योएल 2
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
योएल की पुस्तक का दूसरा अध्याय एक चेतावनी की आवाज़ से शुरू होता है। सिय्योन में नरसिंगा फूँका जा रहा है, वह भी "साँस बाँधकर", यानी पूरी ताकत से। यह उत्सव का बिगुल नहीं है, यह खतरे का सायरन है। "यहोवा का दिन आता है, वरन् वह निकट ही है।"
फिर भविष्यद्वक्ता जो चित्र खींचता है, वह सुंदर नहीं है। अंधकार, बादल, पहाड़ों पर फैलती काली छाया। एक सेना आ रही है, ऐसी जैसी पहले कभी नहीं आई। उनके आगे आग भस्म करती है, पीछे लौ जलाती है। जो भूमि उनके आगे अदन की बारी जैसी हरी-भरी थी, वह उनके पीछे उजाड़ मरुस्थल बन जाती है। योएल इन्हें घोड़ों जैसा बताता है, रथों की गड़गड़ाहट जैसा उनका शोर, योद्धाओं जैसी उनकी कतारें। वे शहरपनाह पर चढ़ते हैं, कोई अपनी पाँति से अलग नहीं होता, कोई एक दूसरे को धक्का नहीं देता, और वे खिड़कियों से घरों में ऐसे घुसते हैं जैसे चोर। पृथ्वी काँपती है, आकाश थरथराता है, सूर्य और चन्द्रमा काले पड़ जाते हैं।
और तब सबसे भारी वाक्य आता है: यह सेना परमेश्वर के विरुद्ध नहीं आ रही, वे इसके आगे-आगे अपना शब्द सुना रहे हैं। पद 11 पूछता है: "यहोवा का दिन बड़ा और अति भयानक है; उसको कौन सह सकेगा?" यह प्रश्न हवा में लटका रह जाता है।
फिर पद 12 में एक छोटा-सा शब्द आता है जो पूरी पुस्तक की दिशा बदल देता है: "तो भी।" अभी भी। अभी भी देर नहीं हुई। "उपवास के साथ रोते-पीटते अपने पूरे मन से फिरकर मेरे पास आओ।" और साथ ही यह चेतावनी: "अपने वस्त्र नहीं, अपने मन ही को फाड़कर" लौट आओ। क्योंकि परमेश्वर "अनुग्रहकारी, दयालु, विलम्ब से क्रोध करनेवाला, करुणानिधान" है।
अब वही नरसिंगा दोबारा फूँका जाता है, पर इस बार लोगों को इकट्ठा करने के लिए। बूढ़े, बच्चे, दूध पीते शिशु, यहाँ तक कि दूल्हा और दुल्हन भी अपने कमरे से निकल आएँ। याजक आँगन और वेदी के बीच रोकर प्रार्थना करें कि दूसरी जातियाँ यह न कहने पाएँ, "उनका परमेश्वर कहाँ रहा?"
और परमेश्वर उत्तर देते हैं। पद 18 से सब कुछ पलट जाता है। अन्न, नया दाखमधु, ताजा तेल। बरसात की पहली और पिछली वर्षा। खलिहान भर जाएँगे, रसकुण्ड उमड़ेंगे। और फिर वह वाक्य जो शायद पूरे पुराने नियम के सबसे कोमल वाक्यों में से एक है: "जिन वर्षों की उपज… टिड्डियों ने खा ली थी, मैं उसकी हानि तुम को भर दूँगा।"
अध्याय का अंत और भी आगे जाता है। परमेश्वर कहते हैं कि वे सब प्राणियों पर अपना आत्मा उण्डेलेंगे। बेटे और बेटियाँ भविष्यद्वाणी करेंगे, बूढ़े स्वप्न देखेंगे, जवान दर्शन देखेंगे, और दास-दासियों पर भी वही आत्मा आएगा। और अंत में: "जो कोई यहोवा से प्रार्थना करेगा, वह छुटकारा पाएगा।"
इसका अर्थ क्या है?
पहली बात जो हमें निगलनी पड़ती है, वह यह है कि योएल परमेश्वर के न्याय को हल्का नहीं करता। हम अक्सर परमेश्वर को एक सहनशील, थोड़े थके हुए बुज़ुर्ग की तरह सोचते हैं जो हर बात पर मुस्कुरा देते हैं। योएल कहता है: नहीं। परमेश्वर के लिए यह मायने रखता है कि आप कैसे जीते हैं। इतिहास किसी अंधी गति से नहीं चल रहा, वह किसी दिन की ओर चल रहा है।
पर योएल यहाँ रुकता नहीं। "तो भी" वह दरवाज़ा है जो न्याय की दीवार में खुलता है। और ध्यान दीजिए कि परमेश्वर किस चीज़ को अस्वीकार करते हैं: वस्त्र फाड़ना। उस संस्कृति में यह दुख का सार्वजनिक प्रदर्शन था, सबको दिखाई देनेवाला। परमेश्वर कहते हैं कि उन्हें प्रदर्शन नहीं चाहिए, उन्हें मन चाहिए। पश्चाताप कोई भावुक तमाशा नहीं है जिसे दूसरे देखकर प्रभावित हों। यह वह मोड़ है जो अकेले में, अंदर, बिना दर्शकों के लिया जाता है।
और पद 14 में एक ईमानदारी है जो चौंकाती है: "क्या जाने वह फिरकर पछताए।" योएल कोई गारंटी नहीं बेचता। अनुग्रह कोई मशीन नहीं है जिसमें सिक्का डालकर परिणाम निकाला जाए। परमेश्वर स्वतंत्र हैं। और फिर भी हम लौटते हैं, इसलिए नहीं कि हमने हिसाब लगा लिया है, बल्कि इसलिए कि हम जानते हैं वे कैसे हैं।
मुख्य सूत्र
योएल 2 का अंतिम हिस्सा किसी अस्पष्ट भविष्य में लटका नहीं रहा। पिन्तेकुस्त के दिन, जब पवित्र आत्मा उतरा, पतरस ने खड़े होकर यही अध्याय पढ़ा और कहा: यह वही है जो योएल के द्वारा कहा गया था। बेटियों पर भी, दासों पर भी, बिना किसी भेद के।
और वह प्रश्न जो पद 11 में लटका रह गया था, "उसको कौन सह सकेगा?", उसका उत्तर क्रूस पर आया। दोपहर को सूर्य अंधियारा हुआ और यीशु मसीह ने वह दिन अपने ऊपर सह लिया, ताकि हम "तो भी" के दरवाज़े से भीतर आ सकें। पौलुस ने रोमियों 10:13 में योएल की आखिरी पंक्ति दोहराई: "जो कोई प्रभु से प्रार्थना करेगा, वह उद्धार पाएगा।"
तुम्हारे लिए
तुम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हो जो वस्त्र फाड़ने में माहिर है। सब कुछ दिखाने के लिए है, कैप्शन के साथ, सही कोण से। यहाँ तक कि दुख और "vulnerability" भी एक शैली बन चुकी है। योएल कहता है कि परमेश्वर उस परत के नीचे देखते हैं और पूछते हैं: तुम्हारा मन कहाँ है?
और शायद तुम्हारे अंदर कुछ ऐसा है जिसे टिड्डियाँ खा चुकी हैं। खोए हुए साल। एक रिश्ता जिसे तुमने बर्बाद किया। एक आदत जिससे तुम खुद घिन खाते हो। एक विश्वास जो कभी जीवित था और अब सूखा पड़ा है। योएल 2:25 उन खोए हुए वर्षों के बारे में परमेश्वर की प्रतिज्ञा है। वे समय को पीछे नहीं घुमाते, पर वे उजाड़ ज़मीन पर बारिश भेजना जानते हैं।
तो आज कुछ ठोस करो। अकेले बैठो, बिना फोन के, और परमेश्वर के सामने नाम लेकर कहो कि क्या-क्या खा लिया गया है। कोई अच्छा शब्द मत ढूँढ़ो। और फिर पद 13 ज़ोर से पढ़ो, जब तक वह सिर्फ जानकारी न रहकर तुम्हारा सहारा न बन जाए।
और एक बात और। योएल में लौटना कभी अकेले का काम नहीं है। पूरा शहर बुलाया जाता है, बच्चे भी, बूढ़े भी। तुम्हें अपने विश्वास को अकेले घसीटने की ज़रूरत नहीं है। किसी एक व्यक्ति को खोजो जिससे तुम सच बोल सको।
इस पर बात करें
तुम्हारे जीवन में "वस्त्र फाड़ना" कैसा दिखता है, यानी वह धार्मिकता या ईमानदारी जो असल में दूसरों को दिखाने के लिए है? और "मन फाड़ना" तुम्हारे लिए व्यावहारिक रूप से क्या होगा?
पद 14 कहता है "क्या जाने"। क्या तुम ऐसे परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हो जो तुम्हारे नियंत्रण में नहीं हैं, जिनसे कोई गारंटी नहीं मिलती? क्यों, या क्यों नहीं?
मिलकर प्रार्थना
परमेश्वर, आप अनुग्रहकारी और दयालु हैं, और यह मेरी योग्यता नहीं, आपका स्वभाव है। मैं अपने दिखावे थका हुआ हूँ। मेरा मन आपके सामने खोल दीजिए, वहाँ भी जहाँ सब उजाड़ है। जो साल खा लिए गए, उन पर अपनी वर्षा भेजिए। और अपने आत्मा से मुझे भर दीजिए, ताकि मैं जानूँ कि आप मेरे बीच में हैं। आमीन।
योएल 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
योएल 2 किस विषय में है?
योएल 2 क्या कहता है?
योएल 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर योएल 2 से क्या सीख सकते हैं?
योएल 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
टिड्डियों की इस सेना में जो सबसे डरावना है, वह उनका अनुशासन है: "वे शूरवीरों के समान दौड़ते हैं, वे योद्धाओं की भाँति शहरपनाह पर चढ़ते हैं; वे अपनी-अपनी राह पर चलते हैं और अपनी पंक्ति नहीं छोड़ते।" विनाश करनेवाले कतार नहीं तोड़ते, और हम? परमेश्वर की ओर चलते हुए हम कितनी जल्दी भटक जाते हैं। आज अपनी पंक्ति में लौट आओ।
टिड्डियों ने जो खलिहान खाली कर दिए थे, परमेश्वर उन्हीं को भरने की बात करता है: "खलिहान अन्न से भर जाएँगे, और रसकुण्ड नये दाखमधु और ताजे तेल से उमड़ेंगे।" वह तुझे नई जगह नहीं देता, वह उसी खाली जगह को भर देता है जहाँ तू रोया था। जिस कमी को तू छिपाता है, शायद वही उसकी भरपूरी दिखाने का स्थान बने।
वह अंधियारे और घोर अंधकार का दिन होगा, वह बादलों और गहरे बादलों का दिन होगा!" फिर भी योएल कहता है कि यह सेना पहाड़ों पर फैली भोर की तरह आती है। भोर, जो आशा का चिन्ह है, यहाँ अंधकार लेकर आती है। कभी तुम्हारे जीवन में भी सुबह ऐसी ही लगी होगी। ठहरो, अगली आवाज़ यही है: पूरे मन से मेरी ओर फिरो।
टिड्डियों की सेना के बारे में लिखा है, "वे एक दूसरे को धक्का नहीं देते, वे अपनी-अपनी राह पर चलते हैं।" सोचो, कीड़े भी अपनी पंक्ति नहीं तोड़ते, और हम मसीह की देह में एक दूसरे को धकेलते हुए आगे निकलना चाहते हैं। योएल का यह चित्र डराने के लिए है, पर एक सवाल भी छोड़ता है: तुम्हारे साथ चलने वाले को तुम्हारी कोहनी लगती है या तुम्हारा हाथ?
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