बाइबल व्याख्या

यिर्मयाह 19

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

परमेश्वर यिर्मयाह को कुम्हार के पास भेजते हैं: एक मिट्टी की सुराही मोल ले, और पुरनियों तथा याजकों को गवाह बनाकर हिन्नोम की तराई में, उस फाटक के पास चल जहाँ शहर का टूटा-फूटा कूड़ा फेंका जाता है। वहाँ उसे यहूदा के मूर्तिपूजन और बच्चों की बलि के विरुद्ध परमेश्वर का भयानक दण्डवचन सुनाना है, और फिर सबके सामने वह सुराही तोड़ देनी है। लौटकर वह मन्दिर के आँगन में खड़ा होकर वही संदेश पूरी भीड़ के आगे दोहराता है।

मर्म

वह टूटी हुई सुराही एक घोषणा है: अनुग्रह अनन्त है, पर अवसर नहीं। एक अध्याय पहले कुम्हार गीली मिट्टी को फिर से गढ़ रहा था; यहाँ बर्तन पक चुका है, और "जो टूट गया कि फिर बनाया न जा सके।" यही इस पाठ की कठोर बात है। परमेश्वर यंत्रवत् न्याय नहीं करते, वे एक सम्बन्ध तोड़ते हुए दुःखी हैं, पर वे खिलौना भी नहीं हैं जिसे बार-बार तोड़कर मनाया जा सके। पद 15 कारण एक ही वाक्य में रखता है: "उन्होंने हठ करके मेरे वचन को नहीं माना है।" पाप यहाँ केवल गलत कर्म नहीं, बरसों तक गर्दन अकड़ाकर खड़े रहना है। और ध्यान दें कि आरोपों में सबसे ऊपर क्या है: निर्दोषों का लहू, अपने ही बाल-बच्चों का होम। जो धर्म बच्चों को खा जाए, वह धर्म नहीं, सर्वनाश है।

जोड़ने वाला सूत्र

हिन्नोम की यह तराई इतिहास में डूबती नहीं, वह एक शब्द बन जाती है। सदियों बाद यीशु मसीह जब अन्तिम न्याय की बात करते हैं, तो वे इसी घाटी का नाम लेते हैं, "गेहन्ना", यरूशलेम के बाहर वह जगह जहाँ कूड़ा और लाशें जलती थीं। यिर्मयाह की तराई प्रभु के होंठों पर नरक का चित्र बन गई। और यहीं एक उलटाव भी है जिसे हम देखे बिना न जाएँ: जो निर्दोष लहू इस स्थान को अशुद्ध करता था, उसी शहर के बाहर एक दिन सचमुच निर्दोष लहू बहा, परन्तु इस बार शुद्ध करने के लिए। टूटा हुआ बर्तन फिर नहीं बनता; पर मसीह के तोड़े गए शरीर में परमेश्वर ने वह किया जो कुम्हार की चाक पर असम्भव था, मिट्टी को मृत्यु के पार से नया गढ़ना।

दर्पण

हम बाल की वेदियाँ नहीं बनाते, लेकिन हम भी चीज़ों को अपने बच्चों से अधिक महँगा खरीदते हैं। वह पदोन्नति जिसके लिए घर के पाँच साल चुका दिए; वह इज़्ज़त जिसके लिए बेटी की पसंद कुचल दी; वह व्यस्तता जो रविवार को भी साँस नहीं लेने देती। हिन्नोम की तराई किसी की योजना में नहीं होती, वह एक-एक समझौते से बनती है। और पद 15 का वह शब्द "हठ" हमें सबसे अधिक चुभता है, क्योंकि हम में से बहुत जानते हैं कि परमेश्वर ने हमें कौन सी बात पाँच बार कही है और हमने हर बार विषय बदल दिया। आज, दस मिनट में: वह एक वाक्य कागज़ पर लिखिए जिसे आप महीनों से सुनने से इनकार कर रहे हैं, और उसे ज़ोर से परमेश्वर के सामने पढ़कर कहिए, "यह सच है।"

मुख्य पात्र

कल्पना करें यिर्मयाह को कुम्हार के सामने, पैसे गिनते हुए, एक सुराही खरीदते हुए जिसे वह जानता है कि एक घंटे में चूर कर देगा। फिर वह गणमान्य लोगों को बुलाता है, पुरनिये और याजक, और उन्हें शहर के कूड़ाघर तक ले चलता है। यह आदमी कोई क्रोधी कट्टरपंथी नहीं; वही है जो कहीं और अपने आँसुओं का ज़िक्र करता है। उसकी आज्ञाकारिता की कीमत सम्मान है: वह अपने समाज के प्रतिष्ठित लोगों के बीच एक पागल जैसा दिखेगा। और वह फिर भी तराई से लौटकर मन्दिर के आँगन में खड़ा हो जाता है, जहाँ भीड़ अधिक है और खतरा अधिक। आज्ञाकारिता यहाँ एक भावना नहीं, पैरों की एक दिशा है।

कठिन प्रश्न

पद 9 को पढ़कर पेट मुड़ जाता है: परमेश्वर कहते हैं, "मैं उनके बेटे-बेटियों का माँस उन्हें खिलाऊँगा।" क्या परमेश्वर स्वयं यह करेंगे? इसे चिकना करने का मन होता है, पर पाठ चिकना नहीं है। दो बातें साथ रखनी पड़ेंगी। पहली, यह घेराबंदी के अकाल की भयावह सच्चाई है जो आई; परमेश्वर ने जिसे छोड़ दिया, वहाँ मनुष्य स्वयं अपने बच्चों को नष्ट करता है, जैसे वे पहले बाल के लिए करते थे। दण्ड पाप का आईना है। दूसरी, बाइबल परमेश्वर को इतिहास से अलग दर्शक नहीं मानती; जो होता है, उसकी ज़िम्मेदारी वे अपने ऊपर लेते हैं। यह आरामदायक नहीं। मैं इसे हल किया हुआ नहीं कहूँगा। मैं केवल कहूँगा: यह परमेश्वर खिलवाड़ नहीं है, और यही कारण है कि उनकी दया भी खिलवाड़ नहीं है।

एक बारीकी

पद 5 में परमेश्वर बाल-बलि के बारे में तीन बार अपना इनकार दोहराते हैं, और तीसरा सबसे अजीब है: "न वह कभी मेरे मन में आया।" इब्रानी में शब्द-ब-शब्द यह है, "वह मेरे हृदय पर चढ़ा ही नहीं।" आज्ञा नहीं दी, चर्चा नहीं की, और सोचा भी नहीं। यह वाक्य हमें परमेश्वर के भीतर झाँकने देता है। जो यहूदा के लोग सबसे पवित्र त्याग समझकर कर रहे थे, वह परमेश्वर की कल्पना में भी कभी नहीं उठा था। धर्म के नाम पर की गई क्रूरता परमेश्वर को और अधिक अजनबी लगती है, न कम। और यहाँ एक चेतावनी है हमारे लिए भी: हम परमेश्वर के नाम से बहुत कुछ माँगते और थोपते हैं जो उनके हृदय पर कभी चढ़ा ही नहीं।

चिंतन

आपके जीवन में कौन सी बात आप "परमेश्वर की इच्छा" कहकर उठाए हुए हैं, जिसके बारे में ईमानदारी से पूछना बाकी है कि क्या वह वाकई उनके मन में आई थी?

वह एक चेतावनी कौन सी है जिसे आपने बार-बार सुना और हर बार टाल दिया, और आज उसे सुनने का पहला छोटा कदम क्या होगा?

Jeremiah में और गहराई से जानें

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The Message of Jeremiah

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Jeremiah and Lamentations: An Introduction and Commentary

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Jeremiah, Lamentations

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Jeremiah 19 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

यिर्मयाह 19 का क्या अर्थ है?
परमेश्वर यिर्मयाह को कुम्हार के पास भेजते हैं: एक मिट्टी की सुराही मोल ले, और पुरनियों तथा याजकों को गवाह बनाकर हिन्नोम की तराई में, उस फाटक के पास चल जहाँ शहर का टूटा-फूटा कूड़ा फेंका जाता है। वहाँ उसे यहूदा के मूर्तिपूजन और बच्चों की बलि के विरुद्ध परमेश्वर का भयानक दण्डवचन सुनाना है, और फिर सबके सामने वह सुराही तोड़ देनी है। लौटकर वह मन्दिर के आँगन में खड़ा होकर वही संदेश पूरी भीड़ के आगे दोहराता है।
यिर्मयाह 19 किस विषय में है?
हिन्नोम की यह तराई इतिहास में डूबती नहीं, वह एक शब्द बन जाती है। सदियों बाद यीशु मसीह जब अन्तिम न्याय की बात करते हैं, तो वे इसी घाटी का नाम लेते हैं, "गेहन्ना", यरूशलेम के बाहर वह जगह जहाँ कूड़ा और लाशें जलती थीं। यिर्मयाह की तराई प्रभु के होंठों पर नरक का चित्र बन गई। और यहीं एक उलटाव भी है जिसे हम देखे बिना न जाएँ: जो निर्दोष लहू इस स्थान को अशुद्ध करता था, उसी शहर के बाहर एक दिन सचमुच निर्दोष लहू बहा, परन्तु इस बार शुद्ध करने के लिए। टूटा हुआ बर्तन फिर नहीं बनता; पर मसीह के तोड़े गए शरीर में परमेश्वर ने वह किया जो कुम्हार की चाक पर असम्भव था, मिट्टी को मृत्यु के पार से नया गढ़ना।
यिर्मयाह 19 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
कल्पना करें यिर्मयाह को कुम्हार के सामने, पैसे गिनते हुए, एक सुराही खरीदते हुए जिसे वह जानता है कि एक घंटे में चूर कर देगा। फिर वह गणमान्य लोगों को बुलाता है, पुरनिये और याजक, और उन्हें शहर के कूड़ाघर तक ले चलता है। यह आदमी कोई क्रोधी कट्टरपंथी नहीं; वही है जो कहीं और अपने आँसुओं का ज़िक्र करता है। उसकी आज्ञाकारिता की कीमत सम्मान है: वह अपने समाज के प्रतिष्ठित लोगों के बीच एक पागल जैसा दिखेगा। और वह फिर भी तराई से लौटकर मन्दिर के आँगन में खड़ा हो जाता है, जहाँ भीड़ अधिक है और खतरा अधिक। आज्ञाकारिता यहाँ एक भावना नहीं, पैरों की एक दिशा है।
यिर्मयाह 19 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पद 5 में परमेश्वर बाल-बलि के बारे में तीन बार अपना इनकार दोहराते हैं, और तीसरा सबसे अजीब है: "न वह कभी मेरे मन में आया।" इब्रानी में शब्द-ब-शब्द यह है, "वह मेरे हृदय पर चढ़ा ही नहीं।" आज्ञा नहीं दी, चर्चा नहीं की, और सोचा भी नहीं। यह वाक्य हमें परमेश्वर के भीतर झाँकने देता है। जो यहूदा के लोग सबसे पवित्र त्याग समझकर कर रहे थे, वह परमेश्वर की कल्पना में भी कभी नहीं उठा था। धर्म के नाम पर की गई क्रूरता परमेश्वर को और अधिक अजनबी लगती है, न कम। और यहाँ एक चेतावनी है हमारे लिए भी: हम परमेश्वर के नाम से बहुत कुछ माँगते और थोपते हैं जो उनके हृदय पर कभी चढ़ा ही नहीं।
यिर्मयाह 19 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
वह एक चेतावनी कौन सी है जिसे आपने बार-बार सुना और हर बार टाल दिया, और आज उसे सुनने का पहला छोटा कदम क्या होगा?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Jeremiah 19 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 3

पिता, धन्यवाद कि आप न्याय से पहले चेतावनी देते हैं। यिर्मयाह को भेजकर आपने यहूदा के राजाओं और यरूशलेम के निवासियों से कहा, "यहोवा का वचन सुनो," ताकि वे लौट आएँ। धन्यवाद कि आज भी आपका वचन मुझे समय रहते जगाता है और आपकी ओर मोड़ता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

उन्होंने मुझे त्याग दिया और इस स्थान को पराया कर दिया है।" परमेश्वर यह अपने ही शहर के बारे में कहते हैं। जो घर उनका था, वह उन्हें अजनबी लगने लगा। और ध्यान दे, उसी आयत के अंत में लिखा है कि वह स्थान निर्दोषों के लहू से भर गया। जहाँ परमेश्वर अजनबी हो जाते हैं, वहाँ इंसान की जान सस्ती हो जाती है। तेरे घर में, तेरे मन में, क्या वे अब भी अपने लगते हैं?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

जिस घाटी में लोग अपने ही बच्चों की बलि चढ़ाते थे, वहीं खड़े होकर यिर्मयाह को यह कहना पड़ा, "मैं इस स्थान में यहूदा और यरूशलेम की युक्ति निष्फल कर दूँगा।" हाथ में मिट्टी का घड़ा था, और परमेश्वर उनकी योजनाओं को उसी तरह उँडेल देने वाला था। जो चतुराई पाप को बचाए रखने के लिए गढ़ी जाती है, वह कभी टिकती नहीं। तेरी कौन सी योजना है जिसे तू परमेश्वर की नज़र से बचाकर चला रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

यिर्मयाह 18 में मिट्टी अब भी चाक पर नरम थी, कुम्हार उसे फिर से गढ़ सकता था। पर यहाँ पकी हुई सुराही है, और परमेश्वर कहता है, "जिस प्रकार कुम्हार का बर्तन ऐसा तोड़ा जाता है कि फिर बनाया नहीं जा सकता।" फर्क कठोरता का है। जब तक दिल नरम है, उसके हाथ काम कर रहे हैं। आज तेरा दिल किस हाल में है?

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