3 कहता है वे "विलम्ब से क्रोध करनेवाला" हैं। और पद 7 का वाक्य पूरे अध्याय की धुरी है: वे भले हैं। यह वही परमेश्वर हैं। तूफ़ान और गढ़, दोनों। अन्तर इस बात में है कि तुम कहाँ खड़े हो, उनके सामने अकड़कर, या उनकी शरण में झुककर।
The Common Thread
अध्याय का अन्तिम पद कुछ ऐसा कहता है जो सदियों बाद फिर सुनाई देगा: "पहाड़ों पर शुभ समाचार का सुनानेवाला और शान्ति का प्रचार करनेवाला आ रहा है!" यही वाक्य यशायाह में भी है, और नए नियम में पौलुस रोमियों 10:15 में इसे यीशु मसीह के सुसमाचार पर लागू करता है।
नहूम के लिए यह शुभ समाचार था कि अश्शूर का जूआ टूटेगा। पर वह जूआ एक बड़े जूए की छाया मात्र था, पाप और मृत्यु का जूआ जो हर इन्सान की गर्दन पर है। और परमेश्वर ने पद 13 में जो वादा किया, "मैं उसका जूआ तेरी गर्दन पर से उतारकर तोड़ डालूँगा," वह पूरी तरह से यीशु में पूरा हुआ। क्रूस पर वही परमेश्वर, जो नहूम में तूफ़ान थे, अपने ही बेटे में उस तूफ़ान के नीचे आ खड़े हुए, ताकि हम गढ़ में शरण पा सकें।
For You
यह अध्याय तुम्हें एक असहज पर ज़रूरी सवाल के सामने खड़ा करता है: तुम्हारा परमेश्वर कैसा है? क्या तुमने उन्हें अपने मन में इतना नरम बना लिया है कि वे कुछ भी सहन कर लेंगे, तुम्हारा हर समझौता, हर झूठ, हर छुपा गुनाह? नहूम कहता है कि परमेश्वर वैसे नहीं हैं जैसा हम उन्हें बनाना चाहते हैं। वे वैसे हैं जैसे वे हैं।
पर घबराओ मत। पद 7 तुम्हारे लिए भी है। "अपने शरणागतों की सुधि रखता है।" शरण लेना कमज़ोरी नहीं, बुद्धिमानी है। जब तुम्हारी ज़िन्दगी में तूफ़ान आते हैं, परीक्षा का दबाव, टूटते रिश्ते, अपनी पहचान का संकट, मन में उठते सन्देह, तो सवाल यह नहीं कि तूफ़ान आएँगे या नहीं। सवाल यह है कि तुम किस गढ़ में शरण लोगे। सोशल मीडिया की सराहना? दोस्तों की मंज़ूरी? अपनी उपलब्धियाँ? ये सब रेत के गढ़ हैं।
और अगर तुम्हारे साथ कुछ ग़लत हुआ है, कोई गहरा घाव जिसके बारे में तुमने किसी को नहीं बताया, तो जान लो: परमेश्वर भूले नहीं हैं। वे "अपने शत्रुओं का पाप नहीं भूलता।" तुम्हें बदला लेने की ज़रूरत नहीं। तुम अपना बोझ उस परमेश्वर के हाथ में सौंप सकते हो जो न्यायी भी हैं और भले भी।
Talk About It
आज के समाज में परमेश्वर के क्रोध की बात करना लगभग वर्जित है। तुम्हारे विचार से क्यों? और नहूम 1 पढ़ने के बाद, क्या तुम्हें लगता है कि परमेश्वर का क्रोध वास्तव में एक बुरी बात है, या इसमें कुछ अच्छा भी छुपा है?
पद 7 कहता है कि परमेश्वर उनका गढ़ हैं जो उनकी शरण लेते हैं। तुम्हारी ज़िन्दगी में असल में तुम्हारा "गढ़" क्या है, वह जगह जहाँ तुम मुश्किल घड़ी में सबसे पहले भागते हो? और वह उत्तर तुम्हारे बारे में क्या बताता है?
Praying Together
हे परमेश्वर, आ
नहूम 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
नहूम 1 किस विषय में है?
नहूम 1 क्या कहता है?
नहूम 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर नहूम 1 से क्या सीख सकते हैं?
नहूम 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
अश्शूर की सेना उस समय अजेय लगती थी, उसके सामने कोई टिक नहीं पाता था। पर परमेश्वर कहता है, "चाहे वे पूरी शक्ति में हों और बहुत भी हों, तौभी वे काटे जाएँगे।" जो आज तुझे कुचल रहा है, उसकी भी एक समय-सीमा परमेश्वर ने तय कर रखी है। और यहूदा से कहा गया, "मैंने तुझे दुःख दिया है, परन्तु अब तुझे और दुःख न दूँगा।" तेरा दुःख अनन्त नहीं है।
नहूम की किताब नीनवे पर आती आग से भरी है, बादल, आँधी, पिघलते पहाड़। और उसी गर्जन के बीच अचानक यह पंक्ति आती है: "यहोवा भला है, संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ है, और अपने शरणागतों की सुधि रखता है।" ध्यान दे, वह भीड़ को नहीं, तुझे जानता है। जो उसकी ओट में दुबका है, उसका नाम उसे याद है। तेरा तूफान भी उसकी भलाई को नहीं मिटा सका।
नीनवे ने सोचा था कि उसकी क्रूरता का हिसाब कोई नहीं रख रहा। पर नहूम कहता है, "यहोवा जलन रखनेवाला और बदला लेनेवाला परमेश्वर है।" यह जलन ठंडी नहीं, यह प्रेम की आग है, अपने लोगों के लिए। जो तुझे कुचलते हैं, वह उन्हें भूलता नहीं। तेरे आँसू उसके सामने दर्ज हैं। सवाल यह है, क्या तू हिसाब उसके हाथ में छोड़ पाएगा?
वह समुद्र को घुड़कता और उसे सुखा देता है, और सब महानदों को सुखा डालता है।" बाशान, कर्मेल, लबानोन, ये उस समय की सबसे हरी-भरी जगहें थीं। जिन पर लोग भरोसा करते थे कि ये कभी नहीं मुरझाएँगी, वे परमेश्वर की एक घुड़की से कुम्हला जाती हैं। तेरे जीवन में भी कोई ऐसा सहारा है जिसे तू अटल समझ बैठा है? नीनवे ने भी यही सोचा था।
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