बाइबल व्याख्या

इफिसियों 4

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

सूर्य अस्त होने से पहले

"सूर्य अस्त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।" यह पौलुस का एक वाक्य है जो आपके भीतर घुस जाता है, खासकर अगर आज सुबह ही घर में कुछ हुआ हो, या दफ़्तर में कोई ऐसी बात हुई हो जो अभी भी सीने में जल रही है। पौलुस यहाँ क्रोध को मना नहीं कर रहे, वे उसे सुला देने से मना कर रहे हैं। बिस्तर पर जाने से पहले उसे निपटाओ, वरना वह रात भर आपके साथ सोएगा और सुबह पहले उठ जाएगा।

पाठ

पौलुस बन्दीगृह से लिखते हैं और विश्वासियों से आग्रह करते हैं कि वे अपनी बुलाहट के योग्य चलें, दीनता और धीरज के साथ शरीर की एकता बनाए रखें। मसीह ने प्रेरित, भविष्यद्वक्ता, सुसमाचारक और उपदेशक इसलिए दिए ताकि पवित्र लोग सिद्ध हों और मसीह की देह बढ़े। फिर वे बहुत ठोस होकर कहते हैं: पुराना मनुष्यत्व उतारो, नया पहनो, और उसके बाद रोज़मर्रा की सूची, झूठ, क्रोध, चोरी, गंदी बातें, कड़वाहट।

मर्म

यह अध्याय दो हिस्सों में टूटा दिखता है, ऊँची कलीसियाई धर्मशास्त्र और फिर घरेलू निर्देश, पर असल में यह एक ही धागा है। पौलुस के लिए मसीह की देह कोई रूपक नहीं है। वह ठोस है। इसलिए जब आप अपने पड़ोसी से झूठ बोलते हैं, तो आप अपने ही अंग से झूठ बोल रहे हैं। जब आप कड़वाहट पालते हैं, तो आप उस देह को ज़हर दे रहे हैं जिसका सिर मसीह है। एकता कोई भावुक आदर्श नहीं, यह एक शारीरिक सच्चाई है जिसमें आप या तो जीवन डाल रहे हैं या मृत्यु।

समूचा सूत्र

पद 8 में पौलुस भजन 68 उठाते हैं, विजयी राजा ऊँचे पर चढ़ा और बन्दियों को बाँध ले गया। लेकिन पौलुस मोड़ देते हैं, यह राजा दान देता है, लूटता नहीं। और वह पहले नीचे उतरा, उसके बाद ऊपर चढ़ा। यहाँ पुराने नियम की विजय-कहानी मसीह के क्रूस और पुनरुत्थान में पूरी होती है। जो नीचे उतरा, वही ऊपर गया, और वहीं से वह अपनी कलीसिया को दान बाँटता है, लोगों के रूप में। प्रेरित, उपदेशक, ये लोग स्वयं मसीह के उपहार हैं देह के लिए। यह उत्पत्ति से चली आ रही उस कहानी की परिणति है जहाँ परमेश्वर बिखरे हुओं को एक शरीर में जोड़ रहे हैं।

दर्पण

अब सीधे बात। आप क्या पहनकर घूम रहे हैं? पौलुस कपड़े का रूपक चुनते हैं क्योंकि वह जानते हैं कि हम अपने पुराने स्वभाव से इस तरह जुड़े हैं जैसे किसी पुरानी, आरामदायक कमीज़ से। वह गन्दी है, पर वह आपकी है। "भरमानेवाली अभिलाषाएँ", यह शब्द रुककर पढ़िए। वे अभिलाषाएँ जो आपसे झूठ बोलती हैं कि उनके पूरे होने पर आप संतुष्ट होंगे। वह करियर की सीढ़ी। वह रिश्ता जो नहीं होना चाहिए। वह फ़ोन जिसे आप देर रात तक स्क्रॉल करते हैं। पौलुस कहते हैं, ये सब भरमानेवाली हैं। और फिर पद 29, "कोई गंदी बात तुम्हारे मुँह से न निकले।" अपने पिछले तीन दिनों की बातचीत याद कीजिए, ऑफ़िस के बारे में पीठ पीछे की टिप्पणियाँ, जीवनसाथी को दी गई तीखी बात। क्या वे "उन्नति के लिये उत्तम" थीं?

प्रश्न

पद 26 अटकता है। "क्रोध तो करो, पर पाप मत करो।" तो क्रोध अपने आप में पाप नहीं है? पौलुस इसे स्वीकार करते हैं, कुछ चीज़ें हैं जिन पर क्रोधित न होना ही असल पाप है। अन्याय, बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, झूठ का बोलबाला। पर वे तुरन्त एक बाड़ लगाते हैं, सूर्य अस्त होने से पहले उसे निपटाओ। क्यों? क्योंकि क्रोध का स्वभाव है सड़ना। जो शुरू में न्याय की आग होती है, वह रात भर में कड़वाहट बन जाती है, और कड़वाहट शैतान को "अवसर" देती है, यह पौलुस का शब्द है, पैर रखने की जगह। यहाँ कोई आसान समाधान नहीं है। कुछ क्रोध सालों पुराने हैं। पौलुस उन्हें भी उसी दिन निपटाने को कहते हैं।

मुख्य पात्र

इस अध्याय में मसीह असामान्य भूमिका में हैं। वे नीचे उतरने वाले और ऊपर चढ़ने वाले हैं, दोनों। वे सिर हैं जिससे पूरी देह "जोड़ की सहायता से एक साथ मिलकर" बढ़ती है (पद 16)। और अन्त में, वे वह हैं जिनमें परमेश्वर ने आपके अपराध क्षमा किए (पद 32)। ध्यान दीजिए, पौलुस क्षमा को कोई नैतिक आदेश नहीं बनाते, वे उसे व्युत्पन्न बनाते हैं। "जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही।" पहले क्षमा प्राप्त हुई, फिर क्षमा दी जाती है। यह क्रम उलटा नहीं हो सकता। जो व्यक्ति अपनी क्षमा की गहराई नहीं जानता, वह दूसरों को कभी सच्ची क्षमा नहीं दे पाएगा।

श्रोताओं का चेहरा

इफिसुस के विश्वासी अन्यजातियों की दुनिया से आए थे, वह दुनिया जहाँ अर्तिमिस के मंदिर में यौन उत्सव थे, जहाँ झूठ व्यवसाय का हिस्सा था, जहाँ दास और स्वामी एक ही कलीसिया में बैठने लगे थे। पौलुस जब कहते हैं "अन्यजातीय लोग अपने मन की अनर्थ की रीति पर

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Ephesians 4 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

इफिसियों 4 का क्या अर्थ है?
"सूर्य अस्त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।" यह पौलुस का एक वाक्य है जो आपके भीतर घुस जाता है, खासकर अगर आज सुबह ही घर में कुछ हुआ हो, या दफ़्तर में कोई ऐसी बात हुई हो जो अभी भी सीने में जल रही है। पौलुस यहाँ क्रोध को मना नहीं कर रहे, वे उसे सुला देने से मना कर रहे हैं। बिस्तर पर जाने से पहले उसे निपटाओ, वरना वह रात भर आपके साथ सोएगा और सुबह पहले उठ जाएगा।
इफिसियों 4 किस विषय में है?
पौलुस बन्दीगृह से लिखते हैं और विश्वासियों से आग्रह करते हैं कि वे अपनी बुलाहट के योग्य चलें, दीनता और धीरज के साथ शरीर की एकता बनाए रखें। मसीह ने प्रेरित, भविष्यद्वक्ता, सुसमाचारक और उपदेशक इसलिए दिए ताकि पवित्र लोग सिद्ध हों और मसीह की देह बढ़े। फिर वे बहुत ठोस होकर कहते हैं: पुराना मनुष्यत्व उतारो, नया पहनो, और उसके बाद रोज़मर्रा की सूची, झूठ, क्रोध, चोरी, गंदी बातें, कड़वाहट।
इफिसियों 4 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यह अध्याय दो हिस्सों में टूटा दिखता है, ऊँची कलीसियाई धर्मशास्त्र और फिर घरेलू निर्देश, पर असल में यह एक ही धागा है। पौलुस के लिए मसीह की देह कोई रूपक नहीं है। वह ठोस है। इसलिए जब आप अपने पड़ोसी से झूठ बोलते हैं, तो आप अपने ही अंग से झूठ बोल रहे हैं। जब आप कड़वाहट पालते हैं, तो आप उस देह को ज़हर दे रहे हैं जिसका सिर मसीह है। एकता कोई भावुक आदर्श नहीं, यह एक शारीरिक सच्चाई है जिसमें आप या तो जीवन डाल रहे हैं या मृत्यु।
इफिसियों 4 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पद 8 में पौलुस भजन 68 उठाते हैं, विजयी राजा ऊँचे पर चढ़ा और बन्दियों को बाँध ले गया। लेकिन पौलुस मोड़ देते हैं, यह राजा दान देता है, लूटता नहीं। और वह पहले नीचे उतरा, उसके बाद ऊपर चढ़ा। यहाँ पुराने नियम की विजय-कहानी मसीह के क्रूस और पुनरुत्थान में पूरी होती है। जो नीचे उतरा, वही ऊपर गया, और वहीं से वह अपनी कलीसिया को दान बाँटता है, लोगों के रूप में। प्रेरित, उपदेशक, ये लोग स्वयं मसीह के उपहार हैं देह के लिए। यह उत्पत्ति से चली आ रही उस कहानी की परिणति है जहाँ परमेश्वर बिखरे हुओं को एक शरीर में जोड़ रहे हैं।
इफिसियों 4 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
अब सीधे बात। आप क्या पहनकर घूम रहे हैं?
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Ephesians 4 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

जीत के बाद राजा लूट का माल अपने लोगों में बाँटता था। मसीह भी ऊँचे पर चढ़ा, पर जीत अपने पास नहीं रखी: "वह ऊँचे पर चढ़ा और बन्धुवाई को बन्दी बनाकर ले गया, और मनुष्यों को दान दिए।" जो तुझे बाँधे रखता था, अब वही उसका बन्दी है। और तेरे भीतर जो वरदान है, वह उसी विजय का हिस्सा है। उसे दबाकर मत रख।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 12

पिता, तूने हर एक को कुछ न कुछ देकर भेजा है। मुझे भी तैयार कर, ताकि जो सेवा मेरे हाथ में है उसे प्रेम से कर सकूँ। मेरे काम से तेरे लोग मज़बूत हों, और तेरी देह थोड़ी और पूरी होती जाए।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 25

पिता, धन्यवाद कि आपने हमें एक दूसरे का अंग बनाया है। धन्यवाद कि झूठ की जगह अब हमें सच बोलने की आज़ादी मिली है, और आपस में भरोसे का रिश्ता। उन लोगों के लिए भी धन्यवाद जो हमसे सच कहते हैं, चाहे वह सुनने में कठिन ही क्यों न हो।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 28

चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; बल्कि भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे, इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।"

रुकिए और देखिए, पौलुस केवल यह नहीं कहते कि चोरी छोड़ो। वह उन्हीं हाथों को नया काम देते हैं। जो हाथ लेने के लिए बढ़ते थे, वही अब देने के लिए मेहनत करें।

क्या आपका परिश्रम केवल अपने लिए है, या उसमें किसी ज़रूरतमंद का हिस्सा भी छिपा है?

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