बाइबल व्याख्या

निर्गमन 8

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

फ़िरौन के इनकार पर परमेश्वर तीन विपत्तियाँ भेजते हैं: मेंढक जो शयनकक्ष से तन्दूर तक चढ़ आते हैं, कुटकियाँ जो धूल से निकलती हैं, और डांसों के झुण्ड जो पूरे देश को नाश कर देते हैं। हर बार फ़िरौन झुकने का संकेत देता है, विनती करवाता है, राहत पाता है, और फिर पीछे हट जाता है। बीच में दो मोड़ आते हैं: जादूगर हार मान लेते हैं और कहते हैं, "यह तो परमेश्वर के हाथ का काम है," और परमेश्वर गोशेन को अलग रखकर अपनी प्रजा और मिस्र के बीच अन्तर ठहराते हैं।

मर्म

इस अध्याय का धड़कता हुआ केन्द्र पद 15 है: "जब फ़िरौन ने देखा कि अब आराम मिला है तब… उसने फिर अपने मन को कठोर किया।" राहत ही उसका सबसे बड़ा ख़तरा बन जाती है। दबाव में वह नरम पड़ता है, दबाव हटते ही पत्थर हो जाता है। यहाँ परमेश्वर यह प्रकट कर रहे हैं कि मनुष्य का हृदय दर्द से नहीं बदलता; दर्द केवल परदा हटाता है। और परमेश्वर का लक्ष्य केवल मिस्र को दंड देना नहीं है, बल्कि पहचान करवाना है: "हमारे परमेश्वर यहोवा के तुल्य कोई दूसरा नहीं है" और "पृथ्वी के बीच मैं ही यहोवा हूँ।" विपत्तियाँ क्रोध का विस्फोट नहीं, बल्कि एक धैर्यपूर्ण, बार-बार दोहराया गया प्रश्न हैं: तू किसे परमेश्वर मानता है?

सूत्र

गोशेन का अलग रखा जाना छोटी सी बात लगती है, पर यही आगे के पूरे छुटकारे की नींव है। परमेश्वर "अपनी प्रजा और तेरी प्रजा में अन्तर ठहराऊँगा" कहते हैं, और यही अन्तर पसाह की रात लहू के चिन्ह में अपने शिखर पर पहुँचेगा। छुटकारा हमेशा चुनाव और सुरक्षा दोनों के साथ आता है: परमेश्वर अपने लोगों को न्याय के बीच से बचाकर निकालते हैं, न कि न्याय के आने से पहले हटाकर। यही रेखा क्रूस तक जाती है, जहाँ मसीह में परमेश्वर एक नया गोशेन बनाते हैं, ऐसा स्थान नहीं बल्कि एक व्यक्ति, जिसमें छिपकर हम खड़े रह सकते हैं। और मूसा का बार-बार फ़िरौन के लिये विनती करना उस मध्यस्थ की धुँधली छाया है जो अपने शत्रुओं के लिये प्रार्थना करेगा।

दर्पण

आप फ़िरौन को पढ़ते हुए दूर खड़े रहना चाहते हैं, पर उसका ढाँचा आपका जाना-पहचाना है। बीमारी की रिपोर्ट आने से पहले की रात आपने जो वादे किए थे, वे रिपोर्ट साफ़ आने के बाद कहाँ गए? नौकरी जाने के डर में जो प्रार्थनाएँ शुरू हुई थीं, वेतन बढ़ने के बाद कितने दिन चलीं? विवाह में जो झगड़ा हुआ था और आपने कहा था "अब मैं बदलूँगा," वह वादा तनाव उतरने के साथ ही उतर गया। यह पाठ आपके संकट में की गई प्रार्थनाओं को बेकार नहीं कहता, पर वह पूछता है कि आपकी नरमी विश्वास थी या केवल दर्द से बचने की चतुराई। और फ़िरौन का सौदा भी सुनिए: "केवल बहुत दूर न जाना।" हम भी परमेश्वर को आधा समर्पण देना जानते हैं, बस इतना कि नियंत्रण अपने हाथ में रहे।

मुख्य पात्र

फ़िरौन कोई मूर्ख अत्याचारी नहीं है; वह एक बुद्धिमान, गणना करनेवाला व्यक्ति है, और यही उसे और भयानक बनाता है। जब मूसा पूछता है कि विनती कब करूँ, वह ठंडे दिमाग़ से कहता है, "कल।" आज नहीं, ताकि थोड़ी और गुंजाइश बची रहे। वह मानता है कि सहायता कहीं और से आनी है, इसलिए मूसा को बुलाता है; पर मानने और झुकने में वह फ़ासला बनाए रखता है जो अंत में उसे नष्ट करेगा। उसके जादूगर उससे पहले हार मान लेते हैं: "यह तो परमेश्वर के हाथ का काम है।" फ़िरौन के पास सत्य की जानकारी है, प्रमाण है, गवाह हैं, और फिर भी वह मन को कठोर करता है। यह ज्ञान की कमी नहीं, इच्छा की बग़ावत है।

श्रोता

पहले सुननेवाले वे इस्राएली थे जो जंगल में बैठकर अपनी कहानी सुन रहे थे, ऐसे लोग जिनके दादा-परदादा उस साम्राज्य के दास थे जिसे तब अजेय समझा जाता था। मिस्र में नील नदी देवता थी, मेंढक तक उर्वरता की देवी का चिन्ह था, और फ़िरौन स्वयं देवपुत्र माना जाता था। इसलिए जब मेंढक उसी नील से निकलकर फ़िरौन के बिछौने पर चढ़ जाते हैं और सड़कर देश को दुर्गन्ध से भर देते हैं, तो श्रोता हँसते भी हैं और काँपते भी हैं: मिस्र के देवता ही मिस्र की सज़ा बन गए। और गोशेन का अलग रखा जाना उन दासों के कानों में स्वतंत्रता की घोषणा थी, कि पृथ्वी की सबसे तुच्छ जाति परमेश्वर की आँखों में चिन्हित है।

अन्तर्पाठ

जादूगरों का वाक्य "यह तो परमेश्वर के हाथ का काम है" यीशु के उन शब्दों की पूर्व-प्रतिध्वनि है जब वे कहते हैं कि वे परमेश्वर की उँगली से दुष्टात्माएँ निकालते हैं, और उन्हें भी देखनेवाले लोग मिले जिन्होंने चिन्ह देखे पर हृदय बंद रखा। यही विषय पौलुस रोमियों 9 में उठाता है, जहाँ फ़िरौन का कठोर होना परमेश्वर की सर्वसत्ता और मनुष्य के इनकार, दोनों का उदाहरण बनता है; निर्गमन दोनों बातें साथ रखता है और हमें उन्हें आसानी से सुलझाने नहीं देता। लगातार लौटता वाक्य "मेरी प्रजा के लोगों को जाने दे जिससे वे मेरी उपासना करें" याद दिलाता है कि छुटकारे का उद्देश्य केवल आज़ादी नहीं, आराधना है। दासता से निकलना अपने आप में मंज़िल नहीं है।

चिन्तन

राहत मिलने के बाद आपकी प्रार्थनाओं का क्या हुआ? किस विषय में आपने संकट के समय जो कहा था, वह आराम आते ही भुला दिया?

"केवल बहुत दूर न जाना" वाला सौदा आप परमेश्वर से किस क्षेत्र में कर रहे हैं, कि समर्पण दिखे पर नियंत्रण आपके हाथ में रहे?

Exodus में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Exodus

Alec Motyer

Traces how God rescues a people for himself, from slavery to Sinai.

Exodus For You

Tim Chester

An accessible chapter by chapter guide that keeps pointing to Jesus.

Exodus: An Introduction and Commentary

R. Alan Cole

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Exodus

Peter Enns

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Exodus: Saved for God's Glory

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Exodus 8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

निर्गमन 8 का क्या अर्थ है?
फ़िरौन के इनकार पर परमेश्वर तीन विपत्तियाँ भेजते हैं: मेंढक जो शयनकक्ष से तन्दूर तक चढ़ आते हैं, कुटकियाँ जो धूल से निकलती हैं, और डांसों के झुण्ड जो पूरे देश को नाश कर देते हैं। हर बार फ़िरौन झुकने का संकेत देता है, विनती करवाता है, राहत पाता है, और फिर पीछे हट जाता है। बीच में दो मोड़ आते हैं: जादूगर हार मान लेते हैं और कहते हैं, "यह तो परमेश्वर के हाथ का काम है," और परमेश्वर गोशेन को अलग रखकर अपनी प्रजा और मिस्र के बीच अन्तर ठहराते हैं।
निर्गमन 8 किस विषय में है?
गोशेन का अलग रखा जाना छोटी सी बात लगती है, पर यही आगे के पूरे छुटकारे की नींव है। परमेश्वर "अपनी प्रजा और तेरी प्रजा में अन्तर ठहराऊँगा" कहते हैं, और यही अन्तर पसाह की रात लहू के चिन्ह में अपने शिखर पर पहुँचेगा। छुटकारा हमेशा चुनाव और सुरक्षा दोनों के साथ आता है: परमेश्वर अपने लोगों को न्याय के बीच से बचाकर निकालते हैं, न कि न्याय के आने से पहले हटाकर। यही रेखा क्रूस तक जाती है, जहाँ मसीह में परमेश्वर एक नया गोशेन बनाते हैं, ऐसा स्थान नहीं बल्कि एक व्यक्ति, जिसमें छिपकर हम खड़े रह सकते हैं। और मूसा का बार-बार फ़िरौन के लिये विनती करना उस मध्यस्थ की धुँधली छाया है जो अपने शत्रुओं के लिये प्रार्थना करेगा।
निर्गमन 8 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
फ़िरौन कोई मूर्ख अत्याचारी नहीं है; वह एक बुद्धिमान, गणना करनेवाला व्यक्ति है, और यही उसे और भयानक बनाता है। जब मूसा पूछता है कि विनती कब करूँ, वह ठंडे दिमाग़ से कहता है, "कल।" आज नहीं, ताकि थोड़ी और गुंजाइश बची रहे। वह मानता है कि सहायता कहीं और से आनी है, इसलिए मूसा को बुलाता है; पर मानने और झुकने में वह फ़ासला बनाए रखता है जो अंत में उसे नष्ट करेगा। उसके जादूगर उससे पहले हार मान लेते हैं: "यह तो परमेश्वर के हाथ का काम है।" फ़िरौन के पास सत्य की जानकारी है, प्रमाण है, गवाह हैं, और फिर भी वह मन को कठोर करता है। यह ज्ञान की कमी नहीं, इच्छा की बग़ावत है।
निर्गमन 8 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
जादूगरों का वाक्य "यह तो परमेश्वर के हाथ का काम है" यीशु के उन शब्दों की पूर्व-प्रतिध्वनि है जब वे कहते हैं कि वे परमेश्वर की उँगली से दुष्टात्माएँ निकालते हैं, और उन्हें भी देखनेवाले लोग मिले जिन्होंने चिन्ह देखे पर हृदय बंद रखा। यही विषय पौलुस रोमियों 9 में उठाता है, जहाँ फ़िरौन का कठोर होना परमेश्वर की सर्वसत्ता और मनुष्य के इनकार, दोनों का उदाहरण बनता है; निर्गमन दोनों बातें साथ रखता है और हमें उन्हें आसानी से सुलझाने नहीं देता। लगातार लौटता वाक्य "मेरी प्रजा के लोगों को जाने दे जिससे वे मेरी उपासना करें" याद दिलाता है कि छुटकारे का उद्देश्य केवल आज़ादी नहीं, आराधना है। दासता से निकलना अपने आप में मंज़िल नहीं है।
निर्गमन 8 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
"केवल बहुत दूर न जाना" वाला सौदा आप परमेश्वर से किस क्षेत्र में कर रहे हैं, कि समर्पण दिखे पर नियंत्रण आपके हाथ में रहे?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Exodus 8 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 22

पिता, तू जानता है कि मैं कहाँ खड़ा हूँ। जैसे तूने अपने लोगों की भूमि को अलग रखा, वैसे ही मुझे भी अपनी छाया में थाम ले। जब चारों ओर गड़बड़ी हो, मुझे याद रहे कि तू इस धरती के बीच में ही मौजूद है, दूर नहीं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 20

फिरौन सुबह सुबह नदी की ओर जाता है, शायद पूजा के लिए, शायद अपने देवताओं से मिलने। और वहीं परमेश्वर मूसा को भेजते हैं: "मेरी प्रजा को जाने दे, कि वे मेरी उपासना करें।"

परमेश्वर उसे महल में नहीं, उसकी दिनचर्या में पकड़ते हैं। जहाँ तू रोज़ जाता है, जो तेरी आदत बन चुकी है, वहीं परमेश्वर तुझसे मिलना चाहते हैं। क्या तू सुन रहा है, या बस चलता जा रहा है?

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