योएल 2
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
कल्पना करो: सुबह-सुबह मंदिर के पहाड़ पर से एक नरसिंगा फूँका जाता है। लंबी, गहरी आवाज़, वह जो जंग के समय बजती है। लोग दौड़कर बाहर आते हैं। योएल कहता है: काँप उठो, क्योंकि यहोवा का दिन निकट है।
और फिर वह बताता है कि वह क्या देखता है। एक सेना आ रही है। इतनी बड़ी कि आकाश काला पड़ जाता है, जैसे अंधेरे बादल पहाड़ों पर फैल जाते हैं। उनकी आवाज़ रथों की गड़गड़ाहट जैसी है, या सूखी घास में लगी आग की चटचटाहट जैसी। वे शहरपनाह पर चढ़ जाते हैं, खिड़कियों से घरों में घुस जाते हैं जैसे चोर। कोई अपनी पाँति से अलग नहीं होता, कोई एक दूसरे को धक्का नहीं देता।
आगे पद 25 में योएल खुलकर बताता है कि यह सेना असल में क्या है: टिड्डियाँ। अर्बे, येलेक, हासील, गाजाम। छोटे-छोटे कीड़े, लेकिन करोड़ों की संख्या में। उनके आगे की ज़मीन अदन की बारी जैसी हरी-भरी है, उनके पीछे उजाड़ मरुस्थल। खाने को कुछ नहीं बचता।
और तब, बिलकुल बीच में, एक शब्द आता है जो सब कुछ मोड़ देता है: "तो भी।" परमेश्वर कहते हैं: अभी भी सुनो, पूरे मन से फिरकर मेरे पास आओ। अपने वस्त्र नहीं, अपने मन ही को फाड़कर।
लोग इकट्ठे होते हैं। सब लोग: बूढ़े, बच्चे, दूध पीते बच्चे भी, और दूल्हा-दुल्हन भी अपने कमरे से निकल आते हैं। याजक वेदी के सामने रोते हैं और पूछते हैं: लोग यह क्यों कहें, "उनका परमेश्वर कहाँ रहा?"
और परमेश्वर सुनते हैं। उन्हें तरस आता है। वे कहते हैं: मैं अन्न, नया दाखमधु और ताजा तेल दूँगा। खलिहान भर जाएँगे। जिन वर्षों की उपज टिड्डियों ने खा ली थी, वे साल मैं तुम्हें भर दूँगा।
इसका अर्थ क्या है?
पद 13 में परमेश्वर के बारे में कुछ ऐसा कहा गया है जिसे याद रखने लायक है: वे अनुग्रहकारी, दयालु, विलम्ब से क्रोध करनेवाले और करुणानिधान हैं। यही परमेश्वर हैं जिनका दिन "बड़ा और अति भयानक" कहा गया है। वह अजीब लगता है, पर दोनों बातें सच हैं। परमेश्वर बुराई को हल्के में नहीं लेते। और वे लौट आनेवाले को कभी दूर नहीं धकेलते।
"अपने मन ही को फाड़कर" का मतलब यह है: उस ज़माने में लोग दुख में अपने कपड़े फाड़ते थे, जिससे सब देख सकें कि वे दुखी हैं। परमेश्वर कहते हैं: मुझे दिखावा नहीं चाहिए, मुझे तुम्हारा असली मन चाहिए।
और एक बात ईमानदारी से कहनी है। पद 25 में परमेश्वर उस टिड्डी-दल को "मेरा बड़ा दल" कहते हैं, जिसे उन्होंने भेजा। यह सवाल छोड़ जाता है: परमेश्वर ने ऐसी विपत्ति क्यों भेजी? योएल इसे पूरा नहीं समझाता, और मैं भी नहीं समझा सकता। पर योएल यह ज़रूर बताता है कि वही परमेश्वर उजड़े खेतों को फिर हरा करते हैं, और खोए हुए साल तक वापस दे देते हैं।
जोड़ने वाला सूत्र
अध्याय के आख़िर में योएल कुछ बिलकुल नया देखता है। परमेश्वर कहते हैं: मैं सब प्राणियों पर अपना आत्मा उण्डेलूँगा। बेटे और बेटियाँ भविष्यद्वाणी करेंगी, बूढ़े स्वप्न देखेंगे, जवान दर्शन देखेंगे, दास और दासियाँ भी। पहले परमेश्वर का आत्मा कुछ चुने हुए लोगों पर आता था। अब हर तरह के लोगों पर।
यह वचन सैकड़ों साल बाद पूरा हुआ। पिन्तेकुस्त के दिन, जब यीशु मसीह जी उठने के बाद स्वर्ग पर जा चुके थे, पवित्र आत्मा शिष्यों पर उतरा, और पतरस ने खड़े होकर ठीक यही अध्याय पढ़ा। योएल का आख़िरी वाक्य भी वहाँ पूरा हुआ: "जो कोई यहोवा से प्रार्थना करेगा, वह छुटकारा पाएगा।" कोई भी। बिना लंबी सूची, बिना शर्तों की कतार।
तुम्हारे लिए
टिड्डियाँ शायद तुम्हारे खेत नहीं खातीं। पर तुम्हारे जीवन में भी कुछ खाया जा सकता है: एक दोस्ती जो झूठ बोलने से टूट गई, एक साल जो बीमारी में गुज़र गया, एक भरोसा जो तुमने तोड़ दिया। और तब यह लगता है कि अब कुछ ठीक नहीं हो सकता।
योएल 2 का सबसे छोटा शब्द याद रखो: "तो भी।" परमेश्वर के पास अभी भी एक रास्ता है। तुम्हें उनके सामने अच्छा दिखने की ज़रूरत नहीं, कपड़े फाड़ने की भी नहीं। तुम अपने मन के साथ आ सकते हो, वैसे ही जैसा वह है।
और पद 28 पर ध्यान दो: "तुम्हारे बेटे-बेटियाँ भविष्यद्वाणी करेंगी।" तुम्हें बड़ा होने का इंतज़ार नहीं करना है। परमेश्वर बच्चों के ज़रिए भी बोलते हैं।
इस पर बात करो
पद 13 कहता है कि परमेश्वर "विलम्ब से क्रोध करनेवाले" हैं। तुम्हें लगता है यह किसी दोस्त के साथ रहने में कैसा दिखता होगा?
योएल यह नहीं समझाता कि परमेश्वर ने टिड्डियाँ क्यों भेजीं। परमेश्वर के बारे में कोई एक सवाल तुम्हारे मन में है जिसका जवाब तुम्हें अभी तक नहीं मिला?
मिलकर प्रार्थना
प्रभु, आप अनुग्रहकारी और दयालु हैं, यह हम आपके ही वचन से जानते हैं। जो हमारे जीवन में टूटा या खा लिया गया है, वह आप जानते हैं। हम अपना मन आपके सामने खोलते हैं, बिना दिखावे के। अपना पवित्र आत्मा हमें दीजिए, और हमें बोलना सिखाइए। आमीन।
योएल 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
योएल 2 किस विषय में है?
योएल 2 क्या कहता है?
योएल 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे योएल 2 से क्या सीख सकते हैं?
योएल 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
टिड्डियों की इस सेना में जो सबसे डरावना है, वह उनका अनुशासन है: "वे शूरवीरों के समान दौड़ते हैं, वे योद्धाओं की भाँति शहरपनाह पर चढ़ते हैं; वे अपनी-अपनी राह पर चलते हैं और अपनी पंक्ति नहीं छोड़ते।" विनाश करनेवाले कतार नहीं तोड़ते, और हम? परमेश्वर की ओर चलते हुए हम कितनी जल्दी भटक जाते हैं। आज अपनी पंक्ति में लौट आओ।
टिड्डियों ने जो खलिहान खाली कर दिए थे, परमेश्वर उन्हीं को भरने की बात करता है: "खलिहान अन्न से भर जाएँगे, और रसकुण्ड नये दाखमधु और ताजे तेल से उमड़ेंगे।" वह तुझे नई जगह नहीं देता, वह उसी खाली जगह को भर देता है जहाँ तू रोया था। जिस कमी को तू छिपाता है, शायद वही उसकी भरपूरी दिखाने का स्थान बने।
वह अंधियारे और घोर अंधकार का दिन होगा, वह बादलों और गहरे बादलों का दिन होगा!" फिर भी योएल कहता है कि यह सेना पहाड़ों पर फैली भोर की तरह आती है। भोर, जो आशा का चिन्ह है, यहाँ अंधकार लेकर आती है। कभी तुम्हारे जीवन में भी सुबह ऐसी ही लगी होगी। ठहरो, अगली आवाज़ यही है: पूरे मन से मेरी ओर फिरो।
टिड्डियों की सेना के बारे में लिखा है, "वे एक दूसरे को धक्का नहीं देते, वे अपनी-अपनी राह पर चलते हैं।" सोचो, कीड़े भी अपनी पंक्ति नहीं तोड़ते, और हम मसीह की देह में एक दूसरे को धकेलते हुए आगे निकलना चाहते हैं। योएल का यह चित्र डराने के लिए है, पर एक सवाल भी छोड़ता है: तुम्हारे साथ चलने वाले को तुम्हारी कोहनी लगती है या तुम्हारा हाथ?
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