मत्ती 13
पाठ
यीशु घर से निकलकर झील के किनारे बैठते हैं, भीड़ इतनी बढ़ती है कि उन्हें नाव पर चढ़ना पड़ता है, और वहीं से पानी के ऊपर से वे बोने वाले, जंगली बीज, राई के दाने, ख़मीर, छिपे धन, मोती और जाल की कहानियाँ सुनाते हैं। बीच-बीच में वे चेलों को अकेले में समझाते हैं कि इन कहानियों का अर्थ क्या है और उन्हें दृष्टान्तों में क्यों बोला जा रहा है। अध्याय का अंत विडम्बना से होता है: अपने ही नगर नासरत में लोग उन्हें "बढ़ई का बेटा" कहकर ठुकरा देते हैं, और वहाँ वे बहुत सामर्थ्य के काम नहीं करते।
मर्म
यह अध्याय स्वर्ग के राज्य के बारे में एक ऐसी बात कहता है जो पहली सदी के किसी भी यहूदी को चौंकाती: राज्य आ चुका है, पर छिपे हुए रूप में। कोई सिंहासन नहीं, कोई सेना नहीं, कोई तख़्तापलट नहीं। बस एक आदमी नाव पर बैठकर बीज बो रहा है, और अधिकांश बीज बरबाद होते दिख रहे हैं। यीशु इनकार नहीं करते कि तीन में से तीन हिस्से असफल दिखते हैं। वे यह भी नहीं छिपाते कि खेत में जंगली पौधे उगेंगे और उन्हें कटनी तक उखाड़ा नहीं जाएगा। परमेश्वर का राज्य धीरज का राज्य है, ख़मीर की तरह चुपचाप काम करता हुआ, राई के दाने की तरह अपमानजनक रूप से छोटा शुरू होता हुआ। और फिर भी उसका अंत निश्चित है: फ़सल, खत्ता, और धर्मी जो "सूर्य के समान चमकेंगे"।
सूत्र
बोने वाला कौन है? दूसरे दृष्टान्त की व्याख्या में यीशु खुलकर कहते हैं: "अच्छे बीज का बोनेवाला मनुष्य का पुत्र है।" यानी वह स्वयं। पुराने नियम में बीज बोने वाला हमेशा परमेश्वर होता है जो अपनी प्रजा को देश में रोपता है; यहाँ वह काम यीशु अपने हाथ में ले लेते हैं। पद 35 इसे और गहरा करता है: जो बातें "जगत की उत्पत्ति से गुप्त रही हैं" वे अब प्रगट हो रही हैं। यूनानी शब्द जो पद 11 में "भेद" के लिए है, मुस्तेरियोन, किसी पहेली को नहीं बल्कि परमेश्वर की उस योजना को दर्शाता है जो सदियों से ढँकी थी और अब एक व्यक्ति में खुल गई है। भविष्यद्वक्ताओं ने चाहा कि देखें पर न देखीं (पद 17); जो वे तरसते रहे, वह अब नाव पर बैठा बोल रहा है। और छिपे धन का दृष्टान्त, जहाँ एक मनुष्य "आनन्द के मारे" अपना सब कुछ बेच देता है, अनजाने में उसी की कहानी है जिसने आनन्द के लिए सब कुछ छोड़कर खेत मोल लिया।
दर्पण
चारों भूमियाँ चार अलग लोग नहीं हैं; वे एक ही जीवन के चार मौसम हो सकते हैं। पत्थरीली भूमि वह रविवार है जब आपने रोते हुए हाथ उठाया था और मंगलवार को दफ़्तर में सब भूल गए, क्योंकि जड़ नहीं थी। झाड़ियाँ ज़्यादा ख़तरनाक हैं, क्योंकि वे हरी होती हैं: "इस संसार की चिन्ता और धन का धोखा"। ध्यान दीजिए, धन को यीशु बुरा नहीं, धोखेबाज़ कहते हैं। वह वादा करता है कि थोड़ा और मिल जाए तो शांति आ जाएगी, और फिर घर की क़िस्त, बच्चों की फ़ीस, बुढ़ापे की चिंता, ये सब मिलकर वचन को दबा देते हैं, बिना किसी नाटकीय इनकार के। और जंगली दानों का दृष्टान्त हमारे भीतर के उस सुधारक को शांत करता है जो कलीसिया को साफ़ करना चाहता है: "नहीं, ऐसा न हो कि… तुम उनके साथ गेहूँ भी उखाड़ लो।" छँटाई परमेश्वर का काम है, आपका नहीं, और यह अच्छी ख़बर है।
पहले श्रोता
मत्ती जिनके लिए लिख रहे थे, वे यहूदी विश्वासी थे जिनके सामने एक असहज सवाल था: यदि यीशु सचमुच मसीह हैं, तो इस्राएल का बड़ा हिस्सा उन्हें क्यों नहीं मानता? यह अध्याय उस घाव पर सीधा हाथ रखता है। यशायाह का उद्धरण, "तुम कानों से तो सुनोगे, पर समझोगे नहीं", उन्हें बताता है कि यह कोई नई असफलता नहीं; परमेश्वर की प्रजा पहले भी ऐसे ही सुनती रही है। और नासरत का दृश्य अंत में इसे चेहरा दे देता है: जिन लोगों ने यीशु को बढ़ते देखा, जो उनकी बहनों को नाम से जानते थे, वही "ठोकर" खाते हैं। परिचय ने विश्वास को आसान नहीं, कठिन बना दिया।
एक बारीकी
पद 12 काँटे की तरह चुभता है: "जिसके पास है, उसे दिया जाएगा… पर जिसके पास कुछ नहीं है, उससे जो कुछ उसके पास है, वह भी ले लिया जाएगा।" यह अन्यायपूर्ण लगता है, जब तक आप न समझें कि यीशु सुनने के बारे में बोल रहे हैं। दृष्टान्त छलनी हैं। वे उसे और खोलते हैं जो झुककर पूछता है, और उसे और बंद करते हैं जो हाथ बाँधकर बैठा है। चेले पूछते हैं, इसलिए उन्हें व्याख्या मिलती है; भीड़ ताली बजाकर चली जाती है। कहानी सुनना मुफ़्त है, समझना महँगा।
पृष्ठभूमि
गलील की झील के किनारे, ढलानदार तट पर आवाज़ पानी से टकराकर दूर तक पहुँचती थी; नाव यीशु का मंच थी। सुनने वाले खेतिहर और मछुए थे, जिनके लिए पथरीली मिट्टी, काँटे और नुक़सान रोज़ की सच्चाई थे, और किसी दुश्मन का रात में खेत में जंगली बीज बोना कोई अजीब कल्पना नहीं, बल्कि एक जाना-पहचाना अपराध था। तीन पसेरी आटा घर भर के लिए रोटी थी, और उसमें ख़मीर मिलाना दिखता नहीं, पर पूरे लोंदे को बदल देता है। इसी दुनिया की भाषा में यीशु परमेश्वर के राज्य का नक़्शा खींचते हैं, ताकि जो सुनना चाहे वह सुन ले।
चिंतन के प्रश्न
आपके जीवन में इस समय कौन-सी "झाड़ी" सबसे हरी दिख रही है, यानी कौन-सी चिंता या चाहत वचन को चुपचाप दबा रही है?
यदि छिपे धन को पाकर सब बेच देना आनन्द का काम है, त्याग का नहीं, तो मसीह के लिए आपने जो छोड़ा है उसे आप किस भाव से याद करते हैं?
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Matthew 13 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
मत्ती 13 का क्या अर्थ है?
मत्ती 13 किस विषय में है?
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मत्ती 13 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
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Matthew 13 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि आपके पुत्र ने एक साधारण परिवार में जीवन बिताया, जहाँ लोग कह सके, "क्या उसकी सब बहनें हमारे बीच में नहीं रहतीं?" धन्यवाद कि आप हमारे जैसे मामूली घरों, गलियों और कामों के बीच रहना चुनते हैं, और वहीं से अपना अद्भुत काम शुरू करते हैं।
पिता, तेरे वचन की गंभीरता मुझे चुप कर देती है। मैं हल्के मन से नहीं, बल्कि झुके हुए दिल से आता हूँ। मुझ में जो कुछ तुझसे दूर ले जाता है, उसे निकाल दे। और जिनके लिए मेरा मन बेचैन है, उन्हें भी अपनी दया के पास खींच ले।
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