बाइबल व्याख्या

प्रेरितों के काम 2

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

आग बँटकर जीभों के रूप में उतरती है और हर एक सिर पर ठहर जाती है, और गलील के अनपढ़ माने जाने वाले लोग अचानक उन भाषाओं में बोलने लगते हैं जो उन्होंने कभी सीखी नहीं। पिन्तेकुस्त के दिन यरूशलेम में इकट्ठी भीड़ घबरा जाती है, कुछ उपहास करते हैं, और तब पतरस खड़ा होकर योएल और दाऊद के वचनों से समझाता है कि यह नशा नहीं, अन्त के दिनों की शुरुआत है। उसका निष्कर्ष चाकू की तरह चलता है: "परमेश्वर ने उसी यीशु को जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, प्रभु भी ठहराया और मसीह भी।" उसी दिन लगभग तीन हजार लोग बपतिस्मा लेते हैं और एक नई तरह का समुदाय जन्म लेता है।

मर्म

यहाँ परमेश्वर कुछ नया नहीं कह रहे, वे अपनी पुरानी प्रतिज्ञा पूरी कर रहे हैं, और यही इस अध्याय का धार्मिक केंद्र है। आत्मा "उण्डेला" जाता है, जैसे पानी किसी सूखी भूमि पर। पुराने नियम में आत्मा चुने हुए कुछ लोगों पर आता था: भविष्यद्वक्ता, राजा, न्यायी। यहाँ आत्मा बेटों और बेटियों पर, जवानों और वृद्धों पर, दासों और दासियों पर आता है। यह सिर्फ अनुभव का विस्तार नहीं, यह वाचा की संरचना का बदल जाना है: अब परमेश्वर की उपस्थिति मंदिर के किसी कमरे में नहीं, बल्कि लोगों के भीतर बसती है। और यह सब अनुग्रह है, क्योंकि जिन्होंने मसीह को क्रूस पर चढ़ाया, उन्हीं को क्षमा और आत्मा का दान दिया जा रहा है। न्याय की जगह दान, यही सुसमाचार की उलटी तर्कशैली है।

सूत्र

बाबेल में भाषाएँ बिखरीं थीं क्योंकि मनुष्य ने स्वयं को ऊँचा करना चाहा था; पिन्तेकुस्त में भाषाएँ जुड़ती हैं क्योंकि परमेश्वर स्वयं नीचे उतरते हैं। ध्यान दीजिए, भाषाएँ मिटाई नहीं गईं, पारथी पारथी ही रहा और अरबी अरबी, पर हर एक "अपनी-अपनी भाषा में" परमेश्वर के बड़े कामों की चर्चा सुनता है। सृष्टि का बिखराव रद्द नहीं होता, वह चंगा होता है। और पतरस का तर्क दाऊद की कब्र से शुरू होकर दाऊद के सिंहासन तक जाता है: जिस वंशज की शपथ परमेश्वर ने खाई थी, वह मर नहीं सकता था, इसलिए "यह अनहोना था कि वह उसके वश में रहता।" राज्य आ गया है, पर तलवार से नहीं, आत्मा के उण्डेले जाने से।

दर्पण

पतरस की सबसे कठिन बात यह नहीं कि यीशु जी उठे, बल्कि यह कि "तुम ने अधर्मियों के हाथ से उसे क्रूस पर चढ़वाकर मार डाला।" वह भीड़ को दर्शक नहीं, भागीदार कहता है। और यहीं हमारा आईना है। हम अपने जीवन की कहानी ऐसे सुनाना पसंद करते हैं जिसमें गलती हमेशा किसी और की हो: बॉस की, जीवनसाथी की, उस रिश्तेदार की जिससे बात बंद है, उस व्यवस्था की जिसने हमें पीछे धकेला। सुननेवालों के हृदय तब छिदे जब उन्होंने दोष अपने ऊपर लिया, और तभी उन्होंने पूछा, "हम क्या करें?" मन फिराव उस प्रश्न से शुरू होता है, न कि आत्म-सुधार की योजना से। आज, दिन खत्म होने से पहले, अपने जीवन का एक ऐसा काम काग़ज़ पर एक वाक्य में लिखिए जिसके लिए आपने आज तक किसी और को दोषी ठहराया है, और उसे ज़ोर से परमेश्वर के सामने स्वीकार कीजिए: यह मैंने किया।

प्रश्न

पतरस कहता है कि यीशु "परमेश्वर की ठहराई हुई योजना और पूर्व ज्ञान के अनुसार" पकड़वाया गया, और उसी साँस में कहता है, "तुम ने… मार डाला।" यह असहज है। अगर क्रूस परमेश्वर की ठहराई हुई योजना थी, तो दोषी कौन? पाठ इस तनाव को सुलझाता नहीं; वह दोनों बातें साथ खड़ी रखता है और हमें दोनों के नीचे खड़ा कर देता है। बाइबल कभी यह नहीं कहती कि परमेश्वर की संप्रभुता मनुष्य की जिम्मेदारी को निगल जाती है, न यह कि मनुष्य की स्वतंत्रता परमेश्वर को किनारे कर देती है। शायद इसका व्यावहारिक अर्थ यही है: आप अपने सबसे बुरे काम के लिए बहाना नहीं बना सकते, और परमेश्वर उसी बुरे काम से भी उद्धार गढ़ सकते हैं। यह आराम नहीं देता, पर यह झूठ भी नहीं बोलता।

अन्तर्पाठ

योएल की भविष्यद्वाणी को पतरस अधूरा नहीं, आरम्भ हुआ घोषित करता है, और उसमें सूर्य के अंधेरे और चाँद के लहू सा होने का हिस्सा भी शामिल रहता है। यानी आत्मा का उण्डेला जाना केवल आशीष नहीं, यह "प्रभु के महान और तेजस्वी दिन" की ओर इशारा करने वाला चिन्ह भी है; अनुग्रह और न्याय एक ही घोषणा में बँधे हैं। दूसरी गूँज और गहरी है: यहेजकेल के द्वारा परमेश्वर ने कहा था कि वे अपनी आत्मा अपने लोगों के भीतर डालेंगे और पत्थर का हृदय हटा देंगे। पिन्तेकुस्त के दिन यही होता है, और इसका प्रमाण आँधी या आग नहीं, बल्कि वह समुदाय है जो "अपनी-अपनी सम्पत्ति और सामान बेच-बेचकर" बाँटने लगा। बदला हुआ हृदय बदले हुए बटुए में दिखता है।

श्रोता

सुननेवाले यहाँ पर्यटक नहीं थे, वे "भक्त-यहूदी" थे जो फसल के पर्व के लिए आए थे, उसी पिन्तेकुस्त पर जब सीनै पर्वत पर व्यवस्था मिलने की याद मनाई जाती थी। आग, शब्द, काँपता हुआ घर, ये उनके कानों में सीनै की आवाज़ें थीं। फर्क यह कि सीनै पर लोग दूर खड़े रहे और आग पर्वत पर रही; यहाँ आग हर एक पर आ ठहरी। और एक बात जो हमसे अक्सर छूट जाती है: पतरस की अंतिम चेतावनी, "अपने आपको इस टेढ़ी जाति से बचाओ," व्यवस्थाविवरण के उस गीत से आती है जिसमें मूसा इस्राएल को ही टेढ़ी पीढ़ी कहता है। यह बाहरी दुश्मनों से अलगाव नहीं, अपने ही लोगों की विद्रोही धारा से बाहर निकलने का बुलावा था।

चिन्तन

"हम क्या करें?" यह प्रश्न पूछने के लिए मुझे अपने विषय में क्या स्वीकार करना पड़ेगा जो मैं अब तक टालता आया हूँ?

यदि आत्मा का आना अपने समुदाय में बाँटने और खुले हाथ में दिखा, तो मेरे पैसे और समय का हिसाब मेरे विश्वास के बारे में आज क्या गवाही दे रहा है?

Acts में और गहराई से जानें

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The Message of Acts

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Stott's classic on how the gospel crossed every boundary on earth.

Acts For Everyone, Part 1

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Acts 2 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

प्रेरितों के काम 2 का क्या अर्थ है?
आग बँटकर जीभों के रूप में उतरती है और हर एक सिर पर ठहर जाती है, और गलील के अनपढ़ माने जाने वाले लोग अचानक उन भाषाओं में बोलने लगते हैं जो उन्होंने कभी सीखी नहीं। पिन्तेकुस्त के दिन यरूशलेम में इकट्ठी भीड़ घबरा जाती है, कुछ उपहास करते हैं, और तब पतरस खड़ा होकर योएल और दाऊद के वचनों से समझाता है कि यह नशा नहीं, अन्त के दिनों की शुरुआत है। उसका निष्कर्ष चाकू की तरह चलता है: "परमेश्वर ने उसी यीशु को जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, प्रभु भी ठहराया और मसीह भी।" उसी दिन लगभग तीन हजार लोग बपतिस्मा लेते हैं और एक नई तरह का समुदाय जन्म लेता है।
प्रेरितों के काम 2 किस विषय में है?
बाबेल में भाषाएँ बिखरीं थीं क्योंकि मनुष्य ने स्वयं को ऊँचा करना चाहा था; पिन्तेकुस्त में भाषाएँ जुड़ती हैं क्योंकि परमेश्वर स्वयं नीचे उतरते हैं। ध्यान दीजिए, भाषाएँ मिटाई नहीं गईं, पारथी पारथी ही रहा और अरबी अरबी, पर हर एक "अपनी-अपनी भाषा में" परमेश्वर के बड़े कामों की चर्चा सुनता है। सृष्टि का बिखराव रद्द नहीं होता, वह चंगा होता है। और पतरस का तर्क दाऊद की कब्र से शुरू होकर दाऊद के सिंहासन तक जाता है: जिस वंशज की शपथ परमेश्वर ने खाई थी, वह मर नहीं सकता था, इसलिए "यह अनहोना था कि वह उसके वश में रहता।" राज्य आ गया है, पर तलवार से नहीं, आत्मा के उण्डेले जाने से।
प्रेरितों के काम 2 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
पतरस कहता है कि यीशु "परमेश्वर की ठहराई हुई योजना और पूर्व ज्ञान के अनुसार" पकड़वाया गया, और उसी साँस में कहता है, "तुम ने... मार डाला।" यह असहज है। अगर क्रूस परमेश्वर की ठहराई हुई योजना थी, तो दोषी कौन? पाठ इस तनाव को सुलझाता नहीं; वह दोनों बातें साथ खड़ी रखता है और हमें दोनों के नीचे खड़ा कर देता है। बाइबल कभी यह नहीं कहती कि परमेश्वर की संप्रभुता मनुष्य की जिम्मेदारी को निगल जाती है, न यह कि मनुष्य की स्वतंत्रता परमेश्वर को किनारे कर देती है। शायद इसका व्यावहारिक अर्थ यही है: आप अपने सबसे बुरे काम के लिए बहाना नहीं बना सकते, और परमेश्वर उसी बुरे काम से भी उद्धार गढ़ सकते हैं। यह आराम नहीं देता, पर यह झूठ भी नहीं बोलता।
प्रेरितों के काम 2 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
सुननेवाले यहाँ पर्यटक नहीं थे, वे "भक्त-यहूदी" थे जो फसल के पर्व के लिए आए थे, उसी पिन्तेकुस्त पर जब सीनै पर्वत पर व्यवस्था मिलने की याद मनाई जाती थी। आग, शब्द, काँपता हुआ घर, ये उनके कानों में सीनै की आवाज़ें थीं। फर्क यह कि सीनै पर लोग दूर खड़े रहे और आग पर्वत पर रही; यहाँ आग हर एक पर आ ठहरी। और एक बात जो हमसे अक्सर छूट जाती है: पतरस की अंतिम चेतावनी, "अपने आपको इस टेढ़ी जाति से बचाओ," व्यवस्थाविवरण के उस गीत से आती है जिसमें मूसा इस्राएल को ही टेढ़ी पीढ़ी कहता है। यह बाहरी दुश्मनों से अलगाव नहीं, अपने ही लोगों की विद्रोही धारा से बाहर निकलने का बुलावा था।
प्रेरितों के काम 2 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यदि आत्मा का आना अपने समुदाय में बाँटने और खुले हाथ में दिखा, तो मेरे पैसे और समय का हिसाब मेरे विश्वास के बारे में आज क्या गवाही दे रहा है?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Acts 2 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

पिन्तेकुस्त के दिन भीड़ के पास कोई तैयार जवाब नहीं था। वे बस चकित और घबराए हुए खड़े थे और पूछ रहे थे, "इसका क्या अर्थ है?" और यही सवाल पतरस के उपदेश का दरवाज़ा बना। परमेश्वर तुम्हारे उलझे हुए सवालों से नहीं डरता। जो मज़ाक उड़ाकर चले गए, वे चूक गए। जो ठहरकर पूछते रहे, उन्होंने उसी दिन मसीह को पाया। तुम्हारा सवाल कहाँ ले जा रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

जब वह शब्द हुआ तो भीड़ लग गई और लोग घबरा गए, क्योंकि हर एक को यही सुनाई देता था कि ये मेरी ही भाषा में बोल रहे हैं।"

ध्यान दो, परमेश्वर ने यह नहीं कहा कि पहले कोई पवित्र भाषा सीखो, फिर मेरी बात समझोगे। वह खुद हर एक की मातृभाषा तक उतर आया। जिस भाषा में तुम रोते हो, जिसमें माँ ने तुम्हें पुकारा था, उसी में वह तुमसे बात करना चाहता है। क्या तुम उसे अपनी असली भाषा में जवाब दोगे?

धन्यवाद संपादकीय पर पद 40

पिता, धन्यवाद कि पतरस चुप नहीं रहा, बल्कि और बहुत सी बातों से गवाही देकर समझाता रहा। धन्यवाद कि तूने आज भी चेतावनी देकर हमें जगाया और बुलाया, "अपने आपको इस टेढ़ी जाति से बचाओ।" तेरी यह पुकार हमारे लिए जीवन बनी।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 32

इसी यीशु को परमेश्वर ने जिलाया, जिसके हम सब गवाह हैं।" पतरस ने कोई तर्क नहीं दिया, बस अपनी आँखों देखी बात कही। जिस आदमी ने डर के मारे यीशु को नकारा था, वही अब भीड़ के सामने खड़ा है। गवाह होने के लिए तुम्हें विद्वान नहीं होना है, सिर्फ यह जानना है कि जी उठे यीशु ने तुम्हारे जीवन में क्या किया। वह कहानी तुम किसे सुनाओगे?

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