मरकुस 16:7
पाठ
कब्र के भीतर बैठा वह जवान तीनों स्त्रियों को रुकने नहीं देता। जैसे ही वे समझ पाती हैं कि लाश वहाँ नहीं है, उसके मुँह से एक आदेश निकलता है: "परन्तु तुम जाओ, और उसके चेलों और पतरस से कहो, कि वह तुम से पहले गलील को जाएगा; जैसा उसने तुम से कहा था, तुम वहीं उसे देखोगे।" खाली कब्र के सामने खड़े होकर विस्मय में डूबे रहने का कोई निमंत्रण नहीं है। एक संदेश है, एक पता है, और एक नाम है जो चेलों की सूची से अलग करके विशेष रूप से पुकारा जाता है। जी उठा हुआ यीशु पहले से ही रास्ते पर है, और वह उत्तर की ओर, गलील की ओर, उन्हीं पुराने गाँवों की ओर मुड़ चुका है जहाँ सब कुछ शुरू हुआ था।
मूल बात
ध्यान दीजिए कि वाक्य में "और पतरस से" क्यों जोड़ा गया। पतरस ग्यारह में से एक है; उसे अलग से नाम लेकर बुलाने की कोई व्याकरणिक आवश्यकता नहीं थी। आवश्यकता थी तो पतरस के मन में, जिसने कुछ ही रातें पहले आँगन की आग के पास तीन बार कसम खाकर कहा था कि वह इस आदमी को जानता तक नहीं। वह खुद को सूची से बाहर मान चुका था। स्वर्ग उसे वापस सूची में लिखता है, और इतने स्पष्ट शब्दों में कि कोई गलतफहमी न रह जाए। यही पुनरुत्थान का धड़कता हुआ हृदय है: मसीह का जी उठना केवल मृत्यु पर विजय नहीं, बल्कि उन लोगों की पुनर्नियुक्ति है जिन्होंने उन्हें छोड़ दिया था। अनुग्रह यहाँ भावना नहीं, एक नाम है जो पुकारा जाता है।
सूत्र
"जैसा उसने तुम से कहा था" एक पीछे की ओर इशारा करने वाला वाक्य है। जैतून पहाड़ की ओर जाते हुए, उसी रात जब सब बिखर गए, यीशु ने कहा था कि जी उठने के बाद वे उनसे पहले गलील पहुँचेंगे (मरकुस 14:28)। यानी विश्वासघात की भविष्यवाणी के साथ-साथ पुनर्मिलन की भी भविष्यवाणी की गई थी। परमेश्वर की योजना में चेलों का भाग जाना कोई अप्रत्याशित दुर्घटना नहीं थी, और इसलिए उनकी वापसी भी कोई जल्दबाज़ी में बनाई गई मरम्मत नहीं है। यह वही पुराना ढर्रा है जो पूरे पवित्रशास्त्र में चलता है: परमेश्वर अपने लोगों को उनके टूटने से पहले ही वचन दे देते हैं, ताकि टूटने के बाद लौटने के लिए कुछ बचा रहे। गलील कोई तीर्थ नहीं, काम की जगह है। मसीह वहीं लौटते हैं जहाँ नावें, जाल और कर-चौकियाँ हैं।
दर्पण
हममें से अधिकांश लोग पतरस की तरह नाटकीय ढंग से नहीं गिरते। हम चुपचाप गिरते हैं: वह बात जो दफ़्तर में कह दी गई और वापस नहीं ली जा सकती, वह रात जब बच्चे पर गुस्सा हद पार कर गया, वह आदत जिसे हमने दस बार छोड़ा और ग्यारहवीं बार फिर पकड़ लिया। और फिर हम वही करते हैं जो पतरस ने किया: खुद को सूची से काट देते हैं। प्रार्थना में अपना नाम लेना असहज लगने लगता है। मंडली में बैठते तो हैं, पर जैसे किनारे पर। इस पद का तीखापन यही है कि स्वर्ग आपकी इस आत्म-गणना को स्वीकार नहीं करता। आज ही उस व्यक्ति को एक संदेश भेजिए जो किसी गिरावट या शर्म के बाद आपकी मंडली या समूह से दूर हट गया है, और उसमें उसका नाम लिखकर कहिए कि वह अब भी शामिल है।
संदर्भ
रविवार की भोर, यरूशलेम की दीवार के बाहर। सब्त बीत चुका है, इसलिए बाज़ार खुल गए और सुगन्धित वस्तुएँ मिल सकीं। तीन स्त्रियाँ अँधेरे में निकलीं, एक व्यावहारिक चिंता लिए हुए कि इतना बड़ा पत्थर कौन लुढ़काएगा। उस संसार में स्त्रियों की गवाही अदालत में भरोसेमंद नहीं मानी जाती थी; फिर भी पुनरुत्थान का पहला संदेश उन्हीं के हाथ सौंपा गया। गलील वहाँ से लगभग सौ किलोमीटर उत्तर में था, एक मिश्रित, कम सम्मानित इलाका, जिसकी बोली यरूशलेम में पहचानी जाती थी, उसी बोली ने तो आँगन में पतरस को पकड़वाया था। रोम ने एक राजद्रोही को सलीब दी थी, महासभा निश्चिंत थी, चेले शहर में कहीं दुबके थे। और इसी सन्नाटे में एक जवान सफ़ेद वस्त्र में बैठा आदेश दे रहा है।
प्रश्न
अगला पद बेचैन करता है: स्त्रियाँ भाग गईं और "उन्होंने किसी से कुछ न कहा, क्योंकि डरती थीं।" जिसे आज्ञा मिली थी कि जाओ और कहो, उसने चुप्पी चुनी। तो क्या संदेश रास्ते में ही मर गया? स्पष्ट रूप से नहीं, क्योंकि आप यह कहानी पढ़ रहे हैं; किसी ने कभी बोला ही होगा। पर मरकुस हमें वह क्षण नहीं दिखाता। वह हमें काँपती हुई, चुप स्त्रियों के साथ छोड़ देता है। मुझे लगता है यह जानबूझकर है। सुसमाचार का भार उन लोगों के साहस पर नहीं टिका जिन्हें वह सौंपा गया; वह उस पर टिका है जो पहले से ही गलील की ओर निकल चुके हैं। डर संदेश को रोक सकता है, कुछ समय के लिए। जी उठे हुए प्रभु को नहीं।
श्रोता
मरकुस संभवतः रोम के उन मसीहियों के लिए लिख रहा था जिन पर नीरो के दिनों में भयानक दबाव पड़ा था। उनमें ऐसे लोग बैठे थे जिन्होंने सिपाहियों के सामने, या पड़ोसियों के सामने, मसीह का नाम लेने से इनकार कर दिया था और अब जीवित बचकर शर्म में डूबे थे। उनके कानों में "और पतरस से कहो" किसी कोमल भावुकता की तरह नहीं, क्षमादान की सरकारी घोषणा की तरह बजा होगा। जिस आदमी ने सबसे ऊँची आवाज़ में इनकार किया था, वह सबसे पहले नाम लेकर बुलाया गया। और "गलील" का मतलब उनके लिए भी यही था: लौटो अपने काम पर, अपने मोहल्ले में, अपनी साधारण ज़िन्दगी में, क्योंकि प्रभु वहीं मिलेंगे, वहीं जहाँ तुम नाकाम हुए थे।
चिंतन
आप किस असफलता के कारण खुद को चुपचाप "सूची से बाहर" मान चुके हैं, और यदि उस वाक्य में पतरस की जगह आपका नाम होता तो क्या बदलता?
आपका "गलील" कौन-सा है, वह साधारण जगह जहाँ लौटने से आप कतराते हैं, पर जहाँ जी उठे प्रभु आपसे पहले ही पहुँच चुके हैं?
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Mark 16:7 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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मरकुस 16:7 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Mark 16 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि स्वर्गदूत ने कहा, "उसके चेलों और पतरस से कहो।" जिसने तीन बार इनकार किया, उसका नाम आपने अलग से लिया। यही आपका प्रेम है जो गिरे हुओं को छोड़ता नहीं, बुलाकर फिर अपने पास ले आता है। मेरी असफलताओं के बाद भी आप मुझे नाम लेकर पुकारते हैं, इसके लिए मेरा हृदय आभारी है।
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