भजन संहिता 137
पाठ
निर्वासित यहूदी बाबेल की नहरों के किनारे बैठे हैं, और सिय्योन की याद उन्हें रुला देती है; उनकी वीणाएँ बजती नहीं, मजनू वृक्षों पर लटकी हुई हैं। उनके बंदी बनाने वाले मनोरंजन माँगते हैं, "सिय्योन के गीतों में से हमारे लिये कोई गीत गाओ!", और यही माँग घाव पर नमक है, क्योंकि यहोवा का गीत पराए देश में गाया नहीं जा सकता। इसके उत्तर में गायक स्वयं पर शाप लेता है: यदि वह यरूशलेम को भूले तो उसका दाहिना हाथ सूख जाए, उसकी जीभ तालू से चिपट जाए। और अंत में वह परमेश्वर को एदोम का वह दिन स्मरण कराता है, और बाबेल के विरुद्ध ऐसा न्याय पुकारता है जिसे पढ़ते हुए साँस रुक जाती है।
मर्म
इस भजन का धर्मशास्त्रीय केंद्र वह प्रश्न है जो चौथे पद में खड़ा होता है: "हम यहोवा के गीत को, पराए देश में कैसे गाएँ?" यह केवल उदासी नहीं, यह वाचा का संकट है। परमेश्वर ने अपने नाम को सिय्योन में बसाया था; मंदिर, राजा, भूमि, ये सब इस बात के दृश्य प्रमाण थे कि वे अपनी प्रजा के बीच रहते हैं। बाबेल उस सब को मलबा बना चुका है, और विजेता अब उन्हीं गीतों को मनोरंजन की तरह माँगते हैं, मानो यहोवा की आराधना दरबार का कोई तमाशा हो। भजनकार गाने से इनकार करता है, क्योंकि पवित्र वस्तु को विजेता के मनोरंजन में बदल देना परमेश्वर के नाम का अपमान होगा। और फिर वह जो करता है, वही सबसे गहरी बात है: वह बदला अपने हाथ में नहीं लेता, वह उसे यहोवा के हाथ में सौंप देता है, "हे यहोवा, यरूशलेम के गिराए जाने के दिन को एदोमियों के विरुद्ध स्मरण कर।" यह क्रोध प्रार्थना बन जाता है, और इसी में इसका उद्धार है।
सूत्र
इस भजन के नीचे जो धारा बहती है, वह पूरे बाइबल की कथा में फिर ऊपर आती है। सिय्योन का उजड़ना केवल एक नगर का पतन नहीं था, यह उस स्थान का उजड़ना था जहाँ परमेश्वर ने अपना नाम रखा था। और जब नया नियम बाबेल की बात करता है, तो वह इसी भजन की भाषा उठाता है: प्रकाशितवाक्य 18:6 में वही माँग गूँजती है कि बाबेल को उसके अपने कामों के अनुसार लौटाया जाए। यानी भजनकार की चीख अनसुनी नहीं रही। परमेश्वर का राज्य केवल क्षमा का नहीं, न्याय का भी राज्य है; अन्यथा क्षमा सस्ती हो जाती। मसीह में यह दोनों मिलते हैं, क्योंकि जो न्याय बाबेल पर पड़ना था, उसका भार क्रूस पर स्वयं परमेश्वर के पुत्र ने उठाया। इसलिए मसीही इस भजन को रद्द नहीं करता; वह इसे क्रूस के पास लाकर प्रार्थना करता है।
दर्पण
आपके जीवन में भी कोई बाबेल है। वह बॉस जिसने आपकी प्रतिष्ठा जानबूझकर मिट्टी में मिला दी, वह रिश्तेदार जिसने संपत्ति के लिए परिवार तोड़ दिया, वह व्यक्ति जिसने आपके बच्चे के साथ कुछ ऐसा किया जिसे आप नाम भी नहीं दे सकते। और फिर वह दूसरी पीड़ा आती है: लोग चाहते हैं कि आप गाएँ। मुस्कुराइए, आगे बढ़िए, कलीसिया में चेहरा ठीक रखिए। यह भजन आपको वह अनुमति देता है जो धार्मिक शिष्टाचार नहीं देता: परमेश्वर के सामने कच्चा, बिना सजाया हुआ क्रोध रख देने की अनुमति। ध्यान दीजिए, भजनकार तलवार नहीं उठाता, वह प्रार्थना उठाता है। आज एक कागज़ पर उस नाम को लिखिए जिसे आप भूल नहीं पाते, और ऊँचे स्वर में कहिए: "हे यहोवा, स्मरण कर", फिर वह कागज़ अपनी बाइबल में इसी भजन के पन्ने पर रख दीजिए।
शास्त्र की गूँज
नौवाँ पद अपने आप में गढ़ी हुई क्रूरता नहीं है। भजन स्वयं यशायाह 13:16 की ओर इशारा करता है, जहाँ परमेश्वर ने बाबेल के विरुद्ध ठीक यही न्याय पहले से घोषित किया था। इसका अर्थ है कि भजनकार परमेश्वर से कुछ नया नहीं माँग रहा, वह उनसे उनका अपना वचन पूरा करने को कह रहा है। यही प्रार्थना का सबसे ईमानदार रूप है। और फिर लूका 19 में यीशु उसी यरूशलेम को देखकर रोते हैं, जिसके लिए यह भजन रोया था; पर उनके आँसू शत्रु के लिए नहीं, उस नगर के लिए हैं जो आने वाले विनाश की ओर बढ़ रहा है। एक ही शहर, एक ही दुःख, पर अब रोने वाला स्वयं परमेश्वर है।
पृष्ठभूमि
587 ईसा पूर्व में नबूकदनेस्सर ने यरूशलेम को ढा दिया, मंदिर जलाया, और अगुवों को बंदी बनाकर बाबेल ले गया। बाबेल नहरों का देश था, इसलिए "नदियों के किनारे" केवल कविता नहीं, भूगोल है। विजेता राजा हारी हुई जातियों के संगीतकारों को दरबार में रखते थे; पराजित प्रजा का गीत विजय का सजावटी प्रमाण बन जाता था। एदोम इस चित्र में सबसे कड़वा है, क्योंकि वह भाई-जाति थी, एसाव की संतान, और उसने यरूशलेम के गिरने के दिन उत्सव मनाया और लूट में हाथ बँटाया। जिन्होंने खून का रिश्ता निभाना था, वे चिल्लाए, "ढाओ! उसको नींव से ढा दो!" विश्वासघात हमेशा शत्रु से नहीं, पड़ोसी से आता है।
एक बारीकी
इस भजन में एक शब्द बार-बार लौटता है: स्मरण। पहले पद में वे सिय्योन को स्मरण करके रोते हैं, पाँचवें और छठे में वे भूल जाने से डरते हैं, और सातवें में वे परमेश्वर से कहते हैं, "स्मरण कर।" बाइबल में जब परमेश्वर "स्मरण करते" हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं कि उन्हें कुछ याद आ गया; इसका अर्थ है कि वे कार्य करने उठते हैं, जैसे उन्होंने नूह को और मिस्र में अपनी प्रजा की कराह को स्मरण किया था। शक्तिहीन लोगों के पास केवल स्मृति बची थी, और उन्होंने वही स्मृति परमेश्वर के हाथ में सौंप दी। जो याद रखता है, वह हार नहीं मानता; और जो परमेश्वर से याद रखने को कहता है, वह अब भी वाचा पर भरोसा कर रहा है।
चिंतन
आपके जीवन का वह कौन-सा घाव है जिसे आप प्रार्थना में "शालीन" बनाकर प्रस्तुत करते हैं, और क्या होगा यदि आप उसे इस भजन की तरह बिना सजाए परमेश्वर के सामने रखें?
जब न्याय परमेश्वर के हाथ में सौंपा जाता है, तो आपके भीतर राहत उठती है या निराशा, और यह आपके बारे में क्या बताता है?
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Psalms 137 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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भजन संहिता 137 का क्या अर्थ है?
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Psalms 137 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
हम यहोवा का गीत, पराए देश में कैसे गाएँ?" बेबीलोन की नदियों के किनारे वीणाएँ टाँग दी गईं। गाने की ताकत नहीं बची थी। पर ध्यान दे, यह सवाल भी परमेश्वर से ही पूछा गया। जब तेरे हालात पराए लगें और गीत गले में अटक जाए, तब चुप्पी भी एक प्रार्थना है। वह सुनता है, तब भी जब तू सिर्फ़ रो पाता है।
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