मीका 7:19
पाठ
भविष्यवक्ता का आखिरी शब्द एक पैर पर टिका है: "हमारे अधर्म के कामों को लताड़ डालेगा।" जिन गुनाहों ने पूरे अध्याय भर यहूदा की गलियों में राज किया, रिश्वत लेते हाकिम, घात लगाते भाई, अपने ही घर के शत्रु, उन्हें परमेश्वर कुचल देंगे, जैसे खलिहान में बैल अनाज को रौंदते हैं। और फिर दूसरी तस्वीर, उससे भी चौंकाने वाली: "तू उनके सब पापों को गहरे समुद्र में डाल देगा।" वापस न आने वाली गहराई में। मीका उस परमेश्वर की बात कर रहे हैं जो लौटकर, फिर से, दोबारा दया करते हैं। यह वादा किसी सुधरी हुई कौम से नहीं, बल्कि उस "बचे हुओं" से किया गया है जिन्होंने अभी-अभी माना, "मैंने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है।"
मूल मर्म
ध्यान दें कि मीका पाप को हटाने के लिए दो हिंसक क्रियाएँ चुनते हैं। परमेश्वर पाप को माफ करते हुए भी उसे हल्का नहीं समझते; वे उसे पैरों तले रौंदते हैं, जैसे किसी शत्रु सेना को। क्षमा का मतलब यह नहीं कि अधर्म को बहाना दे दिया गया, बल्कि यह कि उसकी शक्ति तोड़ दी गई। और आठवीं सदी के उस श्रोता के लिए, जिसके लिए समुद्र अराजकता और मौत का घर था, "गहरे समुद्र में" फेंकना सबसे अंतिम निपटारा था। कोई गोताखोर उसे वापस नहीं ला सकता। यहीं परमेश्वर का चरित्र खुलता है, जो पद 18 में पूछा गया था: "तेरे समान ऐसा परमेश्वर कहाँ है?" उत्तर यह है कि वे "करुणा से प्रीति रखता है", यानी दया उनका मजबूरन किया गया समझौता नहीं, उनका स्वभाव और आनंद है।
सूत्र
मीका का यह वाक्य हवा में नहीं लटकता; अगला ही पद उसे जमीन देता है: "तू याकूब के विषय में वह सच्चाई, और अब्राहम के विषय में वह करुणा पूरी करेगा।" यानी समुद्र में पाप फेंकना कोई अचानक उमड़ा भावुक क्षण नहीं, बल्कि सदियों पुरानी शपथ का निर्वाह है। परमेश्वर अपने ही वचन के प्रति वफादार रहते हुए क्षमा करते हैं। पर मीका यह नहीं बताते कि पाप को रौंदा कैसे जाएगा और पापी बच कैसे जाएगा। वह खाली जगह खुली रहती है, जब तक मरियम अपने गीत में इन्हीं शब्दों को दोहराती नहीं (लूका 1:54,55), यह जानते हुए कि वह गर्भ में जिसे लिए है, वही उत्तर है। क्रूस पर वही हुआ जो मीका ने देखा था: अधर्म कुचला गया, और अपराधी को ढाँप दिया गया।
दर्पण
हममें से ज्यादातर लोगों के पास एक ऐसा पाप होता है जिसे हम खुद ही समुद्र से बार-बार निकाल लाते हैं। रात के दो बजे वह ऊपर तैर आता है: वह बात जो आपने अपने पिता से कही थी और अब वे जीवित नहीं; वह हिसाब जो दफ्तर में आपने थोड़ा घुमा दिया था; वह रिश्ता जिसे आपने तोड़ा। आप उसे कबूल कर चुके हैं, फिर भी गोता लगाकर उसे टटोलते हैं, मानो परमेश्वर की क्षमा पर भरोसा करना अपनी गंभीरता से समझौता करना हो। मीका कहते हैं: वह गहराई आपके लिए नहीं है। जो परमेश्वर ने डुबा दिया, उसे खोदकर निकालना श्रद्धा नहीं, अविश्वास है। आज एक काम कीजिए: कागज पर वह एक पाप लिखिए जिसे आप बार-बार निकाल लाते हैं, ऊँची आवाज में पढ़िए, "तू उनके सब पापों को गहरे समुद्र में डाल देगा," फिर कागज फाड़कर फेंक दीजिए।
संदर्भ
मीका मोरेशेत के थे, यरूशलेम से दक्षिण-पश्चिम की तराई का एक छोटा कस्बा, जैतून और अंजीर के खेतों के बीच, ठीक उस रास्ते पर जिससे अश्शूरी सेनाएँ आती थीं। वे राजधानी के दरबारी नहीं थे; वे उस किसान की आँख से देखते हैं जिसकी फसल राजधानी के रईस रिश्वत और जालसाजी से हड़प लेते हैं। आठवीं सदी का अंत, गाँव जलाए जा रहे हैं, लोग बंदी बनाकर ले जाए जा रहे हैं, और अध्याय की शुरुआत में हवा में लुटे हुए बाग की गंध है: "खाने के लिये कोई गुच्छा नहीं रहा।" जो बचे, वे मलबे पर बैठे लोग थे, जिन पर पड़ोसी हँसते थे, "तेरा परमेश्वर यहोवा कहाँ रहा?" इन्हीं राख-सने लोगों के मुँह में मीका यह अंतिम वादा रखते हैं।
बारीकी
"वह फिर हम पर दया करेगा।" इस "फिर" के पीछे इब्रानी क्रिया शूव है, जिसका अर्थ है लौटना, मुड़ना। यही वह शब्द है जो पूरे पुराने नियम में मनुष्य के पश्चाताप के लिए इस्तेमाल होता है: पाप से मुड़कर परमेश्वर की ओर लौटना। मीका उसे उलट देते हैं। यहाँ लौटने वाले परमेश्वर हैं। उन्होंने मुँह फेरा था, पद 9 का क्रोध असली था, निर्वासन असली था; पर वे मुड़ते हैं और फिर से करुणा करते हैं। इस्राएल की सारी धर्मपरायणता एक तरफ, और यह एक क्रिया दूसरी तरफ: उद्धार इसलिए संभव है क्योंकि परमेश्वर वह पहला कदम दोबारा उठाते हैं, बिना बुलाए, बिना शर्त लगाए, अपने ही स्वभाव के दबाव में।
शास्त्रों की गूँज
समुद्र की तस्वीर सुनते ही इस्राएली के मन में एक ही दृश्य उभरता: लाल समुद्र, जहाँ फिरौन के रथ डूब गए और लौटे नहीं। मीका खुद पद 15 में उसी निर्गमन की याद दिलाते हैं, "जैसे कि मिस्र देश से तेरे निकल आने के दिनों में"। जो कभी मिस्री सेना के साथ हुआ, वही अब हमारे अधर्म के साथ होगा; परमेश्वर का असली शत्रु अब कोई विदेशी फौज नहीं, बल्कि हमारे भीतर का पाप है। दूसरी गूँज मरियम के गीत की है, जहाँ अब्राहम से की गई करुणा की शपथ एक शिशु में साकार होती है। मीका ने जिस गहराई की ओर इशारा किया, मसीह में वह गहराई खुद परमेश्वर के हृदय तक जा पहुँचती है।
मनन के प्रश्न
कौन सा पाप है जिसे आप बार-बार समुद्र से खींच लाते हैं, और आप उसे क्यों नहीं डूबा रहने देते?
अगर परमेश्वर की दया उनकी मजबूरी नहीं बल्कि उनका आनंद है, तो आपकी प्रार्थना का लहजा कैसे बदलना चाहिए?
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Micah 7:19 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
मीका 7:19 का क्या अर्थ है?
मीका 7:19 किस विषय में है?
मीका 7:19 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
मीका 7:19 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
मीका 7:19 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Micah 7 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
धन्यवाद पिता, कि जब ताने सुनने को मिलते हैं, "तेरा परमेश्वर यहोवा कहाँ रहा?", तब भी तू चुप नहीं रहता। तू मेरी लाज रखता है और अपने समय पर मेरा पक्ष लेकर दिखा देता है कि तू मेरे साथ है। तेरी इस वकालत के लिए मेरा मन तुझे सराहता है।
पिता, कभी कभी चारों ओर देखकर लगता है कि सच्चाई और भलाई कहीं बची ही नहीं। मन उदास हो जाता है। मुझे इस थकान में थाम ले, और मुझे ऐसा इंसान बना जो दूसरों के लिए जाल नहीं, बल्कि सहारा बने। तेरी भलाई पर मेरी आस बनी रहे।
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