यशायाह 42:1
यह पाठ
कल्पना कीजिए एक दरबार, जहाँ राजा भीड़ के सामने किसी को आगे बुलाता है और उँगली उठाकर कहता है: "मेरे दास को देखो जिसे मैं सम्भाले हूँ, मेरे चुने हुए को, जिससे मेरा जी प्रसन्न है।" यही इस पद का दृश्य है। परमेश्वर स्वयं किसी की ओर संकेत करते हैं, उसे अपना दास और अपना चुना हुआ कहते हैं, और कहते हैं कि उससे उनका मन प्रसन्न है। फिर वे जोड़ते हैं कि उन्होंने उस पर अपना आत्मा रखा है, और यह दास इस्राएल की सीमाओं से बाहर निकलकर "जाति-जाति के लिये न्याय प्रगट करेगा।" एक अकेली आकृति, परमेश्वर के हाथ में सम्भाली हुई, और उसका कार्यक्षेत्र पूरी पृथ्वी।
मूल बात
ध्यान दीजिए कि परमेश्वर इस दास की योग्यताओं की सूची नहीं गिनाते। वे यह नहीं कहते कि वह बलवान है, बुद्धिमान है, या वंश में ऊँचा है। वे कहते हैं: मैं उसे सम्भाले हूँ। पकड़ने वाला हाथ परमेश्वर का है, पकड़ा हुआ व्यक्ति दास है। यहीं इस पद का धर्मशास्त्रीय केंद्र है, क्योंकि यही बताता है कि परमेश्वर का उद्धार कैसे काम करता है: चुनाव पहले आता है, फिर आत्मा, और उसके बाद ही सेवा। और वह सेवा है न्याय, इब्रानी में मिशपात, जो केवल अदालती फैसला नहीं बल्कि टूटी हुई दुनिया में चीज़ों को फिर से सही जगह पर बिठा देना है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह न्याय केवल यहूदियों के लिए नहीं, "जाति-जाति के लिये" है। परमेश्वर की प्रसन्नता एक व्यक्ति पर टिकती है, ताकि उसके द्वारा सारे संसार तक पहुँचे।
सूत्र जो आगे तक जाता है
यशायाह की यह आकृति रहस्यमय है, और जान-बूझकर। कुछ पदों बाद उसी अध्याय में परमेश्वर कहते हैं: "मेरे दास के सिवाय कौन अंधा है?" वही शब्द, पर अब इस्राएल के लिए, और कड़वे स्वर में। तो एक दास अंधा और बहरा है, और एक दास वह है जिस पर आत्मा रखा गया है। बीच का यह तनाव पूरे भविष्यद्वक्ता की किताब में चलता है: इस्राएल को जो बुलावा मिला था, उसे पूरा करने के लिए एक आएगा जो इस्राएल के भीतर से निकलेगा पर इस्राएल की असफलता को दोहराएगा नहीं। यरदन नदी के किनारे यही दो चीज़ें एक साथ घटीं, आत्मा का उतरना और स्वर्ग से आवाज़ कि यह मेरा प्रिय पुत्र है जिससे मैं प्रसन्न हूँ (मत्ती 3:17)। यह संयोग नहीं; वह आवाज़ इसी पद को उद्धृत कर रही थी।
दर्पण
हमें प्रसन्नता कमानी सिखाई गई है। वार्षिक मूल्यांकन, माता-पिता की संतुष्ट आँखें, कलीसिया में "उपयोगी" होने की जगह, वह सब पहले प्रदर्शन माँगता है और फिर स्वीकृति देता है। यह पद उल्टा चलता है। परमेश्वर पहले कहते हैं "जिससे मेरा जी प्रसन्न है", और फिर काम सौंपते हैं। यदि आप थके हुए सेवक हैं जो हर रविवार यह साबित करने आते हैं कि आप बोझ नहीं हैं, तो यहाँ रुकिए। और आगे पद 3 पढ़िए: "कुचले हुए नरकट को वह न तोड़ेगा और न टिमटिमाती बत्ती को बुझाएगा।" जिसे परमेश्वर सम्भाले हुए हैं, वह दूसरों के साथ रुखा नहीं होता। जो पकड़ा गया है, वही धीरे से पकड़ना सीखता है।
आज एक काम कीजिए: कागज़ पर उस एक काम का नाम लिखिए जिसे आप अपनी कीमत साबित करने के लिए करते हैं, और उसके नीचे लिखिए, "मैं सम्भाला हुआ हूँ।" फिर वह कागज़ अपनी जेब या बटुए में रख लीजिए।
मुख्य पात्र
इस पद में दास एक शब्द नहीं बोलता। उसके बारे में बोला जाता है। सारी वाणी परमेश्वर की है, और उस वाणी में एक अजीब कोमलता है, जैसे कोई पिता भीड़ में अपने बच्चे का हाथ कसकर थामे हुए उसका परिचय करा रहा हो। परमेश्वर यहाँ ठंडे मालिक नहीं हैं जो काम बाँट रहे हैं; "मेरा जी प्रसन्न है" भावना की भाषा है, आनंद की। और दास का चरित्र उसकी चुप्पी में दिखता है, जिसे पद 2 खोलकर रखता है: "न वह चिल्लाएगा और न ऊँचे शब्द से बोलेगा।" जो व्यक्ति जानता है कि उसे कौन सम्भाले हुए है, उसे अपनी आवाज़ ऊँची करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। शक्ति का यह रूप हमारी सारी अपेक्षाओं को उलट देता है।
पहले सुननेवाले
ये शब्द उन लोगों ने सुने जिनका मंदिर राख हो चुका था और जो बाबेल में किसी और के देवताओं के बीच जी रहे थे। बाबेल में मूर्तियों के जुलूस निकलते थे, ढोल, नारे, सोने की चमक। और उसी शहर में भविष्यद्वक्ता एक ऐसे दास की घोषणा करता है जो सड़क पर अपनी वाणी भी नहीं सुनाएगा। हारे हुए लोगों के लिए यह दोहरा झटका था: पहला, कि परमेश्वर ने उन्हें छोड़ा नहीं; दूसरा, कि परमेश्वर का न्याय उन्हीं जातियों तक पहुँचेगा जिन्होंने उन्हें लूटा था। बदला नहीं, रोशनी। जो पद 22 में "गड्ढों में फँसे हुए" थे, उनसे कहा जा रहा था कि तुम्हारे बीच से ही पृथ्वी के लिए न्याय निकलेगा।
अन्तर्पाठ
पद 6 पर लूका का हाशिया ध्यान खींचता है। परमेश्वर कहते हैं, "मैं तुझे प्रजा के लिये वाचा और जातियों के लिये प्रकाश ठहराऊँगा", और शिमौन मंदिर में उस शिशु को हाथों में लेकर ठीक यही शब्द दोहराता है (लूका 2:32)। एक बूढ़ा आदमी, एक नवजात बच्चा, और यशायाह की यह विशाल वैश्विक प्रतिज्ञा; अनुपात हास्यास्पद लगता है, जैसे टिमटिमाती बत्ती से सूरज का वादा। पर यही इस अध्याय का ढंग है। परमेश्वर ऊँची आवाज़ों से नहीं, सम्भाले हुए हाथों से काम करते हैं। और वह काम रुकता नहीं: "वह न थकेगा और न हियाव छोड़ेगा जब तक वह न्याय को पृथ्वी पर स्थिर न करे।"
चिंतन के प्रश्न
आपके जीवन में वह कौन-सी जगह है जहाँ आप परमेश्वर की प्रसन्नता कमाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यह पद कहता है कि वह प्रसन्नता काम से पहले आती है?
जिसे परमेश्वर सम्भालते हैं वह कुचले हुए नरकट को नहीं तोड़ता। इस हफ़्ते आपके हाथ में कौन-सा कुचला हुआ नरकट है, और आप उसके साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं?
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Isaiah 42:1 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यशायाह 42:1 का क्या अर्थ है?
यशायाह 42:1 किस विषय में है?
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यशायाह 42:1 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
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Isaiah 42 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, मैं बहुत कुछ देखता हूँ पर सच में ध्यान नहीं देता, सुनता हूँ पर दिल तक उतरने नहीं देता। मेरी आँखें और कान खोल दे, ताकि तेरी आवाज़ शोर में खो न जाए। मुझे फिर से सचमुच देखना और सुनना सिखा।
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