योएल 2
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
सुबह हो गई थी। पर सूरज दिखाई नहीं दे रहा था।
आसमान काला था। बहुत काला।
क्या वहाँ बादल थे? नहीं। वहाँ टिड्डियाँ थीं। छोटे-छोटे कीड़े, पर बहुत-बहुत सारे। इतने सारे कि गिने नहीं जा सकते।
सर्र, सर्र, सर्र। सुनो, उनके पंख ऐसे ही आवाज़ करते थे।
वे खेत में उतरीं। और उन्होंने सब खा लिया। हरी घास खा ली। अंगूर खा लिए। अंजीर खा लिए। गेहूँ खा लिया।
अब खेत खाली था। भूरा और सूखा। कहीं कुछ हरा नहीं।
लोग खिड़की से बाहर देखते रहे। उनके पेट खाली थे। बच्चे कहते थे, "माँ, रोटी कहाँ है?" पर रोटी नहीं थी।
तब एक आदमी शहर के बीच में खड़ा हुआ। उसके हाथ में एक बड़ा सींग था। उसने ज़ोर से फूँका।
तूऊऊऊ!
सब लोग चौंक गए। सब सुनने लगे।
क्योंकि परमेश्वर बोल रहे थे। और परमेश्वर ने कहा: "आओ। मेरे पास वापस आओ। पूरे मन से आओ।"
इसका क्या अर्थ है?
और लोग आए। सब आए।
बूढ़े दादा-दादी आए, धीरे-धीरे चलते हुए। माँएँ आईं। पिता आए। बड़े बच्चे आए। और सबसे छोटे बच्चे भी, जो अभी दूध ही पीते थे। उनकी माँओं ने उन्हें गोद में उठा लिया।
सब एक साथ खड़े हो गए। और सब रोने लगे।
उन्होंने कहा: "परमेश्वर, हम पर दया कीजिए।"
और परमेश्वर ने सुना।
क्या परमेश्वर गुस्सा रहे? नहीं। परमेश्वर का मन भर आया। उन्हें अपने लोगों पर बहुत प्यार आया।
परमेश्वर ने कहा: "मत डरो! खुश हो जाओ!"
और फिर… टप। टप। टप-टप-टप।
बारिश! ठंडी, गीली, अच्छी बारिश। वह सूखी भूरी ज़मीन पर गिरी।
और ज़मीन फिर से हरी हो गई। पेड़ों पर अंजीर लगे। बेलों पर अंगूर लगे। खलिहान अनाज से भर गए।
परमेश्वर ने कहा: "टिड्डियों ने जो साल खा लिए, वे सब मैं तुम्हें लौटा दूँगा। तुम पेट भरकर खाओगे।"
जोड़ने वाला धागा
फिर परमेश्वर ने एक और बात कही। एक बहुत सुंदर बात।
"मैं अपना आत्मा सब लोगों पर उंडेलूँगा। बूढ़ों पर भी। जवानों पर भी। तुम्हारे बेटों और बेटियों पर भी।"
और परमेश्वर ने कहा: "जो कोई मुझे पुकारेगा, मैं उसे बचाऊँगा।"
यह बात परमेश्वर बहुत सालों बाद भी नहीं भूले। वे यीशु को भेजने वाले थे। यीशु आए, ताकि जो कोई उन्हें पुकारे, वह बचाया जाए।
तुम्हारे लिए
तुम भी परमेश्वर को पुकार सकते हो।
तुम्हें ज़ोर से चिल्लाना नहीं पड़ता। तुम्हें बड़ा होने तक इंतज़ार भी नहीं करना पड़ता।
छोटे बच्चे भी उस दिन वहाँ खड़े थे। परमेश्वर ने उन्हें भी देखा।
जब तुम डरो, तो बस कहो: "परमेश्वर, मैं यहाँ हूँ।" और वे सुनते हैं। हर बार।
इस पर बात करें
जब सब खेत खाली हो गए, तो लोगों ने क्या किया?
तुम परमेश्वर को क्या कहना चाहोगे?
मिलकर प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, आप सुनते हैं। मैं छोटा हूँ, फिर भी आप मुझे देखते हैं। धन्यवाद कि आप बारिश देते हैं। धन्यवाद कि आप खाना देते हैं। जब मैं डरूँ, तो मैं आपको पुकारूँगा। आमीन।
योएल 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
योएल 2 किस विषय में है?
योएल 2 क्या कहता है?
योएल 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे योएल 2 से क्या सीख सकते हैं?
योएल 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
टिड्डियों की इस सेना में जो सबसे डरावना है, वह उनका अनुशासन है: "वे शूरवीरों के समान दौड़ते हैं, वे योद्धाओं की भाँति शहरपनाह पर चढ़ते हैं; वे अपनी-अपनी राह पर चलते हैं और अपनी पंक्ति नहीं छोड़ते।" विनाश करनेवाले कतार नहीं तोड़ते, और हम? परमेश्वर की ओर चलते हुए हम कितनी जल्दी भटक जाते हैं। आज अपनी पंक्ति में लौट आओ।
टिड्डियों ने जो खलिहान खाली कर दिए थे, परमेश्वर उन्हीं को भरने की बात करता है: "खलिहान अन्न से भर जाएँगे, और रसकुण्ड नये दाखमधु और ताजे तेल से उमड़ेंगे।" वह तुझे नई जगह नहीं देता, वह उसी खाली जगह को भर देता है जहाँ तू रोया था। जिस कमी को तू छिपाता है, शायद वही उसकी भरपूरी दिखाने का स्थान बने।
वह अंधियारे और घोर अंधकार का दिन होगा, वह बादलों और गहरे बादलों का दिन होगा!" फिर भी योएल कहता है कि यह सेना पहाड़ों पर फैली भोर की तरह आती है। भोर, जो आशा का चिन्ह है, यहाँ अंधकार लेकर आती है। कभी तुम्हारे जीवन में भी सुबह ऐसी ही लगी होगी। ठहरो, अगली आवाज़ यही है: पूरे मन से मेरी ओर फिरो।
टिड्डियों की सेना के बारे में लिखा है, "वे एक दूसरे को धक्का नहीं देते, वे अपनी-अपनी राह पर चलते हैं।" सोचो, कीड़े भी अपनी पंक्ति नहीं तोड़ते, और हम मसीह की देह में एक दूसरे को धकेलते हुए आगे निकलना चाहते हैं। योएल का यह चित्र डराने के लिए है, पर एक सवाल भी छोड़ता है: तुम्हारे साथ चलने वाले को तुम्हारी कोहनी लगती है या तुम्हारा हाथ?
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