इफिसियों 4:8
पाठ
पौलुस अभी-अभी कह चुका है कि "हम में से हर एक को मसीह के दान के परिमाण से अनुग्रह मिला है," और फिर वे अपनी बात को पवित्रशास्त्र के एक वचन से बाँध देते हैं: "वह ऊँचे पर चढ़ा, और बन्दियों को बाँध ले गया, और मनुष्यों को दान दिए।" तीन क्रियाएँ, एक ही साँस में: चढ़ना, बन्दियों को बाँधना, और देना। यह किसी शिक्षक का सौम्य वाक्य नहीं, बल्कि युद्ध से लौटते हुए विजेता राजा का चित्र है, जो नगर की ऊँचाई पर चढ़ता है, पराजित शक्तियों को अपने पीछे खींचता है, और फिर लूट का माल अपने लोगों में बाँट देता है। पौलुस कहते हैं: कलीसिया में जो वरदान तुम देख रहे हो, वे इसी जुलूस का हिस्सा हैं।
मर्म
यहाँ अनुग्रह को भावना की भाषा में नहीं, विजय की भाषा में कहा गया है। मसीह ने जो दिया, वह उनकी जीत का फल है, इसलिए हर वरदान पर क्रूस और पुनरुत्थान की मुहर लगी है। इसका एक कठोर परिणाम है: तुम्हारी क्षमता तुम्हारी उपलब्धि नहीं, लूट का हिस्सा है, किसी और के युद्ध से कमाई हुई। और एक कोमल परिणाम भी: वही प्रभु जिसने अन्धकार की शक्तियों को बन्दी बनाया, अब खाली हाथ नहीं लौटे; वे बाँटते हुए लौटे। परमेश्वर विजय को अपने पास जमा नहीं रखते, वे उसे वितरित करते हैं। इसीलिए पद 7 "हर एक को" कहता है। जहाँ राजा लूट बाँटता है, वहाँ कोई कोने में खड़ा दर्शक नहीं रहता; देह का हर अंग उस विजय से कुछ न कुछ थामे हुए है।
सूत्र
पौलुस यहाँ भजन संहिता 68 से उद्धरण ले रहे हैं, वह भजन जिसमें परमेश्वर सीनै से निकलकर अपने शत्रुओं को हराते हुए सिय्योन की ऊँचाई पर चढ़ते हैं। वह प्राचीन विजय-गीत अब एक नाम पा गया है: यीशु मसीह। और पौलुस इसे खुला छोड़ने को तैयार नहीं, इसलिए पद 9 और 10 में वे स्वयं समझाते हैं कि चढ़ने का अर्थ है कि वे "पृथ्वी की निचली जगहों में उतरा भी था।" पहले उतरना, फिर चढ़ना; पहले देहधारण और मृत्यु, फिर सिंहासन। यही परमेश्वर की उद्धार-योजना का आकार है, पूरे पवित्रशास्त्र में वही लय: नीचे जाकर ऊपर उठाना। और उस चढ़ाई का लक्ष्य कोई दूरी नहीं, बल्कि भराव है, "कि सब कुछ परिपूर्ण करे।" मसीह ऊपर गए ताकि नीचे कुछ भी खाली न छूटे।
दर्पण
यह पद उस जगह उँगली रखता है जहाँ हम सबसे कम छुआ जाना चाहते हैं: हमारी तुलना। आप मण्डली में बैठकर सोचते हैं कि जो व्यक्ति सामने बोल रहा है, उसके पास वह है जो आपके पास नहीं। या आप सिखाते हैं, नेतृत्व करते हैं, और भीतर कहीं एक शान्त गर्व पलता है कि यह मेहनत से कमाया हुआ है। यह पद दोनों को तोड़ता है। जो आपके पास है, वह किसी और के युद्ध की लूट है, इसलिए घमण्ड का कोई आधार नहीं; और जो आपके पास है, वह राजा ने स्वयं चुनकर आपके हाथ में रखा है, इसलिए हीनता का भी कोई आधार नहीं। दफ्तर में, रसोई में, कक्षा में आपकी क्षमता वेतन नहीं, उपहार है। आज एक काम कीजिए: अपनी मण्डली के किसी एक व्यक्ति को संदेश भेजिए और उसमें नाम लेकर लिखिए कि उसमें आप कौन-सा वरदान देखते हैं और वह मसीह की विजय का हिस्सा है।
श्रोता
इफिसुस के पाठकों के लिए यह चित्र अपरिचित नहीं था। रोमी साम्राज्य में विजयी सेनापति का जुलूस एक जाना-पहचाना तमाशा था: बन्दी जंजीरों में पीछे-पीछे, और लूट का माल सैनिकों और नागरिकों में बँटता हुआ। पर इफिसुस में एक और बात थी। यह अरतिमिस की नगरी थी, जादू-टोने और आत्मिक शक्तियों के भय से भरा हुआ शहर, जहाँ लोग ताबीज़ और मंत्रों पर जीवन टिकाते थे। ऐसे कानों में "वह ऊँचे पर चढ़ा, और बन्दियों को बाँध ले गया" किसी काव्य की तरह नहीं, बल्कि राहत की तरह गिरा होगा: जिन शक्तियों से तुम काँपते थे, वे अब जुलूस में बन्दी हैं। और उन्हें हराने वाला तुमसे दूर नहीं; वह तुम्हें बाँट रहा है।
बारीकी
"बन्दियों को बाँध ले गया" में एक मोड़ छिपा है जिसे जल्दी में पढ़ने वाला खो देता है। मूल भाव यह है कि बन्दीपन को ही बन्दी बना लिया गया। कैद स्वयं कैद हो गई। जो शक्ति मनुष्य को जकड़ती थी, वही अब जंजीर में है। और अब पद 1 पर लौटिए: यह पत्र लिखने वाला स्वयं कहता है, "मैं जो प्रभु में बन्दी हूँ।" एक कैदी लिख रहा है कि कैद पराजित हो चुकी है। यह विडम्बना नहीं, गवाही है। पौलुस की कोठरी उनके संदेश का खण्डन नहीं करती, उसे प्रमाणित करती है, क्योंकि वे जंजीर में होते हुए भी बाँटने वाले बने हुए हैं। मसीह की विजय पर विश्वास इसी में दिखता है: बन्धन के भीतर से भी उपहार निकलते रहते हैं।
प्रसंग
पौलुस बन्दीगृह से लिख रहे हैं, सम्भवतः रोम से, और यह पत्र शायद इफिसुस के आसपास की कई मण्डलियों में पढ़ा जाता था। पहले तीन अध्यायों में उन्होंने बताया कि परमेश्वर ने मसीह में क्या किया: यहूदी और अन्यजाति को एक देह बनाया। अध्याय 4 से वे मोड़ लेते हैं, अब जीवन की ओर: "उसके योग्य चाल चलो।" पद 4 से 6 तक सात बार "एक ही" गूँजता है, एकता का जोर। फिर पद 7 अचानक विविधता लाता है, "हर एक को," और पद 8 उस विविधता का आधार देता है। यह जोड़ ही कुंजी है: भिन्नता एकता के विरुद्ध नहीं, उसी राजा के एक ही भण्डार से निकली हुई है, जो पद 11 में प्रेरित, भविष्यद्वक्ता, सुसमाचार सुनाने वाले और रखवाले देकर देह को बढ़ाते हैं।
चिंतन
आपके पास जो क्षमता है, उसे आप सामान्यतः अपनी मेहनत का फल मानते हैं या मसीह की विजय की लूट? इस अन्तर से आपके बोलने और सेवा करने के ढंग में क्या बदलेगा?
पौलुस जंजीर में रहते हुए भी बाँटने वाले बने रहे। आपके जीवन की कौन-सी सीमा या बन्धन है जिसके भीतर से परमेश्वर आपके द्वारा कुछ देना चाहते हैं?
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Ephesians 4:8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
इफिसियों 4:8 का क्या अर्थ है?
इफिसियों 4:8 किस विषय में है?
इफिसियों 4:8 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
इफिसियों 4:8 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
इफिसियों 4:8 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Ephesians 4 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, आपका पुत्र ऊपर जाने से पहले सबसे नीचे उतरा, वहाँ तक जहाँ मेरी टूटन और अंधेरा है। जब मैं गहराई में डूबता हूँ, मुझे याद दिला कि वहाँ भी आप पहले से मौजूद हैं। आपका प्रेम किसी भी गड्ढे से नीचे पहुँच सकता है, यही मेरा भरोसा है।
pita, mere bhitar jo kadwahat chhupi hai, use tu jaanta hai. gussa, chubhte shabd aur purani shikayatein mujhe andar se thaka rahi hain. mujhe himmat de ki main inhein pakde rehne ke bajay tere haathon mein chhod doon, aur mera dil halka ho jaaye.
*(Hindi script version below)*
पिता, मेरे भीतर जो कड़वाहट छिपी है, उसे तू जानता है। गुस्सा, चुभते शब्द और पुरानी शिकायतें मुझे अंदर से थका रही हैं। मुझे हिम्मत दे कि मैं इन्हें पकड़े रहने के बजाय तेरे हाथों में छोड़ दूँ, और मेरा दिल हल्का हो जाए।
पिता, मेरे भीतर अब भी वह पुराना स्वभाव अटका है, जो धोखा देने वाली इच्छाओं से मुझे खींचता है। मुझे ताकत दे कि मैं उसे उतारकर रख दूँ, जैसे मैला कपड़ा। मुझे नया कर, ताकि मेरा जीना तेरे प्यार जैसा दिखे।
पिता, धन्यवाद कि आपने मुझे ऐसे लोग दिए जो "प्रेम में एक दूसरे को सह" लेते हैं, जिन्होंने मेरी चिड़चिड़ाहट और कमियों को धीरज से सहा है। धन्यवाद कि आप स्वयं मुझ पर हर दिन धीरज धरते हैं, और दीनता और नम्रता सीखने की कृपा देते हैं।
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