नीतिवचन 17:5
पाठ
नीतिवचन 17:5 दो वाक्यों में एक ही चोट करता है: "जो निर्धन को उपहास में उड़ाता है, वह उसके कर्त्ता की निन्दा करता है; और जो किसी की विपत्ति पर हँसता है, वह निर्दोष नहीं ठहरेगा।" पहली पंक्ति कहती है कि गरीब का मज़ाक उड़ाना गरीब तक सीमित नहीं रहता; वह ताना ऊपर की ओर उछलता है और उस परमेश्वर पर जा लगता है जिसने उसे बनाया। दूसरी पंक्ति दायरा और चौड़ा कर देती है: सिर्फ़ निर्धनता नहीं, किसी की भी विपत्ति। जो दूसरे की बर्बादी देखकर भीतर ही भीतर मुस्कुराता है, वह अदालत में बरी नहीं होगा। कोई शर्त नहीं, कोई छूट नहीं। एक ही साँस में यह पद सामाजिक व्यवहार को धार्मिक अपराध घोषित कर देता है।
मूल बात
यहाँ जो तर्क चल रहा है, वह करुणा की अपील नहीं, सृष्टि का धर्मशास्त्र है। "उसके कर्त्ता" शब्द बताता है कि गरीब आदमी किसी दुर्घटना का परिणाम नहीं, किसी की कारीगरी है। उसका फटा कुर्ता, उसकी झुकी पीठ, उसकी टूटी हिंदी, ये सब उस चेहरे पर लगे हैं जिसे परमेश्वर ने गढ़ा। इसलिए उपहास केवल असभ्यता नहीं; वह कारीगर के काम पर की गई टिप्पणी है, और परमेश्वर उसे व्यक्तिगत रूप से लेते हैं। ध्यान दीजिए कि पद यह नहीं कहता कि गरीब पुण्यात्मा है या उसकी गरीबी निर्दोष है। नीतिवचन कहीं-कहीं आलस्य को दरिद्रता से जोड़ता भी है। पर कारण चाहे जो हो, हँसने का अधिकार किसी को नहीं मिलता। जिस राज्य में परमेश्वर राजा हैं, वहाँ कमज़ोर की गरिमा उसकी उपयोगिता से नहीं, उसके बनाए जाने से आती है।
साझा सूत्र
यह पद पूरी बाइबल की एक गहरी लय पकड़ता है: परमेश्वर कमज़ोर के पक्ष को अपना पक्ष मानते हैं। मिस्र में दबे हुए दासों की कराह वे "सुनते" हैं, और व्यवस्था में विधवा, अनाथ और परदेशी को सताने वाले के विरुद्ध वे स्वयं मुकदमा लड़ने की बात करते हैं। सृष्टिकर्ता अपने बनाए हुए के अपमान को अपने ऊपर लेते हैं, यही सिद्धांत यहाँ भी काम कर रहा है।
और फिर यह सूत्र सीधे क्रूस तक जाता है। यीशु मसीह गरीब हुए, कंगालों के बीच रहे, और अंत में सूली पर लटके हुए उपहास का निशाना बने। सिपाहियों ने उनकी विपत्ति पर हँसते हुए उन्हें राजा कहकर चिढ़ाया। नीतिवचन 17:5 की चेतावनी वहाँ अपने चरम पर पूरी होती है: मनुष्य ने अपने कर्ता का ही मज़ाक उड़ाया। और उसी हँसी को सहते हुए वे उन लोगों के लिए क्षमा माँग रहे थे जो हँस रहे थे।
दर्पण
आप शायद कभी किसी भिखारी पर नहीं हँसे। पर याद कीजिए वह क्षण जब दफ़्तर में उस सहकर्मी का प्रमोशन रुका जिसकी अकड़ आपको खटकती थी, और भीतर कहीं एक हल्की-सी ठंडक फैल गई। या वह रिश्तेदार जिसका कारोबार डूबा, और फ़ोन रखते ही आपने कहा, "मैंने तो पहले ही कहा था।" या वह व्हाट्सएप वीडियो जिसमें कोई गरीब आदमी अपनी बोली, अपने कपड़ों, अपनी अज्ञानता के कारण मज़ाक बना है, और आपने हँसकर उसे आगे भेज दिया।
यह पद आपकी हँसी को अदालत में खींच लाता है। वह कहता है कि दूसरे की गिरावट पर मिलने वाला वह गुप्त सुख निर्दोष नहीं है, चाहे किसी को पता चले या न चले। और यह हमारे भीतर के सबसे छिपे डर को भी खोलता है: हम दूसरे की विपत्ति पर इसलिए भी राहत महसूस करते हैं क्योंकि उससे लगता है कि हम सुरक्षित हैं, हम बेहतर हैं, हम उस श्रेणी के नहीं हैं।
आज यह कीजिए: उस एक व्यक्ति का नाम काग़ज़ पर लिखिए जिसकी हार पर आपके मन में चुपचाप संतोष उठा था, और उस नाम को देखते हुए ज़ोर से कहिए, "यह भी परमेश्वर की बनाई हुई रचना है," फिर उसके भले के लिए प्रार्थना कीजिए।
कठिन प्रश्न
"निर्दोष नहीं ठहरेगा" का ठीक-ठीक अर्थ क्या है? अनुभव तो यही कहता है कि दूसरों का मज़ाक उड़ाने वाले अक्सर खूब फलते-फूलते हैं। जिस अफ़सर ने गरीब याचक को दुत्कारा, उसकी कुर्सी नहीं हिली। जिसने मज़ाक भरा वीडियो बनाया, उसे लाखों लोगों ने देखा और वह मशहूर हो गया।
नीतिवचन यहाँ कोई समय-सारणी नहीं देता, और यही ईमानदारी की बात है। वह केवल इतना कहता है कि हिसाब बाक़ी है। इसी अध्याय का पद 3 इसका ढाँचा देता है: "चाँदी के लिये कुठाली, और सोने के लिये भट्ठी होती है, परन्तु मनों को यहोवा जाँचता है।" जाँच अभी चल रही है, फ़ैसला अभी घोषित नहीं हुआ। यह हमें सांत्वना कम और चेतावनी अधिक देता है, क्योंकि जो जाँचा जा रहा है वह मेरा मन भी है।
एक बारीकी
"विपत्ति" के लिए यहाँ जो इब्रानी शब्द है, एद, किसी धीमी परेशानी को नहीं, अचानक आई तबाही को दर्शाता है। वह भूचाल जैसा क्षण जब किसी का पैर फिसलता है और सब कुछ एक साथ ढह जाता है: नौकरी, इज़्ज़त, स्वास्थ्य, घर।
यह बारीकी पद को और नुकीला बनाती है। हम आमतौर पर किसी की छोटी-मोटी नाकामी पर नहीं, उसके पूरे ढह जाने पर सबसे ज़्यादा मज़ा लेते हैं। और ठीक उसी घड़ी, जब उस आदमी के पास कहने को कुछ नहीं बचा, हमारी हँसी उसके ऊपर गिरती है। पद कहता है: वही घड़ी परमेश्वर की नज़र में सबसे संवेदनशील है। जहाँ मनुष्य सबसे नंगा है, वहाँ उसका कर्ता सबसे पास खड़ा है।
शास्त्र की गूँज
ओबद्याह की छोटी-सी पुस्तक पूरी तरह इसी पद पर टिकी है। एदोम ने यरूशलेम की तबाही के दिन दीवार पर खड़े होकर तमाशा देखा और खुश हुआ, और परमेश्वर ने उस हँसी को अपने विरुद्ध किया गया अपराध ठहराया। एक राष्ट्र का पतन इसलिए हुआ कि उसने दूसरे के पतन पर ताली बजाई।
दूसरी ओर, मत्ती 25 में यीशु उसी सृष्टि-तर्क को और आगे ले जाते हैं: भूखे, प्यासे, नंगे और कैदी के साथ किया गया व्यवहार सीधे उनके साथ किया गया व्यवहार माना जाएगा। नीतिवचन कहता है कि गरीब का अपमान उसके कर्ता तक पहुँचता है; यीशु कहते हैं कि वे स्वयं उस गरीब के भीतर खड़े हैं। एक ही सत्य, दो गहराइयों पर।
चिंतन के प्रश्न
पिछले महीने किसकी नाकामी की खबर सुनकर आपके भीतर राहत या संतोष उठा था, और आपने उस भावना का क्या किया?
यदि हर मज़ाक अपने निशाने के कर्ता तक पहुँचता है, तो आपकी बोलचाल, आपके फ़ॉरवर्ड किए संदेश और आपकी हँसी में क्या बदलना होगा?
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Proverbs 17:5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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नीतिवचन 17:5 का क्या अर्थ है?
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Proverbs 17 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि हमारी मेज़ पर चाहे सूखा टुकड़ा ही हो, पर आपने घर में चैन दिया है। आपके वचन के अनुसार यही शांति भरे भोजन से बढ़कर है। धन्यवाद उस मेल के लिए जो आप हमारे परिवार में बनाए रखते हैं, और उस संतोष के लिए जो थोड़े में भी भर देता है।
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