यूहन्ना 16:16
पाठ
यीशु अपने चेलों से विदा लेते हुए एक ऐसा वाक्य कहते हैं जो पहेली जैसा लगता है: थोड़ी देर के बाद वे उन्हें नहीं देखेंगे, और फिर थोड़ी देर के बाद वे उन्हें देखेंगे। दो बार वही शब्द, "थोड़ी देर", और उनके बीच में एक खाली जगह जिसे यीशु यहाँ भरते नहीं। चेले तुरन्त आपस में फुसफुसाने लगते हैं, क्योंकि उन्हें समझ नहीं आता कि यह न देखना कब्र की बात है, स्वर्गारोहण की, या किसी और चीज़ की। यीशु उन्हें समझाने से पहले उनके भ्रम को कुछ देर खड़ा रहने देते हैं, मानो यह भ्रम भी उस रात का ज़रूरी हिस्सा हो।
मूल बात
इस छोटे वाक्य में परमेश्वर के काम करने का पूरा ढंग छिपा है: वे बचाने के लिए पहले ओझल होते हैं। बाइबल की कहानी में यह पैटर्न बार-बार लौटता है, पर यहाँ यह अपने चरम पर पहुँचता है, क्योंकि जो "थोड़ी देर" के लिए दिखाई नहीं देंगे वे स्वयं देहधारी वचन हैं। क्रूस पर परमेश्वर की उपस्थिति सबसे गहरी है और सबसे कम दिखाई देती है। और यही अनुग्रह का हृदय है: उद्धार हमारी आँखों के सामने प्रदर्शित नहीं होता, वह हमारे लिए किया जाता है, अक्सर वहीं जहाँ हमें लगता है कि सब खत्म हो गया। "देखना" यूहन्ना में केवल आँखों का काम नहीं, वह विश्वास का शब्द है। पुनरुत्थान के बाद चेले उसी यीशु को देखेंगे, पर अब पहचानकर, और वह देखना उनसे कोई छीन नहीं सकेगा।
जोड़ने वाला सूत्र
परमेश्वर की बचाने वाली कहानी बार-बार इसी लय पर चलती है: पहले अन्धकार, फिर सुबह। मिस्र में इस्राएल चार सौ साल तक लगता था भुला दिया गया, फिर परमेश्वर ने कहा कि उन्होंने उनकी दुहाई सुनी है। बाबुल का बन्धुआईपन एक लम्बी "थोड़ी देर" थी, और यशायाह ने उसी दौर के लिए जच्चा स्त्री की तड़प का चित्र इस्तेमाल किया, वही चित्र जो यीशु दो पद बाद उठाते हैं (यशायाह 26:17)। पर पुराने नियम में वह प्रसव पीड़ा अक्सर निष्फल रह जाती थी; इस्राएल दर्द तो सहता था, पर सन्तान जन्म नहीं लेती थी। यहाँ पहली बार पीड़ा फल तक पहुँचती है। क्रूस और खाली कब्र के बीच की वह छोटी सी खाई ही वह क्षण है जहाँ वाचा का परमेश्वर अपनी सारी प्रतिज्ञाएँ एक साथ पूरी करते हैं, और नई सृष्टि जन्म लेती है।
दर्पण
आपकी अपनी "थोड़ी देर" शायद अभी चल रही हो। वह जाँच रिपोर्ट जिसका नतीजा दो हफ्ते बाद आएगा। वह बेटा जिसने चर्च जाना छोड़ दिया और अब फोन भी कम उठाता है। वह नौकरी की तलाश जिसमें हर इंटरव्यू के बाद चुप्पी है। इन दिनों में सबसे बड़ा प्रलोभन यह नहीं कि हम परमेश्वर के अस्तित्व पर शक करें, बल्कि यह कि हम "थोड़ी" शब्द पर भरोसा करना छोड़ दें। हमें लगता है कि यह चुप्पी स्थायी है, कि यही अब जीवन का सामान्य रूप है। यीशु इस पीड़ा को झुठलाते नहीं, वे कहते हैं "तुम रोओगे और विलाप करोगे", पर वे उसकी अवधि पर अपना हस्ताक्षर कर देते हैं। आज एक काम कीजिए: एक कागज़ पर लिखिए कि इस समय आप किस चीज़ के इन्तज़ार में हैं, उसके नीचे आज की तारीख डालिए, और उसी कागज़ पर ज़ोर से पढ़कर लिख दीजिए, "तुम्हारा शोक आनन्द बन जाएगा।"
एक बारीकी
यूनानी मूल में यीशु "देखना" के लिए दो अलग क्रियाएँ इस्तेमाल करते हैं, और हिन्दी अनुवाद में यह अन्तर छिप जाता है। पहली बार जो शब्द है वह रोज़मर्रा के देखने का है, आँखों से किसी को ताकते रहना, जैसे चेले तीन साल से यीशु को देखते आए थे। दूसरी बार जो शब्द है, ὄψεσθε (ओप्सेस्थे), वह बाइबल में अक्सर उस देखने के लिए आता है जिसमें परमेश्वर स्वयं को प्रकट करते हैं। यानी यीशु यह नहीं कह रहे कि पुरानी स्थिति लौट आएगी। जो लौटेगा वह पहले से बड़ा होगा: वही व्यक्ति, पर अब घावों समेत, महिमा में, और पवित्र आत्मा के द्वारा भीतर से पहचाना हुआ। खोने और पाने के बीच बराबरी नहीं है; पाना कहीं अधिक है।
शास्त्र की गूँज
अय्यूब की पूरी पुस्तक इसी खाली जगह में बैठी है। अय्यूब परमेश्वर को देख नहीं पाता, उसकी शिकायत यही है कि वे कहीं मिलते नहीं, और फिर अन्त में वह कहता है कि अब उसकी आँख ने उन्हें देख लिया। सुनने से देखने तक की वह यात्रा ठीक वही रास्ता है जिस पर यीशु अपने चेलों को ले जा रहे हैं। दूसरी गूँज इसी अध्याय के भीतर है: पद 10 में यीशु कहते हैं कि आत्मा संसार को धार्मिकता के विषय में इसलिए निरुत्तर करेगा क्योंकि "मैं पिता के पास जाता हूँ, और तुम मुझे फिर न देखोगे"। यानी यह न दिखना कोई हार नहीं, वह पिता के सामने स्वीकृति का प्रमाण है। ओझल होना यहाँ सिंहासन पर बैठने का दूसरा नाम है।
कठिन प्रश्न
पर वह "थोड़ी देर" सचमुच थोड़ी थी क्या? चेलों के लिए तीन दिन। हमारे लिए दो हज़ार साल। जो माँ अपने बच्चे को दफना आई है, उससे यह कहना कि यह बस थोड़ी देर की बात है, क्रूरता जैसा लग सकता है। मैं इसे मीठा नहीं करूँगा। यीशु समय की लम्बाई नहीं नापते, वे उसे अनन्तता के तराज़ू पर रखते हैं, और वह तराज़ू हमारे हाथ में नहीं है। जो हमें दिया गया है वह यह है: वे स्वयं उस खाई से होकर गुज़रे, अकेले, और उस रात उन्होंने कहा "मैंने संसार को जीत लिया है"। यह इन्तज़ार को छोटा नहीं करता, पर उसे बदल देता है। हम खालीपन में नहीं, किसी की वापसी की ओर प्रतीक्षा करते हैं।
चिंतन के प्रश्न
आपके जीवन में इस समय कौन सी "थोड़ी देर" चल रही है, और आप उसे स्थायी मान बैठे हैं या अस्थायी?
यदि पुनरुत्थान का देखना पहले के देखने से बड़ा था, तो आप परमेश्वर से जो लौटाने की माँग कर रहे हैं, क्या वे उससे कुछ बड़ा देना चाहते हैं?
पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें
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अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।
चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।
परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास
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प्रतिदिन के भक्ति-लेख यीशु की कोमल आवाज़ सुनने और उसकी शांति में विश्राम पाने में सहायता करते हैं।
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John 16:16 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यूहन्ना 16:16 का क्या अर्थ है?
यूहन्ना 16:16 किस विषय में है?
यूहन्ना 16:16 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यूहन्ना 16:16 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यूहन्ना 16:16 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
John 16 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
देख, अब तो तू खुलकर कहता है, और कोई दृष्टान्त नहीं कहता।" चेले खुश हैं, लगता है सब समझ आ गया। पर कुछ ही घंटों में वे तित्तर बित्तर हो जाएँगे। समझ लेना और थाम लेना, दोनों एक बात नहीं है। तेरी भी कोई बात है जो तू जानता है, पर संकट में भूल जाता है? यीशु फिर भी उन्हें छोड़ते नहीं। तुझे भी नहीं।
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