नीतिवचन 17
पाठ
सत्रहवाँ अध्याय एक घर से शुरू होता है: शान्ति के साथ सूखी रोटी का टुकड़ा उस भरे-पूरे घर से बेहतर है जहाँ मेलबलि का माँस भी है पर झगड़ा भी। इसके बाद कहावतें एक-एक करके आती हैं, पर वे बिखरी नहीं हैं: वाणी, झगड़ा, रिश्वत, न्याय का बिगड़ना, मित्रता, मूर्ख बेटे का दुःख, और बीच-बीच में तीन बार यहोवा का नाम, जो मनों को जाँचता है, निर्धन के उपहास को अपने ऊपर लेता है, और टेढ़े न्याय से घृणा करता है। अध्याय का अन्त वहीं आता है जहाँ से यह सारा विवेक निकलता है: बन्द मुँह और शान्त आत्मा।
मूल बात
पद 3 इस अध्याय की धुरी है: "चाँदी के लिये कुठाली, और सोने के लिये भट्ठी होती है, परन्तु मनों को यहोवा जाँचता है।" यह छवि भविष्यद्वक्ताओं में लौट-लौट कर आती है, और नए नियम में पतरस उसे विश्वास पर लागू करता है: आग सोने को नष्ट करने नहीं, शुद्ध करने आती है। इसका अर्थ यह है कि नीतिवचन की बुद्धि शिष्टाचार नहीं, परीक्षण है। बाहर से घर भरा हो सकता है और भीतर झगड़ा; मुँह से उत्तम बात निकल सकती है और मन टेढ़ा हो सकता है। परमेश्वर धातु की तरह मन को तपाते हैं, इसलिए यहाँ का सवाल यह नहीं कि आप कैसे दिखते हैं, बल्कि गरम होने पर आपमें से क्या निकलता है।
सूत्र
पद 15 पुराने नियम की न्याय-परम्परा का दिल है: "जो दोषी को निर्दोष, और जो निर्दोष को दोषी ठहराता है, उन दोनों से यहोवा घृणा करता है।" यही वाक्य व्यवस्थाविवरण के न्यायियों को दी गई चेतावनी की गूँज है, और यही वाक्य सुसमाचार के सामने खड़ा हो जाता है, क्योंकि रोमियों में पौलुस कहता है कि परमेश्वर भक्तिहीन को धर्मी ठहराते हैं। सूत्र यहीं से गुज़रता है: क्रूस पर परमेश्वर ने दोषी को बरी करने के लिए न्याय को झुकाया नहीं, बल्कि निर्दोष को दोषी के स्थान पर खड़ा किया। पद 13 का वाक्य, कि भलाई के बदले बुराई करनेवाले के घर से बुराई दूर नहीं होगी, मसीह पर उलट जाता है: उन्होंने बुराई के बदले भलाई सही।
दर्पण
पद 9 चुभता है क्योंकि यह हमारी पसंदीदा धार्मिक आदत पर हाथ रखता है: दूसरे के अपराध की चर्चा बार-बार करना, हर बार ज़रा अधिक चिन्ता के स्वर में। नीतिवचन इसे मित्रता तोड़ना कहता है, और पतरस इसी सोच को आगे बढ़ाता है जब वह कहता है कि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है। फिर पद 14 आता है: झगड़े का आरम्भ बाँध के छेद जैसा है। हम अक्सर सोचते हैं कि हमें आख़िरी वाक्य कहने का अधिकार है; पाठ कहता है, छेद छोटा है, अभी छोड़ दो। आज ही उस व्यक्ति को छोटा संदेश भेजिए जिसकी पुरानी गलती आपने पिछले दिनों किसी तीसरे के सामने दोहराई थी, और लिखिए कि आपको उसका ज़िक्र नहीं करना चाहिए था।
पृष्ठभूमि
पहले सुननेवाले प्रायः वे युवक थे जिन्हें ज़िम्मेदारी के लिए तैयार किया जा रहा था: घर के मुखिया, फाटक पर बैठनेवाले न्यायी, दरबार के कर्मचारी। "मेलबलि-पशुओं से भरा" घर उनके लिए रूपक नहीं था, वह उत्सव की असली गंध थी, और उन्हें पता था कि ऐसा भोज पारिवारिक कड़वाहट से कैसे ज़हरीला हो जाता है। पद 8 और 23 की रिश्वत किसी दूर के भ्रष्टाचार की खबर नहीं थी, वह गाँव के फाटक की रोज़मर्रा थी, जहाँ निर्धन आदमी के पास चादर के सिवा कुछ न था। और पद 2, जहाँ बुद्धिमान दास लज्जाजनक पुत्र पर प्रभुता करता है, उस समाज में विस्फोटक था जो जन्म और क्रम पर टिका था। यह यूसुफ की कहानी का संक्षेप है।
मुख्य पात्र
इस अध्याय में यहोवा तीन बार बोलते नहीं, पर तीन बार खड़े हो जाते हैं, और हर बार वहाँ जहाँ मनुष्य सोचता है कोई देख नहीं रहा। वे मन की भट्ठी के मालिक हैं (पद 3)। वे निर्धन के उपहास को व्यक्तिगत अपमान मानते हैं, क्योंकि "जो निर्धन को उपहास में उड़ाता है, वह उसके कर्त्ता की निन्दा करता है" (पद 5); मज़ाक शिकार तक नहीं रुकता, वह सृष्टिकर्ता तक जाता है। और वे बिगड़े न्याय से घृणा करते हैं (पद 15)। यह वह परमेश्वर हैं जिनकी भावनाएँ हैं: वे जाँचते हैं, वे अपमान महसूस करते हैं, वे घृणा करते हैं। उनकी बुद्धि ठंडी नहीं है; वह किसी के पक्ष में है।
सवाल
पर तब पद 15 खटकता रहता है। यदि परमेश्वर दोषी को निर्दोष ठहरानेवाले से घृणा करते हैं, तो क्षमा का सुसमाचार उसी घृणा के नीचे नहीं आता? इसका सस्ता उत्तर यह है कि क्रूस ने हिसाब बराबर कर दिया, और बात ख़त्म। लेकिन नीतिवचन इतनी आसानी से नहीं छोड़ता, क्योंकि वह सिर्फ़ खाता नहीं, न्यायी के चरित्र की बात करता है: जो बुराई को नाम देने से इनकार करता है, वह बुराई का साझी बन जाता है। इसलिए सुसमाचार पद 15 को रद्द नहीं करता, वह उसे भयानक रूप से गम्भीरता से लेता है। परमेश्वर ने पाप को कम करके नहीं आँका, उन्होंने उसे अपने ऊपर ले लिया। और यहीं एक रहस्य बचा रहता है जिसे हम सुलझा नहीं सकते, केवल घुटनों पर स्वीकार कर सकते हैं: वही न्याय जो हमें डराता है, हमें बचाता भी है।
चिन्तन
पिछले सप्ताह किसका अपराध आपने "ढाँपा" और किसका "बार-बार" दोहराया, और इस अन्तर से आपके मन की जाँच में क्या निकलता है?
पद 5 कहता है कि निर्धन का उपहास उसके कर्त्ता की निन्दा है। आपके परिवार या दफ़्तर की हँसी में किसे नीचा दिखाया जाता है, और आप वहाँ चुप क्यों रहते हैं?
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Proverbs 17 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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Proverbs 17 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि हमारी मेज़ पर चाहे सूखा टुकड़ा ही हो, पर आपने घर में चैन दिया है। आपके वचन के अनुसार यही शांति भरे भोजन से बढ़कर है। धन्यवाद उस मेल के लिए जो आप हमारे परिवार में बनाए रखते हैं, और उस संतोष के लिए जो थोड़े में भी भर देता है।
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