बाइबल व्याख्या

हबक्कूक 2:2

बाइबल
यह वचन THE OPEN HEAVEN CHURCH द्वारा समर्पित है

पाठ

पहरे की दीवार पर हवा ठंडी है। हबक्कूक रात भर खड़ा रहा है, आँखें क्षितिज पर गड़ी हुईं, इस प्रश्न के साथ कि जिस परमेश्वर पर उसने उलाहना दिया है वह क्या उत्तर देंगे। और तब चुप्पी टूटती है। उत्तर आता है, परन्तु वैसा नहीं जैसा वह सोचता था: कोई सफाई नहीं, कोई तर्क नहीं, बल्कि एक आदेश। "दर्शन की बातें लिख दे; वरन् पटियाओं पर साफ-साफ लिख दे कि दौड़ते हुए भी वे सहज से पढ़ी जाएँ।" परमेश्वर कहते हैं: जो मैं दिखाऊँ उसे पत्थर पर उतार दे, इतने बड़े और स्पष्ट अक्षरों में कि दौड़ता हुआ आदमी भी एक नज़र में पढ़ ले। शिकायत करनेवाले भविष्यद्वक्ता के हाथ में उत्तर के बदले एक कलम थमा दी जाती है।

मूल बात

यहाँ परमेश्वर के विषय में कुछ ऐसा खुलता है जो आसानी से छूट जाता है: वे अपने वचन को हवा में नहीं छोड़ते, वे उसे टिकाऊ बनाते हैं। पटिया का अर्थ है स्थायित्व। जो लिखा जाता है वह भविष्यद्वक्ता की स्मृति, मनोदशा या जीवनकाल से बड़ा हो जाता है; वह गवाही बन जाता है जिसे बाद की पीढ़ियाँ जाँच सकती हैं। और "साफ-साफ" का आग्रह बताता है कि परमेश्वर का प्रकाशन गूढ़ पहेली नहीं है जो विशेषज्ञों के लिए सुरक्षित हो। यह उस आदमी के लिए है जो दौड़ रहा है, जिसके पास रुकने का समय नहीं, जो भाग रहा है क्योंकि शहर पर संकट है। परमेश्वर अपने वचन को उस गति के हिसाब से लिखवाते हैं जिस गति से उनके लोग जी रहे हैं। यही अनुग्रह का तरीका है: सच्चाई सुलभ की जाती है, छिपाई नहीं जाती, क्योंकि परमेश्वर चाहते हैं कि उन पर भरोसा किया जा सके।

सूत्र

जो पटिया पर लिखा जाना था, उसकी अगली पंक्ति ही इस्राएल के इतिहास को चीरकर आगे निकल जाती है: "धर्मी अपने विश्वास के द्वारा जीवित रहेगा।" यही वह वाक्य है जिसे पौलुस रोमियों और गलातियों में उठाता है, और इब्रानियों का लेखक अपने थके हुए पाठकों के सामने रखता है। ध्यान दें कि यह संभव ही इसलिए हुआ क्योंकि परमेश्वर ने कहा था: लिख दे। यदि हबक्कूक ने वह दर्शन केवल अपने भीतर रखा होता, तो सदियों बाद कोई उसे पढ़ न पाता। परमेश्वर का आदेश लिखने का था, और उस लिखे हुए शब्द ने आगे चलकर मसीह के सुसमाचार की भाषा गढ़ दी। पटिया पर उतारा गया वचन एक पुल बन गया, बाबेल के अंधकार से लेकर उस दिन तक जब परमेश्वर का धर्मी सेवक क्रूस पर विश्वासयोग्य ठहरा। "नियत समय" कभी खाली नहीं गया।

दर्पण

हम सब कुछ न कुछ के इंतज़ार में हैं। वह रिपोर्ट जो दफ़्तर में दबा दी गई क्योंकि सच बोलने की कीमत थी। वह बेटा जो फ़ोन नहीं उठाता। वह जाँच जिसकी तारीख़ दो महीने आगे खिसक गई। और इंतज़ार में हमारी स्मृति धोखेबाज़ हो जाती है: जो परमेश्वर ने कल कहा था, आज हमें याद नहीं रहता, और परसों हम उसे अपनी घबराहट के रंग में रंग देते हैं। इसीलिए यह आदेश इतना व्यावहारिक है। परमेश्वर हबक्कूक को भावना नहीं, स्याही देते हैं। लिखा हुआ शब्द आपकी मनोदशा से झगड़ सकता है; भीतर की आवाज़ नहीं। आज यह कीजिए: एक कागज़ पर बड़े, साफ़ अक्षरों में परमेश्वर का वह एक वचन लिखिए जिसके पूरा होने का आप इंतज़ार कर रहे हैं, और उसे वहाँ चिपका दीजिए जहाँ आप भागते हुए भी उसे पढ़ लें, आलमारी के शीशे पर, फ्रिज पर, गाड़ी के डैशबोर्ड पर।

अंतर्पाठ

एक बार पहले भी परमेश्वर ने पत्थर की पटियाओं पर लिखवाया था, सीनै पर, जब व्यवस्था दी गई। वहाँ लिखा हुआ शब्द वाचा की बुनियाद बना; यहाँ लिखा हुआ शब्द उस वाचा के परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही बनता है जब सब कुछ उसके विपरीत दिखता है। दूसरा गूँजता स्वर इब्रानियों की पत्री में है, जहाँ सताए जा रहे विश्वासियों को हबक्कूक के अगले ही वचन से ढाढ़स दिया जाता है। और स्वयं यह पाठ अपनी व्याख्या कर देता है: "चाहे इसमें विलम्ब भी हो, तो भी उसकी बाट जोहते रहना; क्योंकि वह निश्चय पूरी होगी और उसमें देर न होगी।" विलम्ब और "देर न होगी" एक ही वाक्य में। हमारी घड़ी और परमेश्वर की घड़ी अलग चलती हैं, पर वे झूठ नहीं बोलतीं: "इसमें धोखा न होगा।"

मुख्य पात्र

इस दृश्य में बोलनेवाले परमेश्वर हैं, और उनका ढंग चौंकाता है। एक भविष्यद्वक्ता ने उन पर उलाहना दिया है, उन्हें उनके अन्याय-सहन के लिए कठघरे में खड़ा किया है, और परमेश्वर नाराज़ नहीं होते। वे अपनी सफ़ाई भी नहीं देते। वे उस शिकायत करनेवाले को अपने सचिव में बदल देते हैं। यही परमेश्वर का चरित्र है: वे प्रश्न से नहीं डरते, वे प्रश्न करनेवाले को काम सौंप देते हैं। और उनका दिया काम दूसरों के लिए है, अपने लिए नहीं; हबक्कूक को जो दिखाया गया है वह उसकी निजी सांत्वना नहीं, पूरे समुदाय की धरोहर है। जो परमेश्वर अंत में कहते हैं कि "समस्त पृथ्वी उसके सामने शान्त रहे", वही परमेश्वर पहले एक डरे हुए आदमी की बात सुनते हैं और उसे बोलने का अधिकार देते हैं।

पृष्ठभूमि

यहूदा के लोग जानते थे कि पत्थर पर क्या लिखा जाता है। राजा अपनी विजयों के शिलालेख बनवाते थे, बाबेल के सम्राट अपनी महानता पत्थर में खुदवाते थे ताकि कोई भूल न सके। और अब यहोवा एक पटिया लिखवा रहे हैं जिस पर उस साम्राज्य का पतन दर्ज है, उस अहंकारी का, जिसकी "लालसा अधोलोक के समान पूरी नहीं होती।" पहले सुननेवालों के लिए यह बात भड़काऊ थी: दुनिया की सबसे बड़ी ताक़त के विरुद्ध एक सार्वजनिक सूचना, चौक में टाँगी गई। यह छिपा हुआ संदेश नहीं था, मंदिर के पुजारियों का रहस्य नहीं था। सिपाही, व्यापारी, शरणार्थी, जो भी भागता हुआ उधर से निकले, पढ़ ले। परमेश्वर का न्याय सार्वजनिक है, और उनकी प्रतिज्ञा भी।

चिंतन के प्रश्न

आप परमेश्वर से किस बात का इंतज़ार कर रहे हैं जिसे आपने कहीं लिख नहीं रखा, और आपकी स्मृति उस इंतज़ार के साथ क्या कर रही है?

जब परमेश्वर आपकी शिकायत का उत्तर सफ़ाई के बदले एक ज़िम्मेदारी से देते हैं, तो आपके भीतर पहला भाव क्या उठता है?

Habakkuk में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Joel, Micah and Habakkuk

David Prior

Three minor prophets, one big vision of judgment and restoration.

Jonah, Nahum, Habakkuk, Zephaniah

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Habakkuk 2:2 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

हबक्कूक 2:2 का क्या अर्थ है?
पहरे की दीवार पर हवा ठंडी है। हबक्कूक रात भर खड़ा रहा है, आँखें क्षितिज पर गड़ी हुईं, इस प्रश्न के साथ कि जिस परमेश्वर पर उसने उलाहना दिया है वह क्या उत्तर देंगे। और तब चुप्पी टूटती है। उत्तर आता है, परन्तु वैसा नहीं जैसा वह सोचता था: कोई सफाई नहीं, कोई तर्क नहीं, बल्कि एक आदेश। "दर्शन की बातें लिख दे; वरन् पटियाओं पर साफ-साफ लिख दे कि दौड़ते हुए भी वे सहज से पढ़ी जाएँ।" परमेश्वर कहते हैं: जो मैं दिखाऊँ उसे पत्थर पर उतार दे, इतने बड़े और स्पष्ट अक्षरों में कि दौड़ता हुआ आदमी भी एक नज़र में पढ़ ले। शिकायत करनेवाले भविष्यद्वक्ता के हाथ में उत्तर के बदले एक कलम थमा दी जाती है।
हबक्कूक 2:2 किस विषय में है?
जो पटिया पर लिखा जाना था, उसकी अगली पंक्ति ही इस्राएल के इतिहास को चीरकर आगे निकल जाती है: "धर्मी अपने विश्वास के द्वारा जीवित रहेगा।" यही वह वाक्य है जिसे पौलुस रोमियों और गलातियों में उठाता है, और इब्रानियों का लेखक अपने थके हुए पाठकों के सामने रखता है। ध्यान दें कि यह संभव ही इसलिए हुआ क्योंकि परमेश्वर ने कहा था: लिख दे। यदि हबक्कूक ने वह दर्शन केवल अपने भीतर रखा होता, तो सदियों बाद कोई उसे पढ़ न पाता। परमेश्वर का आदेश लिखने का था, और उस लिखे हुए शब्द ने आगे चलकर मसीह के सुसमाचार की भाषा गढ़ दी। पटिया पर उतारा गया वचन एक पुल बन गया, बाबेल के अंधकार से लेकर उस दिन तक जब परमेश्वर का धर्मी सेवक क्रूस पर विश्वासयोग्य ठहरा। "नियत समय" कभी खाली नहीं गया।
हबक्कूक 2:2 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
एक बार पहले भी परमेश्वर ने पत्थर की पटियाओं पर लिखवाया था, सीनै पर, जब व्यवस्था दी गई। वहाँ लिखा हुआ शब्द वाचा की बुनियाद बना; यहाँ लिखा हुआ शब्द उस वाचा के परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही बनता है जब सब कुछ उसके विपरीत दिखता है। दूसरा गूँजता स्वर इब्रानियों की पत्री में है, जहाँ सताए जा रहे विश्वासियों को हबक्कूक के अगले ही वचन से ढाढ़स दिया जाता है। और स्वयं यह पाठ अपनी व्याख्या कर देता है: "चाहे इसमें विलम्ब भी हो, तो भी उसकी बाट जोहते रहना; क्योंकि वह निश्चय पूरी होगी और उसमें देर न होगी।" विलम्ब और "देर न होगी" एक ही वाक्य में। हमारी घड़ी और परमेश्वर की घड़ी अलग चलती हैं, पर वे झूठ नहीं बोलतीं: "इसमें धोखा न होगा।"
हबक्कूक 2:2 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यहूदा के लोग जानते थे कि पत्थर पर क्या लिखा जाता है। राजा अपनी विजयों के शिलालेख बनवाते थे, बाबेल के सम्राट अपनी महानता पत्थर में खुदवाते थे ताकि कोई भूल न सके। और अब यहोवा एक पटिया लिखवा रहे हैं जिस पर उस साम्राज्य का पतन दर्ज है, उस अहंकारी का, जिसकी "लालसा अधोलोक के समान पूरी नहीं होती।" पहले सुननेवालों के लिए यह बात भड़काऊ थी: दुनिया की सबसे बड़ी ताक़त के विरुद्ध एक सार्वजनिक सूचना, चौक में टाँगी गई। यह छिपा हुआ संदेश नहीं था, मंदिर के पुजारियों का रहस्य नहीं था। सिपाही, व्यापारी, शरणार्थी, जो भी भागता हुआ उधर से निकले, पढ़ ले। परमेश्वर का न्याय सार्वजनिक है, और उनकी प्रतिज्ञा भी।
हबक्कूक 2:2 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
जब परमेश्वर आपकी शिकायत का उत्तर सफ़ाई के बदले एक ज़िम्मेदारी से देते हैं, तो आपके भीतर पहला भाव क्या उठता है?
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Habakkuk 2 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

जिस घर को तूने सुरक्षित बनाना चाहा, वही तेरी लज्जा का गवाह बन जाता है। "तूने बहुत सी जातियों को काटकर अपने घर के लिये लज्जा की युक्ति बाँधी है, और अपने ही प्राण का दोषी ठहरा है।" दूसरों की कीमत पर बनाई गई दीवारें अपनों को नहीं बचातीं। सोच, जो तू अपने परिवार के लिये जोड़ रहा है, वह कहीं तेरी ही आत्मा को चोट तो नहीं पहुँचा रहा?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 1

पिता, मैं आज चुपचाप खड़ा हूँ और तेरी ओर देख रहा हूँ। मेरे सवाल अब भी मेरे भीतर हैं, पर मैं इंतज़ार करना सीखना चाहता हूँ। जब तू बोले, मेरा मन सुनने के लिए खुला रहे, और तेरा उत्तर मुझे फिर से भरोसे में थाम ले।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 11

हे प्रभु, जो कुछ मैंने अन्याय से बनाया है, उसकी दीवारें भी मेरे खिलाफ पुकारती हैं। मुझे सुनने का साहस दे। जो गलत है उसे छिपाने के बजाय ठीक करना सिखा, ताकि मेरा घर औरों के आंसुओं पर खड़ा न हो।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 19

धन्यवाद पिता, कि आप काठ या मढ़े हुए पत्थर जैसे नहीं हैं, जिनमें प्राण नहीं होता। आप जीवित हैं, आप बोलते हैं, आप सिखाते हैं। जब मैं पुकारता हूँ, तो चुप्पी नहीं, आपकी आवाज़ मिलती है। आपकी सांस मुझमें है, और यही मेरा भरोसा है।

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